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अर्चना तिवारी ट्रेन से गायब, यूपी में लखीमपुर खीरी के पास नेपाल बॉर्डर से मिली पुलिस को

भोपाल/ ग्वालियर  मध्य प्रदेश में ट्रेन से गायब अर्चना तिवारी 12 दिनों बाद मिल गई है. भोपाल की रानी कमलापति थाना जीआरपी ने यूपी के लखीमपुर खीरी से नेपाल बॉर्डर के पास से अर्चना को बरामद किया है. अब टीम यहां से अर्चना को लेकर भोपाल जाएगी और पूछताछ करेगी. पूछताछ में ही पूरे घटनाक्रम के बारे में जानकारी मिलेगी. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि लगभग दो हफ़्ते पहले ट्रेन में यात्रा के दौरान लापता हुई महिला वकील और सिविल जज बनने की इच्छुक अर्चना तिवारी मंगलवार को नेपाल सीमा पर स्थित उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी शहर में मिलीं. रक्षाबंधन के त्योहार के लिए 7-8 अगस्त की रात को इंदौर से कटनी जा रही तिवारी अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पाईं थी और लापता हो गई थी. पूछताछ में सामने आएगा घटनाक्रम का विवरण एसपी (रेलवे) राहुल कुमार लोढ़ा ने कहा कि राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) के जवानों ने 12 दिनों की कड़ी तलाशी के बाद आखिरकार भारत-नेपाल सीमा पर स्थित लखीमपुर-खीरी शहर में अर्चना तिवारी का पता लगा लिया. उन्होंने कहा कि पुलिस अर्चना को वापस भोपाल ला रही है और बयान दर्ज करने के बाद पूरे घटनाक्रम का विवरण सामने आएगा. पुलिस के अनुसार 29 वर्षीय अर्चना की आखिरी लोकेशन इटारसी स्टेशन पर मिली थी. उसके बाद मोबाइल फोन बंद पाया गया और संपर्क नहीं हो पाया. तिवारी मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ में प्रैक्टिसिंग वकील थीं. वह सिविल जज परीक्षा की तैयारी भी कर रही थीं. नर्मदा एक्सप्रेस ट्रेन से गायब हुई थी अर्चना वह 7 अगस्त को नर्मदा एक्सप्रेस ट्रेन से कटनी के लिए रवाना हुईं, लेकिन अपने गंतव्य तक नहीं पहुंचीं. बाद में तिवारी के परिवार वालों ने भोपाल के रानी कमलापति जीआरपी थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने रानी कमलापति स्टेशन से लेकर इटारसी और कटनी तक के इलाकों में सुराग तलाशे और स्टेशनों व आसपास के इलाकों के सीसीटीवी कैमरे खंगाले. लोढ़ा ने बताया कि तिवारी की आखिरी लोकेशन इटारसी स्टेशन थी. मैंने कभी अर्चना तिवारी को सामने से नहीं देखा  ट्रेन से 12 दिन पहले मध्य प्रदेश की अर्चना तिवारी के गायब होने के मामले में नया मोड़ सामने आया है. इंदौर से कटनी के लिए निकली अर्चना तिवारी वैसे तो अब यूपी के लखीमपुर खीरी के पास से बरामद कर ली गई है लेकिन इस मामने में कई गुत्थी अब भी अनसुलझी हैं. इस केस में उसके कॉल डिटेल रिकॉर्ड ने पुलिस को ग्वालियर तक भी पहुंचा दिया. वहीं से कहानी में एक नया किरदार सामने आया. वह अर्चना से डेढ़ साल से संपर्क में था और उसने ही उसके लिए टिकट भी बुक कराए थे. पुलिस ने लिया हिरासत में जांच के दौरान युवती की कॉल डिटेल में पुलिस की नजर ग्वालियर में तैनात एक सिपाही तक पहुंची. आरोप है कि इसी सिपाही ने इंदौर से ग्वालियर का टिकट बुक कराया था. पूछताछ के दौरान उसने बताया कि उसने अर्चना को कभी सामने से नहीं देखा, केवल फोन पर ही बात हुई थी. उसका कहना है कि अर्चना की गुमशुदगी से उसका कोई लेना-देना नहीं है. सिपाही ने यह भी कबूल किया कि उसने बस का टिकट जरूर बुक कराया था, लेकिन ट्रेन की यात्रा से उसका कोई वास्ता नहीं था. जीआरपी ने इस आधार पर उससे लगातार पूछताछ की. पुलिस की पड़ताल और सवाल-जवाब झांसी रोड थाने में रखे गए इस आरक्षक से घंटों सवाल-जवाब किए गए. उसने बयान दिया कि उसकी युवती से केवल कोर्ट से जुड़े एक काम के सिलसिले में बात हुई थी, और वह भी महज़ एक मिनट की. उसने दोहराया कि वह उससे कभी व्यक्तिगत तौर पर नहीं मिला. एडिशनल एसपी ने मीडिया को जानकारी दी कि पूछताछ में स्पष्ट हुआ है कि सिपाही पिछले डेढ़ साल से युवती को जानता था और फोन पर कई बार बातचीत भी हुई. उसने इंदौर से कटनी तक का बस टिकट बुक कराया था, जबकि युवती ट्रेन से यात्रा कर रही थी. यही बात जांच का अहम हिस्सा बनी. रक्षाबंधन पर घर लौट रही थी इस गुमशुदगी की कहानी की शुरुआत रक्षाबंधन के मौके से होती है. युवती इंदौर के एक हॉस्टल में रहकर सिविल जज की तैयारी कर रही थी. त्यौहार पर वह कटनी लौट रही थी. उसके पास इंदौर-बिलासपुर नर्मदा एक्सप्रेस की AC कोच B3 में बर्थ नंबर 3 का रिजर्वेशन था. 7 अगस्त को वह हॉस्टल से निकली और सीसीटीवी फुटेज में भी देखी गई, जिसमें वह ऑरेंज रंग की ड्रेस पहने, बैग और झोले में सामान लेकर स्टेशन जाती हुई दिख रही है. रात करीब दस बजे उसकी चाची से आखिरी बार फोन पर बातचीत हुई, जब उसने बताया कि वह भोपाल के पास है. ट्रेन से गायब, मिला सिर्फ बैग 8 अगस्त की सुबह जब कटनी साउथ स्टेशन पर परिजन उसे लेने पहुंचे तो युवती वहां नहीं उतरी. उसका मोबाइल भी बंद मिला. घबराए परिजन उमरिया स्टेशन तक गए, जहां उसके मामा ने ट्रेन के कोच में तलाश की. सीट पर उसका बैग जरूर मिला, जिसमें राखी, रुमाल और बच्चों के लिए गिफ्ट रखे थे. युवती के अचानक गायब हो जाने से परिवार सकते में आ गया. जीआरपी को तुरंत सूचना दी गई. कटनी रेल पुलिस ने गुम इंसान का मामला दर्ज कर जांच शुरू की. चूंकि आखिरी लोकेशन भोपाल की तरफ मिली थी, इसलिए डायरी भोपाल रेल पुलिस को भेज दी गई. सीसीटीवी और लोकेशन से नहीं मिला सुराग भोपाल, रानी कमलापति और नर्मदापुरम स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, लेकिन युवती का स्पष्ट सुराग नहीं मिला. मोबाइल की लोकेशन नर्मदापुरम ब्रिज के पास तक मिली. इस आधार पर एनडीआरएफ ने नर्मदा नदी में सर्चिंग ऑपरेशन भी चलाया, लेकिन वहां से भी कुछ हाथ नहीं लगा. इस मामले ने छात्र राजनीति से लेकर स्थानीय समाज तक हलचल मचा दी. कांग्रेस से जुड़े एक युवा नेता ने युवती को अपनी बहन बताते हुए उसकी तलाश में मदद करने वाले को 51 हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की. उनका कहना था कि हर राखी पर वह उन्हें राखी बांधती थी. आखिरकार मिला सुराग लंबे समय तक रहस्यमय तरीके से लापता रहने के बाद युवती को आखिरकार लखीमपुर खीरी से बरामद कर लिया गया. पुलिस … Read more

अर्चना तिवारी की गुमशुदगी रहस्य में नया खुलासा, 13 दिन बाद सुराग हाथ लगा

इंदौर इंदौर से ट्रेन में सवार होकर रक्षा बंधन मनाने कटनी के लिए निकली 29 साल की अर्चना तिवारी का 13 दिनों के बाद भी कुछ पता नहीं चला है। हालांकि, अब पुलिस के हाथ एक सुराग लगा है जिसके बाद अर्चना की मिस्ट्री सुलझने की उम्मीद जागी है। जीआरपी ने ग्वालियर के एक कांस्टेबल राम तोमर को हिरासत में लिया है। पता चला है कि राम तोमर ने ही अर्चना तिवारी के लिए टिकट कराया था। तोमर से पूछताछ करके यह पता लगाया जा रहा है कि उसका अर्चना के साथ क्या संबंध है, उसने क्यों इंदौर से ग्वालियर तक का टिकट कराया था और क्या अर्चना का राज वह जानता है? इससे पहलेअर्चना के परिजनों ने मानव तस्करी की आशंका जताते हुए इसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की मांग की थी। इंदौर हाई कोर्ट में वकील के तौर पर प्रैक्टिस के साथ ही सिविल जज की तैयारी कर रही अर्चना 7 अगस्त को नर्मदा एक्सप्रेस ट्रेन से कटनी के लिए निकली थीं। अर्चना की आखिरी लोकेशन भोपाल के रानी कमलापति स्टेशन पर मिली थी, जिसके बाद उसके परिजनों ने रानी कमलापति जीआरपी थाने में गुमशुदगी का मामला दर्ज कराया था। पुलिस रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से लेकर इटारसी और कटनी तक के क्षेत्रों में भी गहनता से जांच कर चुकी है और स्टेशन व आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी खंगाल चुकी है लेकिन अब तक अर्चना का कोई सुराग हाथ नहीं लगा है। राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) के पुलिस अधीक्षक राहुल कुमार लोढ़ा ने बताया कि आस-पास के सभी रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और ट्रैवल एजेंसियों को इसकी सूचना दी गई है। उन्होंने कहा कि जांच में हर पहलू पर ध्यान दिया जा रहा है, चाहे वह दुर्घटना हो, अपहरण या अन्य कोई वजह। लोढ़ा ने बताया कि अर्चना की आखिरी लोकेशन इटारसी रेलवे स्टेशन मिली है और वहीं उसका मोबाइल बंद हुआ है। उन्होंने कहा, "इटारसी रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में उसे कुछ लोगों ने देखा भी है। उसके बाद वह कहां गई, क्या हुआ… हम पता लगाने में जुटे हुए हैं। हमें उम्मीद है कि हम जल्द पता लगा लेंगे।" पुलिस अधीक्षक ने बताया कि जांच के दौरान जहां जरूरत पड़ रही है, वहां संबंधित अन्य एजेंसियों की भी मदद ली जा रही है। इस बीच, अर्चना के परिजनों ने पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए इसे मानव तस्करी का मामला बताया है और इसकी सीबीआई से जांच कराने की मांग की है। अर्चना के ताऊ बाबू प्रकाश तिवारी ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, 'यह मानव तस्करी का मामला है लेकिन पुलिस इस नजरिए से जांच नहीं कर रही है।' 13 दिन की जांच के बाद पुलिस को सुराग मिला कि अर्चना का टिकट भंवरपुरा थाने में तैनात कांस्टेबल राम तोमर ने कटाया था। उसने इंदौर से ग्वालियर तक के लिए टिकट बुक की थी। दोनों के बीच में क्या रिश्ता है, यह अभी साफ नहीं हुआ है। परिवार के लोगों ने तोमर को पहचानने से इनकार किया है। जीआरपी तोमर से पूछताछ करके पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दोनों के बीच में किस तरह का संबंध है और क्या वह जानता है कि अर्चना कहां है। वहीं सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान तोमर ने कहा है कि उसने टिकट जरूर कराया था लेकिन अर्चना ने किसी और टिकट पर यात्रा की थी।