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आरएमपीएसयू में 2,300 से अधिक छात्रों ने लिया हिस्सा, डिजिटल पहुंच 50 हजार पा

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के विजन को युवाओं के नवाचार, उद्यमिता और करियर अवसरों से जोड़ने की दिशा में राजा महेंद्र प्रताप सिंह स्टेट यूनिवर्सिटी, अलीगढ़ में यूपी राइज 2026 का आयोजन किया गया। प्रदेश सरकार के इस प्रमुख कैंपस इनोवेशन और करियर अभियान का आयोजन टाइम्स नेटवर्क और जूम के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने हिस्सा लेकर अपने नए विचारों और समाधान को मंच प्रदान किया। अलीगढ़ में 2300 से अधिक छात्रों की भागीदारी अलीगढ़ चरण में पंजीकरण, सीएम-युवा योजना से जुड़े जागरूकता कार्यक्रम और सभागार सत्र समेत 2,300 से अधिक छात्रों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम की डिजिटल पहुंच 50 हजार से अधिक रही, जबकि ऑफलाइन पहुंच भी 5 हजार से अधिक दर्ज की गई। विश्वविद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम ने युवाओं के बीच नवाचार और उद्यमिता को लेकर उत्साह को सामने रखा। आरएमपीएसयू स्वयं रचनात्मक प्रतिभा, वैज्ञानिक सोच और विद्यार्थियों के करियर विकास को बढ़ावा देने पर जोर देता है। बिल्ड फॉर यूपी पिच फाइनल में दिखी प्रतिभा यूपी राइज 2026 के तहत परिसर में सीएम-युवा योजना जागरूकता स्टॉल, स्पिन द व्हील गतिविधि और ऑक्टोनॉर्म मेंटरशिप जोन लगाए गए। लॉबी और गलियारों में आयोजित इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को योजनाओं, करियर विकल्पों और अपने विचारों को व्यावहारिक रूप देने के अवसरों से परिचित कराया गया। इसके बाद सभागार में बिल्ड फॉर यूपी पिच प्रतियोगिता का फाइनल आयोजित हुआ। 13 छात्र टीमों ने पेश किए नवाचार आधारित समाधान प्रतियोगिता में चयनित 13 छात्र टीमों ने निर्णायकों और उपस्थित विद्यार्थियों के सामने अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रतिभागियों ने स्थानीय समस्याओं के व्यावहारिक समाधान, नए व्यवसाय मॉडल और सामाजिक उपयोगिता से जुड़े प्रस्ताव रखे। प्रतियोगिता का विजेता प्रस्ताव तेज रोशनी वाली हेडलाइट्स के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के उद्देश्य से तैयार सुरक्षा-केंद्रित समाधान पर आधारित रहा। विजेता टीम को मंच पर 25 हजार रुपये का नकद पुरस्कार प्रदान किया गया, जबकि फिक्सेज ग्रुप को उपविजेता घोषित किया गया। यूपी राइज के पहले के चरणों में भी विद्यार्थियों के स्टार्टअप विचारों को पिचिंग और पुरस्कार के माध्यम से प्रोत्साहित किया गया है। सात शहरों के बाद अलीगढ़ पहुंचा यूपी राइज कार्यक्रम में भाजपा उत्तर प्रदेश के मंत्री एवं राज्य मीडिया प्रभारी यतेंद्र शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उन्होंने विद्यार्थियों के नवाचार, रचनात्मक सोच और उद्यमशीलता को प्रोत्साहित किया। अलीगढ़ चरण के साथ यूपी राइज 2026 का विश्वविद्यालय दौरा कानपुर, आगरा, लखनऊ, रायबरेली, मथुरा, बरेली और सहारनपुर तक पहुंच चुका है।

“स्कूटी दीदी” एनु की उड़ान

रायपुर सपनों को उड़ान देने के लिए पंख नहीं, साहस और संकल्प की जरूरत होती है। इसी बात को सत्य साबित किया है छत्तीगसढ के धमतरी की एक साधारण लेकिन जुझारू युवती एनु ने, जो आज “स्कूटी दीदी” के नाम से जानी जाती हैं। संसाधनों की कमी, सामाजिक दबाव और सीमित अवसरों के बावजूद एनु ने न केवल आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाया, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को भी सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाई।           एनु का जन्म एक सामान्य ग्रामीण परिवार में हुआ, जहाँ आर्थिक स्थिति सशक्त नहीं थी। परिवार में आय के सीमित स्रोत थे, और लड़कियों की शिक्षा को लेकर अब भी संकोच और संकीर्ण सोच (prevalent ) थी। परन्तु एनु की सोच इससे बिल्कुल अलग थी। वे हमेशा कुछ नया करने और अपने पैरों पर खड़े होने की इच्छा रखती थीं। कठिनाइयों और प्रतिकूलताओं के बीच भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और अर्थशास्त्र में परास्नातक(Post Graduation inEconomics) की उपाधि हासिल की। यह उपलब्धि ही अपने आप में उनके संघर्ष और लगन का प्रतीक थी।           एनु का लक्ष्य केवल डिग्री लेनी ही मंज़िल नहीं थी। एनु जानती थीं कि केवल शिक्षा से रोजगार नहीं मिलेगा, जब तक उनके पास कोई कौशल न हो। इसी सोच के साथ उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन-बिहान से जुड़कर सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण लिया। इस प्रशिक्षण ने उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में पहला मजबूत कदम उठाने का अवसर दिया। लेकिन उनका सपना सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं था।          एनु का अगला कदम था -मोबिलिटी यानी गतिशीलता की। वे चाहती थीं कि खुद स्कूटी चला सकें, ताकि गांव-गांव जाकर महिलाओं से मिलें, प्रशिक्षण दें और उनके जीवन को बदलने में योगदान दे सकें, लेकिन एक ग्रामीण युवती के लिए दोपहिया वाहन चलाना समाज के लिए असामान्य बात थी। इसके लिए उन्हें न केवल आत्मसंदेह से लड़ना पड़ा, बल्कि समाज की रूढ़िवादी सोच से भी लडना पडा। यही पर ‘प्रथम संस्था’ (PRATHAM Foundation) ने उन्हें स्कूटी चलाने का प्रशिक्षण दिया। पहले-पहले जब उन्होंने स्कूटी की चाबी हाथ में ली, तो लोगों ने ताने दिए – “लड़की होकर गाड़ी चलाएगी?”, “क्या ज़रूरत है इधर-उधर घूमने की?”, लेकिन एनु अडिग रहीं। उन्होंने अपने आत्मविश्वास के साथ इन बातों को अनसुना कर, प्रैक्टिस जारी रखी और जल्द ही स्कूटी चलाने में दक्ष हो गईं।           धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास और कौशल दोनों बढ़ने लगे। अब वे गांवों में स्वतंत्र रूप से घूमने लगीं, महिलाओं से जुड़ीं, उन्हें मोटिवेट करने लगीं और अपनी यात्रा की कहानी सुनाकर उनमें भी आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देने लगीं। यही वह मोड़ था जब उन्होंने तय किया कि अब वह खुद एक ड्राइविंग स्कूल शुरू करेंगी, ताकि अन्य महिलाओं को भी गाड़ी चलाना सिखा सकें। यह पहल ग्रामीण परिवेश में महिलाओं की स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम था।           सन 2023 में एनु अपने सीमित संसाधनों के साथ “महिला दोपहिया प्रशिक्षण केंद्र” की शुरुआत की। शुरू में केवल 2-3 महिलाओं ने प्रशिक्षण लिया, लेकिन जल्द ही यह संख्या बढ़ती चली गई। आज उनकी पहचान पूरे ब्लॉक और जिले में “स्कूटी दीदी” के रूप में हो गई है। उन्होंने अब तक 30 से अधिक ग्रामीण महिलाओं को दोपहिया वाहन चलाने का प्रशिक्षण दिया है, जिनमें से कई महिलाएं अब स्वयं स्कूल, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र या बैंक जैसी जगहों पर काम करने के लिए आत्मनिर्भर रूप से आने-जाने लगी हैं।            एनु की यह पहल न केवल महिलाओं के जीवन में आत्मविश्वास और स्वतंत्रता लाई है, बल्कि सामाजिक सोच को भी बदला है। अब गांवों में लोग अपनी बेटियों और बहुओं को एनु के पास भेजते हैं, यह सीखने कि कैसे वे भी “अपने सपनों की सवारी” कर सकती हैं। उनकी इस उपलब्धि के लिए विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों ने उन्हें सम्मानित भी किया है। हाल ही में उन्हें जिला प्रशासन द्वारा महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किया गया। एनु का सपना है कि वे आने वाले वर्षों में 1000 महिलाओं को ड्राइविंग सिखाएं और इसके लिए वे जल्द ही चारपहिया ड्राइविंग स्कूल भी शुरू करने की योजना बना रही हैं।           एनु का जीवन इस बात का प्रमाण है कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। उनकी कहानी हर उस महिला के लिए प्रेरणा है, जो समाज की जंजीरों को तोड़कर आगे बढ़ना चाहती है। स्कूटी दीदी एनु ने दिखा दिया कि सच्ची ताकत बाहरी साधनों में नहीं, बल्कि भीतर के आत्मबल और दृढ़ निश्चय में होती है।