samacharsecretary.com

ग्वालियर की सड़कों पर आवारा गोवंश बना खतरा, चरनोई जमीनों से अतिक्रमण हटाने की मांग

ग्वालियर
ग्वालियर शहर की यातायात व्यवस्था यूँ तो पहले ही से अतिक्रमण एवं टमटमों के बेतरतीब परिचालन से अस्त व्यस्त रहती है और ऊपर से किसी भी चौराहे पर अथवा बीच रास्ते मे आराम से बैठे अथवा लड़ते हुऐ आवारा जानवर कब किसी राहगीर को अपने सीगों से घायल कर दें यह कहा नहीं जा सकता नगर निगम प्रशासन का एक बहुत बड़ा अमला मात्र औपचारिकता करके कभी कभार गोवंश को पकडकर लाल टिपारा भेजकर अपनी इतिश्री कर लेता है और आम जनता को बीच चौराहे पर जानवरों के सींग खाने को छोड़ जाता है जबकि पूर्व में सभी शासनों द्वारा सरकारी मंदिरों से लगी तमाम भूमि को गऊचर के लिये दी जाती रही है आचार्य विनोवा भावे जी के भूदान आंदोलन के दौरान भी शासन ने इस अंचल में सेकड़ों बीघा जमीन गऊचर के लिये दी थी किन्तु अतिक्रमण करताओं द्वारा उक्त भूमियों पर कब्जा कर लेने से बेचारी गऊ माताओं को चारा मिल नहीं पाता और चारे के अभाव में गोमाता गाँव छोड़कर शहरों की और आ जाती हैं और कुछ लालची व्यक्ति जब गो माता दूध देना बंद कर देती हैं तो ऐसे गोवंशो को शहर मे छोड़ जाते हैं और वे बिचारि इधर उधर बदहवास सी दौड़ती फिरती हैं कुछ शहरी व्यक्ति भी अपने पापों से मुक्ति पाने के लिये बीच बाजारों में गोवंशो को चारा डालकर यातायात को अवरुद्र करने में अपना योगदान दे देते हैं l

ऐसा कहाँ जाता है कि द्वापर काल में भगवान श्रीकृष्णजी का गोवंश चराने का क्षेत्र गोहद तक रहा था किन्तु अब ऐसा जान पड़ता है कि वर्तमान मे यह क्षेत्र ग्वालियर नगर निगम सीमा तक बढ़ गया है क्योंकि जहां देखो वही जानवर बीच चौराहे पर झुण्ड के झुण्ड खड़े होकर अथवा चौराहे पर बैठकर आम नागरिकों के लिये खतरा बन जाते है और कभी कभी माता बहनों एवं विशेषकर बुजुर्ग व्यक्ति इनकी चपेट में आ ही जाते हैं और दुर्घटना ग्रस्त हो जाते हैं l
मेरा जिलाधीश महोदय एवं नव नियुक्त आयुक्त महोदय से आग्रह है कि ग्वालियर में चरनोइ की जमीनों एवं गोदान आंदोलन के दौरान दान में दी गई भूमियों को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाये जिससे पूजनीय गऊ माताओं को को चारा खाने एवं भोजन करने के लिये शहरों में आने का मौका ही ना मिले और शहर में आकर पाँलीथिन खाकर अकाल मौत का सामना भी नहीं करना पड़े एवं जिससे शहर की यातायात व्यवस्था भी बिगड़ने से बच सके और आम नागरिकों को भी जानवरों के बदहवास दौड़ने एवं आपस में लड़ने से अनावश्यक होने वाली दुर्घटनाओं से बचाया जा सके l

 

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here