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उपभोक्ताओं के हित में हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, बिजली कनेक्शन से जुड़े विवाद पर मिली राहत

जीरकपुर. जीरकपुर की सुषमा वैलेंसिया सोसाइटी में रहने वाले 500 से ज़्यादा परिवारों को बड़ी राहत देते हुए पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने साफ किया है कि किसी बिल्डर द्वारा लोगों से करोड़ों रुपये इकट्ठा करके प्रोजेक्ट अधूरा छोड़ देने के के कारण नागरिंकों को बेसिक सुविधाओं से वंचित नहीं रखा जा सकता। अदालत ने कहा कि नागरिकों को प्रशासनिक प्रणाली की नाकामी का खामियाजा नहीं भुगतना चाहिए और चिलचिलाती गर्मी में बच्चों, बुज़ुर्गों और महिलाओं को बिजली जैसी जरूरी सुविधाओं से वंचित नहीं रखा जा सकता। ये टिप्पणी तब सामने आईं जब सुषमा वैलेंसिया अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन की तरफ से दायर की गई एक पिटीशन की सुनवाई के दौरान कोर्ट के ध्यान में लाया गया कि सोसाइटी में सैकड़ों परिवार रह रहे हैं, जबकि प्रोजेक्ट के डेवलपर्स कथित तौर पर प्रोजेक्ट अधूरा छोड़कर गायब हो गए हैं। इस वजह से लोग लंबे समय से नियमित बिजली कनेक्शन के लिए जूझ रहे हैं। जिदगी भर की कमाई खर्च करके खरीदे फ्लैट: पिटीशनर पिटीशनर ने कोर्ट को बताया कि लोगों ने जिंदगी भर की कमाई खर्च करके फ्लैट खरीदे थे, लेकिन अब वह बेसिक सुविधाओं के लिए भी दर-दर की ठोकरें खाने के लिए मजबूर हैं।  सुनवाई के दौरान PSPCL ने कोर्ट को बताया कि अगर लोग करीब 4.44 करोड़ रुपये की बकाया रकम जमा कर दें तो बिजली कनेक्शन जारी किए जा सकते हैं। इसके उलट एसोसिएशन ने दलील दी कि यह जिम्मेदारी लोगों की नहीं, बल्कि बिल्डर की है, जिसने लोगों से करोड़ों रुपये वसूलने के बाद प्रोजेक्ट अधूरा छोड़ दिया। 20 हजार रुपये जमा करने पर मिलेगा टेम्पररी कनेक्शन हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए कहा कि हर वह निवासी जो नॉर्मल चार्ज के साथ 20 हजार रुपये जमा करता है, उसे टेम्पररी बिजली कनेक्शन दिया जाए। कोर्ट ने साफ किया कि यह सिर्फ एक अंतरिम व्यवस्था होगी और इससे परमानेंट कनेक्शन का कोई अधिकार नहीं बनेगा। साथ ही, PSPCL, GMADA और दूसरे संबंधित डिपार्टमेंट को भी इस समस्या का परमानेंट समाधान निकालने के लिए एक जॉइंट मीटिंग करने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 19 जून को होगी। 150 परिवार दूसरी जगहों पर रहने को मजबूर  सोसाइटी के लोगों का कहना है कि बिजली की लंबे समय से चली आ रही समस्या के कारण हालात इतने गंभीर हो गए थे कि करीब 150 परिवार सुषमा वालेंसिया छोड़कर दूसरी जगहों पर रहने को मजबूर हो गए थे। लोगों का कहना है कि जिन लोगों ने करोड़ों रुपये खर्च कर इन्वेस्टमेंट के तौर पर फ्लैट खरीदे थे, उनके किराएदार भी एक-एक करके दूसरी सोसाइटियों में चले गए, जिससे फ्लैट मालिकों को भारी फाइनेंशियल नुकसान उठाना पड़ा। अब हाईकोर्ट के दखल के बाद लोगों को उम्मीद है कि लंबे समय से चली आ रही यह मुश्किल आखिरकार हल की ओर बढ़ेगी। हाईकोर्ट के आदेशों का पालन करेंगे: गिल मामले को लेकर पावरकॉम के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर अमनदीप सिंह गिल ने कहा कि पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के आदेशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अभी सोसायटी के लिए कोई डेडिकेटेड फीडर नहीं है, लेकिन जल्द ही वहां फीडर पहुंचा दिया जाएगा ताकि कोर्ट के निर्देशों के अनुसार योग्य लोगों को टेम्पररी बिजली कनेक्शन जारी किए जा सकें।

पावरकॉम की नई योजना: पंजाब के परिवारों को डायरेक्ट बिजली कनेक्शन की सुविधा

जीरकपुर/चंडीगढ़. अधूरी कॉलोनियों में बुनियादी सुविधाओं से वंचित जीवन जी रहे हजारों परिवारों के लिए राहत की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए पावरकॉम ने राज्य स्तर पर सख्त और स्पष्ट आदेश जारी किए हैं। 30 मार्च 2026 को जारी इन आदेशों में पूरे पंजाब के बिजली अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जिन कॉलोनियों/सोसायटियों में बिल्डरों ने जरूरी नियमों का पालन नहीं किया, उन मामलों की पहचान करके संबंधित लाइसेंसिंग अथॉरिटीज को आधिकारिक नोटिस भेजे जाएं और आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। सबसे जरूरी बात यह है कि अगर किसी कॉलोनी का लाइसेंस सस्पेंड या कैंसल हो जाता है और उसे खाली घोषित कर दिया जाता है, तो वहां रहने वाले लोग तय प्रोसेस पूरा करने के बाद सीधे पावरकॉम से बिजली कनेक्शन ले सकेंगे। यह आदेश पावरकॉम के चीफ इंजीनियर (कमर्शियल) कार्यालय द्वारा जारी कर पूरे राज्य के इंजीनियर-इन-चीफ और चीफ इंजीनियर (डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम) तक भेजे गए हैं, जिससे स्पष्ट है कि यह कदम किसी एक शहर तक सीमित नहीं बल्कि पूरे पंजाब में लागू होगा। इस कार्रवाई का आधार पीएसईआरसी (PSERC) द्वारा हाल ही में किए गए संशोधन हैं, जिनके तहत सप्लाई कोड-2024 के अनुसार अधूरी कॉलोनियों और डिफॉल्ट करने वाले बिल्डरों के मामलों में सख्ती के निर्देश दिए गए हैं। आदेश के अनुसार, यदि कोई बिल्डर या प्रमोटर आवश्यक एनओसी प्राप्त नहीं करता, बैंक गारंटी जमा नहीं करता या कॉलोनी में बिजली से संबंधित बुनियादी ढांचा जैसे ट्रांसफॉर्मर, केबल और वितरण प्रणाली पूरी नहीं करता, तो उसका लाइसेंस सस्पेंड या रद्द किया जा सकता है। पावरकॉम ने आदेश दिए हैं कि ऐसे मामलों को दस्तावेज़ी रूप से चिन्हित कर पुड्डा, गमाडा, पीडीए और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग जैसे विभागों को नोटिस भेजे जाएं। यह प्रक्रिया कॉलोनी को खाली घोषित करने के लिए जरूरी शर्त होगी। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि संबंधित सरकारी प्राधिकरण तीन महीनों के भीतर बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता, तो पावरकॉम खुद अदालत का रुख करेगा और आवश्यक आदेश लेकर आगे कार्रवाई करेगा। इससे पहली बार बिजली विभाग सिर्फ सप्लाई एजेंसी से आगे बढ़कर सक्रिय भूमिका निभाता नजर आएगा। सीधे बिजली कनेक्शन दिए जाएंगे – सबसे ज़रूरी बात यह है कि अगर किसी कॉलोनी का लाइसेंस सस्पेंड या कैंसल होता है और उसे खाली घोषित कर दिया जाता है, तो वहां रहने वाले लोग तय प्रोसेस पूरा करने के बाद सीधे पावरकॉम से बिजली कनेक्शन ले सकेंगे, भले ही बिल्डर ने प्रोजेक्ट अधूरा छोड़ दिया हो। हालांकि, इसके लिए कॉलोनी का ऑफिशियली खाली घोषित होना ज़रूरी होगा और इस बारे में नॉर्म्स तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें रेगुलेटरी अप्रूवल के बाद लागू किया जाएगा। अब बिल्डर की लापरवाही की वजह से लोगों को अंधेरे में नहीं रहना पड़ेगा। ऑर्डर में यह भी कहा गया है कि ऐसे प्रोजेक्ट्स में अधूरे बिजली सिस्टम को पूरा करने का अनुमानित खर्च पावरकॉम तैयार करके संबंधित डिपार्टमेंट्स के सामने रखेगा। सर्विस कनेक्शन चार्ज के तौर पर भी कुछ खर्च वसूल यह भी इशारा किया गया है कि इस प्रोसेस में कुछ खर्च ऐसे प्रोजेक्ट्स में रहने वालों से सर्विस कनेक्शन चार्ज के तौर पर भी वसूला जा सकता है, जिससे यह साफ है कि राहत के साथ-साथ लोगों पर कुछ फाइनेंशियल जिम्मेदारी भी आ सकती है। हाल के बिजली संकट और ज़ीरकपुर और आसपास के इलाकों में अधूरी कॉलोनियों के मामले में इस ऑर्डर को काफी अहम माना जा रहा है। हालांकि, यह भी उतना ही साफ है कि डायरेक्ट बिजली कनेक्शन का रास्ता तभी खुलेगा जब नोटिस जारी करने से लेकर लाइसेंस प्रोसेस करने और छोड़ने की घोषणा करने तक का पूरा प्रोसेस कानूनी और एडमिनिस्ट्रेटिव तरीके से पूरा हो जाएगा। इस पूरे ऑर्डर का मैसेज यह है कि अगर बिल्डर अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाता है, तो बिजली सप्लाई की स्थिति स्थिर नहीं रहेगी। तय प्रोसेस के जरिए एडमिनिस्ट्रेटिव मशीनरी को एक्टिवेट करके, आखिरकार निवासियों को बिजली देने का रास्ता तैयार किया जा रहा है, हालांकि सब प्रोसीजरली और नियमों के दायरे में ही लागू किया जाएगा। विभाग को ऐसे आदेश क्यों जारी करने पड़े पंजाब में कई कॉलोनियों/सोसायटियों में बिल्डरों ने बिजली का बुनियादी ढांचा पूरा किए बिना ही लोगों को बसाया, जिससे निवासी आवश्यक सुविधाओं से वंचित रह गए। कई बड़े प्रोजेक्ट्स में बिल्डरों ने सिंगल पॉइंट मीटर लेकर निवासियों से प्रीपेड मीटर के जरिए पैसे वसूले, लेकिन वह राशि पावरकॉम को जमा नहीं करवाई। इसके कारण जब बिल्डरों पर लाखों रुपये बकाया हो गए तो बिजली काट दी गई, और पूरा भुगतान करने के बावजूद निवासी अंधेरे में रहने को मजबूर हो गए। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए सरकार के निर्देशों और नियमों के तहत यह सख्त आदेश जारी किए गए हैं।

बिजली कनेक्‍शन में नाम परिवर्तन करना हुआ आसान

भोपाल. मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने कंपनी कार्य क्षेत्र के भोपाल,  नर्मदापुरम, ग्‍वालियर एवं चंबल संभाग अंतर्गत आने वाले 16 जिलों के विद्युत उपभोक्ताओं को कंपनी के सरल संयोजन पोर्टल के माध्‍यम से विद्युत कनेक्‍शन के नाम में परिवर्तन करने के लिए ऑनलाइन सुविधा उपलब्‍ध कराई है। अब उपभोक्‍ताओं को उनके परिसरों में पूर्व से विद्यमान कनेक्‍शन के नाम में परिवर्तन करना बेहद आसान हो गया है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने कहा है कि जिन उपभोक्ताओं को अपने मीटर से संबंधित नाम में परिवर्तन करना है वह कंपनी की वेबसाइट https://portal.mpcz.in/web/ में एलटी सर्विसेस के एलटी अदर सर्विसेस में दिये गये नेम ट्रांसफर अथवा सीधे  https://saralsanyojan.mpcz.in पर जाकर अदर यूजफुल लिंक्‍स में दिये गये अप्‍लाय फॉर अदर सर्विसेस के माध्‍यम से आसानी से करा सकते हैं।   कंपनी ने कहा है कि विद्युत उपभोक्ताओं को नाम परिवर्तन के लिए ऑनलाइन आवेदन करने के दौरान अपना आईवीआरएस नंबर,संबंधित समग्र आईडी,पैन कार्ड एवं आवश्‍यक दस्‍तावेज अपलोड करने के उपरांत लिंक मोबाइल नंबर पर प्राप्‍त ओटीपी दर्ज कर निर्धारित शुल्‍क 170/- रूपये का भुगतान करना होगा। ऑनलाइन आवेदन देने के पश्चात उपभोक्ता आवेदन क्रमांक अथवा मोबाइल नंबर से आवेदन की स्थिति भी देख सकते हैं।  

खुशखबरी: हरियाणा के बिजली उपभोक्ताओं को तीन दिन में मिलेगा नया कनेक्शन

चंडीगढ़ हरियाणा में बिजली का कनैक्शन हासिल करने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। चाहे अस्थाई कनेक्शन हासिल करना हो या फिर स्थाई कनैक्शन के लिए अप्लाई किया हो हरेक सेवा के लिए समय सीमा को कर दिया गया है। राज्य सरकार की ओर से जो नोटिफिकेशन जारी किया गया है उसके अनुसार अब महानगरीय क्षेत्रों में एल.टी. आपूर्ति के लिए बिजली का स्थाई कनेक्शन निगमों द्वारा तीन दिन के अंदर जारी किया जाएगा। जबकि नगरपालिका क्षेत्रों में यह समयसीमा सात दिन तय की गई है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्र में अगर कोई नया बिजली का कनेक्शन हासिल करना चाहता है तो 15 दिन के भीतर प्रोसेस पूरा हो जाएगा। अतिरिक्त भार जारी करने के लिए भी यही समय सीमा तय की गई है। हालांकि नोटिफिकेशन में यह भी बताया गया है कि जहां प्रणाली का विस्तार कार्य चल रहा है वहां समय सीमा 34 दिन तक हो सकती है। अगर किसी उपभोक्ता को अस्थाई कनेक्शन चाहिए तो उसके लिए भी वही समय सीमा होगी जो कि स्थाई कनेक्शन के लिए तय की गई है। नोटिफिकेशन में इस कार्य के लिए अधिकारियों की भी जिम्मेदारी सुनिश्चित की गई है। स्थाई और अस्थाई कनेक्शन जारी करने के लिए उपमंडल अधिकारी (ऑपरेशंस), कार्यकारी अभियंता और अधीक्षण अभियंता को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है।   इससे पहले राज्य सरकार की तरफ से नवम्बर 2023 में उपभोक्ताओं को विभिन्न प्रकार की सेवांए देने के लिए समयसीमा जारी की गई थी। जिसमें स्थाई कनैक्शन हासिल करने या फिर अतिरिक्त लोड के लिए निगमों को 37 दिन का समय दिया जाता था जिस कारण कई दिनों तक उपभोक्ताओं को बिना बिजली के रहना पड़ता था। जबकि 11 के.वी. आपूर्ति के नए कनैक्शन के लिए 78 दिन तक लगते थे। इसी तरह एल. टी. आपूर्ति का अस्थाई कनेक्शन जारी करने में भी 19 दिन का समय लिया जाता था। इस वजह से सबसे बड़ी परेशानी बड़े-बड़े उद्योग भी झेल रहे थे जिन्हें नए कनैक्शन के लिए कई दिनों का इंतजार करना पड़ता था।