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घर में चमगादड़ आना शुभ या अशुभ? जानें वास्तु और वैज्ञानिक कारण

चमकादड़ के घर में घुसने से हर आदमी को डर लगने लगता है क्योंकि उनकी बनावट डरावनी होती है. लेकिन इसके पीछे धार्मिक मान्यता से ज्यादा वैज्ञानिक वजह छुपी है. हालांकि, वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में चमगादड़ का आना अच्छा संकेत नहीं होता है. इसे अक्सर नकारात्मक ऊर्जा, आर्थिक परेशानी या घर में हो रहे तनाव से जोड़ा जाता है. वास्तु मान्यताओं के मुताबिक: – यह घर में अशांति या विवाद का संकेत हो सकता है. – बार-बार आना आर्थिक नुकसान से संबंधित होता है. – अगर घर के अंदर चमकादड़ की मृत्यु हो जाए तो इसे और भी अशुभ माना जाता है. फेंगशुई में चमकादड़ का महत्व फेंगशुई में चमगादड़ को सौभाग्य, खुशहाली और लंबी उम्र का प्रतीक माना जाता है. वहां इसे सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जाता है. धार्मिक उपाय क्या करें? वास्तु शास्त्र के मुताबिक, अगर घर से चमकादड़ की नकारात्मक ऊर्जा दूर रखनी है तो घर में गंगाजल छिड़कें. और शाम को कपूर या लोबान जलाएं.  घर में चमकादड़ घूसने के ये कारण हैं- खाने की तलाश घर में चमकादड़ घूसने की सबसे आम वजह होती है खाने की तलाश. चमगादड़ ज्यादातर कीड़े-मकौड़े खाते हैं. अगर आपके घर या आसपास मच्छर, पतंगे, कॉकरोच या छोटे कीड़े ज्यादा हैं, तो उन्हें पकड़ने के चक्कर में वे घर के अंदर आ सकते हैं. इसके अलावा, अगर कहीं खाना खुला या बासी पड़ा हो, तो भी यह उन्हें आकर्षित कर सकता है. गंदगी और नमी वाली जगहों पर कीड़े ज्यादा होते हैं, और वही चमगादड़ों को खींच लाती है. सुरक्षित जगह की तलाश चमगादड़ दिन में आराम करने के लिए अंधेरी और शांत जगह ढूंढते हैं. अगर आपके घर में स्टोर रूम, छत की दरारें, खिड़की के ऊपर खाली जगह या कम इस्तेमाल होने वाले कोने हैं, तो वे वहां छिप सकते हैं. कई बार वे घर को सुरक्षित जगह समझकर कुछ समय के लिए वहीं टिक जाते हैं. मौसम का भी होता है असर तेज गर्मी, बारिश या मौसम में बदलाव होने पर ये जीव ठंडी और सूखी जगह ढूंढते हैं. ऐसे में घर उन्हें एक सुरक्षित विकल्प लगता है. कभी-कभी रास्ता भटक जाते हैं कई बार छोटे या अनुभवहीन चमगादड़ उड़ते समय रास्ता भटक जाते हैं. खुली खिड़की या दरवाजे से अंदर तो आ जाते हैं, लेकिन बाहर निकलने का रास्ता नहीं समझ पाते हैं. अगर घर में चमकादड़ आ जाए तो क्या करें? – कमरे की लाइट बंद कर दें. – बाहर की खिड़की या दरवाजा खोल दें. – कुछ समय में यह खुद बाहर निकल जाएगा. चमगादड़ अपनी खास क्षमता (इकोलोकेशन) से रास्ता पहचान लेते हैं.

घर में सांप दिखना शुभ या अशुभ? जानें वास्तु शास्त्र क्या कहता है

भीषण गर्मी में जब बाहर की जमीन तपने लगती है, तो सांप अक्सर ठंडक की तलाश में हमारे घरों का रुख करते हैं. वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में सांप का निकलना केवल एक इत्तेफाक नहीं है, बल्कि यह आपके जीवन और घर की ऊर्जा से जुड़ा एक बड़ा संकेत भी हो सकता है. समझते हैं कि सांपों का घर में आना धार्मिक और वास्तु के नजरिए से क्या संकेत देता है: सांप का दिखना: अच्छा या बुरा? तरक्की और सौभाग्य: हिंदू धर्म और वास्तु में सांपों को बदलाव, तरक्की और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है. नई शुरुआत: जिस तरह सांप अपनी पुरानी खाल (केंचुली) छोड़कर नया रूप लेता है, वैसे ही उसका घर में आना जीवन में किसी नई शुरुआत का इशारा हो सकता है. आध्यात्मिक विकास: सांप की उपस्थिति आपके आध्यात्मिक विकास और खुद को बेहतर तरीके से समझने (आत्म-जागरूकता) को भी दर्शाती है. वास्तु दोष की चेतावनी: हालांकि, घर में इनकी मौजूदगी वास्तु व्यवस्था में किसी कमी या ऊर्जा के असंतुलन का संकेत भी हो सकती है. दिशाओं का महत्व उत्तर दिशा: वास्तु में सांपों का सीधा नाता उत्तर दिशा से माना गया है, जो आध्यात्मिक उन्नति की दिशा है. इस दिशा में सांप से जुड़े प्रतीक रखना ऊर्जा को बैलेंस करने में मदद करता है. दक्षिण-पश्चिम कोना: इस दिशा में कभी भी सांप से जुड़ी कोई फोटो या चीज न रखें, क्योंकि यह रिश्तों में तनाव और झगड़े पैदा कर सकता है. घर में सांप होने के संकेत सांप की मौजूदगी को इन आसान संकेतों से पहचाना जा सकता है: केंचुली: घर के किसी कोने या बगीचे में सांप की पुरानी खाल मिलना. आवाजें: सीलिंग या सीढ़ियों के नीचे रेंगने या सरसराहट की आवाजें आना. निशान: धूल भरी या नमी वाली जगह पर रेंगने के टेढ़े-मेढ़े निशान दिखना. ठंडी जगहें: भीषण गर्मी में सांप अक्सर बाथरूम, सिंक के नीचे, एसी या फ्रिज के पीछे और सीढ़ियों के नीचे छिपे होते हैं. गंध और मल: वातावरण में एक अजीब सी तीखी गंध महसूस होना या छोटे टुकड़ों जैसा मल दिखना. बचाव के लिए क्या करें? (Do's) सफाई और कबाड़: सांपों को रोकने के लिए घर को हमेशा साफ और कबाड़ मुक्त रखें, क्योंकि गंदगी में वे आसानी से छिप जाते हैं. नेचुरल चीजें: घर में लकड़ी, बांस या पौधों जैसी प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल करें, जो सकारात्मक माहौल बनाती हैं. घंटी और विंड चाइम्स: खिड़कियों या दरवाजों पर विंड चाइम्स या घंटियां लटकाएं; इनकी आवाज और कंपन से सांप दूर रहते हैं. इन गलतियों से बचें (Don'ts) शीशे की पोजीशन: घर में एक-दूसरे के ठीक सामने शीशे न लगाएं, क्योंकि यह ऊर्जा में टकराव पैदा करता है और सांपों को आकर्षित कर सकता है. उत्तर दिशा का महत्व: वास्तु में सांपों का सीधा संबंध उत्तर दिशा से माना जाता है, जिसे आध्यात्मिक उन्नति और प्रगति की दिशा कहा जाता है. इस दिशा को हमेशा साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखना चाहिए ताकि घर की ऊर्जा संतुलित रहे. दक्षिण-पश्चिम कोना: इस दिशा या कोने की विशेष सावधानी रखनी चाहिए; यहां कभी भी सांप से जुड़ी कोई फोटो या सजावटी सामान नहीं रखना चाहिए. वास्तु के अनुसार इस दिशा में सांप से जुड़ी चीजें रखने से परिवार के रिश्तों में झगड़े और तनाव पैदा हो सकते हैं.

आर्थिक तंगी से चाहिए छुटकारा? आज ही पर्स में रखें ये खास वस्तुएं

वास्तु और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुछ ऐसी चीजें बताई गई हैं, जो आपको मां लक्ष्मी की कृपा दिलाती हैं और आर्थिक तंगी दूर करती हैं। इन चीजों को पर्स में रखने से आपको काफी लाभ देखने को मिल सकता है। इन उपायों को करने से न केवल आर्थिक तंगी दूर होती है, बल्कि फिजूलखर्ची भी रुकती है। चलिए जानते हैं इस बारे में। जरूर करें ये उपाय अगर आप पैसों की तंगी का सामना कर रहे हैं, तो इससे राहत पाने के लिए ज्योतिष शास्त्र में सुझाया हुआ ये उपाय कर सकते हैं। इसके लिए 21 साबुत चावल के दानों को हल्दी से रंग लें। इसके बाद इन्हें पीले कपड़े या कागज में बांध दें और इसे अपने पर्स में रख लें। ऐसा करने से आपको धन संबंधी परेशानियों से राहत मिल सकती है और फिजूलखर्ची कम होती है। इस उपाय को आप किसी भी शुक्ल पक्ष के दूसरे गुरुवार को करना उत्तम माना गया है। मिलेगी मां लक्ष्मी की कृपा धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लक्ष्मी जी को कमल के बीज प्रिय माने गए हैं। ऐसे में अगर आप इन्हें अपने पर्स में रखते हैं, तो देवी लक्ष्मी की कृपा से आपको धन संबंधी समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है। इसकी के साथ आप अपने पर्स में गोमती चक्र भी रख सकते हैं, जिससे आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं। शुभ हैं इन चीजों को रखना आप अपने पर्स में एक चांदी का छोटा-सा चौकोर टुकड़ा या फिर चांजी का सिक्का भी रख सकते हैं। इससे आपको मां लक्ष्मी की कृपा मिलती है और बरकत कभी खत्म नहीं होती। इसके साथ ही आप अपने आराध्य देव या देवी-देवताओं का छोटा-सा चित्र भी अपने पर्स में रख सकते हैं, जो काफी शुभ माना जाता है। इससे बरकर बनी रहती है। भूलकर भी न रखें ये चीजें     पर्स में कभी भी फटे नोट नहीं रखने चाहिए, इससे धन की हानि होने लगती है।     पुराने बिल और रसीदें आदि भी अपने पर्स में रखने से बचें, जो बरकत में रुकावट बनते हैं।     कई लोग अपने मृत परिजनों की तस्वीर न पर्स में रखते हैं, जो गलत माना गया है।     पर्स में पुरानी चाबियां, जंग लगे सिक्के, पिन या किसी भी प्रकार की बेकार धातु नहीं रखनी चाहिए।     साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि आपका पर्स फटा हुआ नहीं होना चाहिए।  

खाने की दिशा का रहस्य: आपकी एक गलती बिगाड़ सकती है आर्थिक स्थिति

सनातन धर्म में वास्तु शास्त्र का विशेष महत्व है। इस शास्त्र में घर की सभी दिशाओं के महत्व वर्णन किया गया है। ऐसा माना जाता है कि घर में वास्तु शास्त्र के नियम का पालन करने से अन्न-धन की बरकत बनी रहती है। साथ ही सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, सही दिशा की तरफ मुंह करके भोजन करने से मानसिक शांति और समृद्धि में वृद्धि होती है। साथ ही स्वास्थ्य में लाभ मिलता है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि किस दिशा में मुंह करके भोजन करना शुभ होता है। भोजन के समय किस दिशा में होना चाहिए मुंह?     वास्तु शास्त्र के अनुसार, पूर्व दिशा की तरफ भोजन करना बेहद शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस नियम का पालन करने से मानसिक शांति मिलती है। साथ ही बीमारियां दूर रहती हैं।     इसके अलावा उत्तर दिशा भी भोजन के लिए शुभ मानी जाती है। इस दिशा में मुंह करके भोजन करने से करियर में तरक्की के मार्ग खुलते हैं। सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। धन लाभ के योग बनते हैं, क्योंकि इस दिशा को धन के देवता कुबेर की मानी जाती है।     जो व्यापार या नौकरी करते हैं। उनके लिए पश्चिम दिशा की तरफ मुंह करके भोजन करना शुभ माना जाता है। इससे आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और कारोबार में सफलता मिलती है। साथ ही घर में सुख-शांति का आगमन होता है। भोजन के समय इस दिशा की तरफ न करें मुंह वास्तु शास्त्र के अनुसार, दक्षिण दिशा को यम की दिशा मानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिशा की तरफ मुंह करके भोजन करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा आती है। साथ ही परिवार में किसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए भोजन करते समय दिशा का ध्यान जरूर रखें। ऐसा न करने से अशुभ फल की प्राप्ति होती है। भोजन करते समय ध्यान रखें ये बातें भोजन करते समय सदैव शांत रहना चाहिए। इस दौरान क्रोध या बहस करने से बचें। ऐसा माना जाता है कि इस गलती को करने से भोजन का सकारात्मक प्रभाव खत्म हो जाता है। जिस स्थान पर आप भोजन कर रहे हैं। वहां पर पर्याप्त रोशनी जरूर होनी चाहिए। अंधेरे में भोजन करना शुभ नहीं माना जाता है।  

घर की उत्तर दिशा की ये गलतियां बुलाती हैं कंगाली, आज ही करें सुधार

वास्तु शास्त्र में घर की सभी दिशाओं का विशेष महत्व है। सबसे महत्वपूर्ण घर की उत्तर दिशा को माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस दिशा का संबंध धन के देवता कुबेर से है, जो बुद्धि और व्यापार का कारक है। इसलिए कहा जाता है कि घर की उत्तर दिशा में ऐसी चीजों को भूलकर भी नहीं रखना चाहिए, जिससे आर्थिक तंगी और तरक्की में बाधा आती है। आइए इस आर्टिकल में आपको विस्तार से बताते हैं कि घर की उत्तर दिशा में किन चीजों को नहीं रखना चाहिए। नुकीली चीजें वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की उत्तर दिशा में नुकीली चीजों को (सुई, टूटे हुए कांच और कैची आदि) रखने से आर्थिक तंगी और करियर में रुकावट आ सकती है। साथ ही परिवार में कलह-क्लेश की समस्या बढ़ सकती है। टूटी घड़ी या बंद घड़ी घर की उत्तर दिशा में टूटी घड़ी या बंद घड़ी को नहीं रखना चाहिए। इस दिशा में कुबेर देव का वास माना जाता है। वास्तु के इस नियम का पालन न करने से परिवार के सदस्यों की तरक्की में बाधा आ सकती है। साथ ही करियर में नए अवसर प्राप्त नहीं होते। अगर आपने भी घर में बंद घड़ी रखी हुई है, तो उसे सही करवा लें और टूटी घड़ी को घर से बाहर कर दें। कबाड़ और गंदगी वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की उत्तर दिशा में भूलकर भी गंदगी और कबाड़ नहीं रखना चाहिए, क्योंकि इससे नकारात्मक ऊर्जा आकर्षित होती है। इस तरह की गलती को करने से व्यक्ति को जीवन में धन की कमी का सामना करना पड़ता है। साथ ही कारोबार में नुकसान हो सकता है। मुरझाए या कांटेदार पौध इसके अलावा घर की उत्तर में दिशा में मुरझाए या कांटेदार पौधे भी रखने से बचना चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति को जीवन में बुरे परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव की समस्या उत्पन्न हो सकती है। जूते-चप्पल धन के देवता कुबेर की दिशा में जूते-चप्पल रखने से परिवार के सदस्यों को भारी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है और नकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है। अगर आपने भी इस तरह की गलती की है, तो उसमें आज ही सुधार कर लें।  

सीढ़ियों का रंग तय करता है परिवार की प्रगति, जानें कैसे

वास्तु शास्त्र के अनुसार, सीढ़ियों का रंग न केवल घर की ऊर्जा पर प्रभाव डालता है, बल्कि घर के सदस्यों की तरक्की और मानसिक शांति से भी जुड़ा होता है। वास्तु के अनुसार सीढ़ियों के लिए शुभ रंग: हल्का भूरा : पृथ्वी तत्व से जुड़ा होता है, स्थिरता और मजबूती प्रदान करता है। मानसिक संतुलन और आर्थिक स्थायित्व में सहायक होता है। क्रीम या ऑफ-व्हाइट : प्रकाश और शांति का प्रतीक है। तनाव कम करता है, घर में मानसिक सुख और सहयोग को बढ़ाता है। हल्का ग्रे : यह न्यूट्रल और संतुलित रंग माना जाता है। स्पष्टता और फोकस को बढ़ाता है, घर के सदस्यों में एकाग्रता लाता है। हल्का हरा : प्रकृति का प्रतीक है, जीवन ऊर्जा को दर्शाता है। घर में तरक्की, शांति और स्वास्थ्य बनाए रखता है। हल्का पीला : यह सूर्य और सकारात्मकता का प्रतीक है। घर में ऊर्जा और प्रेरणा लाता है, विशेषकर बच्चों और विद्यार्थियों के लिए लाभकारी है। सीढ़ियों के लिए अवॉयड करें ये रंग, वास्तु दोष पैदा करते हैं: गहरा लाल या काला: ये रंग तनाव, क्रोध और नकारात्मक ऊर्जा ला सकते हैं। डार्क ब्लू या गहरा ग्रे: अवसाद और ठहराव की भावना को बढ़ा सकते हैं। बहुत चमकदार रंग (फ्लोरोसेंट शेड्स): मन को विचलित कर सकते हैं, स्थायित्व में कमी लाते हैं। विशेष सुझाव: सीढ़ियों की पेंटिंग करते समय साइड वॉल्स और स्टेप्स (पायदान) में हल्के और साफ रंगों का ही चयन करें। अगर आपके घर में सीढ़ियां दक्षिण या पश्चिम दिशा में हैं, तो हल्के अर्थी टोन्स (जैसे बेज या सेंड स्टोन) सबसे शुभ माने जाते हैं। ऊर्जा के प्रवाह के लिए सीढ़ियों पर किसी एक रंग का अधिक उपयोग न करें, हल्के शेड्स में संयोजन करना बेहतर होता है।

शाम ढलते ही न करें ये 5 गलतियां, धन की देवी हो सकती हैं अप्रसन्न

दिनभर की भागदौड़ के बाद जब सूरज ढलता है, तो वह समय प्रकृति के शांत होने और घर में सकारात्मक ऊर्जा के आगमन का होता है। हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में शाम के समय को 'संध्या काल' कहा जाता है, जो देवताओं की आराधना का समय है। अक्सर हमारे घर के बड़े-बूढ़े हमें शाम के समय सोने या झाड़ू लगाने से टोकते हैं। क्या यह सिर्फ अंधविश्वास है? या फिर इसके पीछे गहरे वास्तु और वैज्ञानिक कारण छिपे हुए हैं। 1. घर में झाड़ू-पोछा करना वास्तु के अनुसार, शाम के समय घर की सफाई करना यानी मां लक्ष्मी को घर से बाहर निकालना है। माना जाता है कि सूर्यास्त के समय मां लक्ष्मी घर में प्रवेश करती हैं। अगर आप उस समय झाड़ू लगाते हैं, तो आप घर की सकारात्मक ऊर्जा और बरकत को बाहर धकेल देते हैं। 2. पैसों का लेन-देन शाम के समय किसी को उधार देना या कर्ज लेना, दोनों ही शुभ नहीं माने जाते। ऐसा कहा जाता है कि सूर्यास्त के बाद धन का आदान-प्रदान करने से लक्ष्मी दूसरे के पास चली जाती है और आपके घर में आर्थिक तंगी आने लगती है। 3. पेड़-पौधों को छूना या पानी देना पौधों में भी जीवन होता है और सूर्यास्त के बाद वे सो जाते हैं। शाम को उन्हें छूना, उनके पत्ते तोड़ना या उन्हें पानी देना उन्हें कष्ट पहुंचाने जैसा है, जिससे घर में वास्तु दोष पैदा होता है। 4. दही या सफेद चीजों का दान वास्तु और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्यास्त के बाद दही, दूध या नमक जैसी सफेद चीजों का दान नहीं करना चाहिए। सफेद चीजों का संबंध शुक्र और चंद्रमा से होता है। शाम को इनका दान करने से घर की सुख-समृद्धि कम होने लगती है। 5. शाम के समय सोना बीमार या बुजुर्गों को छोड़कर, स्वस्थ व्यक्ति का शाम के समय सोना आलस्य और दरिद्रता को आमंत्रण देता है। यह समय ध्यान और पूजा-पाठ का होता है, सोने का नहीं।

शनि की साढ़ेसाती से परेशान? ये पौधा बदल सकता है आपकी किस्मत

आज हम बात कर रहे हैं शमी के पौधे की, जिसका संबंध शनि देव के साथ-साथ भगवान शिव से भी माना गया है। वास्तु शास्त्र में भी इस पौधे को घर में लगाना काफी शुभ माना गया है। अगर आप घर में शमी का पौधा लगाना चाहते हैं, तो कुछ वास्तु नियमों का ध्यान जरूर रखें। चलिए जानते हैं इस बारे में। किस दिशा में लगाएं शमी का पौधा वास्तु के अनुसार, शमी के पौधे को हमेशा घर के बाहर, जैसे कि बालकनी, छत या गार्डन में लगाना चाहिए। इसे कभी भी घर के अंदर नहीं लगाना चाहिए। आप इसे घर की दक्षिण दिशा में लगा सकते हैं, जो शुभ माना गया है। साथ ही वास्तु शास्त्र में शमी का पौधा लगाने के लिए घर की पूर्व दिशा या फिर ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) को भी उत्तम माना गया है। मिलते हैं ये अद्भुत लाभ     अगर आप घर में शमी का पौधा लगाते हैं और नियमित रूप से इसकी पूजा-अर्चना करते हैं, तो इससे आपको शनिदेव की कृपा मिलती है।     शमी के पत्तों को शिवलिंग पर भी अर्पित करने से महादेव का आशीर्वाद मिलता है।     कुंडली में मिलने वाले अशुभ ग्रहों के प्रभाव से भी राहत मिलती है।     हर शनिवार शमी के पेड़ की पूजा करें और सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इससे शनिदशा का प्रभाव कम होता है।     किसी व्यक्ति पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है, तो उसे घर में शमी का पौधा जरूर लगाना चाहिए।     शमी का पौधा घर में लगाने से विवाह में आ रही बाधा से भी मुक्ति मिल सकती है। इन बातों का रखें ध्यान शमी का पौधा लगाने के लिए शनिवार के दिन को सबसे उत्तम माना गया है, क्योंकि यह दिन शनिदेव को समर्पित माना जाता है। इस बात का भी खास तौर से ध्यान रखें कि शमी के पौधे पर सीधी धूप नहीं पड़नी चाहिए। अगर आप इसे मुख्य द्वार के पास लगा रहे हैं तो इसे इस प्रकार लगाएं कि बाहर से देखने पर यह मुख्य द्वार के दाईं ओर हो। शमी के पौधे को बहुत अधिक पानी की जरूरत नहीं होती, इसलिए इसे इतना ही पानी दें कि मिट्टी में नमी बनी रहे, लेकिन पानी जमा न हो। आप नियमित रूप से भी शमी के पौधे को जल अर्पित कर सकते हैं।

Chaitra Navratri 2026 Vastu Tips: मां दुर्गा की चौकी रखने की सही दिशा और जरूरी नियम

हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्र की शुरुआत होती है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार नवरात्र की शुरुआत 19 मार्च से हो रही है। इस दौरान मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही जीवन में खुशियों के आगमन के लिए व्रत भी किया जाता है। चैत्र नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा की चौकी लगाई जाती है। इस दौरान वास्तु के नियम का पालन जरूर करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि गलत दिशा में मां दुर्गा की चौकी लगाने से साधक पूजा के पूर्ण फल की प्राप्ति से वंचित रहता है। आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि किस दिशा में लगाएं मां दुर्गा की चौकी। चौकी के लिए कौन-सी दिशा है शुभ? वास्तु शास्त्र के अनुसार, चैत्र नवरात्र में मां दुर्गा की चौकी के लिए उत्तर-पूर्व दिशा को बेहद शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिशा में मां दुर्गा की चौकी लगाने से पूजा सफल होती है और साधक पर मां दुर्गा की कृपा बरसती है। इसके अलावा उत्तर-पूर्व दिशा में भी मां दुर्गा की चौकी लगा सकते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस दिशा में चौकी लगाने से घर में सुख-शांति का वास होता है। साथ ही मां दुर्गा की कृपा से साधक की सभी मुरादें पूरी होती हैं। इस दिशा में न लगाएं चौकी वास्तु शास्त्र की मानें तो दक्षिण दिशा को यमराज की मानी जाती है। इसलिए इस दिशा में मां दुर्गा की चौकी न लगाएं। इस दिशा में चौकी लगाने से साधक को सुख-शांति और समृद्धि में बाधा का सामना करना पड़ सकता है। इन बातों का रखें ध्यान     चौकी लगाते समय ध्यान रखें कि साधक का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रहे।     पूजा की सामग्री को चौकी पर रखें। नीचे न रखें।     चौकी पर लाल रंग का साफ कपड़ा बिछाएं, क्योंकि मां दुर्गा को लाल कपड़ा बेहद प्रिय है और लाल रंग को शक्ति का प्रतीक माना जाता है।     इसके अलावा कलश को मां दुर्गा की मूर्ति की प्रतिमा के दाईं तरफ स्थापित करना चाहिए।     मां दुर्गा की चौकी के आसपास साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।     मां दुर्गा को विराजमान करने से पहले उस स्थान को गंगाजल का छिड़काव कर शुद्ध करें।  

रसोई में जूते-चप्पल पहनना सही या गलत? वास्तु शास्त्र की चेतावनी जानें

भारतीय संस्कृति में रसोईघर को घर का सबसे पवित्र हिस्सा माना जाता है। आखिर क्यों हमारे बड़े-बुजुर्ग हमेशा रसोई में चप्पल ले जाने से मना करते थे और वास्तु शास्त्र इस बारे में क्या चेतावनी देता है। किचन सिर्फ खाना पकाने की जगह नहीं है, बल्कि यहां धन और धान्य की देवी मां अन्नपूर्णा का वास होता है। जब हम बाहर से गंदे जूते-चप्पल पहनकर किचन में जाते हैं, तो हम अनजाने में देवी का अपमान कर रहे होते हैं। प्राचीन वास्तु ग्रंथों जैसे 'वास्तु राजवल्लभ' और 'समरांगण सूत्रधार' में घर के दो हिस्सों को हमेशा सबसे शुद्ध रखने पर जोर दिया गया है- पहला पूजा घर और दूसरा रसोईघर। वास्तु शास्त्र के अनुसार, जूते-चप्पलों के साथ राहु और केतु (नकारात्मक ऊर्जा) का प्रभाव जुड़ा होता है। जब यह नकारात्मक ऊर्जा किचन में पहुंचती है, तो खाने के जरिए पूरे परिवार के शरीर में प्रवेश कर जाती है। इससे घर में बीमारियां बढ़ती हैं, बेवजह के झगड़े होते हैं और घर की बरकत (धन) रुक जाती है। वैज्ञानिक नजरिया क्या है? अगर धार्मिक नजरिए से हटकर देखें, तो भी यह आदत बहुत नुकसानदायक है। हमारे जूतों में बाहर की सड़कों की गंदगी, कीटाणु और बैक्टीरिया चिपके होते हैं। जब वही चप्पलें किचन में जाती हैं, तो वह गंदगी हमारे खाने तक पहुंच सकती है, जिससे परिवार का स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। अगर पहनना मजबूरी हो तो क्या करें? कई बार सर्दियों के मौसम में फर्श बहुत ठंडा होता है या किसी को जोड़ों के दर्द (Medical Issue) की वजह से चप्पल पहनना जरूरी होता है। ऐसे में वास्तु का एक आसान सा उपाय है:     अपने किचन के लिए एक अलग, साफ 'कपड़े या ऊन की चप्पल' रखें।     इस चप्पल को पहनकर घर के बाहर या बाथरूम में बिल्कुल न जाएं।     किचन में देवी अन्नपूर्णा और अग्नि देव का वास होता है, अशुद्ध पैरों से वहां जाना उनका सीधा अपमान है।     बाहर की चप्पलें किचन में ले जाने से घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है, जिससे आर्थिक तंगी (पैसे की कमी) आ सकती है।