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बर्ड फ्लू से हड़कंप: बिलासपुर में हजारों मुर्गियों की मौत, प्रशासन ने 10 किमी क्षेत्र में जारी किया अलर्ट

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के कोनी स्थित सरकारी पोल्ट्री फार्म में बर्ड फ्लू के प्रकोप से हड़कंप मच गया है। बीते 19 से 24 मार्च के बीच यहां करीब 4,400 मुर्गियों की मौत हो गई। फार्म में कुल 5,037 मुर्गियां मौजूद थीं। अब प्रशासन ने फार्म के एक किलोमीटर क्षेत्र में अलर्ट जारी किया है। 10 किलोमीटर के दायरे में अलर्ट इस मामले की जानकारी देते हुए बिलासपुर के पशु चिकित्सा विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. जीएस तंवर ने बताया कि मृत पक्षियों के सैंपल भोपाल और पुणे की लैब में भेजे गए थे, जिनमें से भोपाल लैब ने एवियन इन्फ्लुएंजा यानी बर्ड फ्लू की पुष्टि कर दी है। संक्रमण की पुष्टि के बाद जिला कलेक्टर संजय अग्रवाल ने तत्काल प्रभाव से रोकथाम और नियंत्रण के निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने फार्म के एक किलोमीटर के दायरे को ‘संक्रमित क्षेत्र’ और 10 किलोमीटर के दायरे को निगरानी क्षेत्र घोषित किया है। सीलिंग भी होगी प्रोटोकॉल के तहत संक्रमित क्षेत्र में सभी पोल्ट्री पक्षियों, अंडों और चारे को नष्ट किया जाएगा और इनके आवागमन पर पूरी तरह रोक रहेगी। प्रभावित पोल्ट्री मालिकों को पशुपालन विभाग की ओर से मुआवजा दिया जाएगा। कूलिंग (पक्षियों को मारने) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद फार्म को सील कर दिया जाएगा। स्थिति को संभालने के लिए टीम गठित स्थिति को संभालने के लिए रैपिड रिस्पॉन्स टीमें गठित की गई हैं, जो कूलिंग, निस्तारण, निगरानी और सैनिटाइजेशन का काम करेंगी। साथ ही इलाके में चेतावनी बोर्ड लगाए जाएंगे और पोल्ट्री की बिक्री के साथ उनकी आवाजाही पर भी सख्त नजर रखी जाएगी। कर्मचारियों की भी हो रही जांच पोल्ट्री फार्म के कर्मचारियों की स्वास्थ्य जांच भी की जा रही है। किसी में लक्षण मिलने पर जांच और जरूरत पड़ने पर एंटीवायरल दवा दी जाएगी। फिलहाल इंसानों में संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है। जिला प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और सतर्क रहते हुए प्रशासन का सहयोग करने की अपील की है।

बर्ड फ्लू की आशंका, पोल्ट्री फार्म में 5000 मुर्गियों की संदिग्ध मौत, पशु चिकित्सा विभाग में खलबली

बिलासपुर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर के कोनी स्थित शासकीय कुक्कुट पालन परिक्षेत्र में 5 हजार से अधिक मुर्गा-मुर्गियों की संदिग्ध मौत का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है। शुरुआती लक्षणों के आधार पर बर्ड फ्लू की आशंका जताई जा रही है। एहतियात के तौर पर पोल्ट्री फार्म को तत्काल बंद कर दिया गया है और पूरे क्षेत्र को निगरानी में ले लिया गया है।  छह दिनों में 5 हजार से अधिक पक्षियों की मौत जानकारी के अनुसार, 18 मार्च से फार्म में मुर्गा-मुर्गियों की मौत का सिलसिला शुरू हुआ, जो लगातार बढ़ता गया। छह हजार से अधिक पक्षियों की क्षमता वाले इस सरकारी पोल्ट्री फार्म में बीते पांच-छह दिनों के भीतर 5 हजार से अधिक पक्षियों की मौत हो चुकी है। जांच के लिए भोपाल भेजे जाएंगे सैंपल मामले की गंभीरता को देखते हुए मृत पक्षियों के सैंपल जांच के लिए भोपाल स्थित लैब भेजे जाएंगे। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मौतों के पीछे बर्ड फ्लू है या कोई अन्य कारण। घटना के बाद पशु चिकित्सा विभाग सतर्क हो गया है। रायपुर से राज्य स्तरीय विशेषज्ञों की टीम मंगलवार को बिलासपुर पहुंचेगी। टीम द्वारा पोल्ट्री फार्म का निरीक्षण कर स्थिति का आकलन किया जाएगा और संबंधित अधिकारियों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे। 5 किलोमीटर का इलाका घोषित संवेदनशील संभावित संक्रमण को देखते हुए पोल्ट्री फार्म के आसपास के 5 किलोमीटर क्षेत्र को संवेदनशील घोषित किया गया है। यदि बर्ड फ्लू की पुष्टि होती है, तो प्रभावित क्षेत्र में मौजूद सभी मुर्गा-मुर्गियों और अन्य पालतू पक्षियों को नष्ट करने की कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम में फार्म प्रबंधन की लापरवाही भी उजागर हुई है। पक्षियों की मौत 18 मार्च से शुरू होने के बावजूद समय पर उच्च अधिकारियों को सूचना नहीं दी गई। यदि समय रहते कार्रवाई होती, तो मौतों की संख्या कम हो सकती थी। आज आएगी राज्य स्तरीय टीम बीते छह दिनों के भीतर एक के बाद एक पांच हजार से अधिक मुर्गे और मुर्गियों की मौत के बाद विभाग में हड़कंप जैसी स्थिति है। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य से एक टीम बिलासपुर आ रही है। टीम में पशु चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं के संचालक आइएएस चंद्रकांत वर्मा, उप संचालक स्टेट लैब डा एके तफ्शी, अपर संचालक डा केके ध्रुव के अलावा अन्य शामिल रहेंगे। उनके द्वारा पोल्टी फार्म का निरीक्षण किया जाएगा। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों के बयान भी दर्ज करेंगे। जांच के लिए सैंपल को भेजा जाएगा भोपाल सरकारी पोल्ट्री फार्म में इतनी बड़ी संख्या में मौत को बर्ड फ्लू से जोड़कर देखा जा रहा है। आमतौर पर सामूहिक मौतें बर्ड फ्लू से होती हैं। हालांकि अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है। मंगलवार को मृत पक्षियों के सैंपल को जांच के लिए मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित लैब भेजा जाएगा। वहां से रिपोर्ट आने के बाद ही इसकी पुष्टि की जाएगी। पांच किलोमीटर का दायरा हुआ संवेदनशील पक्षियों की मौत के पीछे बर्ड फ्लू को बताया जा रहा है। ऐसे में पोल्ट्री फार्म के आसपास के पांच किलोमीटर का दायरा अति संवेदनशील हो गया है। बर्ड फ्लू की पुष्टि होने पर आसपास के सभी मुर्गे और मुर्गियों के साथ ही अन्य पालतू पक्षियों को नष्ट किया जाएगा। साथ ही पोल्ट्री फार्म के पक्षियों को भी दफनाया जाएगा। प्रबंधक की लापरवाही हुई उजागर इस पूरे मामले में पोल्ट्री फार्म के प्रबंधक डा संजय राज की लापरवाही सामने आई है। पक्षियों की मौत 18 मार्च से शुरू हुई थी। इसके बाद भी उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया और मामले को चुपचाप दबाए रखा। रविवार को मौत का आंकड़ा बढ़ा तो उन्होंने इसकी जानकारी संयुक्त संचालक डा जीएसएस तंवर को दी। अधिकारियों का कहना है कि अगर पहले इसकी जानकारी मिल जाती तो मौतों की संख्या कम हो सकती थी। पहले भी सामने आ चुका है मामला गौरतलब है कि फरवरी 2025 में रायगढ़ के चक्रधर नगर स्थित पोल्ट्री फार्म में एच5एन1 बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई थी। उस दौरान हजारों मुर्गियों, चूजों और अंडों को नष्ट कर क्षेत्र को कंटेनमेंट और सर्विलांस जोन घोषित किया गया था।

चिकन खाने से पहले सोचें, भागलपुर में बर्ड फ्लू के मामले सामने आए

 पटना भागलपुर के नवगछिया अनुमंडल परिसर स्थित मैदान में बड़ी संख्या में मृत मिले कौओं की जांच रिपोर्ट में बर्ड फ्लू वायरस की पुष्टि होते ही पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है. जिला पशुपालन पदाधिकारी अंजली कुमारी ने आधिकारिक रूप से पुष्टि करते हुए बताया कि मृत कौओं का सैंपल जांच के लिए पटना और भोपाल लैब भेजा गया था, जहां से आई रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि हुई है. रिपोर्ट सामने आते ही जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है और प्रभावित क्षेत्र के चारों ओर 10 किलोमीटर के दायरे में सेनेटाइजेशन अभियान शुरू कर दिया गया है. वहीं इलाके के सभी पोल्ट्री फार्म से भी सैंपल इकट्ठा किया जा रहा है. 150 से अधिक कौओं की मौत से फैली दहशत बता दें कि 11 जनवरी की सुबह मॉर्निंग वॉक पर निकले लोगों ने एक ही स्थान पर पेड़ के नीचे 150 से अधिक मृत कौवे पड़े देखे थे. कई कौवे तड़पती हालत में भी मिले थे. घटना के बाद स्थानीय लोगों में बर्ड फ्लू की आशंका को लेकर दहशत फैल गई थी. सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सभी मृत पक्षियों को सुरक्षित तरीके से हटाया गया. सैंपल जांच के बाद हुई फ्लू की पुष्टि वन विभाग और पशुपालन विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर सैंपल कलेक्ट किए. मृत कौओं का सीरम जांच के लिए उच्च स्तरीय लैब भेजा गया था. भोपाल से आई रिपोर्ट में बर्ड फ्लू की पुष्टि होते ही प्रशासनिक मशीनरी सक्रिय हो गई. जिला प्रशासन का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन एहतियात के तौर पर सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं. स्वास्थ्य और पशुपालन विभाग लगातार निगरानी कर रहे हैं. प्रभावित इलाकों में कराया जा रहा सैनिटाइजेशन   डॉक्टर अंजली ने कहा कि 11 जनवरी को कौओं की मौत हुई थी. उस समय बहुत ठंड थी. ऐसा लगा कि ये ठंड के कारण मरे हैं. लेकिन इसका सैंपल हमने बाहर भेजा, जिसके बाद सरकार से इसकी पुष्टि हुई कि कौओं की मौत बर्ड फ्लू के कारण ही हुई है. फिलहाल हम लोग प्रभावित इलाकों में सैनिटाइजेशन करवा रहे हैं. हमने 11 तारीख को भी सैनिटाइज कराया था. इसके अलावा इस इलाके में जितने भी पोल्ट्री फार्म हैं, उनका जीरो सर्विलेंस करके दोबारा भेजा जाएगा.