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60 Cr फ्रॉड केस: राज कुंद्रा पर शिकंजा, EOW ने तलब किया

 मुंबई    शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा को 60.48 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. पिछले हफ्ते ही मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने दोनों के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी किया था. अब इस मामले में मुंबई पुलिस ने एक्शन लेते हुए शिल्पा शेट्टी के पति और बिजनेसमैन राज कुंद्रा को समन जारी किया है. जानकारी के मुताबिक, यह मामला 13 अगस्त को दर्ज हुआ था. राज कुंद्रा अब 15 सितंबर (सोमवार) को EOW दफ्तर पहुंचकर बयान दर्ज कराएंगे. EOW के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, ‘बुधवार (10 सितंबर) को राज कुंद्रा को पूछताछ के लिए बुलाया गया था, लेकिन उन्होंने अपने प्रतिनिधि के जरिए निवेदन किया कि वे सोमवार (15 सितंबर) को शामिल होंगे.’ क्यों जारी हुआ था लुक आउट सर्कुलर पिछले हफ्ते, EOW ने शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया था, क्योंकि यह कपल अक्सर विदेश यात्रा करता है. यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया कि जांच के दौरान दोनों मुंबई में उपलब्ध रहें. दीपक कोठारी की शिकायत यह धोखाधड़ी का मामला मुंबई के बिजनेसमैन और लोटस कैपिटल फाइनेंशियल सर्विसेज के निदेशक दीपक कोठारी की शिकायत पर आधारित है. बिजनेसमैन दीपक कोठारी ने आरोप लगाया है कि 2015 से 2023 के बीच शिल्पा और राज ने उनके साथ 60 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की. दीपक का दावा है कि यह राशि कंपनी के विस्तार के लिए ली गई थी, लेकिन इसका इस्तेमाल निजी खर्चों के लिए किया गया. कोठारी का आरोप है कि शिल्पा और राज ने शुरू में 75 करोड़ रुपये का ऋण 12% वार्षिक ब्याज पर मांगा था, लेकिन बाद में टैक्स बचाने के लिए इसे निवेश के रूप में दिखाने की सलाह दी. कोठारी ने अप्रैल 2015 में 31.95 करोड़ रुपये और सितंबर 2015 में 28.53 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए, जो बेस्ट डील टीवी के बैंक खातों में जमा हुए. लिखित गारंटी और कंपनी से इस्तीफा दीपक कोठारी का कहना है कि अप्रैल 2016 में शिल्पा शेट्टी ने लिखित रूप से व्यक्तिगत गारंटी दी थी कि राशि एक निश्चित समय में 12% ब्याज के साथ लौटाई जाएगी. लेकिन कुछ ही महीनों बाद, सितंबर 2016 में शिल्पा ने कंपनी के निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया. उन्हें बाद में पता चला कि 2017 में कंपनी के खिलाफ 1.28 करोड़ रुपये का एक दिवालियापन मामला भी चल रहा था, जिसके बारे में उन्हें पहले नहीं बताया गया. ईओडब्ल्यू की जांच मामला 10 करोड़ रुपये से अधिक का होने के कारण जुहू पुलिस स्टेशन से ईओडब्ल्यू को ट्रांसफर कर दिया गया. पुलिस ने शिल्पा, राज और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ आईपीसी की धारा 403 (बेईमानी से संपत्ति का दुरुपयोग), 406 (आपराधिक विश्वासघात) और 34 (साझा इरादा) के तहत मामला दर्ज किया है.

सिवान नगर निगम के ईओ के ठिकानों पर ईओयू की छापेमारी

सिवान नगर निगम के ईओ के ठिकानों पर ईओयू की छापेमारी – ईओयू ने डीए मामले में अनुभूति श्रीवास्तव के तीन ठिकानों पर की छापेमारी – वास्तविक आय से 78.91 प्रतिशत अधिक अवैध आय के मिले प्रमाण – ईओयू के डीआईजी ने पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में दी जानकारी पटना आय से अधिक संपत्ति (डीए) मामले में सिवान नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) अनुभूति श्रीवास्तव के ठिकानों पर ईओयू ने छापेमारी की। आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की अलग-अलग टीमों ने ईओ के उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर के एडेल्को ग्रीन्स स्थित पैतृक आवास, पटना के रूपसपुर थाना के तिलकनगर स्थित अर्पणा मेंशन के फ्लैट नंबर 406-बी एवं 407-बी तथा सिवान नगर कार्यपालक पदाधिकारी कार्यालय समेत अन्य ठिकानों पर सघन छापेमारी की। इस दौरान बड़ी संख्या में निवेश संबंधित दस्तावेजों के अलावा ज्वेलरी, कैश, बैंक खाते समेत अन्य कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए हैं। इनकी जांच चल रही है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि कितने की अवैश संपत्ति बरामद की गई है। यह जानकारी ईओयू के डीआईजी (आर्थिक अपराध) मानवजीत सिंह ढिल्लो ने बुधवार को पुलिस मुख्यालय सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान दी।       डीआईजी ने कहा कि अब तक की जांच में उनके खिलाफ 71 लाख 1 हजार 908 रुपये की अवैध संपत्ति का पता चला है, जो उनके वैद्य आय से 78.91 प्रतिशत अधिक है। जांच में यह बात सामने आई है कि अनुभूति श्रीवास्तव ने सीवान जिला में पदस्थापना के दौरान अपने पद का दुरुपयोग कर अवैध आय अर्जित की है। इस मामले को लेकर ईओयू में एफआईआर भी दर्ज की गई है। अनुभूति श्रीवास्तव के खिलाफ 31 अगस्त 2021 को भ्रष्टाचार निरोध अधिनियम की धारा 13(1)(बी) के अंतर्गत मामला दर्ज कर कार्रवाई की गई थी। आय से अधिक संपत्ति मामले में उस समय भी इनके खिलाफ हुई कार्रवाई में 230 प्रतिशत अवैध आय का मामला सामने आया था। उस समय जांच में यह पाया गया था कि नवंबर 2013 से सितंबर 2021 के बीच आय के वैध स्रोतों से 1 करोड़ 99 लाख 77 हजार रुपये से अधिक की संपत्ति बरामद की गई थी। इस मामले में उनके खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र समर्पित किया गया है। यह मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। निलंबन मुक्त होने के बाद उनकी तैनाती रक्सौल, सहरसा के बाद सीवान में हुई।  मधुबनी का कुख्यात तस्कर हुआ गिरफ्तार डीआईजी ने बताया कि मादक पदार्थों एवं द्रव्यों की तस्करी के मामले में मधुबनी के बिस्फी थाना क्षेत्र का रहने वाला कुख्यात तस्कर प्रभाकर चौधरी को गिरफ्तार कर लिया गया। उसे एनसीबी कोलकाता के सहयोग से गिरफ्तार कर जयपुर स्थित केंद्रीय कारा भेजा गया है। प्रभाकर के खिलाफ केंद्रीय वित्त मंत्रालय के स्तर से वारंट जारी किया गया था। वह पूर्वोत्तर राज्यों के अलावा पश्चिम बंगाल और बिहार में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी में बेहद सक्रिय था। उसके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं। पेपर लीक कांडः तीन महीने में डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन आया सामने सिपाही पेपर लीक गिरोह का मुख्य आरोपी राजकिशोर साह को गिरफ्तार कर लिया गया है। केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) के पेपर लीक से संबंधित मामले की जांच ईओयू के स्तर से की जा रही है। राजकिशोर अरवल जिला के करपी थाना के बख्तारी गांव का रहने वाला है। उसके बैंक खातों की जांच में पाया गया कि तीन महीने में डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन सामने आय़ा है। इसमें बड़ा हिस्सा संजीव मुखिया गिरोह को ट्रांसफर हुआ है। इस मामले में दो कोचिंग संचालकों मुकेश सर और चंदन सर का नाम प्रमुखता से सामने आई है। इन दोनों का सत्यापन हो गया है। जल्द इनकी गिरफ्तारी होगी। कुछ अन्य कोचिंग संचालकों के नाम भी सामने आए हैं। सिम बॉक्स मामले में देवघर से हुई गिरफ्तारी ईओयू की साइबर टीम ने सिम बॉक्स मामले में देवघर के पारो थाना क्षेत्र से मुकेश को गिरफ्तार किया गया है। इससे पहले इस मामले में वैशाली से सुल्तान को भी गिरफ्तार किया गया था। उसके साथ मुकेश के काफी चैट और पैसे की लेनदेन से जुड़े साक्ष्य बरामद किए गए हैं। इससे संबंधित काफी साक्ष्य बरामद मिलने के बाद उसकी गिरफ्तारी की गई है। सिम बॉक्स मामले में 21 जुलाई को सबसे पहले सुपौल से हर्षित कुमार को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद वैशाली और इससे जुड़ा देवघर का कनेक्शन सामने आने के बाद गिरफ्तारी की गई है। यह जानकारी डीआईजी (साइबर) संजय कुमार सिंह ने प्रेस वार्ता के दौरान दी। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पेट्रोलिंग यूनिट 432 शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें 115 वेबसाइटों को प्रतिबंधित कर दिया गया है। शेष मामलों की जांच जारी है। साइबर से जुड़े मामलों का निपटारा भी बड़ी संख्या में किया जा रहा है।

सहकारिता विभाग में विवाद! शिवेन्द्र देव पांडेय प्रकरण में हाई लेवल जांच की मांग तेज

भोपाल  मध्यप्रदेश सहकारिता विभाग राजपत्रित अधिकारी संघ द्वारा आज माननीय मुख्यमंत्री, माननीय सहकारिता मंत्री, अपर मुख्य सचिव (सामान्य प्रशासन), प्रमुख सचिव (सहकारिता), महानिदेशक (आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ) एवं पंजीयक सहकारी संस्थाएँ को ज्ञापन सौंपकर  शिवेन्द्र देव पांडेय, संयुक्त आयुक्त, सहकारिता, सागर संभाग, के विरुद्ध दर्ज प्रकरण की उच्च स्तरीय व निष्पक्ष जांच की माँग की गई है।  पांडेय को 23 जुलाई 2025 को आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) द्वारा कथित भ्रष्टाचार के आरोप में 50 हज़ार रुपये लेने का प्रकरण दर्ज  किया गया था, परंतु 23 जुलाई को न्यायालय द्वारा उन्हें जमानत प्रदान कर दी गई। संघ का कहना है कि यह प्रकरण पूर्व नियोजित, आधारहीन और दुर्भावनापूर्ण प्रतीत होता है। उन्होंने बताया कि शिकायतकर्ता ने पूर्व में सेवा सहकारी समिति पनवारी में सेल्समैन नियुक्ति हेतु आवेदन दिया था, एवं चूँकि यह उनके अधिकार क्षेत्र का कार्य नहीं रहा अतः नियमानुसार कार्यवाही हेतु श्री पांडेय द्वारा उसे संबंधित जिला कार्यालय में भेजने के निर्देश भी दे दिए गए थे। गौरतलब है कि शिकायत कर्ता के आवेदन में संलग्न समिति का प्रस्ताव अहस्ताक्षरित था तथा समिति द्वारा जारी नहीं किया गया था। संघ का कहना है कि घटना स्थल पर EOW टीम द्वारा प्रकरण दर्ज करने के लिए श्री पांडेय के हाथ के पृष्ठ भाग में जबरदस्ती कर  रकम स्पर्श करायी गई एवं कार्यालय के कुछ कर्मचारियों के साथ जोर ज़बरदस्ती भी की गई जिस पर पुलिस सहित उच्चाधिकारियों को सूचना दी गई है । सहकारिता विभाग एवं प्रदेश की सहकारी समितियों में ऐसी कार्यवाही से भय एवं आक्रोश का वातावरण व्याप्त है। स्पष्ट है कि यह कार्यवाही षड्यंत्रपूर्वक की गई है।  संघ ने मांग की है कि पांडेय जी की निष्कलंक छवि और उनकी वर्षों की ईमानदार सेवाओं को देखते हुए इस मामले की उच्च स्तरीय, समयबद्ध और निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि उन्हें न्याय मिल सके और सच्चाई सामने आ सके।

7 करोड़ की प्रोत्साहन राशि गबन मामले में प्रबंधक गिरफ्तार, तेंदूपत्ता घोटाले में 12 की जेल यात्रा

रायपुर  छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में तेंदूपत्ता बोनस घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) ने फुलबगड़ी प्राथमिक लघुवनोपज सहकारी समिति के प्रबंधक राजशेखर पुराणिक को गिरफ्तार किया है। आरोपी को साल 2021-22 के तेंदूपत्ता प्रोत्साहन पारिश्रमिक घोटाले में संलिप्त पाया गया। आरोप है कि संग्राहकों को दी जाने वाली करीब सात करोड़ रुपए की राशि का इन्होंने गबन किया था। ईओडब्ल्यू इस घोटाले में शामिल 12 आरोपियों को जेल भेज चुकी है। इसमें तत्कालीन डीएफओ अशोक कुमार पटेल, उप वनक्षेत्रपाल चैतूराम बघेल, देवनाथ भारद्वाज, पोड़ियामी इड़िमा उर्फ हिडमा और वनरक्षक मनीष कुमार बारसे, सात लघुवनोपज सहकारी समिति के प्रबंधक व सहयोगी मनोज कवासी, सुनील नुप्पो,रवि कुमार गुप्ता, आयतू कोरसा, समेत राजशेखर पुराणिक व अन्य शामिल है। घोटाले में डीएफओ की मुख्य भूमिका जांच में सामने आया है कि घोटाले में मुख्य भूमिका तत्कालीन डीएफओ अशोक कुमार पटेल की रही है। उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अन्य अधिकारियों और सहकारी समिति प्रबंधकों के साथ मिलकर संग्राहकों को दी जाने वाली तेंदूपत्ता बोनस राशि का बंदरबांट किया। यह है मामला वर्ष 2021-22 के दौरान तेंदूपत्ता संग्रहण करने वाले श्रमिकों को सरकार द्वारा प्रोत्साहन पारिश्रमिक (बोनस) के रूप में करोड़ों रुपये वितरित किए जाने थे, लेकिन ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया कि इस राशि में से लगभग सात करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई। आरोपी ने संग्राहकों के नाम पर फर्जी भुगतान दिखाकर, धोखाधड़ी से रकम निकाल ली और इसे निजी लाभ के लिए उपयोग किया। ईओडब्ल्यू के घेरे में अभी और कई आरोपी ईओडब्ल्यू के अधिकारियों ने बताया कि इस मामले की विवेचना जारी है। आने वाले दिनों में अन्य संदिग्धों पर भी शिकंजा कस सकता है। जांच एजेंसी इस घोटाले की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं, ताकि तेंदूपत्ता संग्राहकों के हक की राशि की हेराफेरी करने वालों को सख्त सजा दिलाई जा सके। बता दें कि तेंदूपत्ता बोनस छत्तीसगढ़ के लाखों आदिवासी मजदूरों की आजीविका से जुड़ा हुआ है। इस तरह का घोटाला न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि वन समुदाय के अधिकारों का शोषण भी है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।