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लाखों शिक्षकों की बल्ले-बल्ले! बिहार सरकार प्रमोशन प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में

पटना बिहार के सरकारी शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार ने प्रमोशन को लेकर महत्वपूर्ण कदम उठाने का संकेत दिया है। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने विधान परिषद में घोषणा की कि चालू वित्तीय वर्ष समाप्त होते ही शिक्षकों की पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। विधान परिषद की कार्यवाही के दौरान एमएलसी प्रो. संजय कुमार सिंह ने शिक्षकों को लंबे समय से प्रमोशन नहीं मिलने का प्रश्न उठाया। इस पर जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि विभाग आवश्यक तैयारियां पूरी कर रहा है और वित्तीय वर्ष के समापन के बाद पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने स्पष्ट किया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष (मार्च 2026) के समाप्त होते ही, यानी अप्रैल महीने से प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इस फैसले से न केवल शिक्षकों के पदोन्नति होगी बल्कि उनके वेतन में भी अच्छी खासी वृद्धि होगी।

बिहार सरकार का दावा- खजाना खाली नहीं, होली से पहले मिलेगी तनख्वाह

पटना बिहार के सरकारी कर्मचारियों को फरवरी महीने की सैलरी होली से पहले ही खाते में मिल जाएगी। वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने मंगलवार को विधान परिषद में यह घोषणा की। उन्होंने बिहार का खजाना खाली होने के आरोप को भी पूरी तरह खारिज कर दिया। दरअसल, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) समेत अन्य विपक्षी दलों के नेता आरोप लगा रहे हैं कि बिहार का सरकारी खजाना खाली है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोमवार को कहा था कि आने समय में सरकार के पास कर्मचारियों को वेतन देने तक के पैसे नहीं होंगे। विधान परिषद के बजट सत्र की कार्यवाही के दौरान मंगलवार को दूसरी पाली में बिहार विनियोग विधेयक (संख्या 2) 2026 पर चर्चा हुई। विनियोग विधेयक सदन से पारित कर दिया गया। इस विधेयक पर बोलते हुए वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा, “विपक्ष के जो लोग कह रहे हैं कि खजाना खाली है, तो सरकार ने निर्णय लिया है कि फरवरी महीने का वेतन होली से पहले ही दे दिया जाएगा।” उन्होंने विपक्षी सदस्यों की चुटकी लेते हुए यह भी कहा, “हम कोशिश करेंगे कि फरवरी में विरोधी दल का तनख्वाह नहीं मिले।” वित्त मंत्री की इस बात पर सत्ता पक्ष के सदस्य ठहाके लगाने लगे। तेजस्वी ने क्या कहा था दरअसल, आरजेडी के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने सोमवार को मीडिया से बातचीत में कहा था कि बीते 21 साल से जनता ने एनडीए सरकार को मौका दिया। इस दौरान बिहार सबसे गरीब और बेरोजगार राज्य बन गया। उन्होंने आरोप लगाया कि 21 सालों में केवल अपराध, भ्रष्टाचार, तानाशाही का राज रहा। भ्रष्टाचारियों ने सरकार का खजाना खाली कर दिया। कुछ दिनों बाद कर्मचारियों को पैसा देने की भी स्थिति बिहार सरकार की नहीं रहेगी। तेजस्वी ने दावा किया कि सरकार में कोई कार्रवाई और सुनवाई नहीं हो रही है। आरजेडी ने पूछा- विशेष राज्य के दर्जे का क्या हुआ, मंत्री ने दिया जवाब आरजेडी के एमएलसी अब्दुल बारी सिद्दिकी ने मंगलवार को सदन में मुद्दा उठाया कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने का कोई उल्लेख बजट में नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि स्पेशल इकॉनोमिक जोन का पैसा गुजरात में चला जाता है, बिहार को नहीं मिलता है। इस पर, वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद देश की इकॉनमी दुनिया में तीसरे नंबर पर जा रही है। अब कोई स्पेशल कैटगरी का राज्य नहीं होता है। केंद्र सरकार की ओर से बिहार को नेशनल हाईवे समेत अन्य योजनाओं में बहुत अधिक राशि दी जा रही है। केंद्र की इस मदद से बिहार काफी विकास कर रहा है।  

बिहार में जमीन बंटवारे की प्रक्रिया हुई सरल, एक ही आवेदन से परिवार की पूरी जमीन का दाखिल-खारिज

पटना अब एक ही आवेदन से पूरे परिवार की जमीन का दाखिल-खारिज हो जाएगा। पारिवारिक भूमि बंटवारे की प्रक्रिया को सरल, आसान और विवाद मुक्त बनाने के लए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने बिहार भूमि पोर्टल पर यह नई व्यवस्था लागू की गई है। इसकी सुविधा राज्य के लोगों को रविवार यानी 27 दिसंबर मिलने लगेगी। उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि पहले पारिवारिक बंटवारे के बाद प्रत्येक हिस्सेदार को अपने हिस्से की जमीन के लिए अलग-अलग दाखिल-खारिज कराना पड़ता था। इससे लोगों को अनावश्यक कठिनाईयों का सामना करना पड़ता था। इस समस्या को देखते हुए उन्होंने विभागीय अधिकारियों को व्यवस्था में सुधार के निर्देश दिए थे।   विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल के नेतृत्व में विभागीय टीम ने कम समय में नई व्यवस्था विकसित की है। इसे अब बिहार भूमि पेार्टल की दाखिल-खारिज सेवा के तहत लागू कर दिया गया है। इससे आम रैयतों को काफी सहूलियत होगी। अगर आवेदन के दौरान किसी प्रकार की तकनीकी समस्या आती है, तो नागरिक टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 18003456215 पर कॉल कर जानकारी और सहायता प्राप्त कर सकते हैं। यह नई सुविधा बिहार भूमि पोर्टल पर उपलब्ध दाखिल-खारिज सेवा के अंतर्गत लागू की जा रही है। नागरिक ऑनलाइन माध्यम से आवेदन कर सकेंगे और अपनी जमीन से जुड़ी जमाबंदी की स्थिति को आसानी से देख सकेंगे। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और बिचौलियों की भूमिका सीमित होगी।सरकार ने विशेष रूप से उन लोगों से अपील की है, जिन्होंने अब तक मौखिक बंटवारा करके अपनी जमीन पर कब्जा बना रखा है। ऐसे मामलों में अक्सर भविष्य में पारिवारिक विवाद उत्पन्न हो जाते हैं। मौखिक बंटवारा कानूनी दस्तावेज़ों में दर्ज नहीं होने के कारण सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ लेने में भी परेशानी आती है। नई व्यवस्था के तहत मौखिक बंटवारे को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कर कागजी रूप दिया जा सकता है, जिससे विवादों की संभावना कम होगी। साथ ही नई ऑनलाइन व्यवस्था से दलालों की भूमिका पर भी रोक लगेगी। पहले जानकारी के अभाव में कई लोग बिचौलियों के चक्कर में फंस जाते थे, जिससे उन्हें अतिरिक्त पैसे देने पड़ते थे।  

31 IPS अधिकारियों को मिला प्रमोशन, बिहार में 22 नए DIG नियुक्त; कुंदन कृष्णन बने DG

पटना बिहार सरकार ने मंगलवार को भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 31 अधिकारियों को पदोन्नति दी है। गृह विभाग ने अधिसूचना जारी कर यह जानकारी दी। अधिसूचना के अनुसार ये पदोन्नतियां एक जनवरी 2026 से प्रभावी होंगी। अधिसूचना में बताया गया कि 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी कुंदन कृष्णन को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) पद से पदोन्नत कर पुलिस महानिदेशक (DGP) के पद पर नियुक्त किया गया है। इसके अलावा 2008 बैच के आठ आईपीएस अधिकारियों को उप महानिरीक्षक (DIG) से पदोन्नत कर पुलिस महानिरीक्षक (IG) बनाया गया है। इनमें किम, निताशा गुरिया, सत्यवीर सिंह, उपेंद्र कुमार शर्मा, विकास बर्मन और मनोज कुमार सहित अन्य अधिकारी शामिल हैं। अधिसूचना के मुताबिक 2012 बैच के 22 आईपीएस अधिकारियों को उप महानिरीक्षक (DIG) के पद पर पदोन्नति दी गई है।

शिक्षा और आवास में मुफ्त सुविधा: बिहार ने अल्पसंख्यक छात्रों के लिए उठाया कदम

पटना  बिहार सरकार ने अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य सरकार ने किशनगंज और दरभंगा में बिहार राज्य अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया है। इन विद्यालयों में पढ़ाई के साथ-साथ छात्रावास की सुविधा भी पूरी तरह निःशुल्क होगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य अल्पसंख्यक वर्ग के प्रतिभाशाली छात्रों को सुरक्षित, अनुशासित और उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है, ताकि वे बेहतर भविष्य की ओर आगे बढ़ सकें। नामांकन प्रक्रिया इसी दिसंबर से शुरू सरकार सत्र 2025–26 के लिए इन विद्यालयों में नामांकन प्रक्रिया इसी दिसंबर से शुरू कर रही है। इच्छुक अभ्यर्थी 30 दिसंबर तक आवेदन कर सकते हैं। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा आवेदन के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यम उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे अधिक से अधिक छात्र इस योजना का लाभ उठा सकें। छात्रों के सर्वांगीण विकास पर फोकस इन आवासीय विद्यालयों में मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी समुदाय के छात्रों को निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जाएगी। साथ ही सुरक्षित आवास, पौष्टिक भोजन, स्वास्थ्य सुविधाएं और अनुशासित शैक्षणिक माहौल भी सुनिश्चित किया जाएगा। सरकार का फोकस केवल शिक्षा तक सीमित न होकर छात्रों के सर्वांगीण विकास पर भी रहेगा। 75 प्रतिशत सीटें ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों के लिए आरक्षित सत्र 2025–26 के लिए कला और विज्ञान संकाय में नामांकन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसके तहत कक्षा 9 और कक्षा 11 में प्रवेश के लिए आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुसार कक्षा 9 के लिए अधिकतम आयु 16 वर्ष और कक्षा 11 के लिए 18 वर्ष निर्धारित की गई है। वर्तमान में नवमी और ग्यारहवीं कक्षा में अध्ययनरत, विशेषकर विज्ञान और कला संकाय के छात्र-छात्राओं को प्रवेश में प्राथमिकता दी जाएगी। सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कुल सीटों में से 75 प्रतिशत सीटें ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों के लिए आरक्षित करने का निर्णय लिया है, जिनमें से 50 प्रतिशत सीटें बालिकाओं के लिए होंगी। आरक्षण प्रावधानों को प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा इसके अलावा राज्य सरकार के अधीन संचालित शिक्षण संस्थानों में लागू आरक्षण प्रावधानों को भी यहां प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा, ताकि सभी पात्र वर्गों को समान अवसर मिल सके। गौरतलब है कि वर्ष 2005 से पहले राज्य की शिक्षा व्यवस्था कई चुनौतियों से जूझ रही थी। बीते वर्षों में बिहार सरकार ने स्कूलों, कॉलेजों और आवासीय विद्यालयों के माध्यम से शिक्षा के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ किया है। अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय इसी क्रम में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होंगे। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन प्रक्रिया पूरी करें। सरकार का विश्वास है कि यह योजना अल्पसंख्यक छात्रों को मुख्यधारा से जोड़ने, ड्रॉपआउट दर कम करने और उन्हें आत्मनिर्भर व सशक्त बनाने में मील का पत्थर साबित होगी।  

बिहार में स्कूलों की 2026 की छुट्टियां घोषित, जानें कब-कब रहेंगे 75 दिन अवकाश

पटना बिहार सरकार ने आगामी वर्ष 2026 के लिए स्कूलों के लिए  वार्षिक अवकाश कैलेंडर जारी कर दिया है। पूरे राज्य में यही कैलेंडर लागू होगा। इसमें पूरे साल में 75 छुट्टियां हैं। इनमें गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस और प्रमुख धार्मिक त्यौहार शामिल हैं। बिहार सरका द्वारा जारी कैलेंडर के अनुसार, अगले वर्ष स्कूलों में 75 दिनों की छुट्टियां होंगी। अगर सप्ताह के सभी रविवारों की संख्या को घटा दिया जाए तो बाकी छुट्टियां 65 दिन होंगी। यह कैलेंडर 1 जनवरी 2026 से लेकर 31 दिसंबर 2026 तक लागू होगा। इस साल स्कूलों में कुल 75 दिनों की छुट्टियां होंगी। इनमें गर्मी, दीपावली-छठ, शीतकालीन, दुर्गा पूजा और होली शामिल हैं। वहीं, इस साल दुर्गा पूजा की छुट्टियां 5 होगी। हाली पर दो दिनों की छुट्टी दी गई है। सर्दियों में एक हफ्ते की मिलेगी छुट्टी कैलेंडर के अनुसार, स्कूलों में शिक्षकों और छात्रों को 20 दिनों का समर वेकेशन यानी गर्मी की छुट्टियां दी जाएंगी। दीपावली से लेकर छठ पूजा तक 10 दिनों तक छुट्टी रहेगी। इसके अलावा सर्दियों में एक हफ्ते की छुट्टी मिलेगी। हालांकि, मौसम के अनुसार इसे बढ़ाया भी जा सकता है।

केंद्र से बिहार को 10,219 करोड़ का कर अंशदान, सम्राट चौधरी ने धन्यवाद किया व्यक्त

पटना बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विजयादशमी के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद देते हुए गुरुवार को कहा कि केंद्र सरकार ने केंद्रीय करों में राज्य के अंशदान (टैक्स डिवॉल्यूशन) के तहत 10,219 करोड़ रुपए की राशि जारी की है, जो विकास कार्यों को नई गति देगी। चौधरी ने कहा, ‘‘ नवरात्र के शुरुआती दिन यानी 22 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पहले मॉल एवं सेवाकर (जीएसटी) में कर की दरें कम करके देशवासियों को बड़ा उपहार दिया और अब बिहार को 10,219 करोड़ रुपए की टैक्स डिवॉल्यूशन राशि प्रदान कर राज्य के करोड़ों लोगों का मनोबल बढ़ाया है। इसके लिए समस्त बिहारवासी उनकी ओर कृतज्ञता प्रकट करते हैं।'' उपमुख्यमंत्री ने आगे कहा कि यह राशि राज्य के बुनियादी ढांचे और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में सहायक सिद्ध होगी। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय करों से वर्ष 2025-26 में बिहार को करीब 1.38 लाख करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद है। अर्थशास्त्री डॉ. सुधांशु कुमार ने बताया कि केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी 15वें वित्त आयोग द्वारा तय किए गए फॉर्मूले के आधार पर निर्धारित की जाती है। इस फॉर्मूले के तहत प्रत्येक राज्य को कर संग्रहण में उसकी आबादी, भौगोलिक स्थिति, आय-व्यय क्षमता तथा अन्य आर्थिक मानकों के अनुरूप हिस्सा आवंटित किया जाता है। डॉ. कुमार ने कहा कि अनुमानित कुल राशि को केंद्र सरकार वित्तीय वर्ष के दौरान 14 किश्तों में राज्यों को वितरित करती है। इससे राज्यों के विकास कार्यों और योजनाओं के लिए नियमित रूप से संसाधन उपलब्ध रहते हैं और वित्तीय स्थिरता बनी रहती है।