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बसंत पंचमी का खास संयोग: तीन साल बाद शुक्रवार को, 2032 में फिर बनेगा

धार धार की भोजशाला में इस बार बसंत पंचमी और शुक्रवार का संयोग शांति के साथ बीत गया। पिछले चौबीस साल में जब भी यह खास मौका आया, तब धार में हालात काफी चुनौतीपूर्ण रहे। इतिहास के पन्नों को देखें तो चार बार ऐसे मौके आए जब प्रशासन को सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने पड़े और उनमें से तीन बार तो शहर को पथराव और कर्फ्यू जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ा,लेकिन इस साल शहरवासियों और पुलिस प्रशासन ने राहत की सांस ली क्योंकि पूजा और नमाज दोनों ही बिना किसी टकराव के शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गए। भोजशाला की मिल्कियत का मामला फिलहाल हाई कोर्ट में चल रहा है। कोर्ट के आदेश पर पुरातत्व विभाग ने करीब तीन महीने तक यहां सर्वे का काम किया और पुरानेे अवशेषों  की खोजबीन की। हिंदू पक्ष को उम्मीद है कि आने वाले समय में कोर्ट का फैसला उनके हक में आएगा। विश्व हिंदू परिषद की ओर से भी यह बात कही गई है कि भोजशाला के निर्माण को जल्द ही एक हजार साल पूरे होने वाले हैं और तब तक वे कानूनी तरीके से अपनी कोशिशें जारी रखेंगे। आने वाले वक्त की बात करें तो पंडितों का अनुमान है कि साल 2029 में एक बार फिर बसंत पंचमी और शुक्रवार का मेल होगा। इसके बाद साल 2032 और फिर साल 2052 में भी यही स्थिति बनेगी। हालांकि इस बार का उत्सव शांति से निकल गया, फिर भी पुलिस प्रशासन कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। धार में 27 जनवरी तक भारी पुलिस बल शहर में तैनात रखने का फैसला लिया गया है ताकि सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे।  

बसंत पंचमी पर संशय खत्म: सरस्वती पूजा 23 को या 24 जनवरी? जानें सही तिथि, मुहूर्त और उपाय

बसंत पंचमी हिंदू धर्म का एक प्रमुख और ज्ञान-विद्या का पर्व है, जो माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है। मां सरस्वती विद्या, बुद्धि, कला, संगीत और वाणी की देवी हैं। बसंत पंचमी पर पीले वस्त्र पहनकर, पीले फूल चढ़ाकर और पीले प्रसाद से पूजा करने से बुद्धि तेज होती है, परीक्षा में सफलता मिलती है और जीवन में ज्ञान की प्राप्ति होती है। साल 2026 में बसंत पंचमी को लेकर थोड़ा असमंजस है कि 23 या 24 जनवरी को मनाई जाएगी। आइए पंचांग के आधार पर सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और उपाय जानते हैं। बसंत पंचमी 2026 की सही तारीख और मुहूर्त पंचांग के अनुसार, माघ शुक्ल पंचमी तिथि 23 जनवरी 2026 (शुक्रवार) को रात 02:28 बजे शुरू होगी और 24 जनवरी 2026 (शनिवार) को रात 01:46 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर बसंत पंचमी 23 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन सूर्योदय सुबह 7:15 बजे के आसपास होगा, जब पंचमी तिथि ही रहेगी। 24 जनवरी को सूर्योदय पर षष्ठी शुरू हो जाएगी। इसलिए मुख्य तिथि 23 जनवरी शुक्रवार है। शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:50 से 12:40 बजे और अमृत काल में पूजा करना सर्वोत्तम है। बसंत पंचमी का धार्मिक महत्व बसंत पंचमी को वसंत ऋतु की शुरुआत और सरस्वती जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था। पीला रंग बसंत का प्रतीक है, इसलिए पीले वस्त्र, पीले फूल और पीला प्रसाद चढ़ाया जाता है। यह पर्व विद्या, बुद्धि, कला और संगीत की देवी मां सरस्वती की पूजा का दिन है। छात्र-छात्राएं इस दिन किताबें, वाद्ययंत्र और कलम की पूजा करते हैं। मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से बुद्धि तेज होती है, परीक्षा में सफलता मिलती है और वाणी में मधुरता आती है। यह पर्व ज्ञान और सृजनात्मकता का प्रतीक है। सरस्वती पूजा की विधि और सामग्री पूजा की विधि सरल लेकिन श्रद्धापूर्वक होनी चाहिए: सुबह स्नान कर पीले वस्त्र पहनें। पूजा स्थल पर मां सरस्वती की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। पीले फूल (गेंदा, चमेली), पीला चंदन, हल्दी, अक्षत, पीली मिठाई (बेसन के लड्डू, खीर), फल, किताबें, कलम और वाद्ययंत्र चढ़ाएं। धूप, दीप और अगरबत्ती जलाएं। 'ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः' या सरस्वती मंत्र का 108 बार जाप करें। सरस्वती वंदना या सरस्वती चालीसा का पाठ करें। अंत में आरती करें और प्रसाद वितरित करें। छात्र किताबें और कलम को पूजा में शामिल करें और उन्हें छूकर प्रणाम करें। बसंत पंचमी पर क्या करें और क्या न करें क्या करें: पीले वस्त्र पहनें और पीले फूलों से पूजा करें। किताबें, वाद्ययंत्र और कलम की पूजा करें। नई पढ़ाई या लेखन कार्य की शुरुआत करें। पीले चावल, बेसन की मिठाई या खीर का प्रसाद बनाएं। 'ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः' मंत्र का जाप करें। पीपल या आम के पेड़ को जल दें। क्या ना करें: सफेद या काले वस्त्र न पहनें। मांस-मदिरा और तामसिक भोजन ना करें। क्रोध, झूठ या नकारात्मक बातें ना करें। नई किताब या लेखन सामग्री ना जलाएं या नष्ट करें। पूजा के समय मौन या शांत रहें। बसंत पंचमी के विशेष उपाय और लाभ इस दिन मां सरस्वती को पीले फूल और पीला चंदन चढ़ाने से बुद्धि तेज होती है। छात्रों को किताबों की पूजा करने से परीक्षा में सफलता मिलती है। 'सरस्वती वंदना' या 'या कुन्देन्दु तुषारहार धवला' स्तोत्र का पाठ करने से वाणी मधुर होती है। पीले चावल या हल्दी का दान करने से ज्ञान प्राप्ति होती है। इस दिन नई पढ़ाई या कला सीखने की शुरुआत करने से सफलता निश्चित होती है। पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करने से मन शांत रहता है और एकाग्रता बढ़ती है। बसंत पंचमी 2026 में 23 जनवरी शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन मां सरस्वती की पूजा, पीले रंग का प्रयोग और ज्ञान की शुरुआत से जीवन में बुद्धि, सफलता और सुख प्राप्त होता है।

सरस्वती पूजा विधि: घर में पूजन के लिए जरूरी सामग्री, शुभ समय और खास नियम

बसंत पंचमी का पावन पर्व हर वर्ष माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है. यह दिन मां सरस्वती के प्राकट्य से जुड़ा माना जाता है, जिन्हें विद्या, बुद्धि, वाणी और विवेक की अधिष्ठात्री देवी कहा गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन घर में नियमपूर्वक सरस्वती पूजा करने से ज्ञान में वृद्धि होती है, मानसिक स्पष्टता आती है और अध्ययन में एकाग्रता बढ़ती है. इसलिए बसंत पंचमी पर घरेलू पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. पंचांग के अनुसार, साल 2026 में पंचमी तिथि 23 जनवरी को सुबह 02:28 बजे से प्रारंभ होकर 24 जनवरी को रात्रि 01:46 बजे तक रहेगी, इसलिए बसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी, शुक्रवार को श्रद्धा और विधि विधान के साथ मनाया जाएगा. सरस्वती पूजा से पहले की तैयारी और शुभ समय बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा के लिए प्रातः काल का समय सबसे उत्तम माना गया है. सूर्योदय के बाद स्नान कर स्वच्छ और हल्के रंग, विशेष रूप से पीले या सफेद वस्त्र धारण करने चाहिए. पूजा से पूर्व घर की साफ सफाई कर पूजा स्थल को पवित्र करना आवश्यक माना गया है. ईशान कोण (North-East direction) या शांत स्थान पर पीले वस्त्र बिछाकर मां सरस्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. मान्यता है कि मां सरस्वती को स्वच्छता और शांति प्रिय है. पूजा सामग्री जैसे दीपक, धूप, चंदन, अक्षत, पीले पुष्प और नैवेद्य पहले से तैयार रखें. पूजा से पहले मन को शांत कर सकारात्मक भाव बनाए रखना भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है. घर में सरस्वती पूजा की विधि और नियम पूजा प्रारंभ करते समय सबसे पहले दीप जलाकर कर संकल्प लें. इसके बाद मां सरस्वती के चित्र या प्रतिमा पर चंदन, अक्षत और पुष्प अर्पित करें. मां को पीले फूल और पीले वस्त्र विशेष रूप से प्रिय माने जाते हैं. पूजा के दौरान पुस्तकों, कॉपियों, कलम और वाद्य यंत्रों को पूजा स्थल के पास रखना शुभ माना गया है. मान्यता है कि इससे विद्या से जुड़े कार्यों में सफलता मिलती है. पूजा करते समय शुद्ध मन और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखें. घर में सरस्वती पूजा करते समय किसी भी प्रकार का शोर या अव्यवस्था नहीं होनी चाहिए. अंत में मां से ज्ञान, विवेक और सद्बुद्धि की प्रार्थना करें. भोग, मंत्र और पूजा में सावधानियां बसंत पंचमी पर मां सरस्वती को सात्विक भोग अर्पित करने की परंपरा है. खीर, मीठे चावल, बूंदी या पीले रंग के मिष्ठान्न शुभ माने जाते हैं. पूजा के दौरान तामसिक भोजन और नकारात्मक विचारों से दूरी बनाए रखना आवश्यक बताया गया है. मंत्र जाप के लिए सरस्वती वंदना या सरल स्तुति का पाठ किया जा सकता है. मान्यता है कि शांत मन से किया गया मंत्र जाप अधिक फलदायी होता है. पूजा के समय क्रोध, जल्दबाजी या आलस्य से बचना चाहिए. यदि घर में बच्चे हैं तो उन्हें भी पूजा में शामिल करना शुभ माना जाता है, क्योंकि इससे उनमें संस्कार और विद्या के प्रति सम्मान विकसित होता है. पूजा के बाद क्या करें और क्या न करें? सरस्वती पूजा के बाद कुछ समय अध्ययन, लेखन या संगीत अभ्यास करना अत्यंत शुभ माना गया है. मान्यता है कि इस दिन पढ़ाई की गई विद्या लंबे समय तक स्मरण रहती है. छोटे बच्चों के लिए अक्षर अभ्यास या विद्यारंभ करना भी लाभकारी माना गया है. पूजा के बाद पुस्तकों का अपमान न करें और उन्हें जमीन पर न रखें. इस दिन बाल कटवाना या अनावश्यक विवाद से बचने की सलाह दी जाती है. पीले रंग का दान करना और जरूरतमंदों की सहायता करना पुण्यकारी माना गया है. बसंत पंचमी पर किया गया संकल्प जीवन में सकारात्मक दिशा प्रदान करता है और मां सरस्वती की कृपा प्राप्त करने में सहायक होता है.

बसंत पंचमी और पीले रंग का गहरा संबंध: क्या है इसके पीछे की मान्यता?

भारत त्योहारों का देश माना जाता है. यहां जो भी पर्व मनाए जाते हैं, उसके पीछे कोई न कोई रहस्य अवश्य छिपा होता है. माघ माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन हर साल बंसत पंचमी मनाई जाती है. ये पर्व विद्या और ज्ञान की देवी सरस्वती को समर्पित किया गया है. इस पर्व को ‘श्री पंचमी’ या ‘ज्ञान पंचमी’ के नाम से भी जाना जाता है. ये पर्व बंसत ऋतु के आने का प्रतीक माना जाता है. इस दिन विधि-विधान से माता सरस्वती का पूजन किया जाता है. छात्रों के लिए ये पर्व बहुत विशेष और महत्वपूर्ण माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन माता सरस्वती का पूजन करने से विद्या और ज्ञान का आशीर्वाद मिलता है. इस दिन चारों ओर एक ही रंग छाया रहता है और वो होता है पीला रंग. पीला रंग सकारत्मकता और शुभता का कारक माना जाता है. ये उत्सव की आत्मा माना जाता है. इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनें जाते हैं. आइए जानते हैं कि इसके पीछे रहस्य क्या है? बसंत पंचमी कब है? हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 में माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि की शुरुआत 22 जनवरी 2026 को शाम 06 बजकर 15 मिनट पर हो रही है. वहीं इस तिथि का समापन 23 जनवरी 2026 को रात 08 बजकर 30 मिनट पर हो जाएगा. चूंकि 23 जनवरी को सूर्योदय पर पंचमी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा का पर्व इस साल 23 जनवरी, शुक्रवार को मनाया जाएगा. बसंत ऋतु मौसमों का राजा बसंत ऋतु को ‘ऋतुराज’ यानी मौसमों का राजा माना जाता है. यह पीलापन नई फसल के आने और जीवन में खुशहाली का प्रतीक माना जाता है. लोग प्रकृति के इसी सुंदर रूप के साथ स्वयं को जोड़ने की कोशिश करते हैं, इसलिए पीले वस्त्र धारण करते हैं. धार्मिक दृष्टि से पीला रंग शुद्धता, सादगी और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है. मां सरस्वती को ये रंग बहुत प्रिय है. मानसिक स्पष्टता और एकाग्रता बढ़ती है मान्यताओं के अनुसार, पीला रंग पहनने से मानसिक स्पष्टता और एकाग्रता बढ़ती है. भक्त इस दिन पीले वस्त्र पहनकर और पीले फूल अर्पित करके मां सरस्वती का पूजन करते हैं. पीला रंग सकारात्मक ऊर्जा का कारक माना जाता है. ये रंग सूर्य के प्रकाश का प्रतिनिधित्व भी करता है. इस रंग से जीवन में शुभता आती है.

शुक्रवार को बसंत पंचमी: दिनभर पूजा की अनुमति के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका

इंदौर  उत्तर प्रदेश के ज्ञानवापी की तरह ही मध्य प्रदेश के धार में मौजूद भोजशाल भी विवादों में है. वहीं बसंत पंचमी आते ही मध्य प्रदेश की 800 साल पुरानी भोजशाला की चर्चा शुरू हो जाती है, खासकर बसंत पंचमी अगर शुक्रवार को पड़े तो प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था का खास ख्याल रखना पड़ता है. इसकी वजह है कि भोजशाला को लेकर दो पक्षों के बीच स्वामित्व का विवाद चल रहा है, जो सुप्रीम कोर्ट में है. शुक्रवार को बसंत पंचमी होने पर सांप्रदायिक तनाव न बने इसे लेकर प्रशासन अलर्ट मोड पर रहता है. इस बार भी बसंत पंचमी 23 जनवरी यानि शुक्रवार को है, जिसे लेकर भारी संख्या में भोजशाला में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है. कई सालों से इस स्थिति का सामना इस साल फिर बसंत पंचमी शुक्रवार को है और इसी दिन जुमा भी पड़ रहा है. पूजा और नमाज के दौरान यहां किसी तरह का सप्रदायिक तनाव न हो, इसके लिए 20 जनवरी से ही धार शहर में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया जाएगा. करीब ढाई हजार पुलिस अधिकारी, कर्मचारी यहां मोर्चा संभालेंगे. जो फुल सिक्योरिटी प्लान के तहत बसंत पंचमी के दिन किसी भी तरह के हालात बिगड़ने पर तत्काल कार्रवाई करेंगे. एक ही दिन पूजा और नमाज वाली ऐसी ही स्थिति यहां साल 2006, 2013 और 2016 में भी बनी थी. उस दौरान पहले भी यहां तीनों मौके पर आगजनी पथराव और कर्फ्यू की स्थिति बन गई थी. हालांकि जिला प्रशासन द्वारा दोनों ही पक्षों को समझाकर इस आयोजन को शांतिपूर्ण रूप से संपन्न कराया था. इस बार फिर यहां हिंदू फ्रेंड फॉर जस्टिस नामक संगठन की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई है कि बसंत पंचमी पर आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के आदेश के आधार पर दिनभर पूजा की अनुमति दी जाए. एडवोकेट विष्णु शंकर जैन के मुताबिक "सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई यचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की गई है, क्योंकि बसंत पंचमी 23 जनवरी को है." आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया भी बेबस भोजशाला को लेकर आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने 7 अप्रैल 2003 को जो आदेश दिया था, उसमें हिंदू समाज को बसंत पंचमी पर भोजशाला में सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा करने की अनुमति दी थी, लेकिन बसंत पंचमी पर शुक्रवार होने की स्थिति में इस आदेश में कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं था. लिहाजा बसंत पंचमी पर जुम्मा होने के कारण यहां विवाद की स्थिति बनने की आशंका रहती है. इस स्थिति के चलते इस मामले से जुड़ी याचिका की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने भोजशाला के पुरातात्विक सर्वेक्षण के आदेश दिए थे. इसके बाद यहां किए गए सर्वे की 2000 पेज वाली रिपोर्ट में आर्कियोलॉजिकल सर्वे में स्पष्ट किया गया है कि गौशाला परिसर से विभिन्न धातुओं के सिक्के प्राप्त हुए हैं, जो दसवीं से 16वीं शताब्दी के बीच के हैं. इसके अलावा यहां 94 मूर्तियों के टुकड़े मिले जो मूर्तियां गणेश, ब्रह्मा, नरसिंह और भैरव की है. वहीं पशु-पक्षियों की प्रतिकृतियों के अवशेष भी मिले हैं. हालांकि इसके स्वामित्व पर फैसला कोर्ट में ही लंबित है. यह है गौशाला को लेकर पुराना विवाद धार में पुरातात्विक इमारत को हिंदू समाज माता सरस्वती वाग्देवी का मंदिर मानकर यहां बसंत पंचमी पर पूजा अर्चना करता है. वही मुस्लिम समाज इसी स्थान को मौलाना कमाल अहमद की दरगाह मानता रहा है. 1935 में धार रियासत के दीवान ने भोजशाला में मुस्लिम समाज को शुक्रवार के दिन नमाज की अनुमति दी थी. इसके बाद से ही धार के गौशाला विवाद की शुरुआत हुई. लिहाजा बसंत पंचमी के दिन जब भी शुक्रवार अथवा जुम्मे का दिन आता है, तो यहां एक ही दिन पूजा और नमाज होने की मजबूरी के चलते पूरा शहर सांप्रदायिक हिंसा की आशंका में पुलिस छावनी में तब्दील हो जाता है. इसके बाद यहां भोजशाला परिसर पूजा और नमाज के अलग-अलग समय के निर्धारण के बाद पूजा और फिर नमाज अता कराई जाती है. यह है इस स्थान का महत्व और इतिहास धार जिला प्रशासन के मुताबिक 11वीं शताब्दी में परमार वंश के राजा भोज ने भोजशाला का निर्माण कराया था, इस दौरान यहां माता सरस्वती वाग्देवी की प्रतिमा की स्थापना का भी उल्लेख बताया जाता है. परमार काल के बाद यह स्थान राजपूत शासकों की राजधानी और मालवा की राजधानी भी रहा. मुगल काल में अलाउद्दीन खिलजी ने 1305 में भोजशाला को ध्वस्त कर दिया. इसी दौरान यहां अन्य मुगलकालीन शासकों ने परिसर में मस्जिद का निर्माण कराया. मुगल काल समाप्त होने के बाद 1875 में ब्रिटिश काल के दौरान ब्रिटिश मेजर किन केड यहां स्थापित वाग्देवी की मूर्ति को लेकर लंदन चले गए, जो आज भी लंदन के म्यूजियम में मौजूद है.

भोजशाला : बसंत पंचमी से पहले चला बुलडोजर, हिंदू संगठनों ने कहा- पूजा का अवसर पूरे दिन मिलना चाहिए

धार   नगर गौरव दिवस और बसंत पंचमी उत्सव (Basant Panchami) को लेकर धार शहर में तैयारियां तेज हो गई है। आयोजन के मद्देनजर हिंदू संगठनों के साथ ही पुलिस और प्रशासन भी पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहे है। 17 जनवरी को शहर में हिंदू संगठनों द्वारा वाहन रैली निकाली जाएगी, जबकि 23 से 26 जनवरी तक नगर गौरव दिवस के तहत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होंगे। इसके चलते शहर की गलियों और मुख्य सड़को पर भगवा पताकाएं, स्वागत द्वार और सजावट की गई है, जिससे पूरा शहर आयोजन से पहले दुल्हन की तरह सजा हुआ नजर आ रहा है। भोजशाला (Bhojshala) और मोतीबाग चौक क्षेत्र में प्रस्तावित धार्मिक कार्यक्रमों को देखते हुए प्रशासन ने सप्ताहिक हाट और अस्थायी दुकानो को खाली करा दिया है। नगर पालिका की टीम ने दोपहर में जेसीबी से एक दुकान तोड़ी (Bulldozer Action), साथ ही गुमटियों को हटाकर पूरा क्षेत्र साफ कर दिया। सुरक्षा की दृष्टि से भोजशाला परिसर को 300 मीटर परिधि को नो-फ्लाई जोन घोषित किया गया है। क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात रहेगा। आदर्श रोड से हटाई गई फुटपाथ की दुकानें घोड़ा चौपा‌टी से त्रिमूर्ति चौराहे के बीच आदर्श रोड पर लंबे समय से फुटपाथ पर लग रही सब्जी व फल की दुकानों को प्रशासन ने सख्ती से हटाया। यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए एक दिन पहले ही मुनादी कर चेतावनी दी गई थी। इसके बावजूद नहीं मानने वाले दुकानदारों को गुरुवार को हटाया गया। इसके बाद आदर्श रोड की सडक चौड़ी और सुगम नजर आई। घोड़ा चौपाटी स्थित उत्कृष्ट विद्यालय के सामने हमेशा लगने वाले ठेलों के हटने से वाहन चालकों ने राहत की सांस ली। किला मैदान के पास दी गई थी अस्थायी जगह फुटपाथ से हटाए गए सब्जी विक्रेताओं को किला मैदान के पास अस्थायी रूप से बैठने की जगह बताई गई थी। नगर पालिका द्वारा पहले भी यहां दुकानों को शिफ्ट करने का प्रयास किया गया था, लेकिन विरोध के चलते सफलता नहीं मिल पाई। गुरुवार को भी सड़क से हटाने के बाद दुकानदारों को नई जगह दुकान लगाने की कहा गया, किंतु शिफ्टिंग स्थल पर कोई दुकानदार नहीं पहुंचा। फिक्स प्वाइंट पर पुलिस तैनात शुक्रवार को वसंत पंचमी तिथि होने के चलते भोजशाला से जुड़े आयोजन को लेकर करीब 10 साल बाद इतनी व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन द्वारा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए माइक्रो मैनेजमेंट किया जा रहा है। संवेदनशील स्थानों पर फिक्स प्वाइंट पर पुलिस जवानों की तैनाती की गई है. वहीं गली-मोहल्लों में पड़े ईंट-पत्थर भी हटवाए जा रहे हैं, ताकि किसी तरह की अपिय स्थिति न बने। बसंत पंचमी पर सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा की मांग केंद्रीय पुरातत्व विभाग के अधीन भोजशाला में शुक्रवार 23 जनवरी को बसंत पंचमी के अवसर पर एक दिन के लिए सूर्योदय से सूर्यास्त तक अखंड पूजा की अनुमति देने की मांग को लेकर धार में गतिविधियां तेज हो गई है। गुरुवार को जिला मुख्यालय धार में अग्रवाल समाज, रामीमाली समाज नौगांव, लोधा समाज और सकल वैश्य समाज द्वारा अलग-अलग ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपे गए। ज्ञापन प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय एवं पुरातत्व महानिदेशक के नाम संबोधित है। इनमें 2003 के आदेश का हवाला देते हुए वसंत पंचमी पर निर्विघ्न पूजा सुनिश्चित करने की मांग की गई है। बसंत पंचमी को लेकर जन जागरण अभियान भी तेज किया जा रहा है। 17 जनवरी से धार में अखंड पूजा के संकल्प के तहत जन जागरण रैलियां निकाली जाएंगी। इसमें युवा वाहन रैली, बाल मनुहार रैली के साथ ही महिलाओं द्वारा भी यात्राएं निकाली जाएंगी। देशभक्ति गीतों से गूंजा आयोजन स्थल मकर संक्रांति के अवसर पर बसंत पंचमी उत्सव समिति कार्यालय में मातृशक्तियों का हल्दी-कुमकुम कार्यक्रम आयोजित किया गया। महिलाओं ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए। कार्यक्रम को भोजशाला मुक्ति आंदोलन के संयोजक गोपाल शर्मा तथा राजेश शुक्ला ने संबोधित किया। शहर के साथ-साथ अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी ज्ञापन सौंपने का दौर शुरू हो गया है, दिग्ठान में सकल हिंदू समाज द्वारा पुलिस चौकी पर आवेदन देकर 23 जनवरी वसंत पंचमी को अखंड पूजा की अनुमति देने की मांग की गई। सीएम के नाम ज्ञापन, कोतवाली थाने पर भी आवेदन भोजशाला मोतीबाग चौक पर अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद व राष्ट्रीय बजरंग दल ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन तहसीलदार आशीष राठौर को सौंपा। इसमें बसंत पंचमी पर निर्विघ्न पूजन-हवन सुनिश्चित करने की मांग की गई। इस दौरान जिलाध्यक्ष अशोक मुनिया, मालवा प्रांत संगठन मंत्री संजय यादव सहित कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इधर भारतीय किसान संघ भी समर्थन में मैदान में उतर आया है। गुरुवार को भाकिसं पदाधिकारियों ने कोतवाली थाने पहुंचकर थाना प्रभारी दीपकसिंह को भोजशाला वसंत पंचमी को लेकर आवेदन सौंपा।