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₹1,085 करोड़ फ्रॉड केस में अनिल अंबानी घिरे, PNB की शिकायत पर CBI ने दर्ज की नई FIR

 मुंबई केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कारोबारी अनिल अंबानी (Anil Ambani) के खिलाफ आईपीसी की धारा-420 और 120बी के तहत एक नया मामला दर्ज किया है. यह एफआईआर पंजाब नेशनल बैंक के चीफ मैनेजर संतोषकृष्ण अन्नावरपू की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है. इस एफआईआर के मुताबिक, 2013 से 2017 के बीच अनिल अंबानी ने रिलायंस कम्‍युनिकेशंस (Reliance Communications) के अन्य तत्कालीन अधिकारियों के साथ मिलकर पीएनबी के साथ 1085 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की. बैंक ने क्या लगाया आरोप ? पंजाब नेशनल बैंक का आरोप है कि रिलायंस कम्युनिकेशंस ने 1085 करोड़ रुपये का लोन इस मंशा से लिया कि उसे वापस नहीं किया जाएगा. पीएनबी ने यह भी आरोप लगाया है कि कंपनी ने बैंक से लिए गए फंड को जानबूझकर दूसरी जगह डायवर्ट कर दिया. आरोप है कि अनिल कंपनी ने बैंक के पैसों का दुरुपयोग कर धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात (क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट) किया. एफआईआर में रिलायंस कम्युनिकेशंस, अनिल अंबानी और मझारी काकर समेत कुछ अन्य अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है. FIR में कहा गया है कि आरोपियों ने PNB को 621.39 करोड़ रुपए और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया (जिसका अब PNB में विलय हो चुका है) को 463.80 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाया है. रिलायंस पावर कंपनी के 12 ठिकानों पर मारी ताबड़तोड़ रेड बता दें कि, इससे पहले शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अनिल अंबानी की रिलायंस पावर कंपनी के ठिकानों पर छापेमारी की. ये छापेमारी रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम) से जुड़े बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रिलायंस पावर लिमिटेड से जुड़े लोगों के खिलाफ की गई. गौरतलब है कि इससे पहले 25 फरवरी ईडी ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम) से जुड़े बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अनिल अंबानी की मुंबई के पाली हिल स्थित आवासीय संपत्ति ‘अबोड’ को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया था, जिसकी अनुमानित कीमत 3,716.83 करोड़ रुपये है. इसके साथ ही इस समूह से जुड़ी अब तक कुर्क की गई कुल संपत्तियों का मूल्य 15,700 करोड़ रुपए से अधिक हो गया है.

ED ने मुंबई में अनिल अंबानी और रिलायंस पावर से जुड़ी 12 कंपनियों के ठिकानों पर मारी छापेमारी

मुंबई प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को उद्योगपति अनिल अंबानी और रिलायंस पावर लिमिटेड से जुड़े कई व्यवसायों और अधिकारिक ठिकानों पर छापेमारी की. समाचार एजेंसी IANS ने सूत्रों के हवाले से बताया कि मुंबई में 10 से 12 जगहों पर एक साथ ये कार्रवाई की जा रही है. ED की करीब 15 विशेष टीमों ने तड़के सुबह ही रिलायंस पावर से जुड़े लोगों के दफ्तरों और घरों पर तलाशी शुरू कर दी थी। सूत्रों ने संकेत दिया है कि ये तलाशी रिलायंस पावर से जुड़े संदिग्ध फंड ट्रांसफर और लेनदेन की जांच का हिस्सा हैं. हालांकि, शुक्रवार की इन छापेमारी पर ED ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। बैंक धोखाधड़ी मामले में हो चुकी है कुर्की  इससे पहले, ED ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCom) के बैंक धोखाधड़ी मामले में अनिल अंबानी के पाली हिल स्थित आलीशान घर 'एबोड' (Abode) को अस्थायी रूप से कुर्क (Attach) किया था, जिसकी कीमत 3,716.83 करोड़ रुपये आंकी गई है। पिछले महीने के अंत में, CBI ने भी बैंक ऑफ बड़ौदा की शिकायत पर अनिल अंबानी के आवास और RCom के कार्यालयों की तलाशी ली थी। अनिल अंबानी की कंपनी पर क्या हैं आरोप? CBI की FIR के मुताबिक, रिलायंस कम्युनिकेशंस ने बैंक ऑफ बड़ौदा को 2,220 करोड़ रुपये से ज्‍यादा का नुकसान पहुंचाया है. आरोप है कि कंपनी ने कर्ज के पैसों का गलत इस्तेमाल किया और फर्जी लेनदेन के जरिए पैसे इधर-उधर किए. साथ ही, कंपनी के खातों (Books of Accounts) में हेराफेरी कर अनियमितताओं को छिपाने की कोशिश की गई. फिलहाल, ED ने इन ताजा छापों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। पिछले महीने हुई थी घर की जब्ती पिछले ही महीने फरवरी 2026 में, ईडी ने अनिल अंबानी पर बड़ी कर्रवाई की थी। जिसमें अनिल अंबानी के मुंबई स्थित घर, 'अबोड' अस्थायी रूप से जब्त कर लिया था। इस घर की अनुमानित कीमत 3,500 करोड़ रुपये बताई जाती है। यह जब्ती रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े 40,000 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले की लंबे समय से चल रही जांच के सिलसिले में की गई थी। इस जब्ती के साथ अंबानी ग्रुप की संपत्तियों की कुल जब्ती राशि 15,700 करोड़ रुपये से अधिक तक हो गई थी। क्या हैं आरोप आरोप है कि आरकॉम ने विभिन्न बैंकों जैसे एसबीआई, यस बैंक आदि से प्राप्त लोन की राशि को संबंधित संस्थाओं और विदेशी खातों में डायवर्ट किया गया। इसमें चीनी राज्य बैंकों से जुड़े 13,558 करोड़ रुपये के एक्सपोजर का भी जिक्र है। सीबीआई की 2019 की एफआईआर के आधार पर यह मनी लॉन्ड्रिंग जांच चल रही है। ईडी ने विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया है और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद मामले की जांच कर रही है।  

40,000 करोड़ के घोटाले में ED ने लिया बड़ा कदम, अनिल अंबानी सामने हुए

नई दिल्ली  उद्योगपति और रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी की कानूनी मुश्किलें लगातार गहराती जा रही हैं. गुरुवार, 26 फरवरी 2026 को अनिल अंबानी दिल्ली स्थित प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मुख्यालय पहुंचे, जहाँ उन्होंने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCOM) और उससे जुड़ी कंपनियों द्वारा किए गए कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अपना बयान दर्ज कराया. अंबानी सुबह करीब 11 बजे केंद्रीय जांच एजेंसी के दफ्तर पहुंचे. सूत्रों के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय की स्पेशल टास्क फोर्स (मुख्यालय) ने उनसे कई घंटों तक पूछताछ की. यह पूछताछ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत की गई है. ₹3,716 करोड़ का निजी आवास 'अबोड' कुर्क अनिल अंबानी की यह पेशी उस बड़ी कार्रवाई के ठीक बाद हुई है, जिसमें ED ने मुंबई के पॉश इलाके पाली हिल स्थित उनके आलीशान निजी आवास 'अबोड' (Abode) को अस्थायी रूप से कुर्क (Attach) कर लिया है. इस संपत्ति की अनुमानित कीमत लगभग 3,716.83 करोड़ रुपये है. इससे पहले भी इस संपत्ति के एक हिस्से को कुर्क किया गया था, लेकिन अब पूरी इमारत जांच एजेंसी के घेरे में है. इस ताज़ा कार्रवाई के साथ ही, रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप की अब तक कुर्क की गई कुल संपत्तियों का मूल्य 15,700 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है. पिछले साल भी एजेंसी ने नवी मुंबई स्थित 'धीरूभाई अंबानी नॉलेज सिटी' (DAKC) की 132 एकड़ जमीन कुर्क की थी, जिसकी कीमत 4,462 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई थी. क्या है पूरा मामला? यह पूरा मामला सीबीआई (CBI) द्वारा दर्ज की गई उस एफआईआर (FIR) पर आधारित है, जिसमें रिलायंस कम्युनिकेशंस, अनिल अंबानी और अन्य पर आपराधिक साजिश (120-B), अमानत में खयानत (406) और धोखाधड़ी (420) के आरोप लगाए गए हैं. ED की जांच के अनुसार, RCOM और उसकी सहयोगी कंपनियों ने घरेलू और विदेशी बैंकों से भारी-भरकम कर्ज लिया था. वर्तमान में समूह पर बैंकों का कुल बकाया 40,185 करोड़ रुपये है. जांच एजेंसी का आरोप है कि इस पैसे का इस्तेमाल उसी काम के लिए नहीं किया गया जिसके लिए कर्ज लिया गया था. इसके बजाय, फंड को अन्य समूह कंपनियों के कर्ज चुकाने (एवरग्रीनिंग), संबंधित पक्षों को ट्रांसफर करने या म्यूचुअल फंड में निवेश करने के लिए डाइवर्ट किया गया. SBI ने घोषित किया 'फ्रॉड' संसद में भी इस मुद्दे की गूंज सुनाई दी है. वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने पुष्टि की थी कि भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने आरबीआई के दिशानिर्देशों के अनुसार रिलायंस कम्युनिकेशंस और इसके प्रमोटर अनिल अंबानी के खातों को 'फ्रॉड' (धोखाधड़ी) के रूप में वर्गीकृत किया है. केवल SBI ही नहीं, केनरा बैंक ने भी आरोप लगाया है कि RCOM ने उनके साथ 1,050 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की है. कुल मिलाकर पांच बड़े बैंकों ने समूह के खातों को संदिग्ध माना है. शेल कंपनियों और विदेशी संपत्तियों की जांच जांच का दायरा केवल घरेलू बैंकों तक सीमित नहीं है. ED उन "अघोषित विदेशी बैंक खातों" और विदेशी संपत्तियों की भी जांच कर रही है, जिनका लिंक अंबानी परिवार से होने का संदेह है. इसके अलावा, यस बैंक (Yes Bank) के साथ हुए संदिग्ध लेनदेन भी रडार पर हैं, जहाँ रिलायंस म्यूचुअल फंड ने कथित तौर पर 'क्विड प्रो को' (Quid Pro Quo) के तहत यस बैंक के AT-1 बॉन्ड में 2,850 करोड़ रुपये का निवेश किया था. रिलायंस इंफ्रा में भी बड़ी गड़बड़ी का शक जांच में यह भी सामने आया है कि रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने सेबी (SEBI) के नियमों को ताक पर रखकर एक अघोषित संबंधित पार्टी (C-Company) के माध्यम से करोड़ों रुपये डाइवर्ट किए. एजेंसी का मानना है कि लोन डाइवर्जन का यह आंकड़ा 10,000 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है.

सुप्रीम कोर्ट को पत्र: अनिल अंबानी ने कहा, भारत छोड़ने की अनुमति के बिना नहीं जाऊंगा

मुंबई  देश के प्रमुख उद्योगपति अनिल अंबानी ने सुप्रीम कोर्ट में एक औपचारिक हलफनामा दायर किया है कि वे सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना भारत छोड़कर नहीं जाएंगे। अंबानी ने यह भी आश्वासन दिया है कि रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) और उसकी समूह संस्थाओं द्वारा कथित तौर पर किए गए बड़े पैमाने के बैंक फ्रॉड मामले की जांच में वे जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करना जारी रखेंगे। यह मामला ईएएस सरमा बनाम भारत सरकार के तहत चल रहा है। अंबानी फिलहाल प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच के घेरे में हैं। अंबानी द्वारा यह हलफनामा ईएएस सरमा द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) के जवाब में आया है। इससे पहले 4 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने अंबानी के वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी के उस बयान को रिकॉर्ड में लिया था कि अंबानी अदालत की अनुमति के बिना विदेश यात्रा नहीं करेंगे। अपने हलफनामे में अनिल अंबानी ने इस आश्वासन को औपचारिक रूप से रिकॉर्ड पर रखा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब से मौजूदा जांच शुरू हुई है वे जुलाई 2025 से भारत से बाहर नहीं गए हैं और फिलहाल उनकी विदेश यात्रा की कोई योजना नहीं है। उन्होंने अंडरटेकिंग दी है कि यदि विदेश यात्रा की आवश्यकता पड़ती है, तो वे ऐसा करने से पहले अदालत से अनुमति लेंगे। जांच एजेंसियों के साथ सहयोग का वादा हलफनामे में इस बात पर जोर दिया गया है कि अंबानी जांच एजेंसियों के साथ सहयोग कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। उन्होंने बताया कि उन्हें प्रवर्तन निदेशालय द्वारा समन भेजा गया है और उन्होंने निर्धारित तिथि पर जांच में शामिल होने का आश्वासन दिया है। हलफनामे में यह भी कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट में कार्यवाही लंबित रहने के दौरान धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) की धारा 50 के तहत उनकी जांच चल रही है। 31,580 करोड़ रुपये के फ्रॉड का आरोप अदालत के समक्ष दायर याचिका के अनुसार, RCOM और उसकी सहायक कंपनियों रिलायंस इन्फ्राटेल और रिलायंस टेलीकॉम ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के नेतृत्व वाले बैंकों के कंसोर्टियम से 2013 और 2017 के बीच 31,580 करोड़ रुपये का ऋण प्राप्त किया था। याचिका के अनुसार, SBI की एक फोरेंसिक ऑडिट से पता चला कि फंडा का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया था। इसमें हजारों करोड़ रुपये का उपयोग असंबंधित ऋणों को चुकाने, संबंधित पक्षों को हस्तांतरण, म्यूचुअल फंड और फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश और ऋणों को छिपाने के लिए पैसे का जटिल सर्कुलर रूटिंग शामिल है। SIT जांच का आदेश याचिका में दावा किया गया है कि CBI द्वारा 21 अगस्त, 2025 को दर्ज की गई FIR और संबंधित ED की कार्यवाही कथित गलत कामों के केवल एक अंश को कवर करती है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि जांच एजेंसियां विस्तृत फोरेंसिक ऑडिट और स्वतंत्र रिपोर्टों के बावजूद बैंक अधिकारियों और नियामकों की भूमिका की जांच नहीं कर रही हैं। याचिकाकर्ता के अनुसार, केवल न्यायिक निगरानी ही यह सुनिश्चित कर सकती है कि सार्वजनिक धन से जुड़े ऐसे बड़े मामले की गहन जांच हो। 4 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय को आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का निर्देश दिया था। अदालत ने CBI को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि कथित घोटाले में बैंक अधिकारियों की किसी भी संभावित मिलीभगत की जांच की जाए।

ED ने अनिल अंबानी के ग्रुप की संपत्ति 9,000 करोड़ रुपये जब्त की, कार्रवाई जारी

मुंबई     देश के सबसे अमीर इंसान मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) के छोटे भाई अनिल अंबानी (Anil Ambani) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. बीते कुछ समय में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने उनके नेतृत्व वाले रिलायंस समूह की कंपनियों पर तगड़ा एक्शन लिया है और ये कार्रवाई लगातार जारी है. मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में अब तक ईडी द्वारा की गई कुर्की की कार्रवाई में करीब 9000 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्तियां जब्त की जा चुकी हैं. मुंबई से चेन्नई तक ईडी का एक्शन एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) ने अनिल अंबानी ग्रुप ऑफ कंपनीज से जुड़ी 1400 करोड़ रुपये वैल्यू के एसेट्स को लेकर नए प्रोविजनल अटैचमेंट का ऑर्डर दिया है. इससे पहले ED Action के तहत करीब 7500 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई थी और नए ऑर्डर के साथ अब अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप की जब्त की गई संपत्ति की कुल वैल्यू 9000 करोड़ रुपये हो चुकी है. अटैच किए गए एसेट्स नवी मुंबई, चेन्नई, पुणे और भुवनेश्वर में फैले हुए हैं.   बता दें कि बीते 31 अक्टूबर 2025 को PMLA की धारा 5(1) के तहत कुर्की के आदेश जारी किए गए थे. उस समय रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) द्वारा जुटाए गए सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundring) के मामले में 40 से ज्यादा संपत्तियां अस्थायी रूप से जब्त की गई थीं. ईडी ने जिन 7,500 करोड़ रुपये की संपत्तियों को कुर्क किया था, उनमें मुंबई के बांद्रा वेस्ट, पाली हिल में स्थित उनका एक आवास भी शामिल था. वहीं अब नए एसेट्स भी जब्त किए गए हैं.  14 नवंबर को ED ने किया था तलब Anil Ambani Reliance Group पर ईडी की लगातार कार्रवाई के बीच हालांकि, उनकी कंपनियों की ओर से सफाई भी जारी की जा चुकी है. इसमें साफ किया गया कि इससे उनके बिजनेस पर कोई असर नहीं पड़ा है. कंपनी ने बीते दिनों स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में कहा था कि ईडी द्वारा कुर्क की गईं ज्यादातर संपत्तियां रिलायंस कम्युनिकेशन (Reliance Communication) की हैं, जो 6 साल से कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) से गुजर रही है. रिलांयस पावर और रिलायंस इंफ्रा की परफॉर्मेंस पर भविष्य में भी कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय ने अनिल अंबानी को 14 नवंबर को ईडी कार्यालय में भी बुलाया था.  ED ने की अनिल अंबानी ग्रुप की 7500 करोड़ की संपत्त‍ि जप्त  अनिल अंबानी की मुश्किलों को बढ़ाने वाला मनी लॉन्ड्रिंग केस उन आरोपों से संबंधित है, जिनमें कहा गया कि आरएचएफएल और आरसीएफएल के जरिए जुटाए गए सार्वजनिक धन को अनिल अंबानी समूह से जुड़ी संस्थाओं से जुड़े लेन-देन के दौरान डायवर्ट और लॉन्ड्रिंग किया गया था. अनिल अंबानी के शेयरों पर एक नजर अनिल अंबानी की कंपनियों के शेयरों (Anil Ambani Shares) पर नजर डालें, तो सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार को उनकी कंपनी रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर का शेयर (Reliance Infra Share) खबर लिखे जानें तक 4.10 फीसदी की गिरावट लेकर 172 रुपये पर ट्रेड कर रहा था. वहीं दूसरी ओर Reliance Power Share मामूली तेजी के साथ 40 रुपये पर ट्रेड कर रहा है.   

अनिल अंबानी पर ED का दबाव, पहले 7500Cr की संपत्ति कुर्क की गई

मुंबई  अनिल अंबानी की मुश्किलें थमती नजर नहीं आ रही हैं. बीते कुछ दिनों से उनके नेतृत्व वाले रिलायंस ग्रुप पर ED की कार्रवाई जारी है और 7500 करोड़ रुपये की संपत्तियों की कुर्की की जा चुकी है. अब प्रवर्तन निदेशालय ने अनिल अंबानी को 14 नवंबर को ईडी कार्यालय में बुलाया है. ये दूसरी बार है जबकि ईडी ने उन्हें तलब किया है.  लगातार जारी है ED का एक्शन  गौरतलब है कि 31 अक्टूबर 2025 को PMLA की धारा 5(1) के तहत कुर्की के आदेश जारी किए गए थे. इसके तहत रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) द्वारा जुटाए गए सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में 40 से ज्यादा संपत्तियां अस्थायी रूप से जब्त की गई हैं. ईडी ने जिन 7,500 करोड़ रुपये की संपत्तियों को कुर्क किया है, उनमें मुंबई के बांद्रा वेस्ट, पाली हिल में स्थित उनका एक आवास भी शामिल है. ईडी की कार्रवाई के बाद हालांकि, Anil Ambani Reliance Group की ओर से स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में बताया गया कि इससे उनके बिजनेस पर कोई असर नहीं पड़ा है. कंपनी की ओर से कहा गया कि ईडी द्वारा कुर्क की गईं ज्यादातर संपत्तियां रिलायंस कम्युनिकेशन की हैं, जो छह साल से कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) से गुजर रही है. रिलांयस पावर और रिलायंस इंफ्रा की परफॉर्मेंस पर भविष्य में भी कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. अगस्त में भी हुई थी अनिल अंबानी की पेशी अनिल अंबानी के रिलायंस समूह पर ईडी की जांच लंबे समय से चल रही है. इससे पहले 5 अगस्‍त को ED ने रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन और एमडी अनिल अंबानी को कथित लोन फ्रॉड केस की चल रही जांच के सिलसिले में पूछताछ के लिए बुलाया था. वहीं उनकी कंपनियों पर तलाशी अभियान भी कई चरण में चलाया जा चुका है.  अनिल अंबानी की मुश्किलों को बढ़ाने वाला मनी लॉन्ड्रिंग क यह मामला उन आरोपों से जुड़ा है, जिनमें कहा गया कि आरएचएफएल और आरसीएफएल के जरिए जुटाए गए सार्वजनिक धन को अनिल अंबानी समूह से जुड़ी संस्थाओं से जुड़े लेन-देन के दौरान डायवर्ट और लॉन्ड्रिंग किया गया था.  दिल्ली, मुंबई से हैदराबाद तक एक्शन बता दें हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई कुर्की की कार्रवाई जिन संपत्तियों पर की गई है. उनमें मुंबई के पाली हिल स्थित आवास, नई दिल्ली स्थित रिलायंस सेंटर की संपत्ति और दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, मुंबई, पुणे, ठाणे, हैदराबाद, चेन्नई (कांचीपुरम समेत) और पूर्वी गोदावरी में स्थित कई अन्य इन संपत्तियों में कार्यालय परिसर, आवासीय इकाइयां और प्लॉट शामिल हैं. 

मुंबई बंगले से लेकर दिल्ली-नोएडा की प्रॉपर्टी तक, अनिल अंबानी ग्रुप की 3084 करोड़ की संपत्तियां जब्त

मुंबई  प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप (Anil Ambani Reliance Group) पर बड़ा एक्शन लिया है. इसके तहत समूह की तमाम संस्थाओं से जुड़ी करीब 3,084 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां कुर्क की गई हैं. कुर्की के ये आदेश बीते 31 अक्टूबर 2025 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 5(1) के तहत जारी किए गए थे. जिन संपत्तियों को कुर्क किया गया है, उनमें मुंबई के बांद्रा वेस्ट, पाली हिल में स्थित उनका आवास भी शामिल है.  दिल्ली, मुंबई से नोएडा तक कार्रवाई प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई कार्रवाई के दौरान अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप से संबंधित जिन संपत्तियों को कुर्क किया गया है. उनमें मुंबई के पाली हिल स्थित आवास, नई दिल्ली स्थित रिलायंस सेंटर की संपत्ति और दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, मुंबई, पुणे, ठाणे, हैदराबाद, चेन्नई (कांचीपुरम समेत) और पूर्वी गोदावरी में स्थित कई अन्य इन संपत्तियों में कार्यालय परिसर, आवासीय इकाइयां और प्लॉट शामिल हैं. पीएमएलए के तहत जारी चार आदेशों के तहत इन सभी संपत्तियों की कुर्की की गई है. गौरतलब है कि मुंबई के बांद्रा वेस्ट के पाली हिल में स्थित अनिल अंबानी का आवास खासा लोकप्रिय है. 40 से ज्यादा संपत्तिया जब्त रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप पर ये बड़ी कार्रवाई करते हुए, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) द्वारा जुटाए गए सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में 40 से ज्यादा संपत्तियां अस्थायी रूप से जब्त कर ली हैं. यह मामला उन आरोपों से जुड़ा है जिनमें कहा गया कि आरएचएफएल और आरसीएफएल के माध्यम से जुटाए गए सार्वजनिक धन को अनिल अंबानी समूह से जुड़ी संस्थाओं से जुड़े लेन-देन के दौरान डायवर्ट और लॉन्ड्रिंग किया गया था. ये यस बैंक के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से भेजा गया. 2017-2019 के दौरान, यस बैंक ने RHFL के उपक्रमों में 2,965 करोड़ रुपये और RCFL के उपक्रमों में 2,045 करोड़ रुपये का निवेश किया. दिसंबर 2019 तक, ये निवेश नॉन-परफॉर्मिंग हो गए थे, जिसमें आरएचएफएल के लिए 1,353.50 करोड़ और आरसीएफएल के लिए 1,984 करोड़ बकाया थे. रिलायंस कम्युनिकेशंस भी निशाने पर  ईडी ने अनिल अंबानी के रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCom) और उससे जुड़ी संस्थाओं में भी अपनी जांच का दायरा बढ़ाया है. इसमें 13,600 करोड़ रुपये से ज्यादा की ऋण धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है. इसमें से 12,600 करोड़ रुपये से ज्यादा कथित तौर पर संबंधित पक्षों को ट्रांसफर किए गए, जबकि 1,800 करोड़ रुपये समूह की अन्य कंपनियों तक पहुंचाने से पहले सावधि जमा और म्यूचुअल फंड के माध्यम से ट्रांसफर हुए. प्रवर्तन निदेशालय ने कहा है कि वैध लेनदेन की आड़ में संबंधित संस्थाओं को धन पहुंचाने के लिए बिल डिस्काउंटिंग के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग का पता लगाया गया है. ईडी के मुताबिक, वह दागी संपत्तियों की कुर्की सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रहा है. इन कार्रवाइयों के माध्यम से की गई वसूली से आम जनता को लाभ होगा. लगातार कस रहा ईडी का शिकंजा ईडी की जांच लंबे समय से चल रही है और इससे पहले 5 अगस्ता को ED ने रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन और एमडी अनिल अंबानी को कथित लोन फ्रॉड केस की चल रही जांच के सिलसिले में पूछताछ के लिए बुलाया था. उससे भी पहले ईडी ने अनिल अंबानी से जुड़ी व्यावसायिक संस्थाओं पर छापेमारी की थी. ईडी ने Anil Ambani के रिलायंस ग्रुप से जुड़ी 50 व्यावसायिक संस्थाओं और 25 व्यक्तियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी. ये छापे 24 जुलाई को मुंबई में कम से कम 35 जगहों पर मारे गए थे.  अनिल अंबानी के रिलायंस समह पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) बीते कुछ समय में लगातार अपना शिकंजा कसती हुई नजर आई है. बीते अक्टूबर महीने में ईडी ने रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप ऑफ कंपनीज के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) और कार्यकारी निदेशक अशोक कुमार पाल को गिरफ्तार कर लिया है. यह गिरफ्तारी फर्जी बैंक गारंटी मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के तहत की गई है.  

ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में पकड़ा अनिल अंबानी के सहयोगी अशोक पाल

मुंबई प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अनिल अंबानी समूह की कंपनी रिलायंस पावर के अधिकारी अशोक कुमार पाल को गिरफ्तार कर लिया है। जानकारी के मुताबिक पाल से फर्जी बैंक गारंटी और फर्जी बिलिंग से जुड़े मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी के दिल्ली कार्यालय में पूछताछ की गई और इसके बाद गिरफ्तार कर लिया गया। बता दें कि अशोक कुमार पाल को अनिल अंबानी को करीबी के तौर पर जाना जाता है। पाल रिलायंस पावर लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक और मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) हैं। पाल पर क्या लगे हैं आरोप? ईडी ने पाल पर कई आरोप लगाए हैं। एजेंसी का कहना है कि पाल ने सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) को ₹68 करोड़ से अधिक की फर्जी बैंक गारंटी जमा की। ईडी के अनुसार, इस घोटाले में फर्जी चालानों के माध्यम से फंड डायवर्जन किया गया। यही नहीं, एसबीआई, इंडियन बैंक, पीएनबी और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया जैसे प्रमुख बैंकों की नकल की गई और फर्जी ईमेल डोमेन का इस्तेमाल करके जाली दस्तावेजों को असली दिखाया गया। आरोप के मुताबिक पाल ने अनिल अंबानी के एक सहयोगी के माध्यम से इस फर्जी गारंटी को निष्पादित करने में भूमिका निभाई और बिस्वाल ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड (BTPL) को कॉन्ट्रैक्ट के लिए चुना गया। हालांकि, इस कंपनी का विश्वसनीय ट्रैक रिकॉर्ड नहीं था। यह पूरा रैकेट बैंकिंग प्रणाली के दुरुपयोग का एक संगठित प्रयास था, जिसमें सरकारी परियोजना के धन को निजी लाभ के लिए मोड़ने की कोशिश की गई। ईडी के मुताबिक BTPL के निदेशक पार्थ सारथी बिस्वाल पहले से ही न्यायिक हिरासत में हैं। ₹17,000 करोड़ के बैंक धोखाधड़ी का मामला बता दें कि ईडी ₹17,000 करोड़ के बैंक धोखाधड़ी मामलों में अनिल अंबानी समूह की कंपनियों की जांच कर रहा है। यह मामला यस बैंक और एडीए समूह की कई कंपनियों से जुड़ा है। अगस्त में ईडी ने अंबानी को पूछताछ के लिए तलब किया था और मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मुंबई में 35 ठिकानों पर छापेमारी की थी, जिसमें 50 कंपनियां और 25 व्यक्तियों के नाम सामने आए।

ED की रडार पर अनिल अंबानी, लोन घोटाले में पूछताछ का दौर शुरू

मुंबई  रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी से 17,000 करोड़ रुपये के बैंक लोन फ्रॉड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) पूछताछ कर रही है. संघीय जांच एजेंसी ने 1 अगस्त को उन्हें समन जारी करके आज अपने नई दिल्ली दफ्तर में हाजिर होने के लिए कहा था. वह मंगलवार सुबह मुंबई से फ्लाइट लेकर दिल्ली पहुंचे और पूछताछ के लिए ईडी दफ्तर में पेश हुए.  पूछताछ का नेतृत्व असिस्टेंट डायरेक्टर रैंक के अफसर द्वारा किया जा रहा है. वहीं डेप्यूटी डायरेक्टर और जॉइंट डायरेक्ट रैंक के अधिकारी इस इंटेरोगेशन की निगरानी कर रहे हैं. ईडी ने कुछ दिन पहले ही अनिल अंबानी की कंपनियों से जुड़े 35 ठिकानों और व्यक्तियों के यहां छापेमारी की थी और महत्वपूर्ण दस्तावेज, कम्प्यूटर हार्ड ड्राइव समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स जब्त किए थे. जांच एजेंसी ने बैंकों को पत्र लिखकर अनिल अंबानी की कंपनियों को अप्रूव्ड लोन का ब्योरा भी मांगा है. ईडी ने 12-13 सार्वजनिक और निजी बैंकों को पत्र लिखकर रिलायंस हाउसिंग फाइनेंस, रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस को दिए गए लोन पर की गई उचित जांच-पड़ताल का विवरण मांगा है. सूत्रों ने बताया कि भारतीय स्टेट बैंक, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, यूको बैंक और पंजाब एंड सिंध बैंक से भी विवरण मांगा गया है. ₹17000 करोड़ के लोन फ्रॉड का मामला ईडी की प्रारंभिक जांच में येस बैंक से लगभग 3,000 करोड़ रुपये के अवैध लोन ट्रांसफर (2017 से 2019 की अवधि) का पता चला है. बाद में अधिकारियों को रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड से जुड़े 14,000 करोड़ रुपये से अधिक के लोन फ्रॉड के बारे में पता चला. इसके बाद गत 24 जुलाई को ईडी ने दिल्ली और मुंबई में कम से कम तीन दिनों तक 35 ठिकानों पर छापेमारी की, जो 50 कंपनियों और 25 लोगों से जुड़े हैं. अनिल अंबानी की कंपनियों के कई अधिकारियों के यहां भी ईडी ने छापे मारे थे और 25 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की थी. इस कार्रवाई के बाद अनिल अंबानी की कंपनियों के शेयर बुरी तरह टूट गए. रिलायंस इंफ्रा से लेकर रिलायंस पावर तक के शेयरों में लोअर सर्किट लग गया. पिछले पांच दिनों में ही रिलायंस पावर का शेयर 11 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है. वहीं रिलायंस इंफ्रा के शेयर में 10 फीसदी की गिरावट आई है. इस मामले में ED ने की पहली गिरफ्तारी संघीय जांच एजेंसी ने पिछले सप्ताह इस केस के संबंध में पहली गिरफ्तारी की थी. ईडी ने बिस्वाल ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर पार्थ सारथी बिस्वाल को 1 अगस्त को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत 68.2 करोड़ रुपये की फर्जी बैंक गारंटी जमा करने के आरोप में गिरफ्तार किया था. उन्होंने बताया कि ये बैंक गारंटी रिलायंस पावर की ओर से दी गई थी. अनिल अंबानी के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया गया है. CBI के बाद ED ने दर्ज किया था मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दो एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद ईडी ने भी मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था. ईडी सूत्रों के मुताबिक य​ह जांच मुख्य रूप से 2017-2019 के बीच अनिल अंबानी की कंपनियों को येस बैंक द्वारा दिए गए अवैध लोन डायवर्जन के आरोपों से संबंधित है. उनके मुताबिक अनिल अंबानी की कंपनियों को लोन दिए जाने से ठीक पहले, येस बैंक के प्रमोटरों को उनके व्यवसाय में धन प्राप्त हुआ था. संघीय जांच एजेंसी रिश्वत और लोन के इस गठजोड़ की जांच कर रही है. ईडी ने अपनी प्रारंभिक जांच में कई अनियमितताएं पाई हैं, जिनमें खराब या असत्यापित वित्तीय स्रोतों वाली कंपनियों को लोन जारी करना, लोन लेने वाली संस्थाओं में एक ही निदेशक और पते का उपयोग, लोन फाइलों में आवश्यक दस्तावेजों का नहीं होना, शेल कंपनियों के नाम लोन मंजूर करना, मौजूदा कर्ज को चुकाने के लिए नए लोन देना शामिल है. सेबी ने अनिल अंबानी की कंपनी, रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) में गंभीर अनियमितताओं को उजागर करने वाली एक रिपोर्ट पेश की है. इसमें कहा गया है कि कंपनी का कॉरपोरेट लोन पोर्टफोलियो वित्त वर्ष 2017-18 के 3,742 करोड़ रुपये से लगभग दोगुना होकर वित्त वर्ष 2018-19 में 8,670 करोड़ रुपये हो गया. ED एक्शन पर रिलायंस ग्रुप की प्रतिक्रिया अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप की दो कंपनियों रिलायंस पावर और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने 26 जुलाई को स्टॉक एक्सचेंज को सूचित करते हुए कहा था कि वे ईडी की इस कार्रवाई को स्वीकार करते हैं, लेकिन छापों का उनके बिजनेस ऑपरेशन, फाइनेंशियल परफॉर्मेंस, शेयर होल्डर्स, स्टाफ या किसी अन्य स्टेकहोल्डर्स पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है. कई नियामक और वित्तीय निकायों ने अपने निष्कर्ष ईडी के साथ साझा किए हैं, जिनमें नेशनल हाउसिंग बैंक (NHB), सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI), नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी (NFRA) और बैंक ऑफ बड़ौदा शामिल हैं. एसबीआई ने रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) और खुद अनिल अंबानी को 'फ्रॉड अकाउंट्स' के रूप में क्लासिफाइड किया है. यह पहली बार नहीं है जब बैंक ने किसी अकाउंट को धोखाधड़ी वाला बताया है. एसबीआई ने इससे पहले नवंबर 2020 में RCom और अनिल अंबानी के बैंक खातों को फ्रॉड अकाउंट्स घोषित किया था और 5 जनवरी, 2021 को सीबीआई में शिकायत दर्ज कराई थी. दिल्ली हाई कोर्ट ने 6 जनवरी, 2021 यथास्थिति का आदेश जारी किया, जिसके बाद शिकायत वापस ले ली गई.

अनिल अंबानी पर ईडी का कड़ा प्रहार, बैंकिंग नेटवर्क तक पहुंची जांच की आंच

 मुंबई केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक तरफ रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी के समूह की कंपनियों के खिलाफ करोड़ों रुपये के कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें 5 अगस्त को पूछताछ के लिए समन भेजा है, तो दूसरी तरफ दर्जन भर ऐसे बैंकों को चिट्ठी लिखकर उनकी मुश्किलें दोगुनी कर दी हैं, जिन्होंने उनकी कंपनियों को लोन दिए थे। ईडी ने उन बैंकों को पत्र लिखकर उनकी कंपनियों को दिए गए ऋणों का विवरण मांगा है। मामले से जुड़े लोगों ने सोमवार को यह जानकारी दी।  रिपोर्ट के मुताबिक, ईडी ने 12-13 सार्वजनिक और निजी बैंकों को पत्र लिखकर रिलायंस हाउसिंग फाइनेंस, रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस कॉमर्शियल फाइनेंस को दिए गए लोन का विवरण माँगा है। सूत्रों ने बताया कि ईडी ने जिन बैंकों को चिट्ठी लिखी है, उनमें भारतीय स्टेट बैंक, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, यूको बैंक और पंजाब एंड सिंध बैंक शामिल है। जो लोन बन गए NPA… रिपोर्ट में कहा गया है कि ईडी अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस ग्रुप को दिए गए ऋण के मामले में उन लोन्स को स्वीकृत करने और जारी करने वाले बैंक अधिकारियों को भी पूछताछ के लिए तलब कर सकती है, जो बाद में NPA बन गए। सूत्रों ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय ने ऋण मंजूरी की प्रक्रिया, चूक की समय-सीमा और ऐसे खातों पर की गई वसूली कार्रवाई का विवरण भी माँगा है। पिछले हफ्ते पहली गिरफ्तारी एजेंसी ने पिछले हफ्ते अनिल अंबानी के रिलायंस समूह की कंपनियों के खिलाफ 3,000 करोड़ रुपये के ऋण धोखाधड़ी मामले में पहली गिरफ्तारी की थी। बिस्वाल ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पार्थ सारथी बिस्वाल को शुक्रवार को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत 68.2 करोड़ रुपये की फर्जी गारंटी जमा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने बताया कि ये गारंटी रिलायंस पावर की ओर से दी गई थी। 3,000 करोड़ रुपये के कथित ऋण हेराफेरी का मामला बता दें कि ईडी 2017 और 2019 के बीच यस बैंक द्वारा रिलायंस समूह की कंपनियों को दिए गए लगभग 3,000 करोड़ रुपये के कथित ऋण हेराफेरी की जांच कर रही है। एजेंसी ने पाया है कि बैंक के प्रवर्तकों को ऋण स्वीकृत होने से ठीक पहले भुगतान भी प्राप्त हुआ था, जो एक लेन-देन व्यवस्था का संकेत देता है। एजेंसी ने पिछले महीने इस मामले से जुड़ी 50 से अधिक फर्मों पर छापे मारे थे। अंबानी के खिलाफ एक लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया गया है।