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पंजाब में फरवरी में मार्च-अप्रैल जैसी गर्मी का एहसास

लुधियाना. पंजाब में फरवरी के महीने में ही मार्च-अप्रैल वाली गर्मी का एहसास हो रहा है। कई जिलों में दिन का तापमान लगातार सामान्य से चार से पांच डिग्री सेल्सियस अधिक चल रहा है। सोमवार को भी अधिकांश जिलों में दिन का तापमान सामान्य से चार से पांच डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया, जबकि रात का तापमान सामान्य के आसपास रहा। कुछ जिलों में सामान्य से कम तापमान दर्ज किया गया। मौसम केंद्र चंडीगढ़ के अनुसार, फरीदकोट में दिन का तापमान 31.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो कि सामान्य से छह डिग्री सेल्सियस अधिक था। वहीं पटियाला, चंडीगढ़, रूपनगर और बठिंडा में तापमान 27 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया, जो कि सामान्य से चार डिग्री सेल्सियस ज्यादा था। इसी तरह लुधियाना, फिरोजपुर, मोहाली और होशियारपुर में तापमान 26 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहा, जो कि सामान्य से तीन डिग्री सेल्सियस ज्यादा था। पिछले एक सप्ताह से दिन में लगातार तापमान अधिक रहने से गेहूं की खेती करने वाले किसानों की चिंता बढ़ी हुई है। हालांकि, अभी गेहूं में बल्लियां पड़नी शुरू हुई है, अगेती गेहूं में बल्लियां पड़ गई है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार दिन का तापमान रहने से गेहूं की फसल के जल्दी पकने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे दानों के सिंकुड़ने की संभावना रहती है। ऐसे में पैदावार में कमी आने की संभावना रहती है। वर्ष 2023 में भी फरवरी मार्च में अधिक तामपान दर्ज किया गया था। लेकिन राहत की बात यह है कि पंजाब में बुधवार व वीरवार को मौसम बदलने जा रहा है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के चलते कई जिलों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। इस दौरान कई जिलों में बादल छाएं रह सकते हैं, कुछ जिलों में बूंदाबांदी, कुछ जिलों में हल्की से सामान्य वर्षा हो सकती है। अगर वर्षा होती है, तो ठंड बढ़ने से गेहूं को लाभ होगा। कुछ दिनों के लिए खेतों में नमी बढ़ जाएगी। 19 फरवरी से मौसम साफ हो जाएगा।

रायपुर में दिन में 33 डिग्री पारा पहुँचने से पसीना छुड़ाने लगी गर्मी

रायपुर. छत्तीसगढ़ में लोगों को आने वाले दिनों में गर्मी का सामना करना पड़ेगा. मौसम फिलहाल शुष्क बना हुआ है. राजधानी का अधिकतम तापमान 33 डिग्री के करीब पहुंच गया, माह के अंतिम दिन पारा 36 डिग्री तक पहुंचने की उम्मीद है. अभी पश्चिम से पूर्व की ओर आने वाली हवा के प्रबल होने की वजह से दिन का पारा चढ़ रहा है. पिछले चौबीस घंटे में रायपुर का न्यूनतम और अधिकतम तापमान सामान्य से 1.7 डिग्री अधिक रिकार्ड किया गया. रायपुर की गर्मी लगातार तीसरे दिन राज्य में सबसे अधिक रही. विशेषज्ञों के अनुसार, फरवरी के अंतिम दिनों तक गर्मी का तेज असर महसूस होने लगता है. अभी दिन में गर्मी का अनुभव बढ़ रहा है और रात में राहत महसूस हो रही है. धीरे-धीरे रात का पारा चढ़ने के बाद यहां से ठंड की पूरी तरह विदाई हो जाएगी. वर्तमान में ठंड का अच्छा प्रभाव अंबिकापुर समेत राज्य के उत्तरी सीमावर्ती क्षेत्रों में महसूस हो रहा है. वहां से ठंड की विदाई मार्च के अंतिम दिनों में ही होती है. रायपुर में आज कैसा रहेगा मौसम ? राजधानी रायपुर में सोमवार को दिन के वक्त हल्की गर्मी का अहसास होगा. सुबह के वक्त धुंध छाए रहने के आसार हैं. दिन में 33 डिग्री सेल्सियस और रात में 19 डिग्री सेल्सियस के आसपास तापमान दर्ज हो सकता है. 

भारत पर गर्मी का कहर, ऑक्सफोर्ड ने दी खौफनाक वॉर्निंग

नईदिल्ली  सूरज आग उगलेगा, सड़कें पिघलने लगेंगी, आपका अपना घर एक ‘भट्टी’ बन जाएगा…ये कोई डरावनी कहानी नहीं, बल्कि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वो ताजा रिसर्च है जिसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. 2026 की इस सबसे खौफनाक रिपोर्ट के अनुसार, 2050 तक दुनिया की 40% आबादी यानी लगभग 4 अरब लोग ऐसी गर्मी झेलने को मजबूर होगी, जिसे सहना इंसानी शरीर के बस ककी बात नहीं होगी. दिल दहलाने वाली बात ये है कि वैज्ञानिकों ने भारत के लिए भी रेड अलर्ट जारी किया है. बताया गया है कि ऐसी गर्मी आने वाली है कि धरती पानी की तरह उबलने लगेगी. भारत में क्या होने वाला है? ऑक्सफोर्ड के वैज्ञानिकों ने भारत के लिए ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत, नाइजीरिया और इंडोनेशिया उन देशों में सबसे आगे होंगे जहां गर्मी का सबसे भयानक रूप देखने को मिलेगा. दावा किया जा रहा है कि पारा 45 से 50 डिग्री सेल्सियस को पार करेगा, इंसानों का शरीर अंदरूनी अंगों को ठंडा रखने में नाकाम हो जाएगा. भारत की करोड़ों की आबादी के पास एयर कंडीशनिंग की सुविधा नहीं है. वैज्ञानिकों का दावा है कि आने वाले दशकों में गर्मी से होने वाली मौतों का आंकड़ा सुनामी की तरह बढ़ेगा. 2010 में केवल 1.5 अरब लोग इस खतरे में थे, लेकिन 2050 तक यह संख्या दोगुनी से भी ज्यादा होकर 3.8 अरब पहुंच जाएगी. हम एक ऐसे ग्रह की ओर बढ़ रहे हैं जिसकी पहचान सिर्फ ‘आग और धुआं’ होगी. गैस चेंबर बन जाएंगे ये देश अगर आपको लगता है कि रूस, कनाडा या फिनलैंड जैसे ठंडे देश सुरक्षित हैं, तो आप बहुत बड़ी गलतफहमी में हैं. इन देशों के घर गर्मी सोखने और सर्दी से बचाने के लिए बनाए गए हैं. जैसे ही तापमान बढ़ेगा, ये घर ‘गैस चैंबर’ में तब्दील हो जाएंगे. यहां का ट्रांसपोर्ट और स्वास्थ्य ढांचा भीषण गर्मी के लिए तैयार ही नहीं है. ऑक्सफोर्ड की रिसर्चर राधिका खोसला ने चेतावनी दी है कि 1.5 डिग्री की सीमा पार होते ही शिक्षा, स्वास्थ्य और खेती सब कुछ तबाह हो जाएगा. खाने का संकट आएगा, फसलें या तो जल जाएंगी या सूख जाएंगी और भूखमरी फैल जाएगी. करोड़ों लोग रहने लायक जगहों की तलाश में घर छोड़ेंगे.