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प्राचीन पांडुलिपियों और विरासत के संरक्षण में जुटी योगी सरकार, “ज्ञान भारतम् मिशन” को मिली नई गति

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। इसी क्रम में प्रदेश में ज्ञान भारतम् मिशन के तहत प्राचीन पांडुलिपियों की खोज, संरक्षण और डिजिटलीकरण का व्यापक अभियान तेज कर दिया गया है। राज्य सरकार का उद्देश्य देश की प्राचीन बौद्धिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है।       भारत सरकार के ज्ञान भारत मिशन के अंतर्गत दुर्लभ पाण्डुलिपियों के संरक्षण का कार्य किया जा रहा है। इस अभियान को गति प्रदान करते हुए सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थानों, मठों, मंदिरों, शैक्षणिक संस्थानों, निजी एवं सार्वजनिक पुस्तकालयों तथा व्यक्तियों के पास उपलब्ध पाण्डुलिपियों को स्कैन कर पोर्टल पर अपलोड कराया जाए, ताकि देश की सांस्कृतिक एवं बौद्धिक धरोहर का संरक्षण सुनिश्चित हो सके।       प्रदेशभर में चलाए जा रहे सर्वे अभियान के दौरान अब तक हजारों दुर्लभ पांडुलिपियों की पहचान की जा चुकी है। इनमें धर्म, दर्शन, आयुर्वेद, ज्योतिष, साहित्य, संगीत, इतिहास और भारतीय संस्कृति से जुड़ी महत्वपूर्ण पांडुलिपियां शामिल हैं। विशेष रूप से वाराणसी, आयोध्या और रामपुर में सबसे अधिक पांडुलिपियां प्राप्त हुई हैं, जिनमें कई सदियों पुरानी दुर्लभ हस्तलिखित सामग्री भी शामिल है।     राज्य सरकार द्वारा विश्वविद्यालयों, पुस्तकालयों, मठ-मंदिरों, निजी संग्रहकर्ताओं और शोध संस्थानों के सहयोग से विशेष सर्वे टीमों का गठन किया गया है। ये टीमें गांव-गांव और ऐतिहासिक स्थलों तक पहुंचकर प्राचीन दस्तावेजों और हस्तलिखित ग्रंथों का पता लगा रही हैं। मिशन के तहत पांडुलिपियों का वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण, डिजिटलीकरण और सूचीकरण भी किया जाएगा ताकि शोधार्थियों और विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल सके।     दरअसल, उत्तर प्रदेश सदियों से भारतीय ज्ञान परंपरा का प्रमुख केंद्र रहा है। काशी, अयोध्या, मथुरा और रामपुर जैसे शहरों में संस्कृत, फारसी, अरबी और हिंदी की अनेक दुर्लभ पांडुलिपियां सुरक्षित हैं। अब “ज्ञान भारतम् मिशन” के माध्यम से इन्हें व्यवस्थित रूप से संरक्षित किया जा रहा है। यह अभियान केवल दस्तावेजों के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और गौरव को पुनर्स्थापित करने का प्रयास भी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और पारंपरिक ज्ञान को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। ज्ञान भारतम् मिशन उसी विजन को आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण अभियान माना जा रहा है।

प्रदेशभर में प्राचीन पांडुलिपियों की खोज के लिए तेज हुआ सर्वे अभियान

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। इसी क्रम में प्रदेश में ज्ञान भारतम् मिशन के तहत प्राचीन पांडुलिपियों की खोज, संरक्षण और डिजिटलीकरण का व्यापक अभियान तेज कर दिया गया है। योगी सरकार का उद्देश्य देश की प्राचीन बौद्धिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है।       इस दौरान पर्यटन विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने बताया कि भारत सरकार के ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत दुर्लभ पाण्डुलिपियों के संरक्षण का कार्य किया जा रहा है। इस अभियान को गति प्रदान करते हुए सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थानों, मठों, मंदिरों, शैक्षणिक संस्थानों, निजी एवं सार्वजनिक पुस्तकालयों तथा व्यक्तियों के पास उपलब्ध पाण्डुलिपियों को स्कैन कर पोर्टल पर अपलोड कराया जाए, ताकि देश की सांस्कृतिक एवं बौद्धिक धरोहर का संरक्षण सुनिश्चित हो सके।       प्रदेशभर में चलाए जा रहे सर्वे अभियान के दौरान अब तक हजारों दुर्लभ पांडुलिपियों की पहचान की जा चुकी है। इनमें धर्म, दर्शन, आयुर्वेद, ज्योतिष, साहित्य, संगीत, इतिहास और भारतीय संस्कृति से जुड़ी महत्वपूर्ण पांडुलिपियां शामिल हैं। विशेष रूप से वाराणसी, अयोध्या और रामपुर में सबसे अधिक पांडुलिपियां प्राप्त हुई हैं, जिनमें कई सदियों पुरानी दुर्लभ हस्तलिखित सामग्री भी शामिल है।    राज्य सरकार द्वारा विश्वविद्यालयों, पुस्तकालयों, मठ-मंदिरों, निजी संग्रहकर्ताओं और शोध संस्थानों के सहयोग से विशेष सर्वे टीमों का गठन किया गया है। ये टीमें गांव-गांव और ऐतिहासिक स्थलों तक पहुंचकर प्राचीन दस्तावेजों और हस्तलिखित ग्रंथों का पता लगा रही हैं। मिशन के तहत पांडुलिपियों का वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण, डिजिटलीकरण और सूचीकरण भी किया जाएगा ताकि शोधार्थियों और विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल सके।     दरअसल, उत्तर प्रदेश सदियों से भारतीय ज्ञान परंपरा का प्रमुख केंद्र रहा है। काशी, अयोध्या, मथुरा और रामपुर जैसे शहरों में संस्कृत, फारसी, अरबी और हिंदी की अनेक दुर्लभ पांडुलिपियां सुरक्षित हैं। अब “ज्ञान भारतम् मिशन” के माध्यम से इन्हें व्यवस्थित रूप से संरक्षित किया जा रहा है। यह अभियान केवल दस्तावेजों के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और गौरव को पुनर्स्थापित करने का प्रयास भी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और पारंपरिक ज्ञान को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। ज्ञान भारतम् मिशन उसी विजन को आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण अभियान माना जा रहा है।

अब डिजिटल होंगे प्राचीन ग्रंथ: पंजाब संस्कृति मंत्रालय ने लॉन्च किया ‘ज्ञान भारतम् मिशन’

चंडीगढ़. प्राचीन हस्तलिखित धरोहर यानी पांडुलिपि। इनके माध्यम से हमें अपनी संस्कृति के बारे में पता चलता है और इतिहास से जुड़ी तमाम जानकारी मिलती है। एक तरह से यह हमारी सभ्यता का अहम हिस्सा है। जो लोग इनके महत्व समझते हैं वे न केवल इसे संजो कर रखा है बल्कि दूसरों को भी इसके बारे में जागरूक कर रहे हैं। इसी कड़ी में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की ओर से ज्ञान भारतम् मिशन शुरू किया गया है। ताकि इसके महत्व के बारे में बताया जाए। आने वाली पीढ़ी को इसके बारे में जानकारी दी जाए, विरासत को संभाल कर रखा जाए। साथ ही डिजिटाइज भी किया जाए। इसके तहत अलग-अलग चरण में काम होंगे। इस मिशन को चंडीगढ़ के सेक्टर-10 गवर्नमेंट म्यूजियम एंड आर्ट गैलरी की ओर से काम शुरू हो गया है। इसमें म्यूजियम की ओर से आम लोगों से लेकर संस्थानों, पुस्तकालयों से जोड़ा जाएगा। इस दौरान कई गतिविधियां भी होंगी। आइए जानते हैं किस तरह से विरासत, इतिहास और संस्कृति के संरक्षण की इस मिशन को लेकर काम किया जाएगा और लोग किस तरह से सहयोग कर सकते हैं। बात विरासत की है तो महत्वपूर्ण है म्यूजियम की डिप्टी क्यूरेटर सीमा गेरा ने बताया गया कि इस मिशन के तहत देशभर में काम हो रहा है। शहर में भी इसकी शुरुआत हो चुकी है। यह मिशन सभी के लिए महत्वपूर्ण है। क्योंकि बात विरासत की है। इसको बचाने और आने वाली पीढ़ियों को पहुंचाने की है। इसलिए जरूरी है कि सभी इस मिशन में अपने स्तर पर योगदान दें। तीन महीने तक पहले चरण के तहत सर्वे म्यूजियम की क्यूरेटोरियल असिस्टेंट मेघा कुलकर्णी ने बताया कि इस मिशन के लिए चंडीगढ़ के लिए नोडल एजेंसी गवर्नमेंट म्यूजियम एंड आर्ट गैलरी है। हमारी ओर से काम करना शुरू कर दिया गया है। सबसे पहले इंटरनेट मीडिया के जरिए लोगों को जागरूक कर रहे हैं। जल्द ही वालंटियर्स को भी जोड़ा जाएगा। ताकि वह भी पहले चरण के तहत सर्वे करने में मदद करें। संस्थानों को भी सहयोग करने के लिए कहा गया है। हाल में कुछ मंदिरों में होकर आएं। इंस्टीट्यूट, म्यूजियम, लाइब्रेरी के अलावा आम लोगों के पास अगर मैनुस्क्रिप्ट है वह हम तक पहुंच सकते हैं या फिर किसी तरह की कोई परेशानी है तो हमारी टीम उन तक पहुंच जाएगी और सर्वे करने में मदद करेगी। सर्वे के लिए एक सरकार की ओर से एप तैयार की गई है। इसमें अपनी सुविधा के हिसाब से किसी भी भाषा का चयन करके जानकारी दे सकते हैं। यह मिशन इसलिए भी जरूरी है – मैनुस्क्रिप्ट हमारी धरोहर है, जो हमारे कल्चर का प्रतिनिधित्व करती है। कई इंस्टीट्यूट, म्यूजियम, लाइब्रेरी और लोगों के पास मैनुस्क्रिप्ट है। ऐसे में जरूरत है कि इन सभी को संभाल कर रखा जाए, कंजर्व किया जाए। ऐसा होगा तभी आने वाली पीढ़ी तक पहुंचा सकते हैं। इस तरह से होगा काम सर्वे: पहला चरण सर्वे है। इसमें एप के माध्यम से जानकारी देनी है। इसमे अपनी जानकारी देनी है और यह भी बताना है कितने और किस तरह के मैनुस्क्रिप्ट है। कर्जवैशन: पहला चरण जब खत्म हो जाएगा तो देखा जाएगा कि अगर मैनुस्क्रिप्ट खराब है या नहीं। अगर हालत खराब होगी तो उसको कर्जव किया जाएगा। डिजिटाइजेशन : जितने भी मैनुस्क्रिप्ट होंगे उन्हें डिजिटाइज किया जाएगा। साथ ही डाक्यूमेंटेशन भी होगा। इस में मैनुस्क्रिप्ट की टाइटल से लेकर यह जानकारी होगी कि किस विषय पर है, कब का है, हैंड रिटन है, पेट किया हुआ है या साथ में इलस्ट्रेशन है। ट्रांसलेशन इसके बाद मैनुस्क्रिप्ट को ट्रांसलेट भी किया जाएगा। ताकि युवा पीढी को पता चले कि किस मेक्या लिखा गया है। स्सिर्च-आउटरिच: यह सब होंने याद कई सेमिनार, वर्कशाप आयोजित किए जाएंगे। इस में बताया जाएगा कि क्या-क्या रिकार्ड मे है। जो रिसर्च करना चाहता है उनके लिए भी यह अहम हिस्सा है।