samacharsecretary.com

खेल से बढ़ती है दोस्ती, सियासत डालती है दरार — सकलैन मुश्ताक ने राजनीति पर साधा निशाना

नई दिल्ली
अपने दौर के दिग्गज स्पिनर रहे पाकिस्तान के सकलैन मुश्ताक ने कहा है कि क्रिकेट देशों को जोड़ता है, दूर नहीं करता। उन्होंने एक हालिया इंटरव्यू में कहा कि क्रिकेट में राजनीति को नहीं लाना चाहिए।

भारत और पाकिस्तान ने 2012-13 से ही आपस में कोई द्विपक्षीय सीरीज नहीं खेली है। दिसंबर 2012 में पाकिस्तानी टीम 3 वनडे और 2 टी20 इंटरनेशनल मैच की सीरीज के लिए भारत दौरे पर आई थी। तब उसने भारत को ओडीआई सीरीज में 2-1 से हराया था और टी20 सीरीज 1-1 से बराबर रही थी।

राजनीति हमारी दुश्मन: सकलैन
मीडिया को दिए इंटरव्यू में सकलैन मुश्ताक ने कहा, ‘मेरा मानना है कि राजनीति को खत्म किया जाना चाहिए क्योंकि ये मानवता के लिए नुकसानदेह है। राजनीति हमारी दुश्मन है और ये सिर्फ क्रिकेट को ही नुकसान नहीं पहुंचा रही, संपूर्ण मानवता को नुकसान पहुंचा रही है। ये हमारे खेल और खिलाड़ियों का नुकसान है। क्रिकेट देशों को जोड़ने के लिए बना है, उन्हें दूर करने के लिए नहीं।’

'क्रिकेट मनोरंजन की चीज है, युद्ध की नहीं'
मुश्ताक ने कहा कि क्रिकेट तो मनोरंजन से जुड़ा होना चाहिए, राजनीति या संघर्ष से नहीं। उन्होंने टी20 विश्व कप से बांग्लादेश के हटने पर कोई टिप्पणी करने से परहेज किया। उन्होंने कहा, 'क्रिकेट मनोरंजन से जुड़ा है न कि युद्ध के मैदान या युद्ध से। मैं भारत में बांग्लादेश के नहीं खेलने के फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा क्योंकि मैंने पहले ही साफ कर दिया है कि मैं राजनीति में यकीन नहीं करता।'

बांग्लादेश मामले पर टिप्पणी से इनकार
बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को आईपीएल फ्रेंचाइजी केकेआर के स्क्वाड से रिलीज किए जाने के बाद बांग्लादेश ने भारत में विश्व कप मैच खेलने से इनकार कर दिया था। उसने 'सुरक्षा कारणों' से अपने विश्व कप मैचों को बाहर से बाहर शिफ्ट किए जाने यानी श्रीलंका में कराने की मांग की थी। आईसीसी ने उसकी चिंताओं को आधारहीन बताते हुए साफ किया था कि वेन्यू में कोई बदलाव मुमकिन नहीं है।

आखिरकार बांग्लादेश ने विश्व कप में नहीं खेलने का फैसला किया, जिसके बाद उसकी जगह पर आईसीसी ने स्कॉटलैंड को टूर्नामेंट में शामिल कर लिया है। बांग्लादेश के सारे ग्रुप मैच भारत में ही होने थे।

 

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here