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हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा के खिलाफ इंडस्ट्रियल प्लॉट आवंटन मामले में केस प्रक्रिया शुरू

पंचकूला हरियाणा की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। CLP लीडर भूपेंद्र सिंह हुड्डा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं, क्योंकि औद्योगिक भूखंड आवंटन मामले में उनके खिलाफ केस चलाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जानकारी के अनुसार, यह मामला औद्योगिक प्लॉट के आवंटन से जुड़ा हुआ है, जिसमें अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे। अब इस मामले में कार्रवाई आगे बढ़ाई गई है और केस चलाने की अनुमति मिल गई है। बताया जा रहा है कि इस मामले में HUDA (हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण) के दो अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं, जिससे मामला और गंभीर हो गया है। इस घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर सक्रिय हो सकता है। फिलहाल जांच एजेंसियां मामले की आगे की प्रक्रिया में जुटी हुई हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। पंचकूला औद्योगिक भूखंड आवंटन मामले में ईडी की अभियोग शिकायत में हुड्डा को मुख्य साजिशकर्ता के रूप में शामिल किया गया है। एजेंसी ने आरोप लगाया कि उसने अवैध आवंटन की वास्तव में योजना बनाई और चयनित आवंटियों के हित में पात्रता मानदंडों में बदलाव किया। आरोपी आवंटियों को हुडा से जोड़ते हुए, ईडी ने कहा कि रेनू हुड्डा और नंदिता हुड्डा उनके पैतृक गांव सांघी की रहने वाली थी। कंवर प्रीत सिंह संधू उनके सहपाठी डीडी संधू के बेटे थे। मोना बेरी उनके ओएसडी बलदेव राज बेरी की बहू थी। डॉ. गणेश दत्त रतन उनके साथ टेनिस खेलते थे और प्रदीप कुमार उनके निजी सचिव सिंह राम के बेटे थे। ईडी ने आगे दावा किया कि आवंटन पाने वाले अशोक वर्मा के ससुर, अशोक काका, कांग्रेस शासन के दौरान एचएएफईडी के अध्यक्ष थे और हुड्डा उन्हें जानते थे। अमन गुप्ता के पिता रमेश गुप्ता थानेसर के पूर्व विधायक थे और हुड्डा से अच्छी तरह परिचित थे। लेफ्टिनेंट कर्नल ओपी दहिया (रिटायर) पूर्व कांग्रेस विधायक करण दलाल के रिश्तेदार हैं। डागर कात्याल के पिता सुनील कात्याल हरियाणा सेवा अधिकार आयोग में आयुक्त रह चुके थे और हुड्डा उन्हें जानते थे। मनजोत कौर न्यायमूर्ति एमएस सुल्लर (रिटायर) की बहू हैं, जो हुड्डा की परिचित थी। सिद्धार्थ भारद्वाज के पिता संजीव भारद्वाज 2004 में एचपीसीसी सचिव थे, 2005 में पार्टी छोड़ दी और 2016 में फिर से पार्टी में शामिल हो गए।

Haryana News: इंडस्ट्रियल प्लॉट केस में भूपेंद्र हुड्डा पर कसा शिकंजा, जांच तेज

पंचकूला. हरियाणा की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। CLP लीडर भूपेंद्र सिंह हुड्डा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं, क्योंकि औद्योगिक भूखंड आवंटन मामले में उनके खिलाफ केस चलाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जानकारी के अनुसार, यह मामला औद्योगिक प्लॉट के आवंटन से जुड़ा हुआ है, जिसमें अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे। अब इस मामले में कार्रवाई आगे बढ़ाई गई है और केस चलाने की अनुमति मिल गई है। बताया जा रहा है कि इस मामले में HUDA (हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण) के दो अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं, जिससे मामला और गंभीर हो गया है। इस घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर सक्रिय हो सकता है। फिलहाल जांच एजेंसियां मामले की आगे की प्रक्रिया में जुटी हुई हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। पंचकूला औद्योगिक भूखंड आवंटन मामले में ईडी की अभियोग शिकायत में हुड्डा को मुख्य साजिशकर्ता के रूप में शामिल किया गया है। एजेंसी ने आरोप लगाया कि उसने अवैध आवंटन की वास्तव में योजना बनाई और चयनित आवंटियों के हित में पात्रता मानदंडों में बदलाव किया। आरोपी आवंटियों को हुडा से जोड़ते हुए, ईडी ने कहा कि रेनू हुड्डा और नंदिता हुड्डा उनके पैतृक गांव सांघी की रहने वाली थी। कंवर प्रीत सिंह संधू उनके सहपाठी डीडी संधू के बेटे थे। मोना बेरी उनके ओएसडी बलदेव राज बेरी की बहू थी। डॉ. गणेश दत्त रतन उनके साथ टेनिस खेलते थे और प्रदीप कुमार उनके निजी सचिव सिंह राम के बेटे थे। ईडी ने आगे दावा किया कि आवंटन पाने वाले अशोक वर्मा के ससुर, अशोक काका, कांग्रेस शासन के दौरान एचएएफईडी के अध्यक्ष थे और हुड्डा उन्हें जानते थे। अमन गुप्ता के पिता रमेश गुप्ता थानेसर के पूर्व विधायक थे और हुड्डा से अच्छी तरह परिचित थे। लेफ्टिनेंट कर्नल ओपी दहिया (रिटायर) पूर्व कांग्रेस विधायक करण दलाल के रिश्तेदार हैं। डागर कात्याल के पिता सुनील कात्याल हरियाणा सेवा अधिकार आयोग में आयुक्त रह चुके थे और हुड्डा उन्हें जानते थे। मनजोत कौर न्यायमूर्ति एमएस सुल्लर (रिटायर) की बहू हैं, जो हुड्डा की परिचित थी। सिद्धार्थ भारद्वाज के पिता संजीव भारद्वाज 2004 में एचपीसीसी सचिव थे, 2005 में पार्टी छोड़ दी और 2016 में फिर से पार्टी में शामिल हो गए।

मंजू बनीं जिप चेयरपर्सन, भूपेंद्र हुड्डा को हराने के बाद मां बनने की खुशी जताई

चंडीगढ़  पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के सामने गढ़ी-सांपला-किलोई हलके से विधानसभा चुनान लड़ीं मंजू हुड्डा मां बनने वाली हैं। उन्होंने बेबी बंप के साथ सोशल मीडिया पर फोटो शेयर की। जिसमें पति राजेश हुड्डा के साथ इमोशनल अंदाज में दिख रही हैं।  मंजू हुड्डा की शादी कोरोना कॉल के दौरान 2020 में गांव धामड़ निवासी राजेश हुड्डा के साथ हुई। इसके बाद नवंबर 2022 में जिला परिषद का चुनाव लड़ा और 3,281 वोटों से जीत गईं। फिर भाजपा जॉइन की और 14 में से 10 पार्षदों के समर्थन से 27 दिसंबर 2022 को जिला परिषद की चेयरपर्सन बनीं। जब लगा मां बनने के लिए तैयार तो शुरू की प्लानिंग मंजू हुड्डा ने  कहा कि शादी के 4 साल बाद जब लगा कि अब ऑफिस और घर का काम एक साथ मैनेज हो सकता है, तो मां बनने के बारे में सोचा। जब उन्हें प्रेग्नेंसी का पता चला तो खुशी का ठिकाना नहीं था। पति राजेश के चेहरे पर अलग ही खुशी थी। गर्भावस्था के दौरान राजनीतिक कार्यक्रमों में जाना कम किया मंजू हुड्डा ने बताया कि प्रेग्नेंसी और मदरहुड का सफर इंजॉय कर रही हैं। भागदौड़ कुछ कम की है। राजनीतिक कार्यक्रमों में जाना भी कम किया। परिवार के साथ समय अधिक बिताना शुरू कर दिया। ऑफिस, राजनीति और परिवार को मैनेज करते हुए मां बनने के इन पलों को भी संभालने का पूरा प्रयास किया है। गर्भावस्था से संबंधित पढ़नी शुरू की किताब मंजू हुड्डा ने बताया कि प्रेग्नेंसी के बाद से उन्होंने कुछ अच्छी किताबें पढ़ी हैं ताकि गर्भ में पल रहे बच्चे पर अच्छा असर पड़े। अच्छे संस्कार डालने के लिए किताब पढ़ने के साथ ही बड़े बुजुर्गों के अनुसार काम कर रही हैं। धार्मिक किताब भी पढ़ रही हैं, ताकि मन शांत रहे। गुरुकुल में पढ़ने का हो रहा फायदा मंजू हुड्डा ने कहा कि गुरुकुल में पढ़ाई की है तो उसका फायदा मिला है। गर्भावस्था के दौरान मन को शांत करने के लिए योग और मेडिटेशन का सहारा ले रही हैं। गुरुकुल में भी मेडिटेशन और योग करती थीं, तो अब रोजाना सुबह योग जरूर करती हैं, ताकि फिट रह सके। पूर्व सीएम के सामने 37 हजार वोट लिए मंजू हुड्डा ने भाजपा के टिकट पर पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ गढ़ी सांपला किलोई हलके से विधानसभा 2024 का चुनाव लड़ा। चुनाव में मंजू हुड्डा को 37 हजार 74 वोट मिले। भूपेंद्र हुड्‌डा को 1 लाख 8 हजार 539 वोट मिले थे। जीत का अंतर 71 हजार 465 वोट रहा। यह भूपेंद्र हुड्डा का गढ़ माना जाता है और प्रचार के लिए भी कम ही आते हैं।