samacharsecretary.com

पर्यटकों को झटका! नंदनवन जू और जंगल सफारी की टिकट दरें बढ़ीं, AC बस किराया भी महंगा

रायपुर.

नवा रायपुर के नंदनवन जू और जंगल सफारी में घूमना पर्यटकों के लिए अब महंगा हो सकता है. वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने जू के प्रवेश शुल्क, सफारी राइड और अन्य सुविधाओं की नई दरें जारी कर दी है. कई श्रेणियों में टिकट रेट 50% तक बढ़ाई गई हैं, जबकि कुछ कैटेगरी में यह बढ़ोतरी दोगुनी से भी अधिक है.

नई प्रस्तावित दरों के अनुसार 6 से 12 साल तक के बच्चों का टिकट 25 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये और 12 वर्ष से अधिक आयु के आगंतुकों का टिकट 50 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये किया गया है. विदेशी नागरिकों के लिए यह शुल्क 200 रुपये से बढ़कर 500 रुपये हो गया है. वहीं दिव्यांगजन और 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को वैध पहचान पत्र के आधार पर फ्री एंट्री जारी रहेगी. हालांकि सुविधा यह वीकेंड, सार्वजनिक अवकाश और सरकारी छुट्टियों पर लागू नहीं होगी.

सफारी टिकट भी महंगी
सफारी के लिए 6 से 12 वर्ष के बच्चों का टिकट सामान्य बस में 100 रुपये, एसी बस में 150 रुपये और इलेक्ट्रिक बस में 175 रुपये लगेंगे. वयस्कों के लिए यह 150, 200 और 250 रुपये होगा. विदेशी पर्यटकों के लिए सफारी के लिए 750 रुपये से 1250 रुपये तक के रेट तय किए गए हैं.

जिप्सी सफारी के नए रेट
जिप्सी से सफारी घूमने के लिए प्रति व्यक्ति 700 रुपए और पूरी जिप्सी लेने पर 3,500 रुपए देना होगा. वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के लिए यह दर 350 रुपये प्रति व्यक्ति और 2,000 रुपये प्रति जिप्सी रखी गई है. वहीं विदेशी पर्यटकों को प्रति व्यक्ति 1,500 रुपये और प्रति जिप्सी 7,000 रुपये शुल्क देना होगा.

फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर लगेगा भी शुल्क
अगर आपको जंगल सफारी और नंदनवन जू में फोटोग्राफी करनी है तो इसके लिए एक दिन का 5000 रुपये और कमर्शियल वीडियोग्राफी या फिल्म शूटिंग के लिए एक दिन का 15,000 रुपये शुल्क देना होगा. यह अनुमति संबंधित अधिकारियों की स्वीकृति के अधीन होगी.

शैक्षणिक भ्रमण पर मिलेगी छूट
सरकारी स्कूलों के कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को फ्री एंट्री दी जाएगी. वहीं कक्षा 9 से 12 तक के सरकारी स्कूलों के बच्चों को 50 प्रतिशत और निजी स्कूलों के छात्रों को 20 प्रतिशत की छूट मिलेगी.

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here