मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ चीफ जस्टिसेस ऑफ वर्ल्ड (आईसीसीजेडब्ल्यू) के उद्घाटन समारोह में दिया बड़ा संदेश
अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए अराजकता का वातावरण पैदा करने वालों के खिलाफ संवाद महत्वपूर्ण: मुख्यमंत्री स्वयं के वर्चस्व को स्थापित करने के लिए संवाद को बाधित किया जाता रहा हैः मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री बोले: बस्ते के बोझ से बच्चे डिप्रेस्ड न हों, इसके बारे में भी हमें करना होगा विचार लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वसुधैव कुटुम्बकम् यानी 'होल वर्ल्ड इज वन फैमिली, हैज बीन बेसिक फिलॉसफी ऑफ इंडिया फॉर थाउजैंड्स ऑफ ईयर्स' की भावना से विश्व को अवगत कराते हुए इसे भारत की हजारों वर्षों की परंपरा करार दिया। उन्होंने कहा कि संकट के समय शरण देने और आगे बढ़ाने में भारत ने हमेशा योगदान दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को सिटी मॉन्टेसरी स्कूल द्वारा आयोजित 26वें इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ चीफ जस्टिसेस ऑफ वर्ल्ड (आईसीसीजेडब्ल्यू) के उद्घाटन समारोह में अपनी बातें रखीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमें यूएन की उस घोषणा को भी स्मरण करना होगा, जिसमें सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स के बारे में दुनिया के देशों से आह्वान किया गया था। सस्टेनेबल गोल्स शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, जल संसाधन, रोजगार-कौशल विकास, पर्यावरण और वन संपदा की रक्षा के विषयों पर आधारित हैं। इन 16 गोल्स में शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। कभी न भूलें क्या है वास्तविक समस्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमें ये कभी विस्मृत नहीं करना चाहिए कि विश्व की वास्तविक समस्या क्या है। उन्होंने कहा कि जब हम इसकी तह में जाते हैं तो लगता है कि डायलॉग एक-दूसरे के बीच में नहीं है। स्वयं के वर्चस्व को स्थापित करने के लिए डायलॉग को बाधित किया गया। ये कॉन्फ्रेंस अपने आप में डायलॉग का एक माध्यम है। दुनिया के न्यायाधीशों के माध्यम से यह मानवता और उन लोगों के लिए भी एक उद्घोषणा है कि जिन्होंने अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए अराजकता का वातावरण पैदा करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि जब हम दुनिया के अंदर शिक्षा की बात करते हैं तो 250 करोड़ से अधिक बच्चों के लिए क्वॉलिटी एजुकेशन पर फोकस करते हैं। हमें विचार करना होगा कि बस्ते के बोझ से बच्चे डिप्रेस्ड न हों। यह महत्वपूर्ण भाव है, क्योंकि शिक्षा किसी भी व्यवस्था का, फिर चाहे व्यक्ति हो, समाज हो या राष्ट्र हो, डायलॉग की स्थापना, मैन टू मैन, सोसाइटी टू सोसाइटी या फिर कंट्री टू कंट्री, यह स्थापित तभी हो सकती है जब हम उसके बेसिक भाव पर विचार करें। यह बेसिक भाव एजुकेशन के माध्यम से हम प्रत्येक छात्र-छात्राओं के मन में पैदा कर सकते हैं, लेकिन आज भी यह चुनौती बनी हुई है। समस्याओं के समाधान के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जाने की आवश्यकता मुख्यमंत्री ने कहा दुनिया में जहां अशांति व अराजकता है, वर्चस्व को लेकर एक-दूसरे की संप्रभुता को हड़पने की होड़ हो, वहां पर एजुकेशन, हेल्थ तथा सस्टेनेबल डेवलपमेंट की बात बेमानी सी दिखती है। उन स्थितियों में हम सभी को इस बारे में विचार करना चाहिए कि कैसे इन समस्याओं के समाधान के लिए हर एक स्तर पर प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अगर एक संस्था अपने स्तर पर पिछले 25 वर्षों से इस प्रयास को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है, तो क्यों नहीं अन्य स्तर पर यह प्रयास आगे बढ़ाया जा सकता है? सीएम योगी ने प्रदेश की राजधानी में अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि आज जब हम दुनियाभर से जुड़े न्यायविदों के इस सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में उपस्थित हुए हैं, ऐसे में सीएमएस लखनऊ के संस्थापक डॉ. जगदीश गांधी की स्मृतियों को नमन करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जिन्होंने विश्व की एकता, अखंडता व न्याय के लिए इंटरनेशनल कॉन्फ्रेस ऑफ चीफ जस्टिसेस के कार्यक्रम का लंबे समय से आयोजन किया तथा इसके माध्यम से एक-दूसरे को समझने व नया संदेश देने का काम किया था। बड़ी लकीर खींचने में महत्वपूर्ण भूमिका का करना होगा निर्वहन सीएम योगी ने कहा कि एक ओर हमारे सामने दुनिया के अंदर की प्रतिस्पर्धा चुनौती के रूप में है, तो वहीं हमारे सामने जलवायु परिवर्तन और उससे उत्पन्न होने वाला संकट भी नई चुनौती के रूप में हैं। उन्होंने कहा कि हमारे सामने इमर्जिंग टेक्नोलॉजी जीवन को सहज और सरल करने में जहां उपयोगी भूमिका का निर्वहन कर रही है, वहीं इसके द्वारा उत्पन्न अभूतपूर्व कानूनी चुनौतियां भी हम सभी के सामने खड़ी हुई हैं, जिसमें साइबर क्राइम, डेटा चोरी और अन्य समस्याएं प्रमुख हैं। ऐसे अस्थिर समय में न्याय, नैतिकता और अंतरराष्ट्रीय कानून विश्व शांति और मानव सभ्यता के लिए बड़ी लकीर खींचने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर सकते हैं। यूएन के द्वारा 80 वर्ष पहले जिन बातों की घोषणा की गई थी, हम सभी को उस पर फिर से विचार करना चाहिए, उन्होंने उस समय कहा था कि दुनिया को अब एक अधिक न्यायपूर्ण, समावेशी और जवाबदेही वैश्विक प्रणाली की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस घोषणा की सार्थकता आज भी उसी रूप में बनी हुई है। भारत की सोच निकाल सकती है वैश्विक चुनौतियों का रास्ता मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि हम केवल उन पुरानी बातों तक सीमित न रहें, बल्कि आज की उन ज्वलंत समस्याओं के बारे में भी हमें विचार करते हुए जलवायु परिवर्तन, साइबर सुरक्षा, स्वास्थ्य के संकट, वैश्विक आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भी मुखर होकर यूएन जैसे प्लेटफॉर्म का बेहतर उपयोग करना चाहिए। एक ऐसे व्यावहारिक और उद्देश्यपरक गठबंधन को जो और भी प्रभावी हो सके, इसे आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस बारे में हमें भारत की उस प्राचीन व्यवस्था पर विचार जरूर करना चाहिए, जहां पर हमने इस पूरी व्यवस्था को पांच अव्यवों पर आधारित माना, जिसमें पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश, इन सभी की उपासना को इसका आधार मानकर भारत की परंपरा ने सदैव इसे अपने जीवन का अंग माना। न केवल इनकी पवित्रता, बल्कि सुरक्षा और संरक्षण को सदैव प्राथमिकता दी गई। उन्होंने कहा कि दुनिया के लिए वर्तमान में जलवायु परिवर्तन की चुनौती हो या फिर इसके माध्यम से उत्पन्न उन वैश्विक संकट के समाधान का रास्ता, भारत की सोच के माध्यम से समाधान का रास्ता निकाल सकती है। आंख बंद करने से नहीं मिलेगा हल, मिलकर निकालना होगा समाधान मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि दुनिया ने इस युग की … Read more