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अनंत चतुर्दशी 2026: गणपति विसर्जन का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि जानें

ढोल-ताशों की गूंज, हवा में उड़ता गुलाल और 'अगले बरस तू जल्दी आ' का भावुक जयकारा… दस दिनों तक हमारे घरों और दिलों में खुशियां बिखेरने के बाद हमारे प्यारे बाप्पा की विदाई का समय आ गया है. गणेश उत्सव का यह पावन सफर अनंत चतुर्दशी के दिन बाप्पा के विसर्जन के साथ पूरा होता है. यह दिन केवल विघ्नहर्ता को विदाई देने का ही नहीं, बल्कि भगवान श्री हरि विष्णु के 'अनंत' रूपों की भक्ति में लीन होने का भी महापर्व है. इस बार अनंत चतुर्दशी पर माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की असीम कृपा बरसाने वाला बेहद दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहा है. आइए जानते हैं गणपति विसर्जन के शुभ मुहूर्त, पूजा की सही विधि और इस दिन से जुड़े खास नियम. विसर्जन और पूजन के सबसे सटीक शुभ मुहूर्त यदि आप बाप्पा का विसर्जन और अनंत भगवान की पूजा शास्त्रों के अनुसार शुभ समय पर करना चाहते हैं, तो पंचांग के अनुसार ये समय सबसे उत्तम रहेंगे. प्रातः काल का शुभ मुहूर्त: सुबह 06:12 बजे से सुबह 10:42 बजे तक अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:48 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक चर एवं लाभ मुहूर्त: दोपहर 12:15 बजे से दोपहर 03:18 बजे तक अनंत सूत्र बांधने और मुख्य पूजा संपन्न करने के लिए सुबह 06:12 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक का समय सर्वश्रेष्ठ फल देने वाला रहेगा. अनंत चतुर्दशी पर बन रहे हैं दुर्लभ संयोग इस वर्ष अनंत चतुर्दशी की तिथि शुक्रवार को पड़ रही है. धार्मिक दृष्टिकोण से शुक्रवार का दिन धन-वैभव की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित है, ऐसे में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का एक साथ पूजन भक्तों के लिए अत्यंत फलदायी माना जा रहा है. इसके अलावा, इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का एक साथ निर्माण हो रहा है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इन महायोगों में किया गया कोई भी धार्मिक कार्य, पूजा-अर्चना और व्रत अक्षय पुण्य प्रदान करता है और जीवन से दरिद्रता का नाश करता है. गणपति विसर्जन की सरल विधि बाप्पा को घर से विदा करते समय इस बात का ध्यान रखें कि जिस भक्ति और उत्साह से आप उन्हें लाए थे, उसी सम्मान के साथ उन्हें विदा भी करें. – सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें. पूजा स्थल को साफ कर बाप्पा का जल से अभिषेक करें. – गणेश जी को चंदन का तिलक लगाएं, लाल/पीले फूल और दुर्वा अर्पित करें. धूप-दीप जलाकर उनकी आरती करें और मोदक, लड्डू व फलों का भोग लगाएं. – विसर्जन से पहले हाथ जोड़कर अनजाने में हुई गलतियों के लिए बाप्पा से क्षमा मांगें और अगले साल दोबापा आने का निमंत्रण दें. – जयकारों के साथ बाप्पा की प्रतिमा को किसी पवित्र नदी, तालाब या घर में ही किसी स्वच्छ जल के पात्र में आदरपूर्वक विसर्जित करें. कैसे करें भगवान अनंत की पूजा? – सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और पीले वस्त्र धारण करें. इसके बाद व्रत का संकल्प लें. एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें. – रेशम या सूत के धागे को हल्दी या कुमकुम में रंगकर उसमें 14 गांठें लगाएं. यह 14 गांठें चौदह लोकों (जैसे भू, भुवः, स्वः, पाताल आदि) की प्रतीक मानी जाती हैं. पूजन व कथा इस रक्षा सूत्र को भगवान के चरणों में रखें. उन्हें अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और विशेष रूप से मालपुए या पंचामृत का भोग लगाएं. इसके बाद अनंत चतुर्दशी की पौराणिक व्रत कथा सुनें और आरती करें. अनंत सूत्र धारण करने के जरूरी नियम – पुरुष इस रक्षा सूत्र को अपनी दाहिनी (Right) भुजा में बांधें. – महिलाएं इसे अपनी बाईं (Left) भुजा में धारण करें.

आज है अनंत चतुर्दशी, जानें बप्पा विसर्जन के सही समय और मुहूर्त

भोपाल  गणेश चतुर्थी से शुरू हुआ गणेश उत्सव का पर्व आज अनंत चतुर्दशी के साथ समाप्त हो जाएगा। अनंत चतुर्दशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इसी दिन बप्पा की विदाई होती है। मान्यता है कि इस दिन शुभ मुहूर्त में विसर्जन करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। आइए अब जानते हैं, आज गणेश विसर्जन के लिए कौन-कौन से शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य  के अनुसार अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन के लिए आज कई चौघड़िया मुहूर्त बन रहे हैं। इनमें आप गणेश विसर्जन कर सकते हैं।  ये है शुभ मुहूर्त     अपराह्न मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत): दोपहर 12:19 से शाम 5:02 बजे तक     सायं मुहूर्त (लाभ): शाम 6:37 से रात 8:02 बजे तक     रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर): रात 9:28 से सुबह 1:45 बजे (7 सितंबर) तक     उषाकाल मुहूर्त (लाभ): 7 सितंबर सुबह 4:36 से सुबह 6:02 बजे तक अनंत चतुर्दशी का महत्व गणेश विसर्जन के लिए अनंत चतुर्दशी की तिथि अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा की जाती है, इसलिए इसे अनंत चतुर्दशी कहा जाता है। पूजा के समय हाथ में अनंत सूत्र बांधा जाता है, जो भक्तों की हर संकट में रक्षा करता है। गणेशोत्सव के दिन भगवान गणेश की प्रतिमा को नदी, तालाब या समुद्र में विसर्जित किया जाता है। विसर्जन से पहले प्रतिमा की विधिवत पूजा की जाती है, फूल चढ़ाए जाते हैं और नारियल व प्रसाद का भोग लगाया जाता है। इसके बाद ढोल-नगाड़ों और जयकारों के साथ बप्पा को धूमधाम से विदाई दी जाती है।

कब है अनंत चतुर्दशी? जानें दिन और गणेश विसर्जन का सही समय

अनंत चतुर्दशी हिंदू धर्म का एक बड़ा खास त्योहार है, जो भाद्रपद महीने की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है. इस दिन भगवान विष्णु की खास पूजा होती है और गणेश उत्सव का भी समापन होता है. यानी इस दिन गणेश जी का विसर्जन किया जाता है. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और अनंत भगवान की पूजा करने से सारे दुख-दर्द खत्म हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. इस बार अनंत चतुर्दशी का पर्व 6 सितंबर, शनिवार को मनाया जाएगा.  अनंत चतुर्दशी 2025 महत्व  अनंत चतुर्दशी के दिन पूजा के लिए एक खास धागा होता है जिसे अनंत सूत्र कहते हैं. ये धागा चौदह गांठों वाला होता है, जो भगवान विष्णु के चौदह लोकों का प्रतीक है. जो कोई भी इस व्रत को विधि-पूर्वक रखता है और अनंत सूत्र को पहनता है, उसे जीवन में सब कामयाबी और खुशहाली मिलती है. साथ ही, गणेश उत्सव का समापन भी अनंत चतुर्दशी को ही होता है. इस दिन सारे भक्त बड़े शौर्य के साथ 'गणपति बप्पा मोरया' कहते हुए गणेश जी को विदा करते हैं. अनंत चतुर्दशी 2025 शुभ मुहूर्त  अनंत चतुर्दशी की तिथि 6 सितंबर को सुबह 3 बजकर 12 मिनट से शुरू होगी और तिथि का समापन 7 सितंबर को अर्धरात्रि 1 बजकर 41 मिनट पर होगा.  अनंत चतुर्दशी का पूजन मुहूर्त 6 सितंबर को शाम 6 बजकर 02 मिनट से लेकर 7 सितंबर की अर्धरात्रि 1 बजकर 41 मिनट तक रहेगा.  गणेश विसर्जन का मुहूर्त  अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन के 5 पांच मुहूर्त हैं, जो कि चौघड़िया मुहूर्त में बन रहे हैं- प्रातः मुहूर्त (शुभ) – सुबह 7 बजकर 36 मिनट से लेकर सुबह 9 बजकर 10 मिनट तक अपराह्न मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) – दोपहर 12 बजकर 19 मिनट से लेकर शाम 05 बजकर 02 मिनट तक सायाह्न मुहूर्त (लाभ) – शाम 06 बजकर 37 मिनट से लेकर रात 08 बजकर 02 मिनट तक रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर) – रात 09 बजकर 28 मिनट से लेकर अर्धरात्रि 1 बजकर 45 मिनट तक 7 सितंबर को उषाकाल मुहूर्त (लाभ) – सुबह 4 बजकर 36 मिनट से लेकर सुबह 06 बजकर 02 मिनट तक 7 सितंबर को अनंत चतुर्दशी 2025 पूजन विधि  पूजा की शुरुआत सुबह स्नान करके साफ-सुथरे कपड़े पहनकर होती है. फिर घर के साफ जगह पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर रखकर पूजा की जाती है. पूजा में रोली, चावल, फूल, फल, मिठाई और तांबे के पात्र का इस्तेमाल होता है. अनंत सूत्र को पूजा के बाद हाथ में बांधा जाता है, महिलाएं इसे बाएं हाथ में पहनती हैं. पूजा के बाद अनंत चतुर्दशी की कथा सुनी जाती है और अंत में आरती करके प्रसाद बांटा जाता है.