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फगवाड़ा में हादसे से हड़कंप, सर्विस रिवॉल्वर से चली गोली, DSP ने गंवाई जान

फगवाड़ा. फगवाड़ा में डीएसपी योगेश कुमार की सरकारी रिवॉल्वर से ही गोली चलने से मौत हो गई है। मिली जानकारी के अनुसार यह घटना सुबह करीब 7:30 बजे पुलिस स्टेशन सदर फगवाड़ा के पास स्थित उनके सरकारी क्वार्टर में हुई। बताया जा रहा है कि गोली उनके सीने में लगी. जिसके बाद उन्हें तुरंत जालंधर के जोहल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सूत्रों के अनुसार, डीएसपी योगेश कुमार हाल ही में एएनटीएफ पंजाब से ट्रांसफर होकर चंडीगढ़ में एजीसीएमएस, बीओआई में तैनात किए गए थे। एसपी फगवाड़ा माधवी शर्मा ने बताया कि सुबह वो अपनी सरकारी रिवॉल्वर को साफ कर रहे थे तो अचानक से गोली चल गई जोकि डीएसपी योगेश कुमार की छाती पर लगी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया तो वहां पर डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

प्यार के नाम पर करोड़ों की उगाही? DSP कल्पना पर गंभीर आरोप, कारोबारी ने दिए ढाई करोड़ के गिफ्ट

रायपुर रायपुर में पुलिस विभाग की साख पर गंभीर सवाल खड़ा करने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक कारोबारी दीपक टंडन ने महिला DSP कल्पना वर्मा पर रिश्वत लेने, ब्लैकमेलिंग करने और धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित का दावा है कि डीएसपी ने प्यार और शादी का झांसा देकर उससे करोड़ों रुपये, महंगी गाड़ियां और कीमती गहने ऐंठ लिए।    कारोबार‌री का आरोप- ‘शादी का झांसा देकर करोड़ों ले गईं’ दीपक टंडन के मुताबिक उनकी मुलाकात साल 2021 में DSP से हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच नज़दीकियां बढ़ीं। आरोप हैं कि डीएसपी ने लगातार पैसों की मांग की, कारोबारी ने दो करोड़ रुपये से ज्यादा रकम दी, 12 लाख की हीरे की अंगूठी, 5 लाख की सोने की चेन व टॉप्स, 1 लाख का ब्रेसलेट भी गिफ्ट किया। एक इनोवा क्रिस्टा कार भी डीएसपी को दी। DSP ने अपने भाई के नाम पर कारोबारी के रायपुर VIP रोड स्थित होटल की रजिस्ट्री करवा ली और बाद में लगभग 30 लाख खर्च कर उसे अपने नाम करवा लिया। कारोबारी का कहना है कि जब उसने यह सब देने से इंकार किया, तो DSP ने उसे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया।   पुलिस को दिए सबूत पीड़ित दीपक टंडन का दावा है कि उन्होंने खम्हारडीह थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए व्हाट्सऐप चैट, CCTV फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्य पुलिस को सौंपे हैं। वह कहते हैं कि जब उन्होंने शिकायत वापस नहीं ली, तो डीएसपी ने उन्हें फर्जी मामलों में फंसाकर जेल भेजने की धमकी दी।   DSP का जवाब- यह बदनाम करने की साज़िश मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए DSP कल्पना वर्मा ने सभी आरोपों को झूठा और निराधार बताया। उनका कहना है कि यह पूरी कहानी उन्हें बदनाम करने की साज़िश है, वह किसी भी तरह की जांच का सामना करने को तैयार हैं।   पुलिस जांच शुरू उच्च पुलिस अधिकारियों ने मामले का संज्ञान ले लिया है और जांच प्रारंभ कर दी है। मामले की सच्चाई जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी।

सरकारी स्कूल से DSP तक: पूजा जाट की सफलता की कहानी

नीमच मध्य प्रदेश के नीमच जिले के लिए बेहद की गर्व का क्षण है। दरअसल, जीरन तहसील के छोटे से गांव हरवार की बेटी पूजा जाट ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की प्रतिष्ठित परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की है। पूजा ने उप-पुलिस अधीक्षक (DSP) के पद के लिए क्वालिफाई किया है। पूजा जाट पिता बलवीर सिंह जाट के लिए यह सफलता कई मायनों में खास है। उनका परिवार खेती-किसानी से जुड़ा है, जहां उनके माता-पिता और भाई किसान हैं। पूजा ने अपनी पूरी शिक्षा सरकारी स्कूल और कॉलेज से प्राप्त की है। ये भी पढ़ें: MPPSC 2023 का फाइनल Result जारी: टॉप 5 में लड़कों का दबदबा, 13 लड़कियां बनीं DSP, किसान के बेटे अजीत मिश्रा ने किया टॉप, CM डॉ. मोहन ने दी बधाई पढ़ाई के लिए सामाजिक दबाव का किया सामना बेटी को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना और उसे इंदौर जैसे बड़े शहर भेजकर पढ़ाना परिवार के लिए एक बड़ी चुनौती थी। बताया जाता है कि परिवार को पूजा की पढ़ाई को लेकर कई सामाजिक दबावों का सामना भी करना पड़ा। हालांकि, पिता बलवीर सिंह जाट और परिवार के समर्थन के दम पर पूजा ने यह मुकाम हासिल किया है। गांव समेत जिलेभर में खुशी का माहौल पूजा की इस उपलब्धि से हरवार गांव और समूचे नीमच जिले में खुशी का माहौल है। उनकी यह सफलता उन ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए भी एक बड़ा उदाहरण है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। टॉप 5 में लड़कों ने मारी बाजी MPPSC में टॉप 5 में लड़कों ने बाजी मारी है। वहीं 13 लड़कियों ने DSP रैंक हासिल की है। जबकि टॉप 10 में भी 3 लडकियां शामिल हैं। बता दें कि कुल 229 पदों के लिए प्री एग्जाम दिसंबर 2023 में हुआ था। वहीं मुख्य परीक्षा 11 मार्च से 16 मार्च 2024 में हुई और फाइनल इंटरव्यू 7 जुलाई से 7 अगस्त के बीच हुआ था।

बलिदान को मिला सम्मान: शहीद एएसपी की पत्नी की डीएसपी पद पर नियुक्ति

रायपुर  छत्तीसगढ़ सरकार ने बलिदानी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) आकाश राव गिरिपूंजे की पत्नी स्नेहा गिरिपूंजे को अनुकंपा के आधार पर उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) के पद पर नियुक्त किया है। यह निर्णय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मंत्रिमंडल द्वारा पहले ही लिया जा चुका था। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आकाश राव गिरिपूंजे नौ जून को सुकमा जिले में माओवादियों द्वारा किये गये आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) विस्फोट की चपेट में आने के कारण गंभीर रूप से घायल हो गये थे। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री साय ने उनकी मृत्यु पर गहरा दुख व्यक्त किया था। हाल ही में स्नेहा का एक बयान सामने आया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे किसी अन्य विभाग का विकल्प चुन सकती थी, लेकिन उन्होंने पुलिस को सेवा को ही चुना। यह वह विभाग है, जिसे वह सबसे अच्छी तरह समझती हैं। उनका कहना है कि उनके पति ने उन्हें कभी कमजोर नहीं समझा। वह सभी चुनौतियों को स्वीकार कर सकती हैं। उनका कहना है कि वर्दी हमेशा साहेब यानी उनके बलिदानी पति को उनके करीब रखेगी।

संकटों को पछाड़कर रची सफलता की कहानी, हरियाणा की बहादुर बेटी बनीं DSP

नारनौल  हरियाणा के नारनौल की रहने वाली अंजू यादव ने राजस्थान पुलिस में DSP भर्ती होकर अपने परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। जयपुर स्थित राजस्थान पुलिस अकादमी में आयोजित 55वें बैच के दीक्षांत परेड समारोह में 37 वर्षीय अंजू यादव ने राजस्थान पुलिस सेवा  में हुआ चयन।  अंजू ने ये मुकाम यूं ही हासिल नहीं किया। मुश्किल परिस्थितियों का लगातार सामना कर वह यहां तक पहुंचीं। करीब चार साल पहले पति को खोने के बाद भी उन्होंने हौसला नहीं टूटने दिया और लगातार मेहनत करती रहीं।वे मूल रूप से नारनौल के गांव धौलेड़ा की रहने वाली हैं। उनकी शादी अलवर जिले की बहरोड़ तहसील के गंडाला गांव में हुई थी। उन्होंने अपने समर्पण और संघर्ष से न केवल अपने परिवार, बल्कि हरियाणा और राजस्थान दोनों राज्यों का नाम रोशन किया है।     स्कूली शिक्षा से कॉलेज तक का सफर : अंजू चार बहनों में सबसे बड़ी हैं। उन्होंने अपने गांव धोलेड़ा के राजकीय स्कूल से बाहरवीं तक की पढ़ाई की। इसके बाद डिस्टेंस लर्निंग से स्नातक की पढ़ाई की तथा नारनौल के गवर्नमेंट कॉलेज आफ एजुकेशन से बीएड की पढ़ाई की।     छोटी उम्र में हो गई थी शादी : अंजू यादव की कहानी बड़ी संघर्ष भरी है। अंजू की शादी छोटी उम्र में ही 2009 में हो गई थी। जिसके बाद 2012 में उसके बेटा हुआ। वहीं 2021 में उनके पति का बीमारी के चलते देहांत हो गया।     सरकारी जॉब लगने वाली पहली महिला : अंजू ने बताया कि वे मायका व ससुराल में सरकारी नौकरी लगने वाली पहली महिला हैं। वे शुरू में मध्यप्रदेश के भिंड में 2016 से 18 तक जवाहर नवोदय विद्यालय में टीचर लगी। इसके बाद वे 2019 तक राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल जयपुर में टीचर लगी।     5 साल दिल्ली में सरकारी टीचर रहीं : अंजू के मुताबिक 2019 से 2024 तक वह दिल्ली में सरकारी टीचर रहीं। 27 मई 2024 में उन्होंने DSP जयपुर ज्वाइन किया। उन्होंने बताया कि आरपीएस बनने के लिए 2021 में वैकेंसी निकली थी।     2022 में हुई परीक्षा, एक साल बाद इंटरव्यू :  इसके बाद 2022 में मुख्य परीक्षा हुई। 2023 में इंटरव्यू हुआ। रिजल्ट भी 2023 में ही आ गया था। इसे बाद उसने मई 2024 DSP पद पर ज्वाइन किया था। 47 माह की ट्रेनिंग पूरी होने के बाद बीते कल दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया।     47 माह लिया प्रशिक्षण :  राजस्थान पुलिस अकादमी में आरपीएस अधिकारियों को लगभग 47 सप्ताह का गहन प्रशिक्षण दिया जाता है। इस दौरान कानून व्यवस्था, पुलिसिंग के कानूनी पहलुओं, साइबर क्राइम, फोरेंसिक साइंस, क्रिमिनोलॉजी और सॉफ्ट स्किल्स पर विशेष ध्यान दिया जाता है। साथ ही देश की प्रमुख पुलिस अकादमी भोपाल, गांधीनगर और अहमदाबाद के शैक्षिक दौरे भी कराए गए।     दीक्षांत परेड समारोह में ली शपथ :  दीक्षांत परेड समारोह में अंजू यादव ने मंच पर शपथ ग्रहण करते हुए देश और समाज की सेवा के प्रति निष्ठा व समर्पण का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा उनके लिए केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि जनता की सुरक्षा और न्याय दिलाने का दायित्व है। ​​​पिता की वो बात, जिससे अंजू को हमेशा मिली प्रेरणा… अंजू यादव ने बताया कि मेरे प्रेरणा स्त्रोत मेरे पिता लालाराम है। अशिक्षित होते हुए भी उन्होंने मुझे पढ़ाया, समाज के ताने सहे और मेरे बेटे को उन्होंने ही पाला। मुझे अपने पास रखा। पिता की एक लाइन 'काला सिर का आदमी कुछ भी कर सकता है', ने हमेशा बहुत प्रेरित किया। इसका मतलब है अगर इंसान सोच ले तो कुछ भी असंभव नहीं है। हमेशा उनको मेहनत करते हुए देखा और प्रेरणा मिली। वो इस उम्र में हार नहीं मान सकते तो मैं कैसे मान सकती हूं। मेरी बहनों ने बेटे का और मेरा ध्यान रखा। मां ने बेटे को अपने बेटे की तरह पाला। मेरे बेटे मुकुल दीप ने भी मुझे बहुत प्रेरित किया। वह मेरे बिना रहा। जब भी उसको देखती, तो लगता कुछ करना है। इनके बिना जीवन की कल्पना असंभव है।