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डीके शिवकुमार ने मानी सच्चाई, कहा- पांच योजनाओं का बोझ झेल रही सरकार

कर्नाटक कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की पांच योजनाओं को लेकर उपमुख्यमंत्री शिवकुमार ने स्वीकार किया है कि यह सरकारी खजाने के ऊपर बोझ हैं। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं को इस गारंटी के साथ तैयार किया गया था कि पैसा नागरिकों के हाथों में रहे, ताकि कठिन समय में उनका आत्मविश्वास कम न हो। उपमुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि भले ही सरकार पर बोझ पड़ता हो, लेकिन वह इन योजनाओं को जारी रखेंगे। बेंगलुरू में मीडिया से बात करते हुए डिप्टी सीएम ने कहा कि राज्य की इन पांच गारंटी योजनाओं का मुख्य उद्देश्य राज्य की जनता को मानसिक रूप से मजबूत बनाना है। हालांकि उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इन योजनाओं में से अपात्र और मृत लोगों को हटाए जाने की जरूरत है। सरकार लगातार इस संबंध में काम कर रही है। गौरतलब है कि उप मुख्यमंत्री जिन योजनाओं का जिक्र कर रहे थे उनमें गृह ज्योति योजना, जिसके अंतर्गत हर परिवार को 200 यूनिट बिजली मुफ्त दी जाती है। इसके अलावा, गृह लक्ष्मी, अन्न भाग्य, युवा निधि और शक्ति योजना जैसी योजनाएं शामिल हैं। यह योजनाएं मुख्यतः जनता को सीधा लाभ देती हैं। शिवकुमार ने स्वीकार कहा, "यह योजनाएं सरकार पर भले ही वित्तीय बोझ डाल सकती हैं, लेकिन सार्वजनिक कल्याण से समझौता नहीं किया जाएगा।" इसी बीच, परिवहन और मुजरा मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने कहा कि विभाग ने आगामी राज्य बजट में 3,000 नई बसों की मांग की है ताकि बेड़े को मजबूत किया जा सके। यह मांग ‘शक्ति’ योजना के लागू होने के बाद बसों में यात्रियों की संख्या में तेज वृद्धि के बीच की गई है। रेड्डी ने सुझावों को खारिज किया कि मुफ्त यात्रा कार्यक्रम परिवहन कंपनियों के घाटे का कारण है। उन्होंने कहा, “शक्ति योजना परिवहन कंपनियों के घाटे का कारण नहीं है। परिवहन कंपनी भाजपा सरकार के दौरान भी घाटे में थी।” उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन को लाभ कमाने के बजाय सेवा के रूप में चलाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा, “हम 35% लाभ कमा रहे हैं। अगर घाटा भी होगा तो हम बसें चलाएंगे। यहां लाभ कमाने का कोई उद्देश्य नहीं है। निजी कंपनियां लाभ न होने पर बसें नहीं चलातीं।” आपको बता दें, कर्नाटक सरकार द्वारा कई लाभकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। मुख्य तौर पर शक्ति जैसी योजनाएं, जिसमें गैर लग्जरी सरकारी बसों में महिलाओं को फ्री टिकट की व्यवस्था है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार की इस स्कीम से राज्य परिवहन विभाग को घाटा हुआ है।  

DK पर दबाव बढ़ा, RSS प्रार्थना के बाद हाईकमान से ऐक्शन की मांग; सिद्धारमैया समर्थक बढ़त में

बेंगलुरु  कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता संघर्ष नई बात नहीं है, लेकिन अब आरएसएस की प्रार्थना के चलते पार्टी में मतभेद है। डिप्टी सीएम शिवकुमार ने श्रद्धा भाव के साथ आरएसएस की प्रार्थना की दो पंक्तियां विधानसभा में पढ़ दी थीं। इसी को लेकर कांग्रेस के कई विधायक नाराज हैं। यही नहीं कोई डीके शिवकुमार से माफी की मांग कर रहा है तो किसी ने हाईकमान से ऐक्शन की बात ही उठा दी है। डीके शिवकुमार ने नेता विपक्ष आर. अशोक से बातचीत के दौरान आरएसएस की ओर से राज्य में स्कूलों और कई सामाजिक संस्थाएं खोलने का जिक्र करते हुए तारीफ की थी। इसके अलावा आरएसएस की प्रार्थना की भी दो पंक्तियां सुनाई थीं। अब इस मामले में वह पार्टी के अंदर ही घिर गए हैं। राज्य के पीडब्ल्यूडी मंत्री सतीश जरकिहोली का कहना है कि हाईकमान और सीएम सिद्धारमैया के ऊपर है कि वह डीके शिवकुमार पर इस हरकत के लिए क्या ऐक्शन लेते हैं। इसके अलावा एमएलसी बीके हरिप्रसाद का कहना है कि डीके शिवकुमार को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिवकुमार पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। कम से कम यह स्पष्ट होना चाहिए कि उन्होंने पार्टी नेता के तौर पर नहीं बल्कि निजी स्तर पर यह प्रार्थना पढ़ी थी। वहीं जरकिहोली ने कहा कि हम अपने स्तर पर तो कुछ नहीं कर सकते। इस मामले में हाईकमान को ही फैसला लेना है। इस मामले के चलते सिद्धारमैया कैंप को भी हावी होने का मौका मिल गया है, जो डीके शिवकुमार की सीएम पद की दावेदारी को लेकर असहज रहा है। जरकिहोली को भी सिद्धारमैया खेमे का नेता माना जाता है। उन्होंने कहा कि यह सवाल तो उठता ही है क्या शिवकुमार ने जो किया, वह राहुल गांधी की लाइन पर है। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों को डीके शिवकुमार समझते ही नहीं हैं। उम्मीद है कि वह कुछ सीखेंगे। हालांकि जरकिहोली ने एक दिन पहले ही डिप्टी सीएम का बचाव भी किया था। उन्होंने कहा था कि आरएसएस की प्रार्थना तो मैं भी पढ़ लूंगा। लेकिन क्या वे मुझे सीएम बना देंगे? यही नहीं उन्होंने कहा था कि हमेशा किसी का विरोध ही नहीं किया जा सकता। यह कहना सही नहीं है कि आरएसएस की प्रार्थना पढ़ ली तो अब डीके शिवकुमार भाजपा में ही शामिल हो जाएं। इसमें कुछ गलत नहीं है। वह सब जानते हैं। हमारे पास हमेशा काउंटर इंटेलिजेंस होना चाहिए। यानी विरोधी खेमे के बारे में भी पता होना चाहिए। वहीं हरिप्रसाद ने कहा कि डीके शिवकुमार को जो करना है करें। लेकिन पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते उन्होंने जो किया है, वह गलत था। हम इसका विरोध करते हैं।