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ड्रग्स केस में पूर्व AIG राजजीत की बढ़ी मुश्किलें, बेनामी संपत्तियों की जांच कर रही ANTF

चंडीगढ़. ड्रग्स से जुड़े मामले में बर्खास्त पूर्व एआइजी राजजीत सिंह हुंदल की मुश्किलें अब उनकी कथित बेनामी संपत्तियों और बैंक खातों तक पहुंच गई हैं। एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) हुंदल से जुड़े संपत्ति और बैंक रिकॉर्ड की जांच कर रही है। जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि उनके नाम या कथित तौर पर दूसरों के नाम पर मौजूद संपत्तियों और बैंक खातों में हुए लेनदेन का ड्रग्स से जुड़े नेटवर्क से कोई वित्तीय संबंध रहा है या नहीं। एएनटीएफ की जांच में हुंदल से जुड़े वित्तीय दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि संपत्तियां किस तरह अर्जित की गईं और इनके लिए रकम कहां से आई। इसके साथ ही अलग-अलग बैंक खातों में हुए लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसी को संदेह है कि वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने से ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े कुछ और लोगों तक पहुंच बनाई जा सकती है।

बेटी के MBBS एडमिशन के लिए फर्जी डेथ सर्टिफिकेट? बर्खास्त AIG राजजीत का मामला

चंडीगढ. ड्रग्स मामले में पंजाब सरकार द्वारा बर्खास्त किए गए पीपीएस अधिकारी राजजीत सिंह हुंदल का विवादों से लंबे समय से नाता रहा है। राजजीत ने तो अपना डेथ सर्टिफिकेट (मृत्यु प्रमाण पत्र) भी बनवाया था। राजजीत अपनी सैटिंग के दम पर हमेशा ही महत्वपूर्ण पदों पर रहा और बर्खास्तगी से पहले तक एनआरआइ विंग का एआइजी हेडक्वार्टर के पद पर तैनात था। राजनीतिक पहुंच के कारण राजजीत पर कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन एसआइटी की रिपोर्ट खुलने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बर्खास्त कर दिया था। राजजीत सिंह सबसे पहले 2013 में विवादों में आया था। जब उसने अपनी बेटी का मेडिकल कालेज में एमबीबीएस में दाखिला करवाने के लिए खुद का ही मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया था।