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कालाबाजारी करने वालों की अब खैर नहीं! बस्तर में खाद-बीज कारोबारियों पर सख्ती

बस्तर. खरीफ सीजन शुरू होते ही किसानों को गुणवत्तापूर्ण खाद, बीज और कीटनाशक उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग ने निगरानी व्यवस्था मजबूत कर दी है. जिला स्तर पर विशेष कंट्रोल रूम स्थापित कर भंडारण और वितरण पर लगातार नजर रखी जा रही है. विभाग की ताबड़तोड़ जांच कार्रवाई से अवैध कारोबारियों में हड़कंप मचा हुआ है. नियमों के उल्लंघन पर कई दुकानों को नोटिस जारी किए गए हैं, जबकि अनेक केंद्रों की बिक्री पर रोक लगाई गई है. कुछ लाइसेंस निलंबित और एक लाइसेंस निरस्त भी किया गया है. अधिकारियों का कहना है कि किसानों के साथ किसी प्रकार की धोखाधड़ी या कालाबाजारी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए कंट्रोल रूम सक्रिय किया गया है. कृषि विभाग का दावा है कि इस अभियान का उद्देश्य किसानों को सही समय पर गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री उपलब्ध कराना है. प्रशासनिक सख्ती के चलते बाजार में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है.

खाद की कालाबाजारी पर बिलासपुर प्रशासन सख्त, रेड में मिला भारी मात्रा में अवैध भंडारण

बिलासपुर. बिलासपुर जिले में खाद की कालाबाजारी पर जिला प्रशासन का एक्शन जारी है. कार्रवाई के दौरान मल्हार और सेन्दरी में छापेमारी की. इस दौरान बड़ी मात्रा में छिपाकर रखा गया खाद्द जब्त किया गया. कार्रवाई के दौरान मल्हार स्थित अग्रवाल खाद भंडार से यूरिया, एनपीके और एसएसपी खाद बरामद की गई, जबकि सेन्दरी के बंसल फर्टिलाइजर में छिपाकर रखी गई खाद भी जब्त की गई. जांच में अवैध भंडारण पाए जाने पर संबंधित गोदामों को सील कर दिया गया है. अधिकारियों ने बताया कि मामले में आवश्यक वस्तु अधिनियम और उर्वरक नियंत्रण आदेश के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी. इस कार्रवाई के बाद से खाद कारोबारियों में हड़कंप मचा हुआ है. प्रशासन ने किसानों को खाद उपलब्ध कराने के लिए शनिवार और रविवार को भी सहकारी समितियां खुली रखने का निर्णय लिया है. खरीफ सीजन के लिए जिले को 68,950 मीट्रिक टन खाद वितरण का लक्ष्य मिला है. अधिकारियों के अनुसार जिले में यूरिया, डीएपी, पोटाश, एनपीके और एसएसपी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है.

किसानों के लिए नया नियम लागू, बस्तर में बिना आधार कार्ड नहीं मिलेगी खाद

बस्तर. बस्तर में रासायनिक खाद की कालाबाजारी और अवैध भंडारण रोकने के लिए कृषि विभाग ने निगरानी व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल बना दिया है. अब सहकारी समितियों के साथ-साथ जिले के सभी निजी खाद विक्रेताओं को भी पॉश मशीन के जरिए ही खाद बेचनी होगी. नई व्यवस्था के तहत बिना आधार कार्ड के किसानों को खाद नहीं मिलेगी. हर खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड सीधे सरकारी पोर्टल पर दर्ज होगा. फसलों और भूमि की जरूरत के अनुसार खाद वितरण की सीमा भी तय कर दी गई है. जिले में 184 निजी खाद विक्रेता पंजीकृत हैं, लेकिन अभी 20 दुकानदारों के पास पॉश मशीन नहीं है. कृषि विभाग को आशंका है कि बिना मशीन वाले विक्रेता नियमों का उल्लंघन कर सकते हैं. इसीलिए उनकी यूनिक आईडी तैयार कर निगरानी बढ़ाई जा रही है. पिछले पांच वर्षों में जिले में रासायनिक खाद की खपत 27 हजार टन से बढ़कर 40 हजार टन से अधिक पहुंच गई है. बढ़ती मांग के बीच विभाग पारदर्शिता और नियंत्रण सुनिश्चित करने में जुटा है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी. नई व्यवस्था से खाद वितरण में पारदर्शिता बढ़ने और किसानों को समय पर खाद उपलब्ध होने की उम्मीद है.