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नए साल की शुरुआत में ग्रहों की चाल बदलेगी: जनवरी में चार ग्रह बदलेंगे राशि

नए साल के पहले महीने में कई प्रमुख ग्रहों का राशि परिवर्तन और चाल में बदलाव देखने को मिलेगा। जनवरी 2026 में कुल मिलाकर चार ग्रहों का राशि परिवर्तन होगा। इस महीने में सूर्य के राशि परिवर्तन के साथ- साथ मंगल, बुध और शुक्र ग्रह भी गोचर करेंगे। जनवरी महीने के ग्रह गोचर का असर सारी 12 राशियों पर पड़ेगा। कुछ राशि वालों के लिए जनवरी का ग्रह गोचर शुभ रहेगा। वहीं कुछ राशि के जातक को इस गोचर से सावधान रहने की आवश्यकता है। ज्योतिषाचार्या बताते है कि जनवरी 2026 में सूर्य 14 जनवरी को मकर राशि में प्रवेश करेंगे।  मंगल 16 जनवरी को मकर राशि में गोचर करेंगे।  ग्रहों के राजकुमार बुध 17 जनवरी को मकर राशि में प्रवेश करेंगे। शुक्र ग्रह 13 जनवरी को मकर राशि में प्रवेश करेंगे।  ऐसे में कुछ राशि के जातकों के लिए जनवरी के महीने में विशेष सावधानियां बरतनी होगी। ज्योतिष गणना के अनुसार जब कोई ग्रह राशि परिवर्तन करता है, तो उसका असर हर राशि के जातकों के जीवन पर पड़ता है। सूर्य का गोचर ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि वर्तमान में सूर्य देव धनु राशि में विराजमान हैं। वे 13 जनवरी 2026 तक इसी राशि में रहेंगे। इसके बाद 14 जनवरी को सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के इस गोचर से कई राशियों के जातकों को नौकरी और कार्यक्षेत्र में सफलता मिलने के योग बनेंगे। इसी दिन मकर संक्रांति का पर्व भी मनाया जाएगा, जो नई शुरुआत और उन्नति का प्रतीक माना जाता है। शुक्र का गोचर ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि सुख-सुविधाओं और ऐश्वर्य के कारक शुक्र देव 12 जनवरी तक धनु राशि में रहेंगे। इसके बाद 13 जनवरी 2026 को वे मकर राशि में गोचर करेंगे। शुक्र के इस परिवर्तन से कई राशियों के जातकों को भौतिक सुख, धन-लाभ और रिश्तों में मधुरता का अनुभव हो सकता है। मंगल का गोचर ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि ग्रहों के सेनापति मंगल फिलहाल धनु राशि में हैं और 15 जनवरी 2026 तक वहीं रहेंगे। इसके बाद 16 जनवरी को मंगल मकर राशि में प्रवेश करेंगे और 22 फरवरी तक इसी राशि में स्थित रहेंगे। मंगल का यह गोचर करियर, साहस और आत्मविश्वास को मजबूत करेगा। कई लोगों को मनचाही सफलता और पद-प्रतिष्ठा मिलने के संकेत हैं। बुध का गोचर ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि ग्रहों के राजकुमार बुध 17 जनवरी को मकर राशि में गोचर करेंगे। बुध का यह परिवर्तन व्यापार, निवेश और संचार से जुड़े क्षेत्रों में लाभ दिला सकता है। शुभ प्रभाव –  मिथुन, वृश्चिक, मकर और मीन अशुभ प्रभाव – वृष, सिंह, तुला और कुंभ मिलाजुला प्रभाव – मेष कर्क, कन्या और धनु ग्रहों के गोचर का प्रभाव ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि बीमारियों के इलाज में भी नए-नए आविष्कार होंगे। नई-नई दवाइयां और तकनीक विकसित होगी। कोरोना के नए वेरिएंट का नहीं होगा भारत पर बड़ा असर। दुर्घटनाएं अप्रिय घटनाएं हिंसा, प्राकृतिक आपदा होने की आशंका। फिल्म एवं राजनीति से दुखद समाचार। शुक्र बुध और सूर्य के राशि परिवर्तन से व्यापार में तेजी आएगी। बीमारियों में कमी आएगी। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। आय में इजाफा होगा। वायुयान दुर्घटना होने की संभावना। पूरे विश्व में राजनीतिक अस्थिरता यानि राजनीतिक माहौल उच्च होगा। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ज्यादा होंगे। सत्ता संगठन में बदलाव होंगे। पूरे विश्व में सीमा पर तनाव शुरू हो जायेगा। देश में आंदोलन, हिंसा, धरना प्रदर्शन हड़ताल, बैंक घोटाला, वायुयान दुर्घटना, विमान में खराबी, उपद्रव और आगजनी की स्थितियां बन सकती है। करें पूजा-पाठ और दान ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि ग्रहों के अशुभ असर से बचने के लिए हनुमानजी की पूजा करनी चाहिए। हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करें। भगवान शिव और माता दुर्गा की आराधना करनी चाहिए। महामृत्युंजय मंत्र और दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए।

बड़ा खुलासा! 2025 में कब मनाई जाएगी दिवाली — भ्रम दूर हुआ!

नई दिल्ली देशभर में रोशनी और खुशियों का त्योहार दीपावली बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। लेकिन इस बार दीपावली की तारीख को लेकर काफी भ्रम और कन्फ्यूजन देखने को मिल रहा है। अलग-अलग पंचांगों में दीपावली की तारीख अलग-अलग बताई जा रही है। कहीं इसे 20 अक्टूबर को तो कहीं 21 अक्टूबर को मनाने की बात कही जा रही है। इस कन्फ्यूजन के बीच काशी विद्वत परिषद ने इस मामले में साफ-साफ अपनी राय रख दी है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, काशी विद्वत परिषद के महामंत्री रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि साल 2025 में अमावस्या की तिथि 20 अक्टूबर से शुरू हो रही है। इसी दिन अमावस्या प्रदोषकाल पूरा होता है, जो लक्ष्मी पूजन के लिए जरूरी माना जाता है। वहीं 21 अक्टूबर को अमावस्या तीन प्रहर (लगभग आधी रात तक) तक बनी रहती है। उस दिन प्रतिपदा की तिथि भी शुरू हो जाती है, जिससे नए अन्न का पारण (भोजन) नहीं हो पाता है। शास्त्र के अनुसार दीपावली का महापर्व तभी पूरी तरह से माना जाता है जब यह अमावस्या तिथि और प्रदोषकाल के बीच मनाया जाए। इसलिए पूरे देश में इस बार दीपावली 20 अक्टूबर को ही मनाना सही रहेगा। कैसे हुआ फैसला? पंचांग में तारीखों को लेकर चल रहे मतभेदों को सुलझाने के लिए काशी विद्वत परिषद ने एक आपातकालीन बैठक बुलाई। यह बैठक ऑनलाइन हुई और परिषद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इस बैठक में दीपावली की सही तिथि को लेकर गहन चर्चा हुई। विद्वानों ने शास्त्र, गणित और पंचांग के आधार पर अपने तर्क प्रस्तुत किए। अंत में दीपावली की तिथि को स्पष्ट करते हुए प्रेस रिलीज जारी की गई और पूरे देश को जानकारी दी गई। बैठक में शामिल हुए विद्वान इस महत्वपूर्ण बैठक में कई नामी विद्वान मौजूद रहे, जिनमें प्रोफेसर वशिष्ठ नाथ त्रिपाठी, प्रोफेसर विनय पांडेय, प्रोफेसर रामनारायण द्विवेदी, प्रोफेसर सदाशिव द्विवेदी, डॉ. सुभाष पांडेय, प्रोफेसर चंद्रमौली उपाध्याय, विद्वान राम किशोर त्रिपाठी और पंचांगकार अमित कुमार मिश्र शामिल थे। इन सभी ने मिलकर दीपावली की सही तिथि तय की।