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नेगेटिविटी दूर, पॉजिटिविटी भरपूर: घर को महकाएँ इन सुगंधित इत्रों से

वास्तु शास्त्र में, आपके घर का माहौल और ऊर्जा केवल वस्तुओं की स्थिति पर ही नहीं, बल्कि वहां मौजूद सुगंध पर भी निर्भर करती है। सुगंध में इतनी शक्ति होती है कि यह तुरंत घर की नकारात्मकता को दूर करके एक शांत और सकारात्मक वातावरण बना सकती है। यदि आप अपने घर में खुशहाली, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ाना चाहते हैं, तो वास्तु के सिद्धांतों के अनुसार, कुछ विशेष प्रकार के इत्र या सुगंधित तेलों का उपयोग करना बहुत ही प्रभावी माना जाता है। तो आइए जानते हैं कि घर में खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा बनाएं रखने के लिए कौन से इत्र का इस्तेमाल करना चाहिए। चंदन का इत्र चंदन का इत्र  शुद्धता, शांति और आध्यात्मिकता का प्रतीक है। चंदन की भीनी खुशबू घर में सात्विक ऊर्जा लाती है और मानसिक शांति बढ़ाती है। इसे पूजा घर या ध्यान वाले स्थान पर इस्तेमाल करने से एकाग्रता बढ़ती है और नकारात्मक विचार दूर होते हैं। यह तनाव को कम करने में भी सहायक है। गुलाब का इत्र गुलाब का इत्र प्रेम, मधुरता और कोमलता का प्रतीक है। गुलाब की सुगंध घर के भावनात्मक वातावरण को शुद्ध करती है और परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और सौहार्द बढ़ाती है। इसे लिविंग रूम और बेडरूम में उपयोग करने से रिश्ते मजबूत होते हैं और मन प्रसन्न रहता है। लैवेंडर का इत्र लैवेंडर का इत्र शांति, विश्राम और आराम का प्रतीक है। लैवेंडर की खुशबू विशेष रूप से अनिद्रा और मानसिक बेचैनी को दूर करने में सहायक है। यह घर में शांतिपूर्ण ऊर्जा का संचार करता है। इसे बेडरूम में छिड़कने या डिफ्यूज़र में इस्तेमाल करने से नींद की गुणवत्ता सुधरती है और दिनभर का तनाव कम होता है। मोगरा या चमेली का इत्र मोगरा या चमेली का इत्र समृद्धि, आकर्षण और उत्साह का प्रतीक है। मोगरा या चमेली की सुगंध धन और सौभाग्य को आकर्षित करने वाली मानी जाती है, जिससे घर में समृद्धि का प्रवाह बढ़ता है। इसे घर के मुख्य द्वार के आस-पास या उस क्षेत्र में इस्तेमाल करें जहाँ से ऊर्जा का प्रवेश होता है।

पूजा में बढ़ेगी सकारात्मक ऊर्जा: जानें मंदिर की सही दिशा और वास्तु नियम

वास्तु शास्त्र में दिशा का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि सही दिशा का पालन करने से घर में सुख-शांति का वास होता है और जीवन में कोई संकट नहीं आता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की शुभ दिशा में मंदिर होने से परिवार के सदस्यों को पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है। इसलिए वास्तु शास्त्र में मंदिर के लिए शुभ दिशा का वर्णन किया गया है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में विस्तार से जानते हैं कि मंदिर से जुड़े नियम के बारे में। किस दिशा में होना चाहिए मंदिर वास्तु शास्त्र के अनुसार, मंदिर के लिए पूर्व दिशा को बेहद शुभ माना जाता है। इस दिशा में मंदिर होने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। इसके अलावा पूर्व-उत्तर दिशा को भी मंदिर के लिए उत्तम माना जाता है। इससे पूजा सफल होती है। कैसा होना चाहिए मंदिर घर में मंदिर बनवाने के लिए ऐसी जगह का चयन करें, जहां बाथरूम पास न हो और स्वच्छता के नियम का पालन जरूर करना चाहिए। मंदिर लकड़ी या पत्थर का बनवा सकते हैं। कहां नहीं होना चाहिए मंदिर वास्‍तु शास्‍त्र के अनुसार, मंदिर को भूलकर भी सीढ़ियों के नीचे नहीं बनवाना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि सीढ़ियों के नीचे मंदिर होने से जातक को जीवन में परेशनियों का सामना करना पड़ सकता है और घर में क्‍लेश की समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसके अलावा मंदिर को बेडरूम में भी नहीं बनवाना चाहिए। किस रंग का बनवाएं मंदिर मंदिर के रंग का विशेष ध्यान रखें। मंदिर सफेद, पीला या लाल रंग का होना चाहिए। इन रंग को शुभता का प्रतीक माना जाता है। इन बातों का रखें विशेष ध्यान पूजा के दौरान भगवान को फूल अर्पित किए जाते हैं। कुछ समय के बाद फूल सुख जाते हैं। सूखे हुए फूलों को मंदिर में नहीं रखना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार, मंदिर में सूखे फूल रखने से जातक को वास्तु दोष की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए फूल सुख जाने पर किसी बहते हुए पवित्र नदी में बहा दें या फर किसी पौधे में ड़ाल दें। मंदिर में देवी-देवताओं की प्रतिमा को विराजमान करने से पहले उनके नीचे लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। इसके ऊपर प्रतिमा को स्थापित करें।  

सही दिशा में तस्वीर लगाने से चमकेगी किस्मत, जानें शुभ दिशा

वास्तु शास्त्र में हमारे जीवन से जुड़ी कई परेशानियों का हल आसानी से मिल जाता है। बहुत से लोग अपने घरों में वास्तु के अनुकूल चीज़ों को रखते हैं। इसी में से एक है सात घोड़ों की तस्वीर। आपने भी कही न कही इन 7 सफेद घोड़ो की तस्वीर को अपने या किसी न किसी के घर में दीवार पर टंगा हुआ जरुर देखा होगा। वास्तु शास्त्र की मानें तो घर में घोड़ों की पेंटिंग लगाना बेहद ही शुभ माना जाता है। कहते हैं ये पेंटिंग वृद्धि और सौभाग्य के लिए बहुत ही शुभ मानी जाती है। ऐसे में यदि आपके घर पर भी इन सात घोड़ों की तस्वीर है या आप भी इसे लगाने का सोच रहे हैं तो बता दें कि इस तस्वीर को लगाने की सही दिशा को चूनना और इसके विशेष नियमों को जानना बेहद ज़रुरी हो जाता है ताकि आपको इसका पूरा फल मिल सकें। चलिए जानते हैं कि इस तस्वीर को लगाने की सही दिशा और इसके नियम तो चलिए बिना किसी देरी के शुरू करते हैं। कहते हैं कि अगर दौड़ते हुए सात घोड़ों की तस्वीर घर में सही दिशा में लगा दी जाए तो इसे जातक के जीवन में चल रहा बुरा वक्त दूर हो जाता है, रुके हुए काम तेजी से पूरे होने लगते हैं, धन का प्रवाह बढ़ाता है और किस्मत मानो अपने आप चमक उठती है। ऐसे में वास्तु शास्त्र की माने तो लिविंग रूम में सात घोड़ों की तस्वीर लगाना अच्छा होता है। माना जाता है कि लिविंग रूम में सात घोड़ों की तस्वीर लगाने से आर्थिक समस्याएं कम होने लगती हैं और धन प्राप्ति के नए अवसर खुलते हैं। इसके अलावा दौड़ते हुए सात घोड़ों की तस्वीर लगाते समय केवल स्थान ही नहीं, बल्कि उसकी दिशा भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।  वास्तु शास्त्र के अनुसार, सात घोड़ों की तस्वीर को घर की उत्तर दिशा में लगाना शुभ माना गया है। इससे आर्थिक तंगी कम होती है और जीवन की कई परेशानियां धीरे-धीरे खत्म होने लगती हैं। सात घोड़ों की तस्वीर के महत्व का तो वास्तु शास्त्र के अनुसार घोड़े को शक्ति, गति और सफलता का प्रतीक माना जाता है। यहां तक की सात की संख्या को अंक ज्योतिष में भी बेहद शुभ माना जाता है। जैसे की सप्ताह में सात दिन, संगीत के सात सुर, इन्द्रधनुष के सात रंग  क्योंकि ये सात अंक को भाग्यशाली अंक माना गया है। सात घोड़ों की तस्वीर को लगाने के नियम- सात घोड़ों की पेंटिंग लेते समय कोशिश करें कि उसकी पृष्ठभूमि में उगते सूर्य का दृश्य हो। ऐसी तस्वीर घर में लगाना शुभता और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। दौड़ते हुए घोड़ों की पेंटिंग चुनते समय यह सुनिश्चित करें कि घोड़ों का भाव शांत और संतुलित हो। क्रोधित या आक्रामक दिखने वाले घोड़ों की तस्वीर घर में लगाने से बचना चाहिए। सात घोड़ों की पेंटिंग चुनते समय ध्यान रखें कि घोड़ों की संख्या विषम हो, और तस्वीर में घोड़ों के पूरे शरीर स्पष्ट रूप से दिखाई दें। अकेले दौड़ते घोड़े की तस्वीर लगाने की सलाह नहीं दी जाती। घर में वही सात घोड़ों की तस्वीर लगाएं जिसे देखकर मन प्रसन्न हो और जिसे देखकर आपको आगे बढ़ने की प्रेरणा मिले। तस्वीर में सभी घोड़े बिना रुकावट के एक समान दिशा में आगे बढ़ते हुए दिखाई दें। ये निरंतर प्रगति और सफलता का संकेत माना जाता है।

वास्तु चेतावनी! दूसरों को चीजें शेयर करना पड़ सकता है भारी

वास्तु शास्त्र के अनुसार हर वस्तु में एक विशिष्ट ऊर्जा होती है। कुछ चीजें भाग्य और समृद्धि आकर्षित करती हैं, जबकि कुछ चीजों का गलत लेन-देन जीवन में बाधाएं, तनाव और आर्थिक संकट बढ़ा देता है। हिंदू शास्त्रों में कई ऐसी वस्तुओं का उल्लेख है जिन्हें कभी उधार नहीं देना चाहिए और न ही किसी से उधार लेना चाहिए। ऐसा करने से घर की सकारात्मकता घटती है और परिवार पर अशुभ प्रभाव पड़ता है। नीचे कुछ वस्तुएं बताई जा रही हैं, जिनका लेन-देन बिल्कुल अशुभ माना गया है। सफेद खाने-पीने की चीजें – घर की बरकत कम कर देती हैं दूध, दही, चावल, चीनी, नमक जैसी सफेद वस्तुएं चंद्रमा और शांति की ऊर्जा से जुड़ी होती है। वास्तु नियम: शाम या रात को इन चीजों को घर से बाहर न तो किसी को दें और न ही खुद लेकर जाएं। यह समय ऊर्जा परिवर्तन का माना जाता है और सफेद वस्तुओं का इस समय लेन-देन घर की बरकत और धन प्राप्ति को कमजोर करता है। इन वस्तुओं को सुबह या दिन के समय देना शुभ रहता है। झाड़ू – मां लक्ष्मी का प्रतीक, कभी उधार न दें झाड़ू को घर की समृद्धि और लक्ष्मी का रूप माना गया है। उधार देने से: धन कम होता है। बरकत घटती है। नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश कर सकती हैय, यदि किसी को जरूरत हो, तो नई झाड़ू दें पर अपनी झाड़ू कभी न दें। किसी दूसरे की झाड़ू इस्तेमाल करने से उनके घर की ऊर्जा भी आपके जीवन को प्रभावित कर सकती है। कलाई घड़ी – समय और भाग्य का प्रतीक घड़ी सिर्फ समय बताने वाली वस्तु नहीं, बल्कि भाग्य और जीवन की गति का प्रतीक है। वास्तु चेतावनी: अपनी घड़ी किसी को देने पर आप अपनी अच्छी ऊर्जा, समय और भाग्य भी दे देते हैं। किसी और की घड़ी पहनने से उसकी अच्छी-बुरी ऊर्जा सीधे आपके जीवन में प्रवेश करती है इसलिए घड़ी का लेन-देन पूरी तरह निषिद्ध माना गया है। रुमाल – भावनात्मक ऊर्जा को सोखने वाला रुमाल व्यक्ति की भावनाओं, तनाव और मानसिक ऊर्जा को आकर्षित करता है। वास्तु के अनुसार: रुमाल किसी को देना अशुभ होता है। किसी का रुमाल इस्तेमाल करना और भी हानिकारक माना जाता है। उपहार में रुमाल देने से रिश्तों में कड़वाहट आ सकती है। रुमाल का आदान-प्रदान रिश्तों और मानसिक शांति दोनों को प्रभावित करता है।

किचन सिंक एरिया में ये गलतियाँ न करें, वरना बढ़ सकता है नकारात्मक प्रभाव

वास्तु शास्त्र में घर के हर कोने, विशेषकर रसोई को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि यह स्थान अग्नि और जल के तत्वों का संगम होता है। किचन में सिंक के नीचे की जगह अक्सर नज़रअंदाज़ कर दी जाती है, लेकिन वास्तु के अनुसार, यहां कुछ चीज़ें रखना नकारात्मक ऊर्जा और आर्थिक अस्थिरता का कारण बन सकता है, जिसे वास्तु दोष कहते हैं। तो आइए जानते हैं कि वे मुख्य चीज़ें जिन्हें आपको किचन सिंक के नीचे रखने से बचना चाहिए। कूड़ेदान या डस्टबिन सिंक के नीचे कूड़ेदान रखना सबसे बड़ा वास्तु दोष माना जाता है। सिंक पानी का प्रतिनिधित्व करता है, जो स्वच्छ और बहता हुआ होना चाहिए, जबकि कूड़ेदान गंदगी और स्थिर नकारात्मकता का प्रतिनिधित्व करता है। जल के साथ गंदगी का संयोजन आर्थिक हानि और धन के रुकने का कारण बनता है। यह घर की सकारात्मक ऊर्जा को भी कम कर देता है। कूड़ेदान को सिंक के नीचे से हटाकर किचन के किसी ऐसे कोने में रखें जहां वह कम दिखाई दे और जल तत्व से दूर रहे। बिजली के उपकरण किचन सिंक जल तत्व का क्षेत्र है, जबकि बिजली के उपकरण अग्नि तत्व या ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करते हैं। वास्तु के अनुसार, जल और अग्नि तत्वों का एक साथ आना संघर्ष और असंतुलन पैदा करता है। यह घर के सदस्यों के बीच तनाव बढ़ा सकता है और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ दे सकता है। मिक्सर, टोस्टर या अन्य छोटे उपकरणों को सिंक के नीचे की बजाय कैबिनेट या काउंटर पर रखें। सफाई से जुड़े केमिकल फिनाइल, डिटर्जेंट, एसिड जैसे कठोर केमिकल या सफाई उत्पादों को भी सिंक के नीचे नहीं रखना चाहिए। हालांकि ये सफाई के लिए ज़रूरी हैं, लेकिन इनकी तीव्र रासायनिक प्रकृति सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को बाधित कर सकती है। इसके अलावा, वास्तु के अनुसार, जल तत्व के पास कठोर वस्तुओं को जमा करने से आर्थिक अस्थिरता आ सकती है। इन चीज़ों को सिंक के नीचे रखने के बजाय, किसी बंद अलमारी या बाथरूम/यूटिलिटी एरिया में रखें।

तोते की तस्वीर से आएगी खुशहाली: वास्तु के अनुसार इन स्थानों पर लगाना है शुभ

वास्तु शास्त्र और फेंगशुई, दोनों में ही तोते को एक बहुत ही शुभ और शक्तिशाली प्रतीक माना गया है। यह पक्षी केवल सुंदरता का नहीं, बल्कि प्रेम, वफादारी, अच्छा संवाद, लंबी आयु और सौभाग्य का भी प्रतिनिधित्व करता है। मान्यता है कि यदि तोते की तस्वीर को घर में सही स्थान और दिशा पर लगाया जाए, तो यह उस स्थान की ऊर्जा को सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। यह न केवल परिवार के सदस्यों के बीच आपसी प्रेम और सद्भाव को बढ़ाता है, बल्कि धन और समृद्धि को भी आकर्षित करता है। तो आइए जानते हैं घर के वो कौन से महत्वपूर्ण स्थान हैं जहां तोते की तस्वीर लगाना आपके जीवन में प्रेम की मिठास घोल सकता है और समृद्धि के द्वार खोल सकता है। बच्चों के कमरे वास्तु के अनुसार, तोते की तस्वीर बच्चों के कमरे में लगना से बच्चों की पढ़ाई में रुचि बढ़ती है, उनकी एकाग्रता और याददाश्त  मजबूत होती है क्योंकि उत्तर दिशा को बुध ग्रह की दिशा माना जाता है, जो बुद्धि, ज्ञान और वाणी का कारक है। हरा रंग और तोता बुध से संबंधित हैं, इसलिए यह दिशा शिक्षा के लिए सर्वोत्तम है। ड्राइंग रूम या लिविंग एरिया घर के ड्राइंग रूम या लिविंग एरिया में तोते की तस्वीर लगाने से घर में खुशी और सौहार्द का माहौल बनता है, परिवार के सदस्यों और मेहमानों के बीच संबंध मधुर होते हैं। रिश्तों में तनाव कम होता है क्योंकि उत्तर और पूर्व दिशाएं सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश द्वार मानी जाती हैं। तोते की रंगीन छवि पंचतत्वों  का संतुलन करती है, जिससे घर की निराशा दूर होती है और सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है। बेडरूम तोते का जोड़ा, खासकर बेडरूम में, प्रेम, रोमांस और वैवाहिक सुख का सबसे शक्तिशाली प्रतीक माना जाता है। यह शुक्र और चंद्र की सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है। इसलिए तोते के तस्वीर को बेडरूम में लगाने से पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और आपसी समझ बढ़ती है। वैवाहिक जीवन में मिठास आती है और आयु में वृद्धि होती है। यह अकेलापन दूर करने में भी सहायक है। दुकान या दफ्तर वास्तु के अनुसार, उत्तर दिशा को धन के देवता भगवान कुबेर की दिशा भी माना जाता है। दुकान या दफ्तरकी उत्तर दिशा  में तोते की तस्वीर लगाने से धन और समृद्धि का आकर्षण होता है। धन और समृद्धि में वृद्धि होती है। करियर और व्यापार में उन्नति के नए अवसर मिलते हैं।

घर में नहीं टिकता धन? ये वास्तु टिप्स ला सकते हैं समृद्धि और स्थिरता

क्या आपने कभी सोचा है कि आपके घर की चारदीवारी, जिसके भीतर आप रहते हैं, आपकी आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर सकती है ? जब धन हाथ में नहीं टिकता, तो अक्सर हम अपनी मेहनत या किस्मत को दोष देते हैं। लेकिन भारतीय संस्कृति का प्राचीन विज्ञान वास्तु शास्त्र एक गहरा रहस्य बताता है, आपके घर की ऊर्जा का प्रवाह ही आपके धन के ठहराव का सबसे बड़ा कारण है। तिजोरी रखने की सही दिशा वास्तु के अनुसार, आपको अपनी तिजोरी या पैसे रखने वाली अलमारी को घर के दक्षिण-पश्चिम कोने में रखना चाहिए। यह कोना पृथ्वी तत्व को दर्शाता है, जो स्थिरता और जमाव को बढ़ावा देता है।  तिजोरी का दरवाज़ा हमेशा उत्तर दिशा की ओर खुलना चाहिए। उत्तर दिशा को धन के देवता, कुबे  का स्थान माना जाता है। इस दिशा में खुलने से धन आकर्षित होता है और बढ़ता है। तिजोरी का मुख गलती से भी दक्षिण या पश्चिम दिशा की ओर नहीं खुलना चाहिए, इससे धन का तेज बहाव होता है। उत्तर-पूर्व की शुद्धता घर का उत्तर-पूर्व सबसे पवित्र और पूजनीय स्थान माना जाता है क्योंकि यहां देवी-देवताओं का वास होता है। यह दिशा जल तत्व से भी जुड़ी है और धन-समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है। इस कोने में शौचालय, भारी फर्नीचर या जूते-चप्पल की रैक कभी न रखें। मुख्य द्वार के उपाय अपने घर के मुख्य द्वार पर स्वस्तिक का शुभ चिह्न बनाना बहुत ही कल्याणकारी माना जाता है। यह नकारात्मक ऊर्जा को घर में प्रवेश करने से रोकता है और सकारात्मकता लाता है, जिससे धन संबंधी बाधाएं दूर होती हैं। सुनिश्चित करें कि आपके घर के दरवाज़े खोलते या बंद करते समय किसी भी तरह की चरमराहट या कर्कश आवाज दरवाज़ों को चिकनाई देकर रखें। सकारात्मक वस्तुओं का उपयोग घर की दक्षिण-पूर्व दिशा में तांबे का स्वस्तिक लगाना धन के प्रवाह से संबंधित सभी रुकावटों को दूर करता है। धन को आकर्षित करने के लिए कुछ क्रिस्टल बहुत प्रभावशाली माने जाते हैं। पानी की बर्बादी रोकें अगर आपके घर में कोई नल टपक रहा है तो उसे तुरंत ठीक कराएं। वास्तु शास्त्र में पानी का टपकना धन की बर्बादी का प्रतीक माना जाता है।

वास्तु दोष का असर: गलत दिशा में बनी रसोई से बिगड़ सकता है स्वास्थ्य

जीवन में हमेशा खुशहाली बनी रहे इसके लिए आपका घर वास्तु दोष से मुक्त होना जरुरी है। घर से भी ज्यादा जरुरी है आपका रसोई घर। रसोई घर में यदि वास्तु दोष हों तो उनका असर आपके पूरे परिवार पर पड़ता है। खासतौर पर गलत दिशा में बनी किचन गृहणी की सेहत पर बुरा असर डालती है। किचन की दिशा: वास्तु के हिसाब से किचन का निर्माण घर के दक्षिण-पूर्व हिस्से में होना चाहिए। इसके अलावा खाना पकाते वक्त आपका मुंह दक्षिण या फिर उत्तर दिशा में होना चाहिए। ऐसा करने से रसोई घर में बरकत हमेशा बनी रहती है। दरवाजे की दिशा: रसोई-घर का दरवाजा क्लॉक वाइस उत्तर से पूर्व दिशा की तरफ होना चाहिए। खाना पकाते वक्त आपकी पीठ दरवाजे की तरफ नहीं होनी चाहिए। ऐसा करने से घर आने वाली लक्ष्मी का अपमान समझा जाता है। साथ ही इसका असर गृहणी यानि खाना पकाने वाली औरत की सेहत पर भी पड़ता है। रसोई-घर का सामान: रसोई में किसी तरफ का भारी सामान या फिर गेहूं रखने वाला बड़ा कंटेनर कभी भी ईशान कोण में स्थापित न करें। इन्हें रखने के लिए रसोई का दक्षिण-पूर्व हिस्सा सबसे बेस्ट माना जाता है। रंग: रसोई के रंग घर के वास्तु शास्त्र से बहुत मेल खाते हैं। घर में बरकत बनाए रखने के लिए रसोई घर में हमेशा शांतमयी रंगों का इस्तेमाल करें। जैसे कि पीला या फिर हल्का नीला। नीला रंग आसमान से मेल खाता है, ऐसे में ये रंग घर के वास्तु को ठीक रखने में काफी मददगार सिद्ध होते हैं। डाइनिंग टेबल: अगर आपका डाइनिंग टेबल रसोई घर में रखा है तो उसे किचन के सेंटर में रखें। डाइनिंग टेबल रखने के लिए उत्तर-पश्चिम दिशा ही चुनें। गैस रखने की दिशा: रसोई घर में गैस चूल्हा हमेशा साउथ-ईस्ट कॉर्नर में रखें। गैस के साथ-साथ और भी अन्य बिजली के उपकरण अगर इसी दिशा में रखें जाएं तो बेहतर रहेगा। तो ये थे किचन से जुड़े कुछ आसान वास्तु टिप्स। जिन्हें ध्यान में रखकर आप घर और किचन दोनों के वास्तु दोष दूर कर सकते हैं। इसके लिए आपको किसी तोड़-फोड़ की भी जरुरत नहीं पड़ेगी।  

पौधे सही दिशा में लगाने से बदल जाएगा घर का भाग्य

घर की साज-सजावट के लिए हम कई तरह के पेड़-पौधे लगाते हैं। वहीं कुछ पेड़-पौधे आध्यात्मिक लाभ भी प्रदान करते हैं। आज हम आपको कुछ ऐसे पेड़-पौधों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें घर में लगाने से समृद्धि और खुशहाली आती है। साथ ही आर्थिक तंगी भी दूर हो सकती है। चलिए जानते हैं इस बारे में। दूर होती हैं धन संबंधी समस्याएं वास्तु शास्त्र में मनी प्लांट को एक बहुत ही शुभ पौधे के रूप में देखा जाता है। वास्तु शास्त्र में बताया गया है कि घर की दक्षिण-पूर्व दिशा में लगाना सबसे शुभ माना जाता है। ऐसा करने से धन और समृद्धि आकर्षित होती हैं। लेकिन वास्तु के अनुसार, इस पौधे को घर की उत्तर-पूर्व दिशा में लगाना शुभ नहीं माना गया। इस पौधे को घर के अंदर लगाना ज्यादा शुभ माना गया है। इस बात का भी ध्यान रखें कि मनी प्लांट की बेल जमीन को न छूए। बनी रहती है सकारात्मक ऊर्जा वास्तु शास्त्र में घर में लगाने के लिए बांस को भी एक शुभ पौधा माना गया है। अगर वास्तु नियमों का ध्यान रखते हुए इस पौधे को घर में लगाया जाए, तो इससे व्यक्ति के सौभाग्य में वृद्धि हो सकती है। साथ ही, जातक को कई अन्य समस्याओं से भी छुटकारा मिल जाता है। ऐसे में आप इस पौधे को घर की उत्तर या पूर्व दिशा में लगा सकते हैं। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है और नेगेटिव एनर्जी दूर बनी होती है। साथ ही, इससे धन संबंधी समस्याओं से भी आपको छुटकारा मिल सकता है। ये पौधा है बहुत ही शुभ शमी का पौधा भी घर में लगाना काफी शुभ माना गया है। आध्यात्मिक रूप से यदि रोजाना श्रद्धाभाव से इस पौधे की पूजा-अर्चना की जाए, तो इससे आपको भगवान शिव और शनिदेव की कृपा प्राप्त हो सकती है। इसके साथ ही यह माना जाता है कि यदि किसी जातक पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है, तो उसे शमी का पौधा घर में जरूर लगाना चाहिए। वास्तु शास्त्र में इसे लगाने के लिए घर की पूर्व दिशा या फिर ईशान कोण अर्थात उत्तर-पूर्व दिशा को सबसे उत्तम माना गया है। इस बात का खासतौर से ध्यान रखें कि शमी को हमेशा घर के बाहर, जैसे कि बालकनी, छत या गार्डन में लगाना चाहिए। वहीं वास्तु में इसे घर की दक्षिण दिशा में लगाना शुभ माना गया है। इसे कभी भी घर के अंदर नहीं लगाना चाहिए, वरना आपको नकारात्मक परिणाम भी मिल सकते हैं।  

घर के बेडरूम की लाइट बदलेगी रिश्तों की मिठास, ये रंग करेगा कमाल

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर का हर कोना हमारे जीवन की ऊर्जा और मनोभावों को प्रभावित करता है। खासतौर पर बेडरूम, जो पति-पत्नी के बीच प्रेम, सामंजस्य और सुकून से जुड़ा होता है। अगर आप अपने रिश्ते में प्यार और सकारात्मकता बनाए रखना चाहते हैं, तो बेडरूम की लाइट का रंग बेहद महत्वपूर्ण होता है। सही रंग की रोशनी न सिर्फ माहौल को सुखद बनाती है बल्कि जीवनसाथी के बीच अपनापन और मधुरता भी बढ़ाती है। तो आइए जानते हैं कि कौन-सी लाइट आपके रिश्ते में प्रेम का जादू भर सकती है। क्यों फायदेमंद है इस रंग की लाइट गुलाबी रंग लाइट गुलाबी रंग की रोशनी प्रेम, कोमलता और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक मानी जाती है। यह माहौल को रोमांटिक और सुकून भरा बनाती है। वॉर्म येलो लाइट वॉर्म येलो लाइट घर में गर्मजोशी और स्थिरता लाती है। इससे मन शांत रहता है और रिश्तों में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। बहुत ज्यादा चमकीली या सफेद लाइट से बचना चाहिए, क्योंकि यह मानसिक तनाव और बेचैनी पैदा कर सकती है। वास्तु के अनुसार सही दिशा बेडरूम का स्थान दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना सबसे शुभ माना जाता है। यह दिशा स्थायित्व और भरोसे का प्रतीक है, जो रिश्ते को मजबूत बनाती है।