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विभाग ने बढ़ाया बच्चों के जेल में रहने का समय, 816 महिला कैदी और 47 बच्चे शामिल

चंडीगढ़  हरियाणा की जेलों में अब मां के साथ रह रहे बच्चों को बड़ी राहत मिली है। दरअसल जेल विभाग ने बच्चों के साथ मां के रहने की अवधि को 2 साल बढ़ा दिया है। इसके बाद अब बच्चे 6 की बजाय 8 साल तक जेल में अपनी मां के साथ रह सकेंगे। डी.जी. जेल आलोक राय ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि इस फैसले से जेल में रह रही महिला कैदियों के साथ उन बच्चों को भी राहत मिलेगी जिनका बाहर कोई नहीं है। जेल विभाग ऐसे बच्चों के लिए जेल परिसर में ही उनकी पढ़ाई और पौष्टिक खाने की पूरी व्यवस्था कर रहा है। प्रदेश की 17 जेलों में बच्चों के खेलने के लिए क्रैच बने हुए हैं। इन बच्चों के खेल, खान-पान एवं अच्छे स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जाता है। केंद्रीय जेलों सहित हरियाणा की कुल 20 जेलों में से 17 में महिला वार्ड बने हुए हैं। अभी इन जेलों में कुल 816 महिला कैदी बंद हैं जिनमें से 162 महिलाएं सजा काट रही हैं और 654 महिलाओं के केस अंडर ट्रायल चल रहे हैं। इन महिला बंदियों के पास कुल 47 बच्चे बंद हैं, जिनकी उम्र 6 वर्ष तक की आयु के बीच है। जेल विभाग के इस फैसले से इन बच्चों को राहत पहुंची है। हफ्ते में एक दिन बाहर जाते हैं बच्चेः छोटे बच्चों को सप्ताह में एक बार जेल के मुख्य गेट से बाहर जेल परिसर में बने पार्को आदि में जेल के महिला मुलाजिम के निगरानी में घूमने के लिए भेजा जाता है। ओपन जेलों के तहत हरियाणा में करनाल और फरीदाबाद में 2 ओपन जेलें खोली गई हैं जहां करनाल में 30 फ्लैट । हैं वहीं फरीदाबाद में 36 जहां पर यह कैदी अपने परिवार के साथ रह रहे हैं। जेल विभाग ऐसे बच्चों के लिए जेल परिसर में ही उनकी पढ़ाई और पौष्टिक खाने की पूरी व्यवस्था कर रहा है। प्रदेश की 17 जेलों में बच्चों के खेलने के लिए क्रैच बने हुए हैं। इन बच्चों के खेल को खान-पान एवं अच्छे स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जाता है। 816 महिला कैदी जेलों में बंद हैं केंद्रीय जेलों सहित हरियाणा की कुल 20 जेलों में से 17 जेलों में जेल विभाग के द्वारा महिला वार्ड बने हुए हैं। अभी इन जिलों में कुल 816 महिला कैदी बंद हैं, जिनमें से 162 महिलाएं सजा काट रही है और 654 महिलाओं के केस अंडर ट्रायल चल रहे हैं। इन महिला बंदियों के पास कुल 47 बच्चे बंद है, जिनकी उम्र 6 वर्ष तक की आयु के बीच है। जेल विभाग के इस फैसले से इन बच्चों को राहत पहुंची है। हफ्ते में एक दिन बाहर जाते हैं बच्चे छोटे बच्चों को सप्ताह में एक बार जेल के मुख्य गेट से बाहर जेल परिसर में बने पार्कों आदि में जेल के महिला मुलाजिम के निगरानी में घूमने के लिए भेजा जाता है। डीजी जेल आलोक राय ने बताया कि सूबे की ओपन जेलों के तहत हरियाणा में करनाल और फरीदाबाद में 2 ओपन जेल खोली गई हैं, जहां करनाल में 30 फ्लैट हैं वहीं फरीदाबाद में 36 जहां पर यह कैदी अपने परिवार के साथ रह रहे हैं। क्या बोले डीजी जेल हरियाणा के डीजी जेल आलोक राय ने बताया कि इस फैसले से बच्चों और मां दोनों को राहत मिलेगी। कई बार अलग-अलग रहने से बच्चे डिप्रेशन में चले जाते हैं, या उनकी मां के साथ ऐसा हो जाता है। अब दोनों साथ रहेंगे तो वह अवसाद से दूर रहेंगे। जेल विभाग ऐसे बच्चों को हर सुविधा दे रहा है। नए फैसले से मां और बच्चों दोनों को मिलेगी राहत : आलोक राय हरियाणा के डी.जी. जेल आलोक राय ने कहा कि इस फैसले से बच्चों और मां दोनों को राहत मिलेगी। कई बार अलग-अलग रहने से बच्चे डिप्रैशन में चले जाते हैं या उनकी मां के साथ ऐसा हो जाता है। अब दोनों साथ रहेंगे तो वह अवसाद से दूर रहेंगे। जेल विभाग ऐसे बच्चों को हर सुविधा दे रहा है।

हरियाणा सरकार की पहल: जेलों में बंद कैदी अब होंगे कुशल और आत्मनिर्भर

हरियाणा  हरियाणा की जेलें वर्तमान में अपनी निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक कैदियों को संभाल रही हैं। राज्य की 20 जेलों की कुल क्षमता 22,837 कैदियों की है, जबकि 1 जुलाई 2025 तक इनमें 27,230 कैदी बंद थे। यानी जेलों में 4,393 कैदियों की अधिक भीड़ है। यह स्थिति जेल प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करती है, हालांकि डीजी जेल का कार्यभार संभाल रहे आईपीएस अधिकारी आलोक राय का कहना है कि इस बढ़ी हुई संख्या के बावजूद कैदियों के लिए पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध है। कैदियों के पुनर्वास की दिशा में कौशल विकास पर जोर सरकार जेलों में बंद कैदियों के पुनर्वास के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों को प्राथमिकता दे रही है। करेक्शनल कंपाउंड्स के पहले चरण को शुरू करने की मंजूरी मिल चुकी है और इसका निर्माण कार्य प्रगति पर है। इन पहलों के तहत: 686 कैदियों को कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग की मदद से विभिन्न कोर्स कराए जा रहे हैं। अंबाला, पानीपत, करनाल, फरीदाबाद और गुरुग्राम की जेलों में भी जल्द ही यह प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। पॉलिटेक्निक के माध्यम से दीर्घकालिक डिप्लोमा और कोर्स शुरू करने का भी प्रस्ताव भेजा गया है।  इन पहलों का उद्देश्य कैदियों को जेल से रिहा होने के बाद बेहतर रोजगार के अवसर प्रदान करना है, ताकि वे समाज की मुख्यधारा से फिर जुड़ सकें। जेलों में पेट्रोल पंप और उद्योग कैदियों को आत्मनिर्भर बनाने और जेलों की आय बढ़ाने के लिए कई अनूठी पहलें की गई हैं।  इनमें प्रमुख हैं:-     कुरुक्षेत्र की जिला जेल में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के सहयोग से पेट्रोल पंप और सीएनजी स्टेशन की स्थापना। इसकी पिछले वर्ष की बिक्री 54 करोड़ रुपये रही।     इस मॉडल को अंबाला, हिसार-2, यमुनानगर, करनाल और सोनीपत में भी दोहराया जा रहा है।     जेलों में रेडियो स्टेशन, सरसों का तेल निकालने के कोल्हू, आटा चक्की, और अन्य लघु उद्योग भी लगाए गए हैं।     इन उद्योगशालाओं में कैदी घरेलू उपयोग की वस्तुएं तैयार कर रहे हैं, जिससे उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद मिल रही है। जेलों की सुरक्षा में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल जेल प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में भी तेजी से कदम बढ़ा रहा है:-     जेल परिसरों में बैगेज स्कैनर, डोर फ्रेम और हैंडहेल्ड मेटल डिटेक्टर लगाए गए हैं।     अंबाला जेल में हारमोनियस कॉल ब्लॉकिंग सिस्टम स्थापित किया जा रहा है और गुरुग्राम जेल में इसकी स्थापना प्रक्रिया जारी है।     1,350 सीसीटीवी कैमरे और नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) सुरक्षा की निगरानी के लिए लगाए गए हैं।     436 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सिस्टम के ज़रिए अब करीब 84% कैदियों की कोर्ट में पेशी वर्चुअल तरीके से हो रही है, जिससे सुरक्षा जोखिम और सरकारी खर्च दोनों में कमी आई है। स्वास्थ्य सुविधाएं और चिकित्सा सेवाएं कैदियों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए जेल अस्पतालों को नवीनतम चिकित्सा उपकरणों से सुसज्जित किया गया है। इससे कैदियों को जेल परिसर में ही बेहतर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं। सुधार और पुनर्वास की दिशा में बड़ा कदम यह स्पष्ट है कि हरियाणा सरकार केवल जेलों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि कैदियों के समग्र सुधार, पुनर्वास, रोजगार सृजन और सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीकों का समुचित उपयोग कर रही है। यह एक दूरदर्शी कदम है, जो अपराधियों को एक नया जीवन शुरू करने का अवसर देकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक सिद्ध होगा।