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नवाचार और नई कार्ययोजनाओं से बढ़ेगा मत्स्य उत्पादन : राज्यमंत्री पंवार

भोपाल  मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  नारायण सिंह पंवार की अध्यक्षता में मत्स्य महासंघ की कामकाज समिति की 115वीं बैठक संपन्न हुई। बैठक में वर्ष 2027-28 के प्रस्तावित बजट का अनुमोदन किया गया। राज्यमंत्री  पंवार ने महासंघ के जलाशयों में सहकारी समितियों को सदस्यता देने से पहले उनका परीक्षण करने के निर्देश दिए, ताकि पात्र और वास्तविक समितियों को ही सदस्यता मिल सके। उन्होंने वर्तमान में कार्यरत समितियों द्वारा किए जा रहे कार्यों का भी नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए। राज्यमंत्री  पंवार ने महासंघ द्वारा संचालित मछुआ कल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा के दौरान हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ समय पर नहीं मिलने पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को हितग्राहियों को लाभ देने की समय-सीमा निर्धारित करने और लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। राज्यमंत्री  पंवार ने मध्यप्रदेश सहकारी सोसायटी अधिनियम, 1960 की धारा 43 और महासंघ की उपविधियों के अंतर्गत निधियों की समीक्षा में कहा कि भवन निधि एवं विकास निधि का उपयोग कर महासंघ की रिक्त भूमि पर आवश्यक निर्माण कार्यों के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। राज्यमंत्री  पंवार ने महासंघ के जलाशयों में उत्पादन की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि नवीन कार्ययोजनाओं और नवाचारों के माध्यम से मत्स्य उत्पादन तथा महासंघ की आय बढ़ाने की दिशा में कार्य करें। साथ ही उन्होंने मछुआ कल्याण योजनाओं और विकासात्मक गतिविधियों का विस्तार करने के भी निर्देश दिए। बैठक में सचिव  स्वतंत्र कुमार सिंह, प्रबंध संचालक  अनुराग चौधरी, संचालक  मनोज कुमार पथरोलिया सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

ब्लू रिवोल्यूशन की ओर बढ़ते कदम: मछली उत्पादन बढ़ा, झींगा पालन पर फोकस

रोहतास. रोहतास जिले में मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में एक नए नीली क्रांति की ओर अग्रसर है। पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले में मछली उत्पादन में निरंतर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जिला मत्स्य कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्पादन का ग्राफ 10.65 हजार मीट्रिक टन से बढ़कर अब 15.5 हजार मीट्रिक टन के करीब पहुंच रहा है। जिला मत्स्य पदाधिकारी सतेन्द्र राम ने बताया कि जिले में वर्तमान में कुल 1,265 तालाब हैं। विभाग की सक्रियता के कारण इनमें से लगभग 1,150 तालाबों की बंदोबस्ती सफलतापूर्वक की जा चुकी है। इन जल निकायों के प्रबंधन के लिए जिले के सभी प्रखंडों में कुल 19 मत्स्यजीवी सहयोग समितियां सक्रिय हैं। ये समितियां न केवल सरकारी जलकर की बंदोबस्ती कर रही हैं, बल्कि राजस्व प्रबंधन और स्थानीय मछुआरों के हितों की रक्षा भी कर रही हैं। उत्पादन के बढ़ते कदम: एक नजर में जिले में मछली उत्पादन का सालाना डेटा यह दर्शाता है कि आधुनिक तकनीकों और सरकारी योजनाओं का लाभ किसानों तक पहुंच रहा है:- वित्तीय वर्ष     उत्पादन (हजार मीट्रिक टन) 2021-22     10.65 2022-23     12.85 2023-24     13.50 2024-25     14.65 2025-26 (अनुमानित)     15.50 झींगा पालन की नई राह: भुवनेश्वर में प्रशिक्षित हुए किसान मछली के साथ-साथ अब जिले में झींगा पालन की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं। इसके लिए प्रायोगिक तौर पर करहगर प्रखंड के सोनवर्षा निवासी किसान गोपाल सिंह का चयन किया गया। उन्हें भुवनेश्वर स्थित केंद्रीय मीठा जल जीवपालन संस्थान में विशेष प्रशिक्षण दिलाया गया है। विभाग की योजना है कि गोपाल सिंह की सफलता के बाद जिले के अन्य प्रगतिशील किसानों को भी झींगा पालन के लिए प्रोत्साहित और प्रशिक्षित किया जाए। सरकारी योजनाओं का मिल रहा लाभ – मत्स्यपालकों को सशक्त बनाने के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत विभिन्न प्रकार की सहायता दी जा रही है। बताया कि मछली विक्रेताओं और पालकों के बीच किट का वितरण किया जा रहा है व बाजार तक पहुंच आसान बनाने के लिए रियायती दरों पर वाहनों का वितरण हुआ है। वहीं आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों के लिए समय-समय पर कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। किसानों की आय में काफी वृद्धि होगी – जिले में मत्स्य पालन को एक लाभदायक उद्योग के रूप में विकसित करना हमारा लक्ष्य है। तालाबों की समय पर बंदोबस्ती और झींगा पालन जैसे नए प्रयोगों से किसानों की आय में काफी वृद्धि होगी। – सतेन्द्र राम, जिला मत्स्य पदाधिकारी, सासाराम रोहतास