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अनिंदिता मित्रा बनीं नई मुख्य निर्वाचन अधिकारी

चंडीगढ़. भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 2007 बैच की आईएएस अधिकारी अनिंदिता मित्रा को पंजाब का नया मुख्य निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया है। उन्होंने सिबिन सी. का स्थान लिया है, जो अब केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर जा रहे हैं। निर्वाचन आयोग की ओर से यह नियुक्ति प्रशासनिक अनुभव और चुनावी प्रक्रिया को और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से की गई है। कौन हैं अनिंदिता मित्रा? अनिंदिता मित्रा 2007 बैच की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं और इससे पहले वे राज्य और केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर कार्य कर चुकी हैं। उन्हें प्रशासनिक दक्षता, पारदर्शिता और निष्पक्ष कार्यशैली के लिए जाना जाता है। निर्वाचन आयोग को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में पंजाब में आगामी चुनाव निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न होंगे। वहीं, सिबिन सी. के कार्यकाल को भी सफल माना जा रहा है। उनके नेतृत्व में मतदाता जागरूकता अभियान, ईवीएम और वीवीपैट से जुड़े प्रशिक्षण तथा चुनावी व्यवस्थाओं को मजबूत किया गया। अब उनके केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के बाद यह जिम्मेदारी अनिंदिता मित्रा को सौंपी गई है।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मप्र ने मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ की बैठक

प्रदेश में चल रहे एसआईआर कार्य के बारे में कराया अवगत भोपाल  मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मप्र श्री संजीव कुमार झा ने मंगलवार को निर्वाचन सदन भोपाल में मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भारत निर्वाचन आयोग द्वारा एसआईआर को लेकर बढ़ाई गई समय सीमा और प्रगति के बारे में जानकारी दी। साथ ही प्रदेश की उपलब्धि पर राजनीतिक दलों का आभार व्यक्त किया। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री झा ने कहा कि राजनीतिक दलों द्वारा बताई हुई समस्याओं के त्वरित समाधान और सुझावों के क्रियान्वयन से ही प्रदेश में एसआईआर का कार्य लगभग पूरा होने को है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 5 करोड़ 46 लाख से अधिक गणना पत्रकों का डिजीटाइजेशन किया जा चुका है। 10 जिलों ने 100 फीसदी काम पूरा कर लिया है। साथ ही 10 अन्य जिलों ने 99% से अधिक कार्य पूर्ण कर लिया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश कि 230 विधानसभाओं में से 58 में शत् प्रतिशत,146 में 90% से अधिक, 12 में 80 से 90% तथा 14 विधान सभाओं में 80% से कम कार्य हुआ है। साथ ही प्रदेश के 65 हजार 14 मतदान केंद्रों में से 40 हजार 8 सौ 30 पर100%, 16 हजार178 पर 90% से अधिक, 3655 पर 80 से90% तक काम पूरा हो चुका है। बैठक के दौरान मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री झा ने मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के सुझाव प्राप्त किए। साथ ही उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया। बैठक में आम आदमी पार्टी से श्रीमती रीना सक्सेना, श्री सज्जन सिंह परमार, श्री सीपी सिंह, बहुजन समाज पार्टी से श्री पूर्णेन्द्र अहिरवार, भारतीय जनता पार्टी से श्री भगवान दास सबनानी, श्री रजनीश अग्रवाल, श्री एसएस उप्पल और कांग्रेस पार्टी से श्री जेपी धनोपिया उपस्थित रहे।  

मतदाता सरलता से दर्ज कर सकते हैं विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित शिकायतें: मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, मध्यप्रदेश

भोपाल  मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मध्यप्रदेश कार्यालय ने जानकारी दी है कि मतदाता विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़ी अपनी सभी शिकायतें सरल, पारदर्शी और प्रभावी माध्यमों से दर्ज करा सकते हैं, जिनके समयबद्ध समाधान की व्यवस्था राज्यभर में सुनिश्चित की गई है। फॉर्म वितरण, डाटा सत्यापन, बीएलओ संपर्क, मतदाता सूची त्रुटियों और अन्य निर्वाचन कार्यों से संबंधित शिकायतों के लिए प्रदेश में व्यापक शिकायत निवारण प्रणाली संचालित है। मतदाता अपनी शिकायतें राष्ट्रीय मतदाता हेल्पलाइन 1950 पर कॉल करके दर्ज करा सकते हैं, जो एक टोल-फ्री सेवा है। शिकायत दर्ज होते ही कॉल करने वाले को एक टोकन आईडी प्रदान की जाती है, जिसके माध्यम से वह बाद में अपनी शिकायत की स्थिति ट्रैक कर सकता है। ऑनलाइन सुविधा के रूप में राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल (एनवीएसपी) में भी शिकायत पंजीकृत की जा सकती है, जहाँ पोर्टल के ‘कम्प्लेंट’ सेक्शन में जाकर शिकायत का प्रकार चुनने, आवश्यक दस्तावेज़ अपलोड करने और सबमिट करने पर यह शिकायत सीधे जिला या राज्य निर्वाचन कार्यालय तक पहुँच जाती है और उसका निवारण तय समय-सीमा में किया जाता है। प्रत्येक जिले में कलेक्टर (जिला निर्वाचन अधिकारी), ईआरओ, एईआरओ और निर्वाचन शाखा के माध्यम से भी मतदाता लिखित शिकायतें जमा कर सकते हैं। स्कैन की गई शिकायतें जिले के अधिकृत ईमेल पते पर भेजने की सुविधा भी उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त मतदाता अपनी शिकायतें मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मध्यप्रदेश या भारत निर्वाचन आयोग को ईमेल के माध्यम से भी भेज सकते हैं, जिन पर नियमानुसार संज्ञान लिया जाता है। मतदाता विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े किसी भी विषय जैसे एनुमरेशन फॉर्म न मिलना, जानकारी का गलत संकलन, बीएलओ की अनुपस्थिति या व्यवहार संबंधी शिकायतें, मतदाता सूची में नाम जुड़ने, कटने अथवा स्थानांतरण से संबंधित त्रुटियाँ, पोलिंग बूथ की समस्याएँ, दिव्यांगजन सुविधाओं में कमी संबंधी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। शिकायतों के समाधान के लिए राज्य में स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित है। सामान्य शिकायतों का निवारण सात से पन्द्रह दिनों के भीतर किया जाता है, जबकि तात्कालिक या महत्वपूर्ण शिकायतों पर एक से तीन दिनों के भीतर कार्रवाई की जाती है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि “हमारा उद्देश्य विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, सुगम और उत्तरदायी बनाना है। प्रत्येक शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा और समाधान की पारदर्शिता एवं गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।“  

घाटशिला उपचुनाव: मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की समीक्षा बैठक, चुनाव अधिकारियों को मिले आदेश

रांची 11 नवंबर को घाटशिला विधानसभा उपचुनाव होने हैं। इसके चलते राज्य में तैयारियां शुरू हो गई हैं। झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार ने कहा कि घाटशिला में प्रत्येक बूथ मॉडल बूथ के रूप में कार्य करेंगे। मतदाताओं को मतदान केंद्रों पर भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी किए गए गाइडलाइन्स को फॉलो करते हुए मतदान हेतु सभी एश्योर्ड मिनिमम फैसिलिटी उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। के. रवि कुमार घाटशिला अनुमंडल सभागार में 45-घाटशिला (अ.ज.जा.) विधानसभा उप चुनाव के लिए वरीय पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करते हुए कहा कि निर्वाचन कार्य में जीरो एरर के साथ कार्य करना है। मतदान के लिए प्रत्येक बिंदुओं पर भारत निर्वाचन आयोग द्वारा विस्तृत नियमावली बनाए गए है एवं हर कार्य के लिए मॉड्यूल एवं एसओपी बने हुए है, सभी पदाधिकारी अपने कार्यों के संपादन के लिए इन दिशा निर्देशों का अक्षरशः: अनुपालन सुनिश्चित करें। कुमार ने कहा कि निर्वाचन कार्य को त्रुटि रहित बनाने के लिए एवं मतदान प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए तैयार दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही पदाधिकारियों को ट्रेनिंग देना सुनिश्चित करें। सोशल मीडिया पर आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के मामलों पर विशेष ध्यान रखें। इसके लिए प्रतिनिधियों के सोशल मीडिया के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर लें एवं उन्हें आदर्श आचार संहिता के क्या करें क्या न करें का बिंदुवार जानकारी उपलब्ध करा दें।