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डिजिटल पेमेंट के जरिए चल रहा था देह व्यापार, कम उम्र की लड़कियों के शोषण का खुलासा

पटना
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के चर्चित रेड लाइट एरिया चतुर्भुज स्थान में देह व्यापार के एक काले खेल का पर्दाफाश हुआ है। चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस की मौजूदगी के बावजूद यहां नाबालिग लड़कियों से जबरन जिस्मफरोशी कराई जा रही थी। इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब दिल्ली की एक संस्था ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के साथ मिलकर एक गुप्त ऑपरेशन चलाया।

दिल्ली से बुना गया रेस्क्यू ऑपरेशन का जाल
देह व्यापार की यह घिनौनी हकीकत तब सामने आई जब दिल्ली की संस्था रेस्क्यू फाउंडेशन को सूचना मिली कि मुजफ्फरपुर की गलियों में 13 से 17 साल की बच्चियों को बंधक बनाकर रखा गया है। संस्था के अधिकारी संजय प्रसाद गुप्ता ने इसकी जानकारी राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को दी। आयोग के निर्देश पर दिल्ली और मुंबई से विशेषज्ञों की एक विशेष टीम मुजफ्फरपुर पहुंची। स्थानीय पुलिस के साथ तालमेल बिठाकर 8 जनवरी को शुक्ला रोड और मैना गली में अचानक रेड मारी गई।

दो ठिकानों पर रेड, 6 बच्चियां बरामद
 मैना गली (सबाना खातून का घर): यहां से 13, 16 और 17 साल की तीन लड़कियां रेस्क्यू की गईं। मौके से सबाना खातून और उसकी सहयोगी बानो खातून को गिरफ्तार किया गया। लड़कियों ने बताया कि उनसे जबरन धंधा कराया जाता था और सारा पैसा ये महिलाएं रख लेती थीं। शुक्ला रोड (कुमारी पल्लवी का घर): यहां से भी 17 साल की तीन लड़कियां मिलीं। हालांकि मुख्य आरोपी पल्लवी पुलिस के आने से पहले ही फरार होने में कामयाब रही।
 
हाईटेक हुआ धंधा: कैश नहीं तो स्कैनर तैयार
छापेमारी के दौरान पुलिस तब दंग रह गई जब शुक्ला रोड स्थित ठिकाने से एक ATM/डिजिटल स्कैनर बरामद हुआ। बचाई गई लड़कियों ने खुलासा किया कि पल्लवी बहुत शातिर थी यदि किसी ग्राहक के पास नकद (Cash) नहीं होता था तो वह डिजिटल स्कैनर के जरिए ऑनलाइन पेमेंट लेती थी।

आगे की कार्रवाई
नगर थानेदार कमलेश कुमार के मुताबिक पुलिस ने इमोरल ट्रैफिकिंग एक्ट (अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम) के तहत केस दर्ज कर लिया है। पकड़ी गई दोनों महिलाओं को जेल भेज दिया गया है। सभी 6 नाबालिग लड़कियों को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) के सामने पेश किया गया है। अब उनके बयान दर्ज किए जाएंगे और उन्हें सुरक्षित पुनर्वास केंद्रों में भेजा जाएगा।

 

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