samacharsecretary.com

इन तीन वस्तुओं का दान संध्या के समय माना जाता है अशुभ, जानें वजह

वास्तु शास्त्र में धन और संपत्ति की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है। घर में सुख-समृद्धि बनी रहे, इसके लिए समय और अवसर का सही चयन बहुत जरूरी होता है। खासकर दान देने के समय की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यदि आप शाम के समय कुछ खास चीजें दान करते हैं, तो यह आपके आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है। तो आइए जानते हैं कि शाम के समय कौन सी तीन चीजों का दान नहीं करना चाहिए। सिक्के या छोटे पैसे का दान शाम के समय छोटे-मोटे पैसे या सिक्कों का दान करने से घर में धन की ऊर्जा कमजोर हो सकती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, यह आपके आर्थिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है और अनावश्यक खर्च बढ़ा सकता है। टूटे या पुराने बर्तन का दान पुराने या टूटे बर्तनों का दान करने से भी धन हानि की संभावना बढ़ सकती है। शाम के समय यह करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है और संपत्ति की वृद्धि रुक सकती है। बिना जरूरत की चीजों का दान शाम के समय ऐसा दान करना जिसमें आपकी जरूरत की वस्तुएं शामिल हों या बिना योजना का दान हो, यह भी वास्तु दोष पैदा कर सकता है। इससे न केवल संपत्ति पर असर पड़ता है बल्कि मानसिक तनाव भी बढ़ सकता है।

घर में तनाव और कलह की वजह बन सकती हैं बाथरूम की ये वस्तुएं

घर में सुख-शांति और समृद्धि बनाए रखना हर किसी की इच्छा होती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के हर हिस्से की सही व्यवस्था जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाती है। खासकर बाथरूम के बारे में कुछ चीजें हैं जिनका ध्यान रखना बेहद जरूरी है, वरना यह घर की सुख-शांति पर असर डाल सकती हैं। तो आइए जानते हैं घर में सुख-शांति और पॉजिटिव एनर्जी बनाएं रखने के लिए बाथरूम की कौन-कौन सी चीजों को तुरंत हटाना चाहिए। टूटे या दरार वाले फिटिंग्स वास्तु के अनुसार, टूटे हुए टॉयलेट सीट, फटी हुई टब या सीटींग्स बाथरूम में नहीं होनी चाहिए। ऐसी चीजें नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाते हैं। इसलिए इन्हें बाथरूम से तुरंत हटा देना चाहिए। बाथरूम में अनावश्यक सामान वास्तु के अनुसार, बाथरूम में पुराने टब्स, खाली बोतलें और बेकार सामान जमा करना वास्तु दोष पैदा करता है। घर में पॉजिटिव एनर्जी को बनाएं रखने के लिए चीज़ों को साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखें। बाथरूम में अंधेरा या खराब लाइट वास्तु शास्त्र के अनुसार, कम रोशनी वाला बाथरूम नकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करता है। इसलिए हमेशा पर्याप्त रोशनी और हवादार व्यवस्था रखनी चाहिए। टूटी या घिसे चप्पलें वास्तु के अनुसार, बाथरूम में कभी भी टूटी चप्पलें या घिसे हुए जूते नहीं रखने चाहिए। ऐसे जूते घर की शांति और सुख को प्रभावित कर सकती है। टूटा हुआ शीशा वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर या बाथरूम में कभी भी टूटा हुआ शीशा नहीं लगाना चाहिए। टूटे हुए शीशे से वास्तु दोष पैदा हो सकता है और नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है।

घर और ऑफिस में तांबे का सूरज लगाएं, करें करियर और मान-सम्मान की वृद्धि

वास्तु के अनुसार घर की सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने के लिए हम कई तरह के उपायों को आजमाना पसंद करते हैं। घर के हर एक कोने में हम वास्तु के अनुसार ही चीजों का प्लेसमेंट करते हैं, जिससे समृद्धि बनी रहे। ऐसी ही चीजों में से एक है घर में तांबे का सूरज लगाना। वास्तुशास्त्र के अनुसार, तांबे का सूरज घर में लगाना न केवल सौंदर्य बढ़ाता है बल्कि यह एक सकारात्मक और सशक्त वातावरण भी प्रदान करता है। तांबे का सूरज घर में लगाने के कई फायदे होते हैं। तांबा एक महत्वपूर्ण धातु है, जिसे सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। तांबे का सूरज घर के उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित करने से विशेष लाभ मिलता है। तांबा सूर्य का प्रतीक है, जो जीवन और ऊर्जा का स्रोत है। इसे घर में लगाने से घर में सकारात्मकता और जीवन शक्ति का संचार होता है। इससे परिवार के सदस्यों में स्वास्थ्य, खुशी और समृद्धि बढ़ती है। तांबा गर्मी को संतुलित करता है। यह घर के वातावरण को शुद्ध करता है और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। इस प्रकार घर में ताजगी और शांति बनी रहती है। तांबे का सूरज व्यक्ति की मनोबल को भी बढ़ाता है। यह आत्मविश्वास और ऊर्जा को बढ़ाने में सहायक होता है, जिससे व्यक्ति अपने लक्ष्यों को बेहतर तरीके से प्राप्त कर सकता है। वास्तु की मानें तो घर में तांबे का सूर्य पूरे घर के लिए ऊर्जा का एक उत्कृष्ट स्रोत माना जाता है। यदि आप सूर्य की ऊर्जा का प्रतीक तांबे का सूरज घर में लगाते हैं तो आपके घर के चारों तरफ यश, र्कीति और खुशहाली बनी रहती है। तांबे को एक प्रभावशाली धातु के रूप में जाना जाता है और मान्यता है कि इस तरह का सूरज घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। यह घर के लोगों के बीच सामंजस्य बनाए रखने में मदद करता है और इससे निकलने वाली ऊर्जा वातावरण में समृद्धि जोड़ती है, जिससे पारिवारिक कलह से मुक्ति मिलती है। यदि आप लोकप्रियता हासिल करना चाहते हैं तो अपने घर में तांबे का सूर्य अवश्य लगाना चाहिए। यदि आप किसी कार्यस्थल पर इसे लगाते हैं तो यह सफलता दिलाने में मदद करता है।

जानें कौन सा घर का कोना है धनवृद्धि का मार्ग, बस रखें खाली फ्लावर पॉट

घर में खुशहाली और आर्थिक समृद्धि बनाए रखना हर किसी की इच्छा होती है। वास्तु शास्त्र में कुछ आसान लेकिन असरदार उपाय बताए गए हैं, जो जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। इनमें से एक सरल और प्रभावशाली तरीका है- घर के सही कोने में खास रंग का खाली फ्लावर पॉट रखना। यह न केवल घर की ऊर्जा को संतुलित करता है, बल्कि अनावश्यक खर्चों को कम करने में भी मदद करता है। बस दो छोटे उपायों को अपनाकर आप अपने घर और जीवन में सुख-समृद्धि ला सकते हैं। फ्लावर पॉट के लिए सही कोने का चयन वास्तु के अनुसार, घर के उत्तर-पूर्वी या दक्षिण-पश्चिमी कोने में खाली फ्लावर पॉट रखना शुभ माना जाता है। यह कोना सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है और घर के वातावरण में संतुलन बनाता है। साथ ही घर-परिवार में खुशहाली और समृद्धि बनी रहती है। फ्लावर पॉट के लिए रंगों का महत्व वास्तु के अनुसार, फ्लावर पॉट का रंग भी बहुत मायने रखता है। इसलिए घर में खाली फ्लावर पॉट रखते समय रंगों का चयन करना भी बहुत जरूरी है। घर में सफेद, हरे, नीले रंग के फ्लावर पॉट रखने चाहिए क्योंकि यह शांति और मानसिक स्थिरता को स्थिर रखते हैं और धन, समृद्धि बढ़ाने में सहायक होते हैं। साथ ही इन रंगों के फ्लावर पॉट रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक स्पष्टता बनी रहती है।

बच्चों की पढ़ाई में बढ़ावा: स्टडी रूम के वास्तु टिप्स

बच्चों की पढ़ाई में ध्यान न लगना, जल्दी थक जाना या मन भटकना आजकल आम समस्या बन गई है। कई बार इसका कारण सिर्फ आदतें या पढ़ाई का तरीका नहीं होता, बल्कि घर का वास्तु भी इसमें अहम भूमिका निभाता है। अगर स्टडी रूम का वास्तु सही न हो, तो बच्चे का फोकस और मेमोरी दोनों प्रभावित हो सकते हैं। चलिए जानते हैं कुछ ऐसे आसान वास्तु उपाय, जो आपके बच्चे के भविष्य को उज्जवल बना सकते हैं। स्टडी रूम की दिशा का सही चयन करें वास्तु के अनुसार, बच्चों का स्टडी रूम उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा में होना सबसे शुभ माना जाता है। इन दिशाओं से आने वाली सकारात्मक ऊर्जा एकाग्रता बढ़ाती है और बच्चे में सीखने की क्षमता को मजबूत करती है। पढ़ाई की मेज की दिशा वास्तु के अनुसार, बच्चों को पढ़ते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए। इससे याददाश्त बेहतर होती है और मन शांत रहता है। ध्यान रखें कि पीठ दरवाजे या खिड़की की ओर न हो, क्योंकि इससे ध्यान भटकता है। कमरे में प्रकाश और हवा का सही संतुलन स्टडी रूम में प्राकृतिक रोशनी और ताजी हवा का आना बहुत ज़रूरी है। तेज और साफ रोशनी दिमाग को सक्रिय रखती है। अगर संभव हो तो स्टडी टेबल को ऐसी जगह रखें जहां दिन की रोशनी आसानी से पहुंचे। आईना और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं न रखें वास्तु के अनुसार, स्टडी रूम में आईना, टीवी या मोबाइल जैसी चीज़ें रखने से बचें। ये वस्तुएं ध्यान भटकाती हैं और बच्चों के फोकस को कम करती हैं।

समृद्धि का रास्ता खोलें: दीवाली से पहले हटाएं घर से ये नकारात्मक चीजें!

सनातन धर्म में दीवाली के त्योहार का बेहद खास महत्व है। इस पर्व के आने का हर कोई बेसब्री से इंतजार करता है। दीवाली से पहले लोग अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं। ऐसे में सफाई करते समय ध्यान रखें कि अशुभ चीजों को घर से बाहर करें। वास्तु (Vastu Tips) शास्त्र के अनुसार, अशुभ चीजों को घर से बाहर करने से मां लक्ष्मी की कृपा बरसती है। साथ ही सुख-शांति बनी रहती है। ऐसे में चलिए इस आर्टिकल में जानेंगे कि दीवाली से पहले किन चीजों को घर से बाहर करना चाहिए, जिससे धन की देवी मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होगा। कब है दीवाली हर साल कार्तिक माह की अमावस्या तिथि पर दीवाली मनाई जाती है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार दीवाली का पर्व 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इन चीजों को घर से करें बाहर     वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में टुटा हुआ शीशा रहना शुभ नहीं माना जाता है। इसको घर में रखने से नकारात्मकता ऊर्जा का वास होता है और व्यक्ति को जीवन में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए दीवाली से पहले टूटे हुए शीशे को घर से बाहर करें। ऐसा माना जाता है कि इस काम को करने से घर में मां लक्ष्मी का आगमन होता है।     अगर आपके घर में फटे-पुराने जूते चप्पल है, तो उन्हें भी दीवाली की सफाई के दौरान घर से बाहर करें। वास्तु शास्त्र के अनुसार, फटे-पुराने जूते चप्पल को घर में रखने से दुर्भाग्य आता है और मां लक्ष्मी का आगमन नहीं होता है। इसलिए इस दीवाली पर घर में भूलकर भी फटे-पुराने जूते चप्पल न रखें।     इसके अलावा घर में बंद घड़ी को नहीं रखना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि बंद घड़ी का नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इससे व्यक्ति को करियर और आर्थिक तंगी का समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए दीवाली से पहले बंद घड़ी को घर से बाहर करें या फिर उसे सही करवाएं।     अगर आपके मंदिर में किसी देवी-देवता की खंडित प्रतिमा (टूटी हुई) है, तो उसे मंदिर में न रखें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, खंडित प्रतिमा की पूजा करने से साधक को पूजा का शुभ फल प्राप्त नहीं होता है। ऐसे में खंडित प्रतिमा को किसी पवित्र नदी में विसर्जत कर दें।  

वास्तु टिप्स: आईना कहां लगाएं ताकि घर में आए सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य

आईना एक जरूरत होने के साथ-साथ घर की शोभा बढ़ाने का भी काम करता है। ऐसे में यदि आप इसको वास्तु नियमों का ध्यान रखते हुए घर में लगाते हैं, तो इससे आपको कई तरह के फायदे देखने को मिल सकते हैं। कहां रखें आईना वास्तु शास्त्र में माना गया है कि शीशे को घर की पूर्व या फिर उत्तर दिशा में रखना चाहिए। ऐसा करने से इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और धन लाभ के योग बनते हैं। इसके साथ ही आप अच्छे परिणामों के लिए खिड़की या बालकनी के पास भी शीशा लगा सकते हैं। वास्तु के अनुसार, शीशे को कभी भी घर की दक्षिण या फिर पश्चिम दिशा में नहीं रखना चाहिए, ऐसा करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है। यहां न लगाएं शीशा वास्तु शास्त्र के नियमों के अनुसार, बेडरूम में शीशा इस तरह से लगाना चाहिए कि उसमें बिस्तर का प्रतिबिंब न दिखे। क्योंकि इससे वैवाहिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसके साथ ही घर की रसोई में भी कभी शीशा नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि वास्तु शास्त्र में यह माना गया है कि इससे गृह-क्लेश की स्थिति बनने लगती है। वास्तु के अनुसार, शीशे को कभी सीधे बिस्तर या दरवाजे के ठीक सामने भी नहीं लगाना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से सकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश करने से पहले ही लौट जाती है। न करें ये गलतियां वास्तु शास्त्र में यह माना गया है कि घर में कभी भी टूटा हुआ या धुंधला आईना नहीं रखना चाहिए। इससे दुर्भाग्य आता है और घर में नकारात्मक ऊर्जा का वास बढ़ सकता है। जिससे अशांति का माहौल पैदा हो जाता है। इन नियमों का ध्यान न रखने पर आपको आर्थिक समस्या का भी सामना करना पड़ सकता है। इसलिए हमेशा साफ और चमकदार शीशे का ही इस्तेमाल करें।  

नए घर में प्रवेश से पहले जानें ये वास्तु टिप्स, परिवार में रहेगी सुख-शांति

क्या आप भी परिवार के सदस्यों के बीच मनमुटाव का सामना कर रहे हैं और घर में सुख-शांति का वास नहीं है, तो इसका कारण वास्तु दोष हो सकता है। ऐसा माना जाता है कि घर में वास्तु दोष वास्तु शास्त्र के नियम का पालन न करने की वजह से होता है। कई लोग नए घर में शिफ्ट होते समय कई बातों का ध्यान नहीं रखते हैं, जिसकी वजह से व्यक्ति को जीवन में कई तरह की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। अगर आप भी नए घर में शिफ्ट हो रहे हैं, तो इस आर्टिकल में वास्तु शास्त्र के बताए गए नियम का पालन जरूर करें। अगर आप नया घर ले रहे हैं, तो ध्यान रखें कि घर का मेन गेट उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा हो। वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस नियम का पालन करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। किस दिशा में होना चाहिए बेडरूम घर के मेन गेट के अलावा बेडरूम की दिशा का भी ध्यान रखना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार, बेडरूम दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना उत्तम माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिशा में बेडरूम के होने से घर में सुख-शांति बनी रहती है। किस दिशा में लगाएं शीशा वास्तु शास्त्र के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम दिशा में रूम का होना उत्तम माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि सही दिशा में रूम होने से घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। इसके अलावा बेड के सामने भूलकर भी शीशा न लगाएं। इस गलती को करने से नकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। साथ ही जीवन में दुखों का सामना करना पड़ सकता है। कहां होना चाहिए टॉयलेट वास्तु के अनुसार, घर में सीढ़ियों के नीचे टॉयलेट का होना अच्छा नहीं माना जाता है। गलत दिशा में सीढ़ियों के होने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। साथ ही परिवार के सदस्यों के बीच मनमुटाव की समस्या बनी रहती है। वास्तु शास्त्र में घर की उत्तर-पश्चिम या दक्षिण-पूर्व दिशा में टॉयलेट का होना उत्तम माना जाता है। वास्तु के इस नियम का पालन करने से धन में बरकत होती है।

फटाफट परिणाम! बुरी नजर हटाने के लिए 3 वास्तु शास्त्र के टिप्स

घर परिवार की सबसे बड़ी संपत्ति होता है। जब घर में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है, तभी जीवन में सफलता और संतोष मिलता है। लेकिन क्या होगा अगर बार-बार घर पर नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव हो, और बुरी नजर का साया आपके परिवार और संपत्ति पर पड़ता रहे ? ऐसे समय में वास्तु शास्त्र के सरल लेकिन प्रभावी उपाय आपके लिए वरदान साबित हो सकते हैं। वास्तु शास्त्र हमारे घर की ऊर्जा और वातावरण को संतुलित करने की एक प्राचीन विद्या है। जब घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है, तो बुरी नजर का असर कम हो जाता है। वास्तु के अनुसार, घर के कुछ खास स्थान और चीजें ऐसी होती हैं जो बुरी नजर को रोकने और नकारात्मक ऊर्जा को बाहर भगाने में मदद करती हैं। मुख्य द्वार पर तुलसी का पौधा लगाएं तुलसी का पौधा हमारे घर के लिए सबसे शुभ माना जाता है। यह न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि वास्तु शास्त्र के अनुसार भी घर की नकारात्मक ऊर्जा को खत्म करता है। तुलसी के पौधे में एक सकारात्मक ऊर्जा होती है जो बुरी नजर को रोकती है और घर में खुशहाली लाती है। मुख्य द्वार के समीप तुलसी का पौधा लगाएं। रोज सुबह तुलसी की पूजा करें और उसकी नियमित देखभाल करें। तुलसी की पत्तियां घर के मंदिर में भी रख सकते हैं। इससे घर में शांति, सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। घर के कोनों में नींबू-मिर्च का टोटका यह एक बेहद लोकप्रिय और प्राचीन वास्तु उपाय है। नींबू और मिर्ची का टोटका नकारात्मक ऊर्जा को दूर भगाने और बुरी नजर को टालने में कारगर होता है। यह टोटका घर में दरवाजे या खिड़कियों के पास लगाया जाता है ताकि किसी भी नकारात्मक नजर का प्रवेश रोका जा सके। नींबू के साथ हरी मिर्च को लटकाएं। इसे मुख्य द्वार के बाहर या घर के ऐसे स्थान पर लगाएं जहां से बाहर की नजर आती हो। कुछ लोगों का मानना है कि नींबू मिर्च का टोटका हर 15-20 दिन में बदलना चाहिए ताकि उसकी ऊर्जा बनी रहे। घर में गणेश जी और नारियल का पूजन गणेश जी को विघ्नहर्ता और शुभता का देवता माना जाता है। वास्तु में गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर घर के मुख्य द्वार के पास स्थापित करने से बुरी नजर से बचाव होता है। साथ ही, घर में नियमित नारियल का पूजन भी नकारात्मक ऊर्जा को कम करता है। घर के पूजा स्थल पर गणेश जी की मूर्ति रखें। व्रत या शुभ कार्य के दिन नारियल का पूजन करें और गणेश मंत्र का जप करें। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और बुरी नजर का प्रभाव समाप्त होता है।

तनाव से मुक्ति पाने के लिए इस रंग का करें इस्तेमाल

वास्तु शास्त्री रंगों को वास्तु के तत्वों का प्रतीक मानते हैं। अत: उन्हें जल, अग्नि, धातु, पृथ्वी और काष्ठ से जोड़ते हैं। रंग और ध्वनि जैसी ऊर्जाओं ने प्रकृति और वातावरण के माध्यम से जनमानस को घेर रखा है। वास्तु शास्त्र के अनुसार रंग तनाव को घटा और बढ़ा सकते हैं। अगर आप भी रंगों की मदद से तनाव कम करना चाहते हैं तो ये टिप्स अपना सकते हैं : हल्के ग्रे रंग को कोमल माना जाता है जो सीधे व्यक्ति के मस्तिष्क को प्रभावित कर सकता है। इस रंग का सुखदायक प्रभाव होता है और साथ ही यह आकर्षक भी होता है। यदि आप तनाव में हैं तो आप लाइट ग्रे रंग के कपड़े पहन सकते हैं जो आपके तनाव को दूर करने में मदद करेगा। वास्तु के अनुसार इस तरह के रंगीन कपड़े मानसिक तनाव को कम करने में काफी मदद करते हैं। हल्का गुलाबी रंग बहुत ही शांत और सौम्य रंग माना जाता है। यह रंग दिमाग को शांत रखने में सबसे कारगर रहता है। तनाव के बीच यह रंग आपको प्यार का एहसास कराता है। यह रंग आपके जीवन में संतुलन बनाने में मदद करता है। वास्तु के अनुसार आपको हल्के गुलाबी रंग के कपड़े पहनने चाहिए और इस रंग को अपने बेडरूम में इस्तेमाल करने पर विचार करना चाहिए। लैवेंडर रंग अपने नाम की तरह ही शांत है। अगर तनाव कम करने की बात आती है, तो वास्तु इस रंग का इस्तेमाल करने की सबसे ज्यादा सलाह देता है।