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वास्तु दोष से सुरक्षा चाहिए? होलाष्टक की एंट्री से पहले घर में करें ये खास परिवर्तन

होलाष्टक का समय हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। होली से आठ दिन पहले शुरू होने वाले इस समय को 'होलाष्टक' कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इन आठ दिनों में सभी ग्रह उग्र अवस्था में होते हैं, जिसके कारण वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। यही कारण है कि इस दौरान कोई भी शुभ कार्य वर्जित होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, यदि आप होलाष्टक शुरू होने से पहले अपने घर और जीवन से जुड़ी कुछ खास तैयारियों को पूरा कर लेते हैं तो आप आने वाली परेशानियों और वास्तु दोषों से बच सकते हैं। आइए जानते हैं विस्तार से कि वे कौन से काम हैं जिन्हें समय रहते निपटा लेना चाहिए। घर की गहरी सफाई और कबाड़ का निपटारा वास्तु में स्वच्छता का सीधा संबंध सकारात्मकता से है। होलाष्टक के दौरान नकारात्मक शक्तियां प्रभावी होती हैं, इसलिए घर के कोनों में जमा धूल-मिट्टी और मकड़ी के जाले वास्तु दोष को निमंत्रण देते हैं।  घर में पड़ी टूटी हुई क्रॉकरी, बंद घड़ियां या इलेक्ट्रॉनिक कचरा तुरंत बाहर करें। ये चीजें राहु और शनि के नकारात्मक प्रभाव को बढ़ाती हैं। मुख्य द्वार के पास पुराने फटे जूते न रखें। होलाष्टक से पहले इन्हें हटा दें ताकि घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश सुगम हो सके। ईशान कोण को दोषमुक्त करना घर का उत्तर-पूर्वी कोना यानी ईशान कोण देवताओं का स्थान माना जाता है। होलाष्टक शुरू होने से पहले यह सुनिश्चित करें कि इस दिशा में कोई भारी सामान या गंदगी न हो। यदि यहां कोई भारी अलमारी रखी है, तो उसे दक्षिण या पश्चिम दिशा में खिसका दें। इस कोने में गंगाजल का छिड़काव करें ताकि ग्रहों की उग्रता का असर आपके घर की शांति पर न पड़े।  रसोई और नमक का उपाय वास्तु शास्त्र में रसोई को घर की समृद्धि का केंद्र माना गया है। होलाष्टक से पहले रसोई की सफाई अनिवार्य है। होलाष्टक शुरू होने से एक दिन पहले पूरे घर में सेंधा नमक मिले हुए पानी से पोंछा लगाएं। नमक नकारात्मक ऊर्जा को सोखने का काम करता है। यह नियम बना लें कि होलाष्टक के दौरान रात को रसोई में जूठे बर्तन न रहें। इससे अन्नपूर्णा दोष लगता है। मुख्य द्वार का सौंदर्यीकरण वास्तु के अनुसार घर का मुख्य द्वार ही भाग्य का द्वार होता है। होलाष्टक में ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव को रोकने के लिए मुख्य द्वार पर आम या अशोक के पत्तों का तोरण लगाएं। द्वार के दोनों ओर सिंदूर से स्वास्तिक बनाएं। यह चिन्ह सुरक्षा कवच की तरह काम करता है और बुरी शक्तियों को घर के अंदर प्रवेश करने से रोकता है। धन स्थान और तिजोरी की व्यवस्था होलाष्टक के दौरान आर्थिक तंगी से बचने के लिए अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान को व्यवस्थित करें। तिजोरी में लाल कपड़ा बिछाएं और उसमें कुछ गोमती चक्र या कौड़ियां रखें। ध्यान रहे कि होलाष्टक शुरू होने के बाद निवेश या बड़े आर्थिक लेनदेन से बचना चाहिए, इसलिए जो भी निवेश संबंधी कागजी कार्यवाही है, उसे पहले ही पूरा कर लें। पूजा घर की शुद्धि होलाष्टक में भक्ति का विशेष महत्व है क्योंकि भक्त प्रहलाद को इसी दौरान प्रताड़ित किया गया था। अपने मंदिर की सफाई करें और भगवान की मूर्तियों को गंगाजल से स्नान कराएं। खंडित मूर्तियों या तस्वीरों को विसर्जित कर दें। होलाष्टक शुरू होने से पहले शुद्ध घी का दीपक जलाने का संकल्प लें, ताकि घर का आभामंडल शुद्ध रहे।

24 फरवरी को फाल्गुन अष्टमी से शुरू हो रहे होलाष्टक?

होली से पहले आने वाले आठ दिन होलाष्टक के नाम से जाने जाते हैं, जिनका सनातन धर्म में विशेष महत्व है।साल 2026 में पंचांग के अनुसार फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से होलाष्टक की शुरुआत 24 फरवरी से मानी जा रही है। यह अवधि होलिका दहन यानी फाल्गुन पूर्णिमा तक चलती है और इस दौरान मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।मान्यता है कि इन दिनों में नकारात्मक ऊर्जा प्रबल रहती है, इसलिए नई शुरुआत टाल दी जाती है।होलाष्टक का संबंध भक्त प्रह्लाद और हिरण्यकश्यप की कथा से भी जुड़ा है, जो अटूट भक्ति और आस्था का संदेश देती है। होलाष्टक 2026 कब से हो रहे हैं आरंभ? वैदिक पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 24 फरवरी सुबह 7 बजकर 1 मिनट से होगी और यह तिथि 25 फरवरी शाम 4 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। चूंकि होलाष्टक का आरंभ अष्टमी तिथि से माना जाता है, इसलिए इस वर्ष होलाष्टक 24 फरवरी 2026 से शुरू होंगे। क्या है होलाष्टक? होलाष्टक का धार्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। पौराणिक कथा के अनुसार राक्षसराज हिरण्यकश्यप स्वयं को भगवान मानता था और अपने पुत्र प्रह्लाद की भगवान विष्णु में अटूट भक्ति से क्रोधित रहता था। उसने प्रह्लाद को आठ दिनों तक अनेक कष्ट दिए। यही आठ दिन होलाष्टक के रूप में माने जाते हैं।मान्यता है कि इन दिनों में वातावरण में उग्र और अस्थिर ऊर्जा रहती है, इसलिए शुभ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। यह समय आत्मचिंतन, साधना और संयम का माना गया है। होलाष्टक में क्या नहीं करें? शास्त्रों के अनुसार होलाष्टक के दौरान 16 संस्कार जैसे नामकरण, जनेऊ, विवाह, गृह प्रवेश आदि शुभ कार्य नहीं करने चाहिए। इन दिनों में हवन, यज्ञ या किसी नए कार्य की शुरुआत भी वर्जित मानी गई है।यह भी परंपरा है कि जिन कन्याओं का हाल ही में विवाह हुआ हो, वे इस अवधि में अपने मायके में रहें। साथ ही, किसी अनजान व्यक्ति से खाने-पीने की वस्तु लेने से भी बचना चाहिए। मान्यता है कि इस समय नकारात्मक प्रभाव अधिक सक्रिय रहते हैं। होलाष्टक में क्या करें? नियमित पूजा-पाठ और मंत्र जाप करें। भगवान विष्णु या अपने इष्ट देव का ध्यान करें। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान दें। घर में शांति और सकारात्मक वातावरण बनाए रखें। श्रद्धा और नियमपूर्वक होलिका दहन की तैयारी करें। होलिका दहन 2026 शुभ मुहूर्त वर्ष 2026 में होलिका दहन 3 मार्च को किया जाएगा। शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 22 मिनट से रात 8 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। यह समय बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है और श्रद्धापूर्वक पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

होलाष्टक के दौरान इन राशियों पर बढ़ सकता है संकट, बरतें सतर्कता

हिंदू पंचांग के अनुसार होली से आठ दिन पहले होलाष्टक की शुरुआत होती है। धार्मिक मान्यताओं में इस अवधि को मांगलिक कार्यों के लिए शुभ नहीं माना जाता। कहा जाता है कि इन दिनों ग्रहों की स्थिति उग्र रहती है, जिससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ सकता है। वर्ष 2026 में होलाष्टक का आरंभ 24 फरवरी 2026 से होगा और इसका समापन 3 मार्च 2026 को होलिका दहन के दिन होगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस बार होलाष्टक का प्रभाव कुछ राशियों पर अधिक देखने को मिल सकता है। आइए जानते हैं किन 6 राशियों को इस दौरान विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। मेष राशि होलाष्टक का समय मेष राशि के जातकों के लिए चुनौतीपूर्ण रह सकता है। जमीन-जायदाद से जुड़े मामलों में विवाद की स्थिति बन सकती है। पारिवारिक तनाव और दांपत्य जीवन में मतभेद संभव हैं। इस दौरान धैर्य बनाए रखना आवश्यक होगा। पेट से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं भी परेशान कर सकती हैं, इसलिए खान-पान पर विशेष ध्यान दें। कर्क राशि कर्क राशि वालों को सेहत को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। इन आठ दिनों में स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव संभव है। करियर से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय टालना बेहतर रहेगा। प्रेम संबंधों में विवाद से बचें, अन्यथा रिश्तों में दूरी आ सकती है। संयम और समझदारी से काम लेना लाभकारी रहेगा। सिंह राशि सिंह राशि के जातकों को इस दौरान लोगों पर आंख मूंदकर भरोसा करने से बचना चाहिए। कार्यक्षेत्र में लापरवाही नुकसानदायक साबित हो सकती है। व्यापारियों को जोखिम भरे निवेश से बचना चाहिए। अचानक खर्च बढ़ने से आर्थिक दबाव महसूस हो सकता है। बजट संतुलित रखना जरूरी होगा। वृश्चिक राशि वृश्चिक राशि के लिए होलाष्टक के आठ दिन कुछ बाधाएं लेकर आ सकते हैं। कार्यों में रुकावट और आर्थिक तंगी की स्थिति बन सकती है। रिश्तों में भी तनाव संभव है। पार्टनर की भावनाओं को समझना और संवाद बनाए रखना जरूरी रहेगा। धैर्य और संयम से स्थिति संभाली जा सकती है। कुंभ राशि कुंभ राशि के जातकों को आर्थिक मामलों में विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। इस दौरान बड़ा निवेश करने या किसी को धन उधार देने से बचें। वाहन चलाते समय सावधानी रखें, दुर्घटना की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। स्वास्थ्य और वित्त दोनों मामलों में सतर्कता आवश्यक है। मीन राशि मीन राशि के नौकरीपेशा और कारोबारी लोगों को कार्यक्षेत्र में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। काम में रुकावटें और खर्चों में वृद्धि तनाव का कारण बन सकती है। पारिवारिक जीवन में भी मतभेद संभव हैं। रिश्तों में किसी तीसरे व्यक्ति की दखलअंदाजी से बचें और संवाद बनाए रखें। क्या रखें ध्यान? होलाष्टक में विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य न करें। महत्वपूर्ण वित्तीय निर्णय टालना बेहतर हो सकता है। पूजा-पाठ, दान-पुण्य और संयम से समय बिताना शुभ माना जाता है। होलाष्टक को आध्यात्मिक दृष्टि से आत्मचिंतन और सावधानी का समय माना गया है। हालांकि यह ज्योतिषीय आकलन पर आधारित सामान्य भविष्यफल है, व्यक्तिगत कुंडली के अनुसार परिणाम भिन्न हो सकते हैं। अतः किसी भी बड़े निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहेगा।