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ED ने अनिल अंबानी के ग्रुप की संपत्ति 9,000 करोड़ रुपये जब्त की, कार्रवाई जारी

मुंबई     देश के सबसे अमीर इंसान मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) के छोटे भाई अनिल अंबानी (Anil Ambani) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. बीते कुछ समय में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने उनके नेतृत्व वाले रिलायंस समूह की कंपनियों पर तगड़ा एक्शन लिया है और ये कार्रवाई लगातार जारी है. मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में अब तक ईडी द्वारा की गई कुर्की की कार्रवाई में करीब 9000 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्तियां जब्त की जा चुकी हैं. मुंबई से चेन्नई तक ईडी का एक्शन एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) ने अनिल अंबानी ग्रुप ऑफ कंपनीज से जुड़ी 1400 करोड़ रुपये वैल्यू के एसेट्स को लेकर नए प्रोविजनल अटैचमेंट का ऑर्डर दिया है. इससे पहले ED Action के तहत करीब 7500 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई थी और नए ऑर्डर के साथ अब अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप की जब्त की गई संपत्ति की कुल वैल्यू 9000 करोड़ रुपये हो चुकी है. अटैच किए गए एसेट्स नवी मुंबई, चेन्नई, पुणे और भुवनेश्वर में फैले हुए हैं.   बता दें कि बीते 31 अक्टूबर 2025 को PMLA की धारा 5(1) के तहत कुर्की के आदेश जारी किए गए थे. उस समय रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) द्वारा जुटाए गए सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundring) के मामले में 40 से ज्यादा संपत्तियां अस्थायी रूप से जब्त की गई थीं. ईडी ने जिन 7,500 करोड़ रुपये की संपत्तियों को कुर्क किया था, उनमें मुंबई के बांद्रा वेस्ट, पाली हिल में स्थित उनका एक आवास भी शामिल था. वहीं अब नए एसेट्स भी जब्त किए गए हैं.  14 नवंबर को ED ने किया था तलब Anil Ambani Reliance Group पर ईडी की लगातार कार्रवाई के बीच हालांकि, उनकी कंपनियों की ओर से सफाई भी जारी की जा चुकी है. इसमें साफ किया गया कि इससे उनके बिजनेस पर कोई असर नहीं पड़ा है. कंपनी ने बीते दिनों स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में कहा था कि ईडी द्वारा कुर्क की गईं ज्यादातर संपत्तियां रिलायंस कम्युनिकेशन (Reliance Communication) की हैं, जो 6 साल से कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) से गुजर रही है. रिलांयस पावर और रिलायंस इंफ्रा की परफॉर्मेंस पर भविष्य में भी कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय ने अनिल अंबानी को 14 नवंबर को ईडी कार्यालय में भी बुलाया था.  ED ने की अनिल अंबानी ग्रुप की 7500 करोड़ की संपत्त‍ि जप्त  अनिल अंबानी की मुश्किलों को बढ़ाने वाला मनी लॉन्ड्रिंग केस उन आरोपों से संबंधित है, जिनमें कहा गया कि आरएचएफएल और आरसीएफएल के जरिए जुटाए गए सार्वजनिक धन को अनिल अंबानी समूह से जुड़ी संस्थाओं से जुड़े लेन-देन के दौरान डायवर्ट और लॉन्ड्रिंग किया गया था. अनिल अंबानी के शेयरों पर एक नजर अनिल अंबानी की कंपनियों के शेयरों (Anil Ambani Shares) पर नजर डालें, तो सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार को उनकी कंपनी रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर का शेयर (Reliance Infra Share) खबर लिखे जानें तक 4.10 फीसदी की गिरावट लेकर 172 रुपये पर ट्रेड कर रहा था. वहीं दूसरी ओर Reliance Power Share मामूली तेजी के साथ 40 रुपये पर ट्रेड कर रहा है.   

अनिल अंबानी पर ED का दबाव, पहले 7500Cr की संपत्ति कुर्क की गई

मुंबई  अनिल अंबानी की मुश्किलें थमती नजर नहीं आ रही हैं. बीते कुछ दिनों से उनके नेतृत्व वाले रिलायंस ग्रुप पर ED की कार्रवाई जारी है और 7500 करोड़ रुपये की संपत्तियों की कुर्की की जा चुकी है. अब प्रवर्तन निदेशालय ने अनिल अंबानी को 14 नवंबर को ईडी कार्यालय में बुलाया है. ये दूसरी बार है जबकि ईडी ने उन्हें तलब किया है.  लगातार जारी है ED का एक्शन  गौरतलब है कि 31 अक्टूबर 2025 को PMLA की धारा 5(1) के तहत कुर्की के आदेश जारी किए गए थे. इसके तहत रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) द्वारा जुटाए गए सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में 40 से ज्यादा संपत्तियां अस्थायी रूप से जब्त की गई हैं. ईडी ने जिन 7,500 करोड़ रुपये की संपत्तियों को कुर्क किया है, उनमें मुंबई के बांद्रा वेस्ट, पाली हिल में स्थित उनका एक आवास भी शामिल है. ईडी की कार्रवाई के बाद हालांकि, Anil Ambani Reliance Group की ओर से स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में बताया गया कि इससे उनके बिजनेस पर कोई असर नहीं पड़ा है. कंपनी की ओर से कहा गया कि ईडी द्वारा कुर्क की गईं ज्यादातर संपत्तियां रिलायंस कम्युनिकेशन की हैं, जो छह साल से कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) से गुजर रही है. रिलांयस पावर और रिलायंस इंफ्रा की परफॉर्मेंस पर भविष्य में भी कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. अगस्त में भी हुई थी अनिल अंबानी की पेशी अनिल अंबानी के रिलायंस समूह पर ईडी की जांच लंबे समय से चल रही है. इससे पहले 5 अगस्‍त को ED ने रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन और एमडी अनिल अंबानी को कथित लोन फ्रॉड केस की चल रही जांच के सिलसिले में पूछताछ के लिए बुलाया था. वहीं उनकी कंपनियों पर तलाशी अभियान भी कई चरण में चलाया जा चुका है.  अनिल अंबानी की मुश्किलों को बढ़ाने वाला मनी लॉन्ड्रिंग क यह मामला उन आरोपों से जुड़ा है, जिनमें कहा गया कि आरएचएफएल और आरसीएफएल के जरिए जुटाए गए सार्वजनिक धन को अनिल अंबानी समूह से जुड़ी संस्थाओं से जुड़े लेन-देन के दौरान डायवर्ट और लॉन्ड्रिंग किया गया था.  दिल्ली, मुंबई से हैदराबाद तक एक्शन बता दें हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई कुर्की की कार्रवाई जिन संपत्तियों पर की गई है. उनमें मुंबई के पाली हिल स्थित आवास, नई दिल्ली स्थित रिलायंस सेंटर की संपत्ति और दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, मुंबई, पुणे, ठाणे, हैदराबाद, चेन्नई (कांचीपुरम समेत) और पूर्वी गोदावरी में स्थित कई अन्य इन संपत्तियों में कार्यालय परिसर, आवासीय इकाइयां और प्लॉट शामिल हैं. 

मुंबई बंगले से लेकर दिल्ली-नोएडा की प्रॉपर्टी तक, अनिल अंबानी ग्रुप की 3084 करोड़ की संपत्तियां जब्त

मुंबई  प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप (Anil Ambani Reliance Group) पर बड़ा एक्शन लिया है. इसके तहत समूह की तमाम संस्थाओं से जुड़ी करीब 3,084 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां कुर्क की गई हैं. कुर्की के ये आदेश बीते 31 अक्टूबर 2025 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 5(1) के तहत जारी किए गए थे. जिन संपत्तियों को कुर्क किया गया है, उनमें मुंबई के बांद्रा वेस्ट, पाली हिल में स्थित उनका आवास भी शामिल है.  दिल्ली, मुंबई से नोएडा तक कार्रवाई प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई कार्रवाई के दौरान अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप से संबंधित जिन संपत्तियों को कुर्क किया गया है. उनमें मुंबई के पाली हिल स्थित आवास, नई दिल्ली स्थित रिलायंस सेंटर की संपत्ति और दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, मुंबई, पुणे, ठाणे, हैदराबाद, चेन्नई (कांचीपुरम समेत) और पूर्वी गोदावरी में स्थित कई अन्य इन संपत्तियों में कार्यालय परिसर, आवासीय इकाइयां और प्लॉट शामिल हैं. पीएमएलए के तहत जारी चार आदेशों के तहत इन सभी संपत्तियों की कुर्की की गई है. गौरतलब है कि मुंबई के बांद्रा वेस्ट के पाली हिल में स्थित अनिल अंबानी का आवास खासा लोकप्रिय है. 40 से ज्यादा संपत्तिया जब्त रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप पर ये बड़ी कार्रवाई करते हुए, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) द्वारा जुटाए गए सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में 40 से ज्यादा संपत्तियां अस्थायी रूप से जब्त कर ली हैं. यह मामला उन आरोपों से जुड़ा है जिनमें कहा गया कि आरएचएफएल और आरसीएफएल के माध्यम से जुटाए गए सार्वजनिक धन को अनिल अंबानी समूह से जुड़ी संस्थाओं से जुड़े लेन-देन के दौरान डायवर्ट और लॉन्ड्रिंग किया गया था. ये यस बैंक के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से भेजा गया. 2017-2019 के दौरान, यस बैंक ने RHFL के उपक्रमों में 2,965 करोड़ रुपये और RCFL के उपक्रमों में 2,045 करोड़ रुपये का निवेश किया. दिसंबर 2019 तक, ये निवेश नॉन-परफॉर्मिंग हो गए थे, जिसमें आरएचएफएल के लिए 1,353.50 करोड़ और आरसीएफएल के लिए 1,984 करोड़ बकाया थे. रिलायंस कम्युनिकेशंस भी निशाने पर  ईडी ने अनिल अंबानी के रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCom) और उससे जुड़ी संस्थाओं में भी अपनी जांच का दायरा बढ़ाया है. इसमें 13,600 करोड़ रुपये से ज्यादा की ऋण धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है. इसमें से 12,600 करोड़ रुपये से ज्यादा कथित तौर पर संबंधित पक्षों को ट्रांसफर किए गए, जबकि 1,800 करोड़ रुपये समूह की अन्य कंपनियों तक पहुंचाने से पहले सावधि जमा और म्यूचुअल फंड के माध्यम से ट्रांसफर हुए. प्रवर्तन निदेशालय ने कहा है कि वैध लेनदेन की आड़ में संबंधित संस्थाओं को धन पहुंचाने के लिए बिल डिस्काउंटिंग के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग का पता लगाया गया है. ईडी के मुताबिक, वह दागी संपत्तियों की कुर्की सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रहा है. इन कार्रवाइयों के माध्यम से की गई वसूली से आम जनता को लाभ होगा. लगातार कस रहा ईडी का शिकंजा ईडी की जांच लंबे समय से चल रही है और इससे पहले 5 अगस्ता को ED ने रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन और एमडी अनिल अंबानी को कथित लोन फ्रॉड केस की चल रही जांच के सिलसिले में पूछताछ के लिए बुलाया था. उससे भी पहले ईडी ने अनिल अंबानी से जुड़ी व्यावसायिक संस्थाओं पर छापेमारी की थी. ईडी ने Anil Ambani के रिलायंस ग्रुप से जुड़ी 50 व्यावसायिक संस्थाओं और 25 व्यक्तियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी. ये छापे 24 जुलाई को मुंबई में कम से कम 35 जगहों पर मारे गए थे.  अनिल अंबानी के रिलायंस समह पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) बीते कुछ समय में लगातार अपना शिकंजा कसती हुई नजर आई है. बीते अक्टूबर महीने में ईडी ने रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप ऑफ कंपनीज के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) और कार्यकारी निदेशक अशोक कुमार पाल को गिरफ्तार कर लिया है. यह गिरफ्तारी फर्जी बैंक गारंटी मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के तहत की गई है.  

ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में पकड़ा अनिल अंबानी के सहयोगी अशोक पाल

मुंबई प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अनिल अंबानी समूह की कंपनी रिलायंस पावर के अधिकारी अशोक कुमार पाल को गिरफ्तार कर लिया है। जानकारी के मुताबिक पाल से फर्जी बैंक गारंटी और फर्जी बिलिंग से जुड़े मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी के दिल्ली कार्यालय में पूछताछ की गई और इसके बाद गिरफ्तार कर लिया गया। बता दें कि अशोक कुमार पाल को अनिल अंबानी को करीबी के तौर पर जाना जाता है। पाल रिलायंस पावर लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक और मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) हैं। पाल पर क्या लगे हैं आरोप? ईडी ने पाल पर कई आरोप लगाए हैं। एजेंसी का कहना है कि पाल ने सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) को ₹68 करोड़ से अधिक की फर्जी बैंक गारंटी जमा की। ईडी के अनुसार, इस घोटाले में फर्जी चालानों के माध्यम से फंड डायवर्जन किया गया। यही नहीं, एसबीआई, इंडियन बैंक, पीएनबी और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया जैसे प्रमुख बैंकों की नकल की गई और फर्जी ईमेल डोमेन का इस्तेमाल करके जाली दस्तावेजों को असली दिखाया गया। आरोप के मुताबिक पाल ने अनिल अंबानी के एक सहयोगी के माध्यम से इस फर्जी गारंटी को निष्पादित करने में भूमिका निभाई और बिस्वाल ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड (BTPL) को कॉन्ट्रैक्ट के लिए चुना गया। हालांकि, इस कंपनी का विश्वसनीय ट्रैक रिकॉर्ड नहीं था। यह पूरा रैकेट बैंकिंग प्रणाली के दुरुपयोग का एक संगठित प्रयास था, जिसमें सरकारी परियोजना के धन को निजी लाभ के लिए मोड़ने की कोशिश की गई। ईडी के मुताबिक BTPL के निदेशक पार्थ सारथी बिस्वाल पहले से ही न्यायिक हिरासत में हैं। ₹17,000 करोड़ के बैंक धोखाधड़ी का मामला बता दें कि ईडी ₹17,000 करोड़ के बैंक धोखाधड़ी मामलों में अनिल अंबानी समूह की कंपनियों की जांच कर रहा है। यह मामला यस बैंक और एडीए समूह की कई कंपनियों से जुड़ा है। अगस्त में ईडी ने अंबानी को पूछताछ के लिए तलब किया था और मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मुंबई में 35 ठिकानों पर छापेमारी की थी, जिसमें 50 कंपनियां और 25 व्यक्तियों के नाम सामने आए।

ED की रडार पर अनिल अंबानी, लोन घोटाले में पूछताछ का दौर शुरू

मुंबई  रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी से 17,000 करोड़ रुपये के बैंक लोन फ्रॉड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) पूछताछ कर रही है. संघीय जांच एजेंसी ने 1 अगस्त को उन्हें समन जारी करके आज अपने नई दिल्ली दफ्तर में हाजिर होने के लिए कहा था. वह मंगलवार सुबह मुंबई से फ्लाइट लेकर दिल्ली पहुंचे और पूछताछ के लिए ईडी दफ्तर में पेश हुए.  पूछताछ का नेतृत्व असिस्टेंट डायरेक्टर रैंक के अफसर द्वारा किया जा रहा है. वहीं डेप्यूटी डायरेक्टर और जॉइंट डायरेक्ट रैंक के अधिकारी इस इंटेरोगेशन की निगरानी कर रहे हैं. ईडी ने कुछ दिन पहले ही अनिल अंबानी की कंपनियों से जुड़े 35 ठिकानों और व्यक्तियों के यहां छापेमारी की थी और महत्वपूर्ण दस्तावेज, कम्प्यूटर हार्ड ड्राइव समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स जब्त किए थे. जांच एजेंसी ने बैंकों को पत्र लिखकर अनिल अंबानी की कंपनियों को अप्रूव्ड लोन का ब्योरा भी मांगा है. ईडी ने 12-13 सार्वजनिक और निजी बैंकों को पत्र लिखकर रिलायंस हाउसिंग फाइनेंस, रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस को दिए गए लोन पर की गई उचित जांच-पड़ताल का विवरण मांगा है. सूत्रों ने बताया कि भारतीय स्टेट बैंक, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, यूको बैंक और पंजाब एंड सिंध बैंक से भी विवरण मांगा गया है. ₹17000 करोड़ के लोन फ्रॉड का मामला ईडी की प्रारंभिक जांच में येस बैंक से लगभग 3,000 करोड़ रुपये के अवैध लोन ट्रांसफर (2017 से 2019 की अवधि) का पता चला है. बाद में अधिकारियों को रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड से जुड़े 14,000 करोड़ रुपये से अधिक के लोन फ्रॉड के बारे में पता चला. इसके बाद गत 24 जुलाई को ईडी ने दिल्ली और मुंबई में कम से कम तीन दिनों तक 35 ठिकानों पर छापेमारी की, जो 50 कंपनियों और 25 लोगों से जुड़े हैं. अनिल अंबानी की कंपनियों के कई अधिकारियों के यहां भी ईडी ने छापे मारे थे और 25 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की थी. इस कार्रवाई के बाद अनिल अंबानी की कंपनियों के शेयर बुरी तरह टूट गए. रिलायंस इंफ्रा से लेकर रिलायंस पावर तक के शेयरों में लोअर सर्किट लग गया. पिछले पांच दिनों में ही रिलायंस पावर का शेयर 11 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है. वहीं रिलायंस इंफ्रा के शेयर में 10 फीसदी की गिरावट आई है. इस मामले में ED ने की पहली गिरफ्तारी संघीय जांच एजेंसी ने पिछले सप्ताह इस केस के संबंध में पहली गिरफ्तारी की थी. ईडी ने बिस्वाल ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर पार्थ सारथी बिस्वाल को 1 अगस्त को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत 68.2 करोड़ रुपये की फर्जी बैंक गारंटी जमा करने के आरोप में गिरफ्तार किया था. उन्होंने बताया कि ये बैंक गारंटी रिलायंस पावर की ओर से दी गई थी. अनिल अंबानी के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया गया है. CBI के बाद ED ने दर्ज किया था मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दो एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद ईडी ने भी मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था. ईडी सूत्रों के मुताबिक य​ह जांच मुख्य रूप से 2017-2019 के बीच अनिल अंबानी की कंपनियों को येस बैंक द्वारा दिए गए अवैध लोन डायवर्जन के आरोपों से संबंधित है. उनके मुताबिक अनिल अंबानी की कंपनियों को लोन दिए जाने से ठीक पहले, येस बैंक के प्रमोटरों को उनके व्यवसाय में धन प्राप्त हुआ था. संघीय जांच एजेंसी रिश्वत और लोन के इस गठजोड़ की जांच कर रही है. ईडी ने अपनी प्रारंभिक जांच में कई अनियमितताएं पाई हैं, जिनमें खराब या असत्यापित वित्तीय स्रोतों वाली कंपनियों को लोन जारी करना, लोन लेने वाली संस्थाओं में एक ही निदेशक और पते का उपयोग, लोन फाइलों में आवश्यक दस्तावेजों का नहीं होना, शेल कंपनियों के नाम लोन मंजूर करना, मौजूदा कर्ज को चुकाने के लिए नए लोन देना शामिल है. सेबी ने अनिल अंबानी की कंपनी, रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) में गंभीर अनियमितताओं को उजागर करने वाली एक रिपोर्ट पेश की है. इसमें कहा गया है कि कंपनी का कॉरपोरेट लोन पोर्टफोलियो वित्त वर्ष 2017-18 के 3,742 करोड़ रुपये से लगभग दोगुना होकर वित्त वर्ष 2018-19 में 8,670 करोड़ रुपये हो गया. ED एक्शन पर रिलायंस ग्रुप की प्रतिक्रिया अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप की दो कंपनियों रिलायंस पावर और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने 26 जुलाई को स्टॉक एक्सचेंज को सूचित करते हुए कहा था कि वे ईडी की इस कार्रवाई को स्वीकार करते हैं, लेकिन छापों का उनके बिजनेस ऑपरेशन, फाइनेंशियल परफॉर्मेंस, शेयर होल्डर्स, स्टाफ या किसी अन्य स्टेकहोल्डर्स पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है. कई नियामक और वित्तीय निकायों ने अपने निष्कर्ष ईडी के साथ साझा किए हैं, जिनमें नेशनल हाउसिंग बैंक (NHB), सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI), नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी (NFRA) और बैंक ऑफ बड़ौदा शामिल हैं. एसबीआई ने रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) और खुद अनिल अंबानी को 'फ्रॉड अकाउंट्स' के रूप में क्लासिफाइड किया है. यह पहली बार नहीं है जब बैंक ने किसी अकाउंट को धोखाधड़ी वाला बताया है. एसबीआई ने इससे पहले नवंबर 2020 में RCom और अनिल अंबानी के बैंक खातों को फ्रॉड अकाउंट्स घोषित किया था और 5 जनवरी, 2021 को सीबीआई में शिकायत दर्ज कराई थी. दिल्ली हाई कोर्ट ने 6 जनवरी, 2021 यथास्थिति का आदेश जारी किया, जिसके बाद शिकायत वापस ले ली गई.

अनिल अंबानी पर ईडी का कड़ा प्रहार, बैंकिंग नेटवर्क तक पहुंची जांच की आंच

 मुंबई केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक तरफ रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी के समूह की कंपनियों के खिलाफ करोड़ों रुपये के कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें 5 अगस्त को पूछताछ के लिए समन भेजा है, तो दूसरी तरफ दर्जन भर ऐसे बैंकों को चिट्ठी लिखकर उनकी मुश्किलें दोगुनी कर दी हैं, जिन्होंने उनकी कंपनियों को लोन दिए थे। ईडी ने उन बैंकों को पत्र लिखकर उनकी कंपनियों को दिए गए ऋणों का विवरण मांगा है। मामले से जुड़े लोगों ने सोमवार को यह जानकारी दी।  रिपोर्ट के मुताबिक, ईडी ने 12-13 सार्वजनिक और निजी बैंकों को पत्र लिखकर रिलायंस हाउसिंग फाइनेंस, रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस कॉमर्शियल फाइनेंस को दिए गए लोन का विवरण माँगा है। सूत्रों ने बताया कि ईडी ने जिन बैंकों को चिट्ठी लिखी है, उनमें भारतीय स्टेट बैंक, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, यूको बैंक और पंजाब एंड सिंध बैंक शामिल है। जो लोन बन गए NPA… रिपोर्ट में कहा गया है कि ईडी अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस ग्रुप को दिए गए ऋण के मामले में उन लोन्स को स्वीकृत करने और जारी करने वाले बैंक अधिकारियों को भी पूछताछ के लिए तलब कर सकती है, जो बाद में NPA बन गए। सूत्रों ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय ने ऋण मंजूरी की प्रक्रिया, चूक की समय-सीमा और ऐसे खातों पर की गई वसूली कार्रवाई का विवरण भी माँगा है। पिछले हफ्ते पहली गिरफ्तारी एजेंसी ने पिछले हफ्ते अनिल अंबानी के रिलायंस समूह की कंपनियों के खिलाफ 3,000 करोड़ रुपये के ऋण धोखाधड़ी मामले में पहली गिरफ्तारी की थी। बिस्वाल ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पार्थ सारथी बिस्वाल को शुक्रवार को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत 68.2 करोड़ रुपये की फर्जी गारंटी जमा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने बताया कि ये गारंटी रिलायंस पावर की ओर से दी गई थी। 3,000 करोड़ रुपये के कथित ऋण हेराफेरी का मामला बता दें कि ईडी 2017 और 2019 के बीच यस बैंक द्वारा रिलायंस समूह की कंपनियों को दिए गए लगभग 3,000 करोड़ रुपये के कथित ऋण हेराफेरी की जांच कर रही है। एजेंसी ने पाया है कि बैंक के प्रवर्तकों को ऋण स्वीकृत होने से ठीक पहले भुगतान भी प्राप्त हुआ था, जो एक लेन-देन व्यवस्था का संकेत देता है। एजेंसी ने पिछले महीने इस मामले से जुड़ी 50 से अधिक फर्मों पर छापे मारे थे। अंबानी के खिलाफ एक लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया गया है।

लोन फ्रॉड मामले में बड़ा एक्शन, ED ने अनिल अंबानी से जुड़ी कंपनी के MD को दबोचा

मुंबई  प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कारोबारी समूहों के लिए 'फर्जी' बैंक गारंटी जारी करने वाले गिरोह के संचालन के आरोप में ओडिशा की एक कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) को गिरफ्तार किया है। इस गिरोह द्वारा रिलायंस समूह की एक कंपनी के लिए कथित रूप से 68 करोड़ रुपये की गारंटी भी प्रदान की गई थी। आधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी। संघीय जांच एजेंसी ने शुक्रवार को धन शोधन के इस मामले में भुवनेश्वर स्थित ‘बिस्वाल ट्रेडलिंक’ कंपनी के खिलाफ छापेमारी शुरू की थी। क्या है डिटेल सूत्रों ने बताया कि ‘बिस्वाल ट्रेडलिंक’ के प्रबंध निदेशक पार्थ सारथी बिस्वाल को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत शुक्रवार को भुवनेश्वर से हिरासत में लिया गया। उन्होंने बताया कि अदालत ने उसे छह अगस्त तक प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत में भेज दिया है। ईडी द्वारा पीएमएलए के तहत दर्ज किया गया मामला दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा नवंबर 2024 में दर्ज की गई एक प्राथमिकी से जुड़ा है। शुक्रवार को हुई थी तलाशी ईडी ने शुक्रवार को कंपनी के भुवनेश्वर स्थित तीन परिसरों और कोलकाता स्थित एक ‘‘सहयोगी’’ कंपनियों की तलाशी ली थी। एजेंसी के सूत्रों ने आरोप लगाया कि यह कंपनी आठ प्रतिशत कमीशन लेकर ‘‘फर्जी’’ बैंक गारंटी जारी करने का काम कर रही थी। उन्होंने बताया कि ‘रिलायंस पावर’ की सहायक कंपनी ‘रिलायंस एनयू बीईएसएस लिमिटेड’ की ओर से सोलर ‘एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड’ (एसईसीसआई) को जमा की गई 68.2 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी ‘‘फर्जी’’ पाई गई। कंपनी का नाम पहले ‘महाराष्ट्र एनर्जी जनरेशन लिमिटेड’ था। सूत्रों ने बताया कि ईडी ने हाल में मुंबई में अनिल अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस समूह की कंपनियों के खिलाफ की गई छापेमारी के दौरान इस लेनदेन से संबंधित कुछ दस्तावेज जब्त किए हैं। रिलायंस समूह के एक प्रवक्ता ने कहा कि रिलायंस पावर इस मामले में ‘‘धोखाधड़ी और जालसाजी की साजिश का शिकार’’ रही है और उसने सात नवंबर 2024 को विभिन्न स्टॉक एक्सचेंज में इस संबंध में उचित सूचनाएं दी थीं। प्रवक्ता ने कहा कि उन्होंने अक्टूबर 2024 में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा में तीसरे पक्ष (आरोपी कंपनी) के खिलाफ एक आपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी और कानून की ‘‘उचित प्रक्रिया’’ का पालन किया जाएगा। सूत्रों ने कहा कि कई कंपनियों के साथ इसी तरह के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का पता चला है और इसकी जांच की जा रही है। आरोप है कि कंपनी के कई ऐसे बैंक खाते थे जिन्हें उसने अघोषित रखा और इन खातों से उसकी घोषित आमदनी के मुकाबले कहीं ज्यादा लेनदेन किए जा रहे हैं। एजेंसी को कंपनी के करीब सात ‘‘अघोषित’’ बैंक खातों का पता चला है। पता चला है कि ओडिशा स्थित कंपनी मूल ईमेल डोमेन की जगह दूसरे ईमेल डोमेन का उपयोग कर रही थी ताकि यह दिखावा किया जा सके कि यह संदेश देश के सबसे बड़े ऋणदाता भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) द्वारा भेजा जा रहा है।