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घाटशिला उपचुनाव का फैसला कल, जनता के जनादेश से तय होगी 13 उम्मीदवारों की किस्मत

घाटशिला घाटशिला विधानसभा उपचुनाव मंगलवार को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और भयमुक्त मतदान के साथ सम्पन्न हुआ। शाम 5 बजे तक कुल 74.63 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। अब लोगों का कल का इंतजार है क्योंकि कल सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू होगी और यह साफ हो जाएगा कि सीट किसके नाम जाएगी। 15 टेबल पर 20 राउंड में मतगणना की जायेगी सूत्रों के मुताबिक को-ऑपरेटिव कॉलेज में कुल 15 टेबल पर 20 राउंड में मतगणना की जायेगी। सर्विस वोट सुबह 8 बजे से पहले आने वाले मतों में शामिल किए जाएंगे। इसके चलते मतगणना केंद्र पर त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। प्रवेश केवल अधिकृत पासधारी व्यक्तियों को ही मिलेगा और संपूर्ण प्रक्रिया सीसीटीवी निगरानी में होगी। जिला निर्वाचन पदाधिकारी कर्ण सत्यार्थी ने कहा कि मतगणना प्रक्रिया निर्वाचन की विश्वसनीयता का सबसे महत्वपूर्ण चरण है। प्रत्येक कर्मी को आयोग के निर्देशों का हूबहू पालन करना होगा। निष्पक्षता और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी प्रकार की त्रुटि या लापरवाही नहीं हो। बता दें कि घाटशिला विधानसभा सीट पर कुल 73.88 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो राज्य के औसत से अधिक है। इस उपचुनाव में कुल 2,55,823 मतदाता पंजीकृत थे, जिनमें महिलाओं की संख्या 1,30,921 और पुरुष मतदाता 1,24,899 रही। यानी इस बार महिलाओं ने पुरुषों से अधिक मतदान कर लोकतंत्र की मजबूती का संदेश दिया। इस उपचुनाव में 13 प्रत्याशी मैदान में हैं, जिनकी किस्मत अब EVM (Electronic Voting Machine) में कैद हो चुकी है। अब सभी की निगाहें मतगणना के दिन पर टिकी हैं, जब यह तय होगा कि घाटशिला की जनता ने किसे अपना जनप्रतिनिधि चुना है। मतगणना 14 नवंबर को होगी। झारखंड के शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन के आकस्मिक निधन से खाली हुई इस सीट पर अब उनके बेटे सोमेश चंद्र सोरेन मैदान में हैं और भाजपा की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के पुत्र बाबूलाल सोरेन ताल ठोक रहे हैं। वैसे तो 13 प्रत्याशी घाटशिला विधानसभा उपचुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला फिलहाल सत्तारूढ़ झामुमो के सोमेश चंद्र सोरेन और भाजपा के बाबूलाल सोरेन के बीच बताया जा रहा है।  

JMM को घाटशिला में बड़ा नुकसान, महिला और पुरुष कार्यकर्ताओं ने थामा भाजपा का दामन

घाटशिला घाटशिला विधानसभा सीट पर मतदान कल यानी 11 नवंबर को कराया जाएगा। 14 नवंबर को मतगणना होगी। वहीं, घाटशिला उपचुनाव से पहले झामुमो को बड़ा झटका लगा है। झामुमो ने जनता को केवल निराश किया दरअसल, बीते रविवार को झामुमो महिला मोर्चा की नगर अध्यक्ष लिली भगत के नेतृत्व में सैकड़ों महिलाओं और पुरुषों ने झामुमो पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। भाजपा नेता चंपई सोरेन ने नए सदस्यों का स्वागत किया। इस दौरान चंपई सोरेन ने कहा कि अब जनता का रुझान साफ दिखने लगा है। घाटशिला से परिवर्तन की शुरुआत हो चुकी है। जनता झूठे वादों से ऊब चुकी है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विश्वास जता रही है। चंपई सोरेन ने कहा कि यह सिर्फ पार्टी परिवर्तन नहीं, बल्कि “विचारधारा का बदलाव” है। उन्होंने कहा कि भाजपा विकास और पारदर्शिता की राजनीति करती है, जबकि झामुमो ने जनता को केवल निराश किया है। बता दें कि झारखंड के शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन के आकस्मिक निधन से खाली हुई इस सीट पर अब उनके बेटे सोमेश चंद्र सोरेन मैदान में हैं और भाजपा की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के पुत्र बाबूलाल सोरेन ताल ठोक रहे हैं। दोनों ही संताल समाज से आते हैं। इसलिए संभावना है कि आदिवासी मत दोनों तरफ जाएगा। भाजपा के अपने सहयोगी लोजपा के सहारे चार प्रतिशत दलित मतों को साथ लाने की कोशिश में हैं। झामुमो गठबंधन के मुस्लिम मंत्री भी अल्पसंख्यक मतों को अपने पाले में लाने के लिए लगे हैं, लेकिन भाजपा आदिवासी मतों के अलावा कुड़मी, पिछड़ी और अन्य दलित मतों पर नजर रख रही है। चंपाई के गहरे मित्र विद्युतवरण महतो की भी इस क्षेत्र में काफी पकड़ है। वे तीन बार से जमशेदपुर लोकसभा के सांसद भी हैं। ज्ञात हो कि रामदास सोरेन एक साल से ज्यादा समय से किडनी संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। उनका 15 अगस्त को एक अस्पताल में निधन हो गया था। इसी के कारण घाटशिला सीट पर उपचुनाव कराने की आवश्यकता पड़ी।  

नई सियासी पारी की शुरुआत: 9 नए प्रत्याशी आजमाएंगे अपनी किस्मत

घाटशिला घाटशिला विधानसभा सीट पर 11 नवंबर को मतदान है। सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान होगा। मतगणना 14 नवंबर को की जाएगी। वहीं, कुल 13 प्रत्याशी घाटशिला विधानसभा उपचुनाव लड़ रहे हैं। 13 में से 9 प्रत्याशी पहली बार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, जिनमें एक महिला उम्मीदवार भी शामिल हैं। 2 प्रत्याशियों के बीच बड़ा मुकाबला ये नए उम्मीदवार स्थानीय स्तर पर सक्रिय रहे हैं, विकास-विकल्प, सामाजिक कार्य या जनसंपर्क के माध्यम से पहचान बना रहे हैं और अब राजनीतिक पारी में भाग ले रहे हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला फिलहाल सत्तारूढ़ झामुमो के सोमेश चंद्र सोरेन और भाजपा के बाबूलाल सोरेन के बीच बताया जा रहा है। एक तरफ झामुमो प्रत्याशी सोमेश सोरेन अपने दिवंगत पिता रामदास सोरेन की विरासत पर भरोसा जता रहे है तो दूसरी ओर, भाजपा नेता चंपई सोरेन के बेटे बाबूलाल सोरेन मोदी सरकार की योजनाओं के दम पर मैदान में उतरे हैं, लेकिन झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के प्रत्याशी रामदास मुर्मू ने मैदान में उतरकर इस बार मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में नए उम्मीदवारों के शामिल होने से मत का विभाजन अधिक होगा और पुरानी राजनीतिक तस्वीर बदलने की संभावना बढ़ रही है। इस बार चुनावी परिणाम तय होंगे इस बात पर कि जनता पुरानी पार्टियों एवं नेताओं पर भरोसा बनाए रखेगी या नए विकल्प के पक्ष में जाए। बता दें कि झारखंड के शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन के आकस्मिक निधन से खाली हुई इस सीट पर अब उनके बेटे सोमेश चंद्र सोरेन मैदान में हैं और भाजपा की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के पुत्र बाबूलाल सोरेन ताल ठोक रहे हैं। दोनों ही संताल समाज से आते हैं। इसलिए संभावना है कि आदिवासी मत दोनों तरफ जाएगा। भाजपा के अपने सहयोगी लोजपा के सहारे चार प्रतिशत दलित मतों को साथ लाने की कोशिश में हैं। झामुमो गठबंधन के मुस्लिम मंत्री भी अल्पसंख्यक मतों को अपने पाले में लाने के लिए लगे हैं, लेकिन भाजपा आदिवासी मतों के अलावा कुड़मी, पिछड़ी और अन्य दलित मतों पर नजर रख रही है। चंपाई के गहरे मित्र विद्युतवरण महतो की भी इस क्षेत्र में काफी पकड़ है। वे तीन बार से जमशेदपुर लोकसभा के सांसद भी हैं। ज्ञात हो कि रामदास सोरेन एक साल से ज्यादा समय से किडनी संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। उनका 15 अगस्त को एक अस्पताल में निधन हो गया था। इसी के कारण घाटशिला सीट पर उपचुनाव कराने की आवश्यकता पड़ी।  

घाटशिला उपचुनाव: झामुमो का तीर या भाजपा का कमल — जनता किसका देगी साथ?

घाटशिला घाटशिला उपचुनाव नजदीक है। 11 नवंबर को घाटशिला सीट पर चुनाव कराया जाएगा। वहीं, बता दें कि घाटशिला विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के उम्मीदवार बाबूलाल सोरेन, झामुमो के उम्मीदवार सोमेश चंद्र सोरेन और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के उम्मीदवार रामदास मुर्मू के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है जिससे घाटशिला विधानसभा उपचुनाव दिलचस्प बन गया है। बता दें कि कुल 13 प्रत्याशी घाटशिला विधानसभा उपचुनाव लड़ेंगे। 13 में से 9 प्रत्याशी पहली बार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। वहीं, मुख्य मुकाबला फिलहाल सत्तारूढ़ झामुमो के सोमेश चंद्र सोरेन और भाजपा के बाबूलाल सोरेन के बीच है। एक तरफ झामुमो अपने दिवंगत नेता रामदास सोरेन की विरासत पर भरोसा जता रहे है तो दूसरी ओर, भाजपा नेता चंपई सोरेन के बेटे बाबूलाल सोरेन मोदी सरकार की योजनाओं के दम पर मैदान में उतरे हैं, लेकिन झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के प्रत्याशी रामदास मुर्मू ने मैदान में उतरकर इस बार मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। रामदास सोरेन के आकस्मिक निधन से खाली हुई इस सीट पर अब उनके बेटे सोमेश चंद्र सोरेन मैदान में हैं और भाजपा की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के पुत्र बाबूलाल सोरेन ताल ठोक रहे हैं। दोनों ही संताल समाज से आते हैं। इसलिए इसकी संभावना है कि आदिवासी मत दोनों तरफ जाएगा। भाजपा के अपने सहयोगी लोजपा के सहारे चार प्रतिशत दलित मतों को साथ लाने की कोशिश में हैं। झामुमो गठबंधन के मुस्लिम मंत्री भी अल्पसंख्यक मतों को अपने पाले में लाने के लिए लगे हैं, लेकिन भाजपा आदिवासी मतों के अलावा कुड़मी, पिछड़ी और अन्य दलित मतों पर नजर रख रही है। चंपाई के गहरे मित्र विद्युतवरण महतो की भी इस क्षेत्र में काफी पकड़ है। वे तीन बार से जमशेदपुर लोकसभा के सांसद भी हैं। ज्ञात हो कि रामदास सोरेन एक साल से ज्यादा समय से किडनी संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। उनका 15 अगस्त को एक अस्पताल में निधन हो गया था। इसी के कारण घाटशिला सीट पर उपचुनाव कराने की आवश्यकता पड़ी जिसके लिए 11 नवंबर को मतदान होगा। वहीं, चुनाव आयोग द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस निर्वाचन क्षेत्र में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से लगभग पांच प्रतिशत अधिक है। 2,56,252 मतदाताओं में से 1,31,180 महिलाएं और 1,25,078 पुरुष मतदाता हैं।  

भाजपा को घाटशिला में बड़ा झटका, हेमंत साहू ने छोड़े सभी पद

जमशेदपुर घाटशिला उपचुनाव नजदीक है। इसके चलते भाजपा ने तैयारी शुरू कर दी है। भाजपा ने घाटशिला उपचुनाव के लिए आक्रामक अभियान शुरू कर दिया है। वहीं, इसी बीच जमशेदपुर महानगर जिला कार्यसमिति के सदस्य हेमंत साहू ने भाजपा पार्टी की प्राथमिक सदस्यता व सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। साहू ने अपना त्यागपत्र भाजपा जमशेदपुर महानगर के जिलाध्यक्ष सुधांशु ओझा को सौंपा है। पत्र में उन्होंने लिखा है कि वे पार्टी के प्रत्येक दायित्व और प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे रहे हैं और उनके इस्तीफे को स्वीकार किया जाए। हेमंत साहू ने अपने त्यागपत्र में इस्तीफे का कोई विशेष कारण नहीं बताया है। वहीं, पार्टी नेतृत्व की ओर से इस पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। बता दें कि घाटशिला उपचुनाव 11 नवंबर को होगा। ऐसे में हेमंत साहू का सभी पदों से इस्तीफा देना इसके पीछे जरूर कोई बड़ा कारण छुपा हो सकता है। अभी तक पार्टी नेतृत्व की ओर से इस पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।  

2 से 3 की हो गई कड़ी टक्कर, JLKM ने घाटशिला उपचुनाव में किया ऐलान

घाटशिला घाटशिला विधानसभा उपचुनाव के लिए भाजपा और झामुमो के बाद झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा ने अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी है। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा ने रामदास मुर्मू को अपना उम्मीदवार बनाया है। बता दें कि पहले भाजपा प्रत्याशी बाबूलाल सोरेन और झामुमो प्रत्याशी सोमेश सोरेन के बीच कांटे की टक्कर थी, लेकिन अब झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा ने मैदान में अपना उम्मीदवार उतारा है तो यह मुकाबला और टक्कर का हो गया है। देखना ये है कि तीनों में से किसके सिर ताज सजेगा और किसे हार मिलेगी। मालूम हो कि नयी दिल्ली में 15 अगस्त को रामदास सोरेन के निधन के बाद से यह सीट रिक्त हो गई थी। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने बीते बुधवार को पूर्व शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन के बेटे सोमेश चंद्र सोरेन को घाटशिला विधानसभा सीट के उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार बनाया, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के बेटे बाबूलाल सोरेन को इस सीट से चुनाव मैदान में उतारा है। बाबूलाल सोरेन ने 2024 का विधानसभा चुनाव इस सीट से लड़ा था, लेकिन वह रामदास सोरेन से 22,464 मतों के अंतर से हार गये थे।  

घाटशिला उपचुनाव पर भाजपा की नज़र , मरांडी का बयान- यह सिर्फ चुनाव नहीं, यह राज्य की दिशा तय करेगा

रांची झारखंड के घाटशिला में होने वाले आगामी उपचुनाव को लेकर बीते रविवार को नेता प्रतिपक्ष और भाजपा के वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी घाटशिला पहुंचे, जहां उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ चुनावी रणनीति पर गहन मंथन किया। इस दौरान भाजपा के नवनियुक्त कार्यकारी अध्यक्ष आदित्य साहू भी मौजूद रहे। बैठक में विधानसभा स्तर के सभी वरिष्ठ कार्यकर्ता शामिल हुए और संगठन मजबूत करने की रूपरेखा तय की गई। बैठक को संबोधित करते हुए मरांडी ने कहा कि घाटशिला उपचुनाव झारखंड की जनता के लिए बेहद अहम है। यह चुनाव सिर्फ एक सीट की नहीं, बल्कि पूरे राज्य को अपराध, भ्रष्टाचार और लूट-खसोट से मुक्त करने की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि भाजपा झारखंड को एक सुरक्षित और पारदर्शी शासन देने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए हर स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि अब समय आ गया है जब जनता को इन अव्यवस्थाओं के खिलाफ एकजुट होना होगा। मरांडी ने बताया कि भाजपा ने पंचायत स्तर से लेकर बूथ स्तर तक तैयारी शुरू कर दी है। घाटशिला के सभी सात मंडलों में पार्टी सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे, ताकि हर कार्यकर्ता संगठन की मजबूती में अपनी भूमिका निभा सके। मरांडी ने कहा कि प्रत्येक कार्यकर्ता को बूथ स्तर पर जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, जिससे चुनावी मशीनरी मजबूत बनेगी और घर-घर भाजपा का संदेश पहुंचेगा। उम्मीदवार चयन के सवाल पर मरांडी ने स्पष्ट किया कि भाजपा व्यक्ति आधारित नहीं, बल्कि विचार और संगठन आधारित पार्टी है। उन्होंने कहा कि उम्मीदवार का चयन पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति करेगी और एक बार उम्मीदवार घोषित होने के बाद सभी कार्यकर्ता उसकी जीत सुनिश्चित करने के लिए एकजुट होकर काम करेंगे। मरांडी ने दावा किया कि भाजपा की लड़ाई सत्ता की लालसा के लिए नहीं, बल्कि भ्रष्टाचारमुक्त, समृद्ध और सुरक्षित झारखंड की दिशा में नई शुरुआत के लिए है।