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शिक्षक की बेटी को मिली साइकिल, जिम्मेदारों के बयान आपस में टकराए

बड़वानी  बड़वानी के शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक–1 में साइकिल वितरण योजना को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। दूरदराज से आने वाले विद्यार्थियों की सुविधा के लिए चलाई जा रही सरकारी योजना में कथित अनियमितता सामने आई है, जब उसी विद्यालय में पदस्थ शिक्षक की पुत्री को साइकिल वितरित किए जाने का मामला उजागर हुआ। जानकारी के अनुसार विद्यालय में अध्ययनरत कुमारी प्रियांशी गुजराती, पिता जगदीश गुजराती, को भी साइकिल दी गई थी, जबकि उनके पिता स्वयं इसी विद्यालय में शिक्षक के रूप में पदस्थ हैं। सूत्रों के अनुसार छात्रा की आईडी में निवास स्थान अवलदा दर्शाया गया है, जबकि परिवार के लोग एकलव्य विद्यालय परिसर के क्वार्टर में निवासरत बताए जा रहे हैं। ऐसे में यह प्रश्न उठ रहा है कि यदि छात्रा विद्यालय के पास ही रहती है तो उसे योजना का लाभ किस आधार पर दिया गया। गौरतलब है कि शिक्षा विभाग की साइकिल वितरण योजना का उद्देश्य उन विद्यार्थियों को लाभ देना है जो दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों से स्कूल आते हैं। योजना में दूरी और निवास स्थान प्रमुख पात्रता मापदंड माने जाते हैं। ऐसे में शिक्षक की पुत्री को साइकिल मिलने से पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों के बयान भी एक-दूसरे से मेल नहीं खा रहे। विद्यालय के प्राचार्य का कहना है कि साइकिल वितरण कार्यक्रम जुलाई–अगस्त में हुआ था और वे छात्रवृत्ति प्रभारी  शुक्ला से जानकारी लेकर बताएंगे। वहीं छात्रवृत्ति एवं साइकिल वितरण प्रभारी  शुक्ला का दावा है कि जब शिक्षक की पुत्री को साइकिल मिलने का मामला सामने आया तो प्रभारी बीईओ  जाधव के कहने पर साइकिल वापस ले ली गई और उसे वर्ष 2027–28 में वितरित करने की बात कही गई। लेकिन इस पूरे मामले में नया मोड़ तब आया जब बीईओ  जाधव ने ही साफ इनकार कर दिया। उनका कहना है कि उन्होंने ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया और न ही साइकिल वापस लेने की बात कही। अधिकारियों के परस्पर विरोधी बयान से मामले में और संदेह गहरा गया है। इधर संबंधित शिक्षक जगदीश गुजराती का नाम पहले भी विवादों में रह चुका है। बताया जाता है कि पूर्व में सहायक आयुक्त के नाम से कूट रचित पत्र जारी करवाने का मामला भी सामने आ चुका है। इसके बावजूद उन्हें जिला स्तरीय माध्यमिक शिक्षा मंडल के मूल्यांकन केंद्र, शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय में बनाई गई परीक्षा मूल्यांकन समिति में शामिल किया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इस तरह के विवादित आचरण वाले शिक्षक को बोर्ड परीक्षा की गोपनीय मूल्यांकन प्रक्रिया में शामिल करना क्या उचित है। स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि साइकिल वितरण सूची, पात्रता और दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र विद्यार्थियों तक पहुंच सके। अब सवाल यह है कि— क्या साइकिल योजना में नियमों को ताक पर रखा गया? और जिम्मेदार अधिकारी आखिर सच क्यों छिपा रहे हैं?

छिंदवाड़ा में मानवीय चेहरा: छात्रा की मदद को आगे आए थाना इंचार्ज, एक्सीडेंट में टूटी साइकिल की जगह दिलाई नई

छिंदवाड़ा   छिंदवाड़ा में एक पुलिस अधिकारी का मानवीय चेहरा सामने आया है. 12वीं में पढ़ने वाली एक छात्रा की साइकिल को एक स्कार्पियो वाहन ने टक्कर मार दी. इस हादसे में साइकिल बुरी तरह तहस नहस हो गई. इससे दुखी छात्रा शिकायत करने सिटी कोतवाली पहुंची और उसने पुलिस को पूरी घटना बताई.  दरअसल, छात्रा बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखती है और वह साइकिल से ही रोज स्कूल आना-जाना करती है. उसने कोतवाली टीआई आशीष धुर्वे को बताया कि कार की टक्कर से साइकिल टूट गई है, अब वह सुधरेगी भी नहीं, ऐसे में स्कूल कैसे जाऊंगी?  छात्रा स्कूल जाने से वंचित न रह जाए, यह देखते हुए टीआई आशीष धुर्वे ने अविभावक बनकर एक नई साइकिल छात्रा को दिला दी. बच्ची नई साइकिल मिलने से खुश हो गई.  सिटी कोतवाली टीआई आशीष धुर्वे ने बताया, ''ये छोटी बच्ची स्कूल आती है. इसकी साइकिल को एक वाहन ने टक्कर मार दी थी. साइकिल पीछे से टूट गई थी. मेरे पास आई. बोली कि साइकिल टूट गई है, अब कैसे स्कूल आना जाना करूंगी? मेरा परिवार बहुत गरीब है.यह सुनकर मैंने एक साइकिल खरीदकर दे दी ताकि उसका स्कूल न छूट जाए. नई साइकिल पाकर बच्ची बेहद खुश है और अब वह अपनी पढ़ाई जारी रख पाएगी.''

रीवा में सरकारी कर्मचारियों के लिए खास निर्देश, एक दिन बिना वाहन के पहुंचें कार्यालय

रीवा  रीवा संभाग में एक विशेष पहल की गई है। यहां सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए मंगलवार को साइकिल से ही दफ्तर जाना अनिवार्य कर दिया गया है। आदेश जारी करने वाले संभाग आयुक्त बीएस जामोद ने खुद साइकिल से दफ्तर पहुंचकर इसकी शुरुआत भी की है। संभाग आयुक्त बीएस जामोद ने मंगलवार को 'साइकिल डे' की शुरुआत की है। पूरे संभाग के सरकारी अधिकारी-कर्मचारी सप्ताह में एक दिन साइकिल आएंगे अथवा पैदल या रिक्शा का सहारा ले सकते हैं। लेकिन बाइक या कार से ऑफिस नहीं जा सकेंगे। इस पहल का उद्देश्य है ईंधन की बचत, पर्यावरण संरक्षण और बेहतर स्वास्थ्य है। मंगलवार को रीवा कमिश्नरी के कर्मचारी साइकिल से कार्यालय पहुंचे। हालांकि बहुत से कर्मचारी-अधिकारी वाहन से ही आए। संभागीय कमिश्नर बीएस जामोद ने रीवा संभाग के सभी कलेक्टर और विभाग प्रमुखों को पत्र लिखकर, मंगलवार साइकिल डे प्रारंभ करने को कहा है। सप्ताह में एक दिन साइकिल के उपयोग की बात कहते हुए कमिश्नर ने कहा है कि वर्तमान में हम सभी वैश्विक और स्थानीय चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। इनमें ईंधन की बढती कीमतें, पर्यावरण प्रदूषण का स्तर और नागरिकों के स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं गंभीर विषय बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि साइकिल चलाने से जहां शरीर स्वस्थ रहेगा वहीं पर्यावरण का प्रदूषण भी कम होगा और खर्चे में भी कटौती होगी। हालांकि इसकी शुरुआत के पहले दिन जहां कमिश्नर और उनके कर्मचारी साइकिल से कार्यालय पहुंचे तो कलेक्ट्रेट कार्यालय में ज्यादातर अधिकारी कर्मचारी वाहन से ही पहुंचते दिखे।