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Bank Strike: कर्मचारियों की हड़ताल से पहले आज ही करें जरूरी बैंकिंग काम

इंदौर  केंद्र सरकार की श्रमिक नीतियों के विरोध में गुरुवार को बैंककर्मी हड़ताल पर जा रहे हैं। ऑल इंडिया बैंक एम्प्लाइज एसोसिएशन, ऑल इंडिया बैंक आफिसर्स एसोसिएशन और बेफी समेत विभिन्न बैंक यूनियनों द्वारा इस हड़ताल का आह्वान किया है। सेंट्रल ट्रेड यूनियनों के अलावा एलआईसी, जीआईसी जैसी बीमा क्षेत्र की यूनियनों ने भी हड़ताल का समर्थन किया है। इस हड़ताल के कारण गुरुवार को बैंकिंग और बीमा सेवाएं प्रभावित रहेंगी। देशव्यापी इस हड़ताल में हजारों बैंककर्मी शामिल होंगे। गांधी हॉल में विशाल आम सभा मध्य प्रदेश बैंक एम्प्लाइज एसोसिएशन के चेयरमैन मोहन कृष्ण शुक्ला ने मीडिया से चर्चा के दौरान कहा कि, गुरुवार सुबह 10 बजे इंदौर के गांधी हाल स्थित अभिनव कला समाज में विशाल आमसभा आयोजित की जाएगी। उन्होंने कहा कि चार श्रम संहिताओं में बदलाव किया गया है जो कर्मचारी विरोधी नीतियां हैं। हड़ताल से पहले प्रदर्शन सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और बीमा संस्थानों के निजीकरण, कर्मचारियों की कमी, आउटसोर्सिंग, पुरानी पेंशन योजना की समाप्ति और बढ़ते सेवा शुल्क से न सिर्फ कर्मचारी बल्कि आम जनता भी प्रभावित हो रही है। हड़ताल से पहले आज बुधवार 11 फरवरी को शाम सवा पांच बजे पंजाब नेशनल बैंक में प्रदर्शन होगा।

बिहार में बैंक हड़ताल के चलते कैश संकट से जूझे अकाउंट होल्डर

पटना/बगहा. बगहा अनुमंडल में बैंक कर्मचारियों की हड़ताल का सीधा असर आम लोगों पर पड़ता नजर आ रहा है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के आह्वान पर मंगलवार को बैंकों में कार्य ठप रहा, जिससे पहले से जारी कैश की किल्लत और गहरा गई। लगातार चार दिनों से बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होने के कारण बड़ी संख्या में खाताधारी अपने-अपने जरूरी कार्य के लिए बैंकों तक पहुंचे, लेकिन बैंक बंद मिलने पर उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा। बगहा शहर स्थित विभिन्न बैंकों की शाखाओं के बाहर सुबह से ही लोगों की भीड़ देखी गई। शादी-विवाह, इलाज, खेती-किसानी, बच्चों की पढ़ाई और दैनिक जरूरतों के लिए पैसे निकालने पहुंचे खाताधारकों को बैंक बंद होने की सूचना मिलने पर परेशानी का सामना करना पड़ा। कई ग्रामीण इलाकों से आए लोग दिनभर इंतजार करते रहे, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। स्थानीय नागरिक प्रमोद कुमार गुप्ता का कहना है कि पहले से ही एटीएम में नकदी की भारी कमी बनी हुई है। कई एटीएम या तो बंद पड़े हैं या फिर कुछ ही घंटों में खाली हो जा रहे हैं। ऐसे में बैंक शाखाओं पर लोगों की निर्भरता बढ़ गई है, लेकिन हड़ताल और अवकाश के कारण सेवाएं ठप होने से आमजन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बैंक ऑफ इंडिया बगहा शाखा के प्रबंधक राहुल गुप्ता ने बताया कि प्रत्येक माह सभी शनिवार को बैंक बंद रहते हैं और इसी क्रम में एक दिन की हड़ताल होने से बैंकिंग कार्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने बताया कि 28 जनवरी से शाखा का कामकाज पुनः सुचारू रूप से शुरू हो जाएगा। ग्राहकों से हुई असुविधा के लिए उन्होंने खेद भी जताया। हड़ताल के कारण सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं और दूर-दराज से आए ग्रामीण खाताधारकों को उठानी पड़ी। कई लोगों ने कहा कि बैंक बंदी की पूर्व सूचना स्पष्ट रूप से नहीं मिलने के कारण उन्हें बेवजह समय और पैसे की बर्बादी करनी पड़ी। वहीं, छोटे व्यापारियों ने भी नकदी के अभाव में लेन-देन प्रभावित होने की बात कही। बैंक हड़ताल और कैश संकट ने आम जनजीवन को प्रभावित किया है। लोगों को उम्मीद है कि बैंक खुलते ही नकदी की समस्या का समाधान होगा और लंबित कार्य जल्द पूरे किए जा सकेंगे। फिलहाल, बैंक बंदी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि बैंकिंग सेवाएं ठप होने का सबसे ज्यादा असर आम नागरिकों पर ही पड़ता है।

लाखों बैंक कर्मचारी ‘फाइव डे वीक’ के लिए सड़कों उतरे

भोपाल. मध्य प्रदेश में मंगलवार को करीब 40 हजार बैंककर्मी हड़ताल पर हैं। पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करने की मांग को लेकर होने वाली इस हड़ताल से प्रदेशभर की 7 हजार से ज्यादा बैंक शाखाओं में ताले लटके हुए हैं। इससे चेक क्लियरेंस, नकद लेन-देन और अन्य बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हैं, वहीं एटीएम में भी नकदी की कमी की आशंका है। एक ही दिन में लाखों करोड़ रुपए के कारोबार पर असर है। यह हड़ताल यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर हो रही है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और ग्वालियर सहित पूरे प्रदेश में बैंकिंग सेवाएं बाधित रहेंगी। सरकारी के साथ-साथ निजी बैंकों के कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल हैं। इन बैंकों में लटके ताले यूनियन पदाधिकारियों के अनुसार, सरकारी क्षेत्र की 12 प्रमुख बैंकें बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, केनरा बैंक, सेंट्रल बैंक, इंडियन बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के सभी अधिकारी और कर्मचारी हड़ताल में शामिल हैं। इसके अलावा निजी क्षेत्र के बैंकों में भी कामकाज प्रभावित हो सकता है। पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह बैंककर्मियों की मुख्य मांग है कि बैंकिंग उद्योग में सप्ताह में पांच कार्य दिवस लागू किए जाएं। वर्तमान में केवल दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश रहता है, जबकि अन्य शनिवार कार्य दिवस होते हैं। यूनियन चाहती है कि सभी शनिवार अवकाश घोषित किए जाएं और सोमवार से शुक्रवार तक कार्य घंटे समायोजित किए जाएं। दो साल से लंबित है प्रस्ताव यूएफबीयू के मध्य प्रदेश को-ऑर्डिनेटर वीके शर्मा ने बताया कि वर्ष 2015 में हुए समझौते में इस विषय पर विचार का आश्वासन दिया गया था। 2022 में केंद्र सरकार और भारतीय बैंक संघ (IBA) के साथ चर्चा हुई, जबकि 2023 में यह सहमति बनी कि सोमवार से शुक्रवार तक प्रतिदिन 40 मिनट कार्य घंटे बढ़ाकर शेष शनिवारों को अवकाश घोषित किया जाएगा। यह प्रस्ताव सरकार को भेजा गया, लेकिन पिछले दो वर्षों से स्वीकृति लंबित है। पहले भी टली थी हड़ताल सरकार की ओर से ठोस प्रतिक्रिया न मिलने पर यूएफबीयू ने मार्च 2025 में दो दिवसीय हड़ताल का ऐलान किया था, जिसे ‘मामला विचाराधीन है’ के आश्वासन पर स्थगित कर दिया गया था। अब भी मांग पूरी न होने पर बैंककर्मियों ने फिर से हड़ताल का रास्ता अपनाया है।