samacharsecretary.com

डिजिटल ट्रैकिंग से परिषदीय शिक्षा में बदलाव, 67 हजार स्कूल जुड़े स्टूडेंट रिपोर्ट कार्ड सिस्टम से

डिजिटल ट्रैकिंग से बदली परिषदीय शिक्षा की तस्वीर, स्टूडेंट रिपोर्ट कार्ड सिस्टम से जुड़े 67 हजार स्कूल योगी सरकार की सख्त मॉनिटरिंग का असर, रिपोर्ट कार्ड डाउनलोड में तेज रफ्तार बागपत, गाजियाबाद, सहारनपुर और सिद्धार्थनगर ने हासिल की 100 प्रतिशत उपलब्धि 01 लाख 06 हजार से अधिक विद्यालयों का हुआ आकलन, 63 प्रतिशत विद्यालयों ने अपनाया डिजिटल मूल्यांकन रियल-टाइम रिपोर्ट कार्ड से बढ़ी जवाबदेही, डेटा आधारित शिक्षा मॉडल की ओर बड़ा कदम परिषदीय शिक्षा अब पारंपरिक ढांचे से आगे, डिजिटल और परिणाम आधारित मॉडल की ओर अग्रसर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था ‘डिजिटल गवर्नेंस’ और ‘रिजल्ट आधारित मॉनिटरिंग’ के नए मानक स्थापित कर रही योगी सरकार लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की परिषदीय शिक्षा व्यवस्था तेजी से डिजिटल, पारदर्शी और परिणामोन्मुख मॉडल की ओर बढ़ रही है। निपुण विद्यालय मूल्यांकन के अंतर्गत प्रदेश के 01 लाख 06 हजार से अधिक विद्यालयों का आकलन किया गया, जिनमें से 67 हजार 200 (21 अप्रैल तक) से अधिक विद्यालयों ने विद्यार्थियों के रिपोर्ट कार्ड डाउनलोड कर नई डिजिटल व्यवस्था को अपनाया है। यह कुल का लगभग 63 प्रतिशत है, जो राज्य में डिजिटल शिक्षा की तेजी से बढ़ती स्वीकार्यता को पुष्ट कर रहा है। यह उपलब्धि बेसिक शिक्षा विभाग की तकनीकी प्रगति का मजबूत संकेत हैं। शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता स्थापित करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है। डिजिटल रिपोर्ट कार्ड डाउनलोड सिस्टम के माध्यम से अब छात्रों की प्रगति का आकलन अधिक सटीक और त्वरित तरीके से संभव हो रहा है, जिससे अभिभावकों और शिक्षकों के बीच संवाद भी सशक्त हुआ है। अभिभावकों को घर बैठे बच्चों की प्रगति की पूरी जानकारी डिजिटल रिपोर्ट कार्ड प्रणाली के अन्तर्गत अब विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन को पूरी तरह तकनीकी प्लेटफॉर्म पर दर्ज और साझा किया जा रहा है, जिससे पारंपरिक कागजी प्रक्रिया की जगह पारदर्शी, तेज और प्रभावी व्यवस्था विकसित हुई है। इस प्रणाली में छात्रों के अंक, ग्रेड, उपस्थिति और समग्र प्रगति का डेटा ऑनलाइन उपलब्ध रहता है, जिसे अभिभावक कभी भी देख सकते हैं। इससे विद्यालयों और बेसिक शिक्षा विभाग को वास्तविक समय में मूल्यांकन और निगरानी करने में सुविधा भी मिल रही है। 'डिजिटल गवर्नेंस’ और ‘रिजल्ट आधारित मॉनिटरिंग’ के नए मानक स्थापित कर रही है योगी सरकार योगी सरकार के नेतृत्व में प्रदेश की परिषदीय शिक्षा व्यवस्था ‘डिजिटल गवर्नेंस’ और ‘रिजल्ट आधारित मॉनिटरिंग’ के नए मानक स्थापित कर रही है। तकनीक के व्यापक उपयोग पर विशेष जोर का ही परिणाम है कि विद्यालयों में डिजिटल प्लेटफॉर्म की स्वीकार्यता तेजी से बढ़ी है। शिक्षा अब डेटा-आधारित और परिणामोन्मुखी बन रही है। रिपोर्ट कार्ड डाउनलोड में टॉप प्रदर्शन करने वाले जनपद स्टूडेंट रिपोर्ट कार्ड डाउनलोड के मामले में कई जनपदों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। बागपत, गाजियाबाद, सहारनपुर और सिद्धार्थनगर ने 100 प्रतिशत उपलब्धि हासिल कर शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। इसके अलावा संत कबीर नगर (97%), फिरोजाबाद (94%), फतेहपुर (94%), अंबेडकर नगर (93%), चंदौली (91%) और मऊ (90%) ने भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले अन्य जनपद जालौन (88%), कुशीनगर (87%), कानपुर देहात (86%), गौतम बुद्ध नगर (86%), कासगंज (85%), पीलीभीत (84%), अमेठी (84%), गोंडा (83%), एटा (82%), सुल्तानपुर और हापुड़ (81%) ने उपलब्धि हासिल की है।

उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों को मिलने वाले बीज की होगी डिजिटल ट्रैकिंग

लखनऊ.  उत्तर प्रदेश सरकार गन्ना किसानों को डिजिटल माध्यमों से राहत प्रदान करने का बड़ा कदम उठा रही है। इसी क्रम में गन्ना किसानों को बेहतर पैदावार के लिए नए बीज ट्रैकिंग सिस्टम से जोड़ा जाएगा, ताकि उत्पादन और आय को बढ़ाया जा सके। प्रदेश सरकार की मंशा के मुताबिक गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग एक नया मोबाइल ऐप तैयार करा रहा है, जिसके जरिए गन्ना शोध केंद्रों से निकलने वाले बीजों की किसानों के खेत में पहुंचने तक ट्रैकिंग होगी।  एडिशनल केन कमिश्नर, यूपी, वीके शुक्ला का कहना है कि किसान प्रदेश सरकार की प्राथमिकता हैं। गन्ने की खेती में यूपी का योगदान बेहद अहम रहा है। ऐसे में विभाग गन्ना किसानों की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहा है। नया मोबाइल ऐप गन्ने के बीज वितरण की ट्रैकिंग से किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध होगा। इससे गन्ना उत्पादन में बढ़ोतरी होगी। ऐप लॉचिंग को लेकर तैयारी तेजी से चल रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग ने बीजों की कालाबाजारी पर पूरी तरह नियंत्रण का प्लान बनाया है। प्लान के तहत गन्ना किसानों को उच्च गुणवत्ता वाला बीज उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही इन बीजों की सीड (बीज) ट्रेस एंड ट्रैक मोबाइल ऐप के जरिए ट्रैकिंग की जाएगी। इससे बीज की ट्रैकिंग से उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को काफी लाभ होगा। किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज मिलने के साथ उत्पादन भी बढ़ने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि अच्छे बीज से बढ़िया पैदावार होने पर किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। यूपी-गुजरात की मदद से तैयार हो रहा मोबाइल ऐप गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग लखनऊ मुख्यालय के जिला गन्ना अधिकारी विजय बहादुर सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार की मंशा के मुताबिक विभाग कई विभागों की मदद से नया मोबाइल ऐप तैयार कर रहा है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश रिमोट सेंसिंग एप्लिकेशन सेंटर, गुजरात के भास्कराचार्य नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस एप्लिकेशन एंड जियो-इंफॉर्मेटिक्स (बीआईएसएजी-एन) इंस्टिट्यूट मिलकर गन्ना किसानों के लिए सीड (बीज) ट्रेस एंड ट्रैक मोबाइल ऐप तैयार कर रहे हैं। विजय बहादुर सिंह ने बताया कि सबसे अच्छी बात है कि नए डिटिजल ऐप को तैयार करने में एक रूपये भी विभाग का खर्च नहीं हो रहा है। ये सारा काम पीएम गति शक्ति योजना के तहत किया जा रहा है। बीजों की ट्रैकिंग वाली ये मोबाइल ऐप एक से दो महीने में लॉन्च हो जाएगी। फिलहाल इसकी टेस्टिंग चल रही है। ऐप का जमीनी स्तर पर भी परिक्षण किया जाएगा। सीड (बीज) ट्रेस एंड टेस्टिंग ऐप के फायदे गन्ने का बीज तीन से चार चरणों के बाद किसानों तक पहुंचता है। सबसे पहले गन्ने का कोई भी बीज शोध केंद्रों से निकलता है। इसके बाद गन्ना विकास परिषद (आधार बीज उत्पाद केंद्र) तक पहुंचता है। फिर प्राथमिक बीज उत्पादन नर्सरी तक जाता है। यहां से किसानों को वितरित होना शुरू होता है। इतने सारे चरणों में बीज की ट्रैकिंग संभंव नहीं हो पाती थी, लेकिन नए मोबाइल ऐप के जरिए यह संभंव हो पाएगा। किसान को मोबाइल ऐप पर ही बीज की उपलब्धता पता चलेगा। यहां से वह विभाग को बीज की मांग (डिमांड) भेज सकता है। फिर गन्ना विकास परिषद में तैनात गन्ना पर्यवेक्षक हर जिले में आने वाली डिमांड की उपलब्धता के आधार पर आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। मोबाइल ऐप पर गन्ना बीज पाने वाले किसानों का भी डाटा उपलब्ध रहेगा। इससे अगले चरण में उत्पादन की ट्रैकिंग भी आसान हो जाएगी। ट्रैकिंग शुरू होने से गन्ने की वैराइटी को पैदावार के हिसाब से आगामी वर्षों में बदलना आसान हो पाएगा। फैक्ट फाइल यूपी में गन्ना किसान – 46.50 लाख (चीनी मीलों को सप्लाई करने वाले) कुल गन्ना उत्पादन – 83.25 टन प्रति हेक्टेयर कुल गन्ना बोआई (पिछले वर्ष) – 28.61 लाख हेक्टेयर