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आसाराम की जमानत पर सवाल, पीड़िता के पिता ने सुप्रीम कोर्ट से मांगी कार्रवाई

शाहजहांपुर  यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी कथावाचक आसाराम इलाज के लिए जमानत पर छूटा है. आसाराम की जमानत के खिलाफ शाहजहांपुर के रहने वाले पीड़िता के पिता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. पीड़िता के पिता का आरोप है कि आसाराम के गुर्गे उन्हें और उनके परिवार को धमका रहे हैं और जान से मारने की धमकी दे रहे हैं. मामले में शुक्रवार को सुनवाई हो सकती है. पीड़ित परिवार का क्या कहना? पीड़िता के पिता का कहना है कि अगर आसाराम जमानत पर बाहर रहा तो उनके परिवार के खिलाफ कोई बड़ा षड्यंत्र रचा जा सकता है. पीड़िता के पिता का कहना है कि आसाराम जब भी जेल से छूटता है तो वह गवाहों को गोली मरवाता है या फिर उन्हें गायब करवा देता है. पिता के पिता का कहना है कि आसाराम सुरेशानंद, भोलानंद और मुख्य गवार राहुल सचान को गायब करवा चुका है, जिनका आज तक पता नहीं चल पाया है.  पीड़ित परिवार की सुरक्षा में 6 पुलिसकर्मी तैनात पीड़िता के पिता का कहना है कि वह बीमारी का बहाना बनाकर जेल से बाहर निकलता है और गवाहों और उनके परिवार को अपने गुर्गों के जरिए धमकता है. अगर वह बीमार है तो जेल के अंदर रहकर ही उसका इलाज हो सकता है जैसे बाकी कैदियों का होता है. उन्होंने कहा कि आसाराम को इलाज के नाम पर विशेष ट्रीटमेंट दिया जा रहा है. पीड़िता के पिता ने आशंका जाहिर की है कि अगर आसाराम जमानत पर बाहर रहा तो उनके परिवार को जान का बड़ा खतरा हो सकता है. हालांकि पीड़िता के परिवार की सुरक्षा के लिए 6 पुलिसकर्मी तैनात हैं. कोर्ट ने सुनाई थी उम्रकैद की सजा बता दें कि शाहजहापुर की पीड़िता ने दुष्कर्म के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई थी. जिस पर कोर्ट ने आसाराम को उम्रकैद की सजा सुनाई. हाल ही में आसाराम को इलाजे के लिए 6 महीने की जमीनत मिली है. इसके बाद वह जमानत पर जेल से बाहर आया है. इसी के बाद पीड़िता के पिता ने खतरे की आशंका जताते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और आसाराम की जमानत रद्द करने की मांग की है. 

जोधपुर हाईकोर्ट से आसाराम को जमानत मंजूर, बीमारी का हवाला देकर मिली राहत

जोधपुर जोधपुर हाईकोर्ट से बड़ा अपडेट सामने आया है। आसाराम बापू को जोधपुर हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उनके उपचार के लिए दायर की गई नियमित जमानत याचिका को मंजूर करते हुए उन्हें जमानत प्रदान कर दी है। यह राहत स्वास्थ्य कारणों के आधार पर दी गई है। मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच में हुई। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आसाराम को इलाज के लिए जमानत देने का फैसला सुनाया। देवदत्त और यशपाल ने रखा था कोर्ट के सामने पक्ष यौन उत्पीड़न के आरोपी आसाराम का मामला लंबे समय से चर्चा में बना हुआ है। राजस्थान हाईकोर्ट से मिली छह माह की अंतरिम जमानत के बाद  अब आसाराम को छह माह जेल में नहीं रहना पड़ेगा। वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत, अधिवक्ता यशपा लसिंह राजपुरोहित ने आसाराम का पक्ष कोर्ट के समक्ष रखा था। उन्होंने अपनी दलील में  कहा था कि उपचार के लिए आसाराम को जेल से बाहर रहना जरूरी है। ऐसे में बिना कस्टडी के जमानत मिलने से आसाराम के उपचार में राहत मिलेगी। कोर्ट ने आसाराम की बीमारी अवस्था व पिछले 12 साल से जेल में होने पर ये राहत प्रदान की है। समर्थकों में खुशी की लहर सूत्रों के मुताबिक, कोर्ट का विस्तृत आदेश शीघ्र जारी किया जाएगा। बताया जा रहा है कि आसाराम लंबे समय से बीमार चल रहे हैं और उन्होंने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते नियमित जमानत की मांग की थी। हाई कोर्ट के इस निर्णय के बाद आसाराम को राहत मिलने से समर्थकों में खुशी की लहर है।

जनवरी में मिली थी जमानत, आसाराम ने अब जोधपुर जेल में किया सरेंडर

 जोधपुर नाबालिग से रेप के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम ने शनिवार, 30 अगस्त को जोधपुर सेंट्रल जेल में सरेंडर कर दिया है। राजस्थान हाई कोर्ट ने 27 अगस्त को उसकी अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ाने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद उसे यह कदम उठाना पड़ा। आसाराम को जनवरी 2025 में पहली बार 12 साल बाद अंतरिम जमानत मिली थी। उसने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए जमानत मांगी थी। जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस विनीत कुमार माथुर की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, आसाराम की तबीयत स्थिर है और उसे अस्पताल में भर्ती होने या लगातार चिकित्सा देखभाल की जरूरत नहीं है। अहमदाबाद के सिविल हॉस्पिटल के मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि आसाराम ने पिछले कुछ महीनों में इलाज के लिए कई यात्राएं की हैं और विभिन्न शहरों के अस्पतालों में सलाह ली है, लेकिन किसी भी अस्पताल में नियमित फॉलोअप नहीं कराया है। कोर्ट ने आसाराम के वकील की उस दलील को भी खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने एम्स जोधपुर की रिपोर्ट का हवाला देते हुए स्वास्थ्य में गिरावट की बात कही थी। जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस विनीत कुमार माथुर की खंडपीठ ने फैसले में कहा था कि मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार आसाराम की तबीयत स्थिर है। उसे हॉस्पिटल में भर्ती होने या लगातार चिकित्सा देखभाल की जरूरत नहीं है। आसाराम जनवरी 2025 में 12 साल के बाद पहली बार जमानत मिली थी। सबसे पहले जानिए- अंतरिम जमानत कैंसिल करते हुए कोर्ट ने क्या कहा था… अहमदाबाद के सिविल हॉस्पिटल में मेडिकल बोर्ड की ओर से दी गई रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि आसाराम ने पिछले 3-4 महीनों में इलाज के लिए कई यात्राएं की हैं। उसने कई शहरों में अलग-अलग हॉस्पिटल में इलाज भी कराया है, लेकिन किसी भी हॉस्पिटल में नियमित फॉलोअप नहीं कराया है। वकील के दलील को किया खारिज 27 अगस्त की सुनवाई में आसाराम के वकील निशांत बोड़ा ने कहा था कि- 21 अगस्त को आसाराम को एम्स जोधपुर ले जाया गया था। वहां के डॉक्टरों ने उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति के बारे में एक रिपोर्ट दी है। हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। बेटे से भी हुई थी मुलाकात अपनी करीब साढ़े सात महीने की जमानत के दौरान आसाराम ने 11 साल बाद अपने बेटे नारायण साईं से भी मुलाकात की थी। नारायण साईं 25 जून को सूरत जेल से जोधपुर स्थित आसाराम के आश्रम पहुंचे थे।