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कहीं आप भी तो नहीं कर रहे झाड़ू से जुड़ी यह भूल? मां लक्ष्मी हो सकती हैं रुष्ट

 सनातन धर्म में झाड़ू का विशेष महत्व है। इसका संबंध मां लक्ष्मी और घर की स्वच्छता से है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, झाड़ू के द्वारा घर की दरिद्रता बाहर निकलती है और धन आगमन के मार्ग खुलते हैं। ऐसा माना जाता है कि जिस घर में साफ-सफाई रहती है। वहीं, धन की देवी मां लक्ष्मी वास करती हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, झाड़ू को घर की उत्तम दिशा में रखना चाहिए। झाड़ू से जुड़ी गलती करने से व्यक्ति को जीवन में कंगाली का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही मां लक्ष्मी की नाराजगी का सामान करना पड़ सकता है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में हम आपको बताते हैं कि घर की किस दिशा में झाड़ू रखनी चाहिए और इससे जुड़े नियम के बारे में। वास्तु शास्त्र में झाड़ू से जुड़े नियम के बारे में विस्तार से बताया गया है। वास्तु के अनुसार, झाड़ू को घर की उत्तम दिशा में रखने से आर्थिक स्थिति ठीक बनी रहती है और परिवार में सुख-शांति का वास होता है, लेकिन झाड़ू को गलत दिशा में रखने से जातक को धन की कमी का सामना करना पड़ सकता है। किस दिशा में रखें झाड़ू? वास्तु के अनुसार, झाड़ू रखने के लिए पश्चिम दिशा को उत्तम माना जाता है, क्योंकि इस दिशा को धन और प्रसिद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस दिशा में झाड़ू को रखने से घर में नकारात्मक ऊर्जा नहीं आती है। इसके अलावा दक्षिण-पश्चिम दिशा में भी झाड़ू को रख सकते हैं। यह दिशा स्थिरता प्रदान करती है। भूलकर भी न रखें इस दिशा में झाड़ू झाड़ू को भूलकर भी उत्तर-पूर्व दिशा में नहीं रखना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दिशा में झाड़ू रखने से घर में दरिद्रता का आगमन होता है। साथ ही धन की कमी हो सकती है। अगर आप भी इस तरह की गलती कर रहे हैं, तो आज ही इसमें सुधार करें। इसके अलावा झाड़ू को दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना वर्जित है। इस दिशा में झाड़ू को रखने से घर में क्लेश की समस्या बन सकती है। इन बातों का रखें ध्यान     घर या ऑफिस में झाड़ू को किसी की नजरों से दूर रखना चाहिए। ऐसा करने से सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है।     घर में टूटी हुई झाड़ू का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इस गलती को करने से घर में दरिद्रता का वास होता है और इंसान को कई परेशानियां घेर लेती हैं।    

न्यू ईयर ईवन पर करें ये सरल उपाय, धन-समृद्धि से भर जाएगा घर

साल 2026 की शुरुआत हो चुकी है. आज नए साल का पहला दिन है. हर कोई अपने परिवार के लोगों और दोस्तों को नए साल की शुभकामनाएं दे रहा है. कहा जाता है कि नए साल के पहले दिन की शुरुआत जिस प्रकार से की जाती है, उसका प्रभाव जीवन में साल भर देखने को मिलता है, इसलिए ज्योतिषविदों का मानना है साल के पहले दिन देव-देवताओं को प्रसन्न करने का प्रयास करना चाहिए. इससे पूरे साल देवी-देवताओं का आशीर्वाद बना रहता है. शास्त्रों में माता लक्ष्मी को धन की देवी कहा गया है. अगर नए साल पर माता लक्ष्मी को प्रसन्न कर लिया जाता है, तो पूरे साल घर में धन की कमी नहीं होती है. ज्योतिषविदों के अनुसार, देवी लक्ष्मी शाम को गोधूलि वेला में धरती पर भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों के घर में आती हैं. ये समय संध्या काल में करीब 7 बजे से रात 9 बजे के बीच का होता है. मान्यता है कि अगर नए साल के पहले दिन शाम को कुछ विशेष उपाय करते हुए माता लक्ष्मी का स्वागत किया जाए तो इससे बहुत लाभ होता है. नए साल पर करें ये उपाय सूर्यास्त के बाद घर का प्रमुख द्वार खुला रखें नए साल के पहले दिन सूर्यास्त के बाद घर का प्रमुख द्वार कुछ देर के लिए खुला रखना चाहिए. इससे घर में सकारात्मक उर्जा का प्रवेश होगा, जिसके प्रभाव से घर में सुख-शांति बनी रहेगी. साथ ही माता लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होगा. घर के प्रमुख द्वार पर पांच दीपक जलाएं नए साल के पहले दिन शाम को घर के प्रमुख द्वार पर पांच दीपक जलाने चाहिए. दरवाजे पर जलाए गए दीपकों को माता लक्ष्मी के स्वागत का प्रतीक माना जाता है. ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि और सौभाग्य बढ़ता है. शाम को घर में अंधेरा और गंदगी न रखें घर के मुख्य दरवाजे पर शाम को रंगोली अवश्य बनानी चाहिए. वहां साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए. कहते हैं जिस घर में साफ-सफाई होती है, वहीं पर माता लक्ष्मी प्रवेश करती हैं. इसलिए ध्यान रखें कि नए साल साल के पहले दिन शाम को घर के किसी कोने में अंधेरा और गंदगी न रहे.

न्यू ईयर की पहली सुबह क्या करें? ये शुभ काम दूर करेंगे गरीबी और बढ़ाएंगे धन-धान्य

साल 2025 का आगाज़ होने वाला है. हर कोई चाहता है कि आने वाला साल उसके और उसके परिवार के लिए खुशियों की सौगात लेकर आए. ज्योतिष शास्त्र और पुरानी मान्यताओं के अनुसार, साल के पहले दिन की शुरुआत अगर सही ढंग से और कुछ विशेष शुभ कार्यों के साथ की जाए, तो पूरे 12 महीने मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और जीवन से दरिद्रता का नाश होता है. अगर आप भी चाहते हैं कि इस साल आपकी तिजोरी कभी खाली न रहे, तो नए साल की सुबह इन शुभ कार्यों को करना न भूलें. नए साल की पहली सुबह करें ये शुभ काम! ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान और सूर्य अर्घ्य शास्त्रों में ब्रह्म मुहूर्त को सबसे शुभ माना गया है. नए साल के पहले दिन सूर्योदय से पहले उठें और स्नान के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें. इसके बाद उगते हुए सूर्य को तांबे के लोटे से अर्घ्य दें. सूर्य देव को जल अर्पित करने से मान-सम्मान में वृद्धि होती है और स्वास्थ्य उत्तम रहता है. घर के मुख्य द्वार पर बनाएं स्वास्तिक घर का मुख्य द्वार वह स्थान है जहां से लक्ष्मी का आगमन होता है. साल की पहली सुबह अपने मुख्य द्वार की सफाई करें और हल्दी या सिंदूर से स्वास्तिक का चिह्न बनाएं. इसके साथ ही आम के पत्तों का तोरण लगाना भी अत्यंत शुभ माना जाता है. इससे नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश नहीं कर पाती. तुलसी पूजन और दीपक दान तुलसी के पौधे में साक्षात मां लक्ष्मी का वास माना जाता है. नए साल की सुबह तुलसी को जल अर्पित करें और शाम के समय घी का दीपक जलाएं. ध्यान रखें कि रविवार या एकादशी न हो तुलसी की पूजा करने से घर के कलह क्लेश दूर होते हैं और सुख-समृद्धि आती है. दान-पुण्य से करें शुरुआत गरीबी दूर करने का सबसे बड़ा मंत्र दान है. साल के पहले दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार किसी जरूरतमंद को अनाज, गर्म कपड़े या तिल का दान करें. पंछियों को दाना डालना और गाय को हरा चारा खिलाना भी सोए हुए भाग्य को जगाने का काम करता है. मंदिर जाकर लगाएं हाजिरी अपने दिन की शुरुआत अपने इष्ट देव के दर्शन से करें. चाहे वह घर का मंदिर हो या बाहर का देवालय, भगवान के चरणों में माथा टेककर नए साल के लिए मंगल कामना करें. यदि संभव हो तो श्री सूक्त या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें, यह धन प्राप्ति के लिए अचूक माना गया है. इन बातों का भी रखें खास ख्याल कलह से बचें: साल के पहले दिन घर में किसी भी तरह का झगड़ा या वाद-विवाद न करें. खुशहाल माहौल लक्ष्मी को आकर्षित करता है. उधार न लें, न दें: कोशिश करें कि साल के पहले दिन न तो किसी से पैसा उधार लें और न ही किसी को उधार दें. मान्यता है कि जैसा हमारा साल का पहला दिन बीतता है, वैसा ही असर पूरे साल पर रहता है. इसलिए सकारात्मक रहें, बड़ों का आशीर्वाद लें और शुभ संकल्पों के साथ नए साल का स्वागत करें.

2026 में धन-समृद्धि का योग: साल के पहले दिन महिलाओं के लिए खास काम, बरसेगी लक्ष्मी कृपा

साल 2026 की शुरुआत होने में अब बहुत ज्यादा समय नहीं बचा है. नए साल से हर कोई ये आशा रखता है कि नया साल उसके जीवन में नई उम्मीदें और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आए. नए साल के पहले दिन पूजा-पाठ का विधान है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार, नए साल की शुरुआत पूजा-पाठ से की जाती है, तो मां लक्ष्मी का विशेष आशीर्वाद घर पर बना रहता है. नए साल पर पूजा-पाठ के साथ-साथ कुछ विशेष कामों को करने के लिए भी कहा जाता है. हिंदू मान्यता है कि अगर घर की महिलाएं नए साल के पहले दिन ये विशेष काम कर लें तो घर में मां लक्ष्मी की कृपा से पूरे साल बरकत बनी रहती है. ऐसे में आइए जानते हैं नए साल के पहले दिन किए जाने वाले इन विशेष कामों के बारे में. नए साल के पहले दिन महिलाएं करें ये काम ब्रह्म मुहूर्त स्नान करें और सूर्यदेव को जल चढ़ाएं साल 2026 के पहले दिन महिलाए ब्रह्म मुहूर्त में उठें और स्नान करें. अगर संभव हो सके तो पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें. स्नान के बाद साफ वस्त्र धारण करें और भगवान सूर्य को अर्घ्य दें. कहा जाता है ऐसा करने से सकारात्मक उर्जा मिलती है और साल भर सौभाग्य बना रहता है. तुलसी की पूजा करें नए साल के पहले दिन तुलसी के पौधे में जल अर्पित करें. पौधे में लाल रंग का कलावा अवश्य बांधें. शाम के समय तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाएं. भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें. इससे माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में धन की कमी नहीं होती. बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लें नए साल के पहले दिन पूजा के बाद घर के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लें उनके चरण छुएं और उनसे कहें कि उन्हें आप हमेशा खुश रखेंगे. माना जाता है कि जिस घर के बुजुर्ग खुश रहते हैं, वहां समृद्धि हमेशा बनी रहती है. गाय को रोटी खिलाएं नए साल के पहले दिन महिलाएं गाय को ताजी रोटी खिलाएं. गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, धन, कंबल या उपयोगी वस्तुओं का दान करें.

तुलसी चालीसा का पाठ करें इस पूर्णिमा: घर में आएगी सुख-समृद्धि और लक्ष्मी का वास

हिंदू धर्म में हर माह में एक पूर्णिमा मनाई जाती है. इस माह में मार्गशीर्ष पूर्णिमा मनाई जाएगी. इस दिन भगवान विष्णु और चंद्र देव की पूजा की जाती है. पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान और दान करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. मान्यता है कि इस दिन स्नान-दान करने से पुण्य फल प्राप्त होते हैं. इस दिन तुसली माता की भी पूजा की जाती है. इस दिन तुसली माता की पूजा करने से मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे जीवन में सुख-शांति बनी रहती है. मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन तुलसी के पौधे की पूजा-अर्चना करनी चाहिए. साथ ही इस दिन तुलसी चालीसा का पाठ करने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में प्रवेश करती है, जिससे कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती. मार्गशीर्ष पूर्णिमा कब है? वैदिक पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 04 दिसंबर को सुबह 08 बजकर 37 मिनट पर हो रही है. वहीं, इस तिथि का समापन 05 दिसंबर को सुबह 04 बजकर 43 मिनट पर हो जाएगा. ऐसे में इस साल 04 दिसंबर को मार्गशीर्ष पूर्णिमा मनाई जाएगी. इसी दिन पूर्णिमा का स्नान-दान किया जाएगा. तुलसी चालीसा श्री तुलसी महारानी, करूं विनय सिरनाय। जो मम हो संकट विकट, दीजै मात नशाय।। नमो नमो तुलसी महारानी, महिमा अमित न जाय बखानी। दियो विष्णु तुमको सनमाना, जग में छायो सुयश महाना।। विष्णुप्रिया जय जयतिभवानि, तिहूँ लोक की हो सुखखानी। भगवत पूजा कर जो कोई, बिना तुम्हारे सफल न होई।। जिन घर तव नहिं होय निवासा, उस पर करहिं विष्णु नहिं बासा। करे सदा जो तव नित सुमिरन, तेहिके काज होय सब पूरन।। कातिक मास महात्म तुम्हारा, ताको जानत सब संसारा। तव पूजन जो करैं कुंवारी, पावै सुन्दर वर सुकुमारी।। कर जो पूजन नितप्रति नारी, सुख सम्पत्ति से होय सुखारी। वृद्धा नारी करै जो पूजन, मिले भक्ति होवै पुलकित मन।। श्रद्धा से पूजै जो कोई, भवनिधि से तर जावै सोई। कथा भागवत यज्ञ करावै, तुम बिन नहीं सफलता पावै।। छायो तब प्रताप जगभारी, ध्यावत तुमहिं सकल चितधारी। तुम्हीं मात यंत्रन तंत्रन, सकल काज सिधि होवै क्षण में।। औषधि रूप आप हो माता, सब जग में तव यश विख्याता, देव रिषी मुनि औ तपधारी, करत सदा तव जय जयकारी।। वेद पुरानन तव यश गाया, महिमा अगम पार नहिं पाया। नमो नमो जै जै सुखकारनि, नमो नमो जै दुखनिवारनि।। नमो नमो सुखसम्पति देनी, नमो नमो अघ काटन छेनी। नमो नमो भक्तन दुःख हरनी, नमो नमो दुष्टन मद छेनी।। नमो नमो भव पार उतारनि, नमो नमो परलोक सुधारनि। नमो नमो निज भक्त उबारनि, नमो नमो जनकाज संवारनि।। नमो नमो जय कुमति नशावनि, नमो नमो सुख उपजावनि। जयति जयति जय तुलसीमाई, ध्याऊँ तुमको शीश नवाई।। निजजन जानि मोहि अपनाओ, बिगड़े कारज आप बनाओ। करूँ विनय मैं मात तुम्हारी, पूरण आशा करहु हमारी।। शरण चरण कर जोरि मनाऊं, निशदिन तेरे ही गुण गाऊं। क्रहु मात यह अब मोपर दाया, निर्मल होय सकल ममकाया।। मंगू मात यह बर दीजै, सकल मनोरथ पूर्ण कीजै। जनूं नहिं कुछ नेम अचारा, छमहु मात अपराध हमारा।। बरह मास करै जो पूजा, ता सम जग में और न दूजा। प्रथमहि गंगाजल मंगवावे, फिर सुन्दर स्नान करावे।। चन्दन अक्षत पुष्प् चढ़ावे, धूप दीप नैवेद्य लगावे। करे आचमन गंगा जल से, ध्यान करे हृदय निर्मल से।। पाठ करे फिर चालीसा की, अस्तुति करे मात तुलसा की। यह विधि पूजा करे हमेशा, ताके तन नहिं रहै क्लेशा।। करै मास कार्तिक का साधन, सोवे नित पवित्र सिध हुई जाहीं। है यह कथा महा सुखदाई, पढ़े सुने सो भव तर जाई।। तुलसी मैया तुम कल्याणी, तुम्हरी महिमा सब जग जानी। भाव ना तुझे माँ नित नित ध्यावे, गा गाकर मां तुझे रिझावे।। यह श्रीतुलसी चालीसा पाठ करे जो कोय। गोविन्द सो फल पावही जो मन इच्छा होय।।

शाम के बाद इन कामों से रहें दूर, नहीं तो चली जाती है घर की लक्ष्मी!

हिंदू धर्म शास्त्रों में माता लक्ष्मी को धन, वैभव और ऐश्वर्य की देवी कहा गया है. शास्त्रों के अनुसार, जिस घर में माता लक्ष्मी वास करती हैं, वहां कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती, लेकिन क्या आपको पता है कि सूर्यास्त के बाद घर में कुछ काम करने से माता लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं और फिर वो घर छोड़ देती हैं. ऐसे में आइए जान लेते हैं कि सूर्यास्त के बाद हमें घर में कौन से काम भूलकर भी नहीं करने चाहिए? झाड़ू लगाना सूर्यास्त के बाद घर में कभी भी झाड़ू नहीं लागाना चाहिए. मान्यता है कि सूर्यास्त के बाद घर में झाड़ू लगाने से माता लक्ष्मी रुष्ठ होती हैं और घर छोड़कर चली जाती हैं. मान्यताएं ये भी हैं कि झाड़ू किसी बाहरी व्यक्ति की निगाह में नहीं आना चाहिए. इसलिए घर में झाड़ू हमेशा छिपाकर रखा जाता है. पैसों का लेन-देन वास्तु शास्त्र में बताया गया है कि सूर्यास्त के बाद शाम के समय किसी से पैसों का लेन-देन नहीं करना चाहिए. इस समय न तो किसी को पैसा उधार देना और न ही किसी से पैसा उधार लेना चाहिए. ऐसा करने से भी माता लक्ष्मी रुष्ठ होती हैं. इसके अलावा मंगलवार भी एक ऐसा दिन माना जाता है, जिस दिन पैसों के लेन-देन से बचना चाहिए. नमक देना सूर्यास्त के बाद शाम के समय किसी को भी घर की रसोई से नमक नहीं देना चाहिए. ज्योतिष शास्त्र में नमक का संबंध शुक्र और चंद्रमा से बताया गया है. शाम को अगर दूसरों को नमक दिया जाता है, तो इससे घर के धन-धान्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है. जो लोग ऐसा करते हैं उनका घर कभी उन्नत नहीं होता. शाम के समय सोना सूर्य के ढलने के बाद शाम को कभी भी सोना नहीं चाहिए. ऐसा करने वाले लोगों के घर में दरिद्रता का वास हो जाता है. शाम के समय सोने की बजाय मंदिर में दीपक प्रज्वलित करके पूजा-पाठ करना चाहिए. तुलसी के पौधे को छूना धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि तुलसी के पौधे में स्वंय माता लक्ष्मी वास करती हैं. शाम के समय तुलसी को छूने से माता लक्ष्मी नाराज होती हैं, इसलिए भूलकर भी शाम के समय तुुलसी न छूएं.

देव दीपावली विशेष: भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करने से खुलेंगे सुख-समृद्धि के द्वार!

आज कार्तिक मास की पूर्णिमा है. आज देव दीपावली का पर्व भी मनाया जा रहा है. इसे देवताओं की दिवाली कहा जाता है. इस अवसर पर भगवान शिव की नगरी काशी में लाखों दीप प्रज्वलित किए जाते हैं. घर-घर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का विशेष पूजन किया जाता है. देव दीपावली का दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु और भगवान शिव को समर्पित किया गया है. कार्तिक महीने और पूर्णिमा तिथि का संबंध माता लक्ष्मी लक्ष्मी से भी बताया जाता है. ऐसे में इस अवसर पर दीपदान के बाद, भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की आरती करना बहुत शुभ होता है. ऐसा करने से पूजा का पूरा फल प्राप्त होता है, तो आइए आरती पढ़ते हैं. भगवान विष्णु की आरती ॐ जय जगदीश हरे आरती ॐ जय जगदीश हरे… ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ॐ जय जगदीश हरे… जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का। स्वामी दुःख विनसे मन का। सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय जगदीश हरे… मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी। स्वामी शरण गहूं मैं किसकी। तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय जगदीश हरे… तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी। स्वामी तुम अन्तर्यामी। पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय जगदीश हरे… तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता। स्वामी तुम पालन-कर्ता। मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय जगदीश हरे… तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति। स्वामी सबके प्राणपति। किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय जगदीश हरे… दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे। स्वामी तुम ठाकुर मेरे। अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय जगदीश हरे… विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा। स्वामी पाप हरो देवा। श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय जगदीश हरे… श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे। स्वामी जो कोई नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥ ॐ जय जगदीश हरे… आरती श्री लक्ष्मी जी ॐ जय लक्ष्मी माता,मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निशिदिन सेवत,हरि विष्णु विधाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥ उमा, रमा, ब्रह्माणी,तुम ही जग-माता। सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत,नारद ऋषि गाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥ दुर्गा रुप निरंजनी,सुख सम्पत्ति दाता। जो कोई तुमको ध्यावत,ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥

घर में धन और समृद्धि लाने के लिए करें ये वास्तु अनुसार काम

लाभ पंचमी का पर्व धन, सफलता और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि इस दिन कुछ विशेष उपाय और दिशाओं का ध्यान रखा जाए तो घर, व्यापार और जीवन में लाभ के द्वार खुलते हैं। आइए जानते हैं कि वास्तु के अनुसार लाभ पंचमी पर क्या करना चाहिए: सुबह की शुरुआत सूर्य अर्घ्य से करें लाभ पंचमी के दिन प्रातःकाल स्नान के बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए। यह वास्तु के अनुसार ऊर्जा और सफलता का आरंभ है। सूर्य देव को अर्घ्य देने से घर में पॉजिटिव एनर्जी आती है और व्यापार में बाधाएं दूर होती हैं। घर और दुकान की दिशा की सफाई घर और दुकान की उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) को साफ-सुथरा रखें। यह दिशा माता लक्ष्मी और कुबेर जी का निवास स्थान मानी गई है। इस कोने में लाल या पीले फूल, दीपक और अगरबत्ती जलाना शुभ रहता है। गणेश-लक्ष्मी की पूजा किस दिशा में करें माता लक्ष्मी की मूर्ति उत्तर दिशा की ओर मुख करके रखें। पूजक (जो व्यक्ति पूजा कर रहा है) का मुख दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए। भगवान गणेश को दाईं ओर और महालक्ष्मी को बाईं ओर बैठाएं। पूजा स्थल पर काले या गहरे रंगों का प्रयोग न करें, केवल हल्के रंगों का उपयोग करें। प्रवेश द्वार पर शुभ प्रतीक बनाएं वास्तु शास्त्र में कहा गया है, “मुखद्वारे शुभलाभ चिह्नं धनं लभते गृहस्थः।” मुख्य दरवाजे पर शुभ लाभ और स्वस्तिक का चिह्न लाल सिंदूर या रोली से बनाएं। द्वार के दोनों ओर आम के पत्तों और बंदनवार लगाएं। इससे घर में देवी लक्ष्मी का आगमन होता है और धनवृद्धि के योग बनते हैं। तिजोरी और धन स्थान का वास्तु तिजोरी या कैश बॉक्स को हमेशा दक्षिण दिशा की दीवार के सहारे रखें और उसका मुख उत्तर दिशा की ओर खुलना चाहिए। यह स्थिति धन के स्थायित्व का संकेत देती है। लाभ पंचमी के दिन तिजोरी में पीली कौड़ी, चांदी का सिक्का या लाल कपड़े में हल्दी रखी सुपारी रखें। व्यापार स्थल के लिए विशेष उपाय दुकान या ऑफिस के मुख्य द्वार के सामने कोई रुकावट (खंभा, पेड़ या दीवार) नहीं होनी चाहिए। प्रवेश द्वार के ऊपर मंगल कलश या नारियल लगाना शुभ होता है। लाभ पंचमी पर नया लेन-देन या बहीखाता शुरू करना अत्यंत फलदायी माना गया है। दीपक जलाने की दिशा सुबह और शाम पूर्व या उत्तर दिशा में घी का दीपक जलाएं। तिल के तेल का दीपक मुख्य द्वार पर जलाना बहुत शुभ माना गया है। दीपक की लौ सदैव पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होनी चाहिए, इससे आर्थिक उन्नति होती है। वास्तु अनुकूल उपाय लाभ पंचमी के दिन घर में कुबेर यंत्र या श्री यंत्र स्थापित करें और उनका पूजन करें। तुलसी पौधे के पास दीपक जलाएं, इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है। रसोईघर में पहली रोटी गाय को और मीठा पहला भोजन कन्याओं को दें। दक्षिण दिशा की दीवार पर लाल रंग की पेंटिंग या कपड़ा लगाना निषेध है। रंग और वस्त्र चयन लाभ पंचमी के दिन लाल, पीले या सुनहरे रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना गया है। ये रंग आकर्षण, सौभाग्य और ऊर्जा के प्रतीक हैं। काले या भूरे रंग से बचें क्योंकि यह नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है। वास्तु के अनुसार शुभ संकेत अगर लाभ पंचमी के दिन पूजा करते समय दीपक की लौ स्थिर रहती है, कपूर आसानी से जल जाता है या पूजा स्थल में सुगंध फैल जाती है तो यह इस बात का संकेत है कि माता लक्ष्मी की कृपा आप पर बनी हुई है। लाभ पंचमी केवल धन की पूजा का दिन नहीं है, यह वास्तु संतुलन और ऊर्जात्मक शुद्धि का पर्व भी है। यदि इस दिन आप वास्तु के इन छोटे-छोटे नियमों का पालन करते हैं तो आपके घर और कार्यस्थल में सकारात्मक ऊर्जा, धनवृद्धि और सौभाग्य का प्रवाह बढ़ता है।

धनतेरस विशेष: जब मां लक्ष्मी ने चुना एक साधारण किसान का घर

हर साल कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का पर्व मनाया जाता है। इस दिन समुद्र मंथन के समय प्रकट हुए भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है, जो अपने हाथ में अमृत से भरा कलश लेकर प्रकट हुए थे। साथ ही, इस दिन मां लक्ष्मी का पूजन भी विधिपूर्वक किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान धन्वंतरि और देवी लक्ष्मी की पूजा करने से घर में धन, सुख और समृद्धि बनी रहती है। धनतेरस से जुड़ी एक पौराणिक कथा के अनुसार, इस दिन मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करने आती हैं। यदि घर स्वच्छ और दीपों से प्रकाशित हो, तो देवी लक्ष्मी प्रसन्न होकर उसमें वास करती हैं और घर में धन-संपत्ति की वृद्धि होती है। इसी कारण लोग इस दिन घर की साफ-सफाई करते हैं और दीप जलाकर मां लक्ष्मी का स्वागत करते हैं। धनतेरस की कथा प्राचीन काल की बात है। एक बार भगवान विष्णु ने पृथ्वी लोक पर भ्रमण करने की इच्छा प्रकट की। जब वे चलने लगे, तो मां लक्ष्मी ने भी निवेदन किया, "प्रभु! मैं भी आपके साथ पृथ्वी पर जाना चाहती हूं।" भगवान विष्णु मुस्कराए और बोले, "देवी, यदि तुम मेरे साथ चलना चाहती हो तो एक शर्त है, तुम्हें मेरी आज्ञा का पालन करना होगा।" माता लक्ष्मी ने सहर्ष यह शर्त स्वीकार कर ली। दोनों पृथ्वी लोक की ओर प्रस्थान कर गए। कुछ समय पश्चात भगवान विष्णु को दक्षिण दिशा की ओर जाने की इच्छा हुई। उन्होंने माता लक्ष्मी से कहा, "देवी, आप यहीं ठहरें। मैं थोड़ी देर में लौटता हूं।" परंतु माता लक्ष्मी, सौंदर्य और आकर्षण की देवी, वहां न रुकीं और चुपचाप प्रभु के पीछे-पीछे चल दीं। रास्ते में उन्हें एक सुंदर सरसों का खेत दिखाई दिया। खेत की हरियाली और पीले-पीले फूलों ने माता का मन मोह लिया। वे वहां रुकीं, सरसों के फूलों से श्रृंगार किया और पास में लगे गन्ने का रस पीया। यह दृश्य जब भगवान विष्णु ने देखा, तो वे क्रोधित हो उठे। उन्होंने माता लक्ष्मी से कहा, "तुमने मेरी आज्ञा का उल्लंघन किया है। इसलिए तुम्हें दंड मिलेगा। अब तुम्हें बारह वर्षों तक इस किसान के घर निवास करना होगा।" भगवान का वचन सत्य हुआ। मां लक्ष्मी को बारह वर्षों तक उसी किसान के घर रहना पड़ा। परंतु जहां लक्ष्मी का वास हो, वहां दरिद्रता कैसे टिक सकती है? देखते ही देखते वह गरीब किसान धन-धान्य से भर गया। उसका घर संपन्नता से चमक उठा। बारह वर्ष पूरे होने पर भगवान विष्णु माता लक्ष्मी को वापस ले जाने आए। लेकिन किसान मां लक्ष्मी को छोड़ने को तैयार नहीं था। तब माता लक्ष्मी ने उसे प्रेमपूर्वक समझाया, "पुत्र! मैं वर्ष में एक दिन तुम्हारे घर जरूर आऊंगी। यदि तुम कार्तिक मास की त्रयोदशी के दिन अपने घर को स्वच्छ रखोगे, दीपक जलाओगे, और श्रद्धा से मेरा पूजन करोगे, तो मैं सदा तुम पर अपनी कृपा बनाए रखूंगी।" किसान ने माता की बात मानी और विधिपूर्वक पूजन किया। तभी से यह परंपरा चली आ रही है कि धनतेरस के दिन घर की सफाई की जाती है, दीप जलाए जाते हैं और माता लक्ष्मी का पूजन कर संपत्ति, सुख और समृद्धि की कामना की जाती है।

धनतेरस: खरीदारी के साथ करें ये 5 उपाय, बढ़ेगी मां लक्ष्मी की शुभता

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस मनाया जाता है और इसी दिन से दिवाली का त्योहार शुरू हो जाता है। इस शुभ दिन मां लक्ष्मी, कुबेर और यमराज की पूजा की जाती है। धनतेरस पर नई वस्तुएं खरीदने के साथ ही कुछ विशेष उपाय करने से धन-धान्य की वृद्धि, सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है। आइए जानते हैं धनतेरस पर किए जाने वाले 5 अचूक उपाय, जो मां लक्ष्मी की कृपा दिला सकते हैं। कुबेर और लक्ष्मी पूजन धनतेरस पर सूर्यास्त के बाद 13 दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके बाद कुबेर देव और तिजोरी की विधि-विधान से पूजा करें। पूजा में धूप, दीप, चंदन, नैवेद्य, फूल और फल अर्पित करें। फिर श्रद्धापूर्वक मंत्र जपें: ‘यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन-धान्य अधिपतये धन-धान्य समृद्धि मे देहि दापय दापय स्वाहा।’ यह मंत्र धन की वृद्धि और आर्थिक स्थिरता लाता है। तिजोरी में चांदी का सिक्का या लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति रखना भी शुभ है। लौंग का जोड़ा अर्पित करें धनतेरस से दिवाली तक मां लक्ष्मी की पूजा के दौरान रोज एक जोड़ा लौंग अर्पित करना चाहिए। यह छोटा सा उपाय आर्थिक तंगी को दूर करता है। मान्यता है कि लौंग की सुगंध मां लक्ष्मी को आकर्षित करती है, जिससे घर में धन-धान्य की कमी नहीं रहती। लौंग को पूजा के बाद तिजोरी में रखने से धन का प्रवाह बना रहता है। तिजोरी में मां लक्ष्मी की तस्वीर धनतेरस पर तिजोरी या गल्ले में मां लक्ष्मी की ऐसी तस्वीर लगाएं, जिसमें वे कमल पर विराजमान होकर धन की वर्षा कर रही हों। यह तस्वीर समृद्धि और स्थायी सुख का प्रतीक मानी जाती है। तस्वीर के पास एक घी का दीपक जलाएं और लाल फूल अर्पित करें। इस उपाय से घर में धन की बरकत होती है और आर्थिक समस्याएं कम होती हैं। मुख्य द्वार पर शुभ प्रतीक घर का मुख्य द्वार सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश द्वार होता है। धनतेरस पर हल्दी और चावल को पीसकर पेस्ट बनाएं और इससे मुख्य द्वार पर ‘ॐ’ का चिन्ह बनाएं। यह मां लक्ष्मी के स्वागत का प्रतीक है। इसके साथ, द्वार पर रंगोली बनाना और तोरण लगाना भी शुभ माना जाता है। यह उपाय घर में शांति, समृद्धि और सकारात्मकता लाता है। शंख से शुद्धिकरण धनतेरस पर कार्यों में बाधाओं या धन की कमी को दूर करने के लिए दक्षिणावर्ती शंख में स्वच्छ जल भरकर घर के चारों ओर छिड़कें। पूजा से पहले और बाद में यह प्रक्रिया करें। साथ ही, चीनी, बताशा, खीर और चावल का दान करें। यह नकारात्मक ऊर्जा को हटाता है और मां लक्ष्मी के आगमन का मार्ग प्रशस्त करता है। शंख की ध्वनि घर को शुद्ध करती है। धनतेरस केवल खरीदारी का दिन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और आर्थिक समृद्धि का अवसर है। कुबेर-लक्ष्मी पूजन, लौंग अर्पण, लक्ष्मी तस्वीर, शुभ प्रतीक और शंख शुद्धिकरण – नकारात्मकता को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा लाते हैं। इन उपायों को श्रद्धा और विधि-विधान से करने पर मां लक्ष्मी की कृपा बरसती है और घर में धन-धान्य, सुख-शांति का वास होता है।