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नशे के कारोबार पर वार: भोपाल में क्राइम ब्रांच ने MD ड्रग्स के साथ तीन आरोपियों को पकड़ा

भोपाल

गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के पालन में भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार के नेतृत्व में नशा मुक्ति अभियान के तहत क्राइम ब्रांच ने बड़ी कार्रवाई की है। गोविंदपुरा क्षेत्र में कस्तूरबा अस्पताल के सामने स्थित सब्जी मंडी के पास घेराबंदी कर पुलिस ने तीन युवकों को अवैध मादक पदार्थ एमडी की तस्करी करते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। आरोपितों के कब्जे से 2.14 ग्राम एमडी ड्रग्स बरामद की गई है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लाखों रुपये आंकी गई है। पुलिस ने तस्करी में प्रयुक्त स्कूटर और मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं।

मुख्य सप्लायर सहित तीन आरोपित दबोचे गए

अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त शैलेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि मुखबिर से मिली सटीक सूचना के आधार पर एएसआइ मो. सादिक खान के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। टीम ने गोविंदपुरा मंडी के पास घेराबंदी कर काले रंग की स्कूटर पर सवार दो संदिग्धों को दबोचा। पूछताछ और तलाशी के दौरान उनके पास से नशीला पदार्थ बरामद हुआ। थाने लाकर उनसे पूछताछ करने पर आरोपितों ने अपने तीसरे साथी का नाम उगला, जिसे पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपितों में इंद्रा नगर फेस-2 जाटखेड़ी, थाना मिसरोद निवासी 22 वर्षीय हर्ष यादव, रोहित नगर फेस-03 जाटखेड़ी, थाना मिसरोद निवासी 23 वर्षीय सौरभ तेजवानी और निर्मल स्टेट भैरोपुर, थाना मिसरोद निवासी गुरदीप सिंह शामिल हैं, जिसे मुख्य सप्लायर बताया जा रहा है।

मोबाइल डेटा से नेटवर्क की जांच जारी

एडीसीपी शैलेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि पुलिस जांच में सामने आया है कि ये आरोपित शहर के छात्रों और पार्टियों में शामिल होने वाले लोगों को निशाना बनाते थे। तीनों के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/22 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब इनके मोबाइल डेटा के जरिए नशा तस्करी के मुख्य स्रोत और संपत्ति की जानकारी जुटा रही है ताकि इस गिरोह की जड़ों तक पहुंचा जा सके।

मिसरोद और गोविंदपुरा थाने रहे ड्रग्स सौदे से बेखबर

इस पूरे घटनाक्रम ने मिसरोद और गोविंदपुरा दोनों ही थानों की बीट प्रणाली की कार्यक्षमता को कठघरे में खड़ा कर दिया है। तीनों आरोपित मूलतः मिसरोद थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं और लंबे समय से नशे के कारोबार से जुड़े बताए जा रहे हैं। बावजूद इसके, मिसरोद पुलिस को अपने इलाके में सक्रिय इन अपराधियों की भनक तक नहीं लगी। तस्करों ने सौदेबाजी के लिए गोविंदपुरा के व्यस्त मंडी इलाके को चुना। कस्तूरबा अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में सरेआम ड्रग्स सप्लाई की कोशिश होना यह दर्शाता है कि अपराधियों के मन में स्थानीय थाने का कोई खौफ नहीं था। दोनों ही थाने इससे बेखबर थे।

 

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