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वास्तु शास्त्र की चेतावनी: शेर की तस्वीर से बढ़ सकता है तनाव और विवाद

घर सजाते समय हम अक्सर सुंदर पेंटिंग और आकर्षक तस्वीरें लगा लेते हैं, लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार हर चित्र घर की ऊर्जा को प्रभावित करता है। विशेष रूप से शेर की तस्वीर को लेकर वास्तु में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। वास्तु ग्रंथ जैसे समरांगण सूत्रधार, प्रासाद मंडन और बृहत संहिता में बताया गया है कि घर में रखी वस्तुएं वहां रहने वाले लोगों के स्वभाव, संबंध और समृद्धि पर गहरा प्रभाव डालती हैं। शेर की तस्वीर क्यों मानी जाती है अशुभ? शेर को जंगल का राजा और शक्ति का प्रतीक माना जाता है, लेकिन वास्तु के अनुसार शेर आक्रामकता, अहंकार और प्रभुत्व (Dominance) का प्रतीक भी है। घर में शेर की तस्वीर लगाने से: परिवार के सदस्यों में वाद-विवाद बढ़ सकते हैं। क्रोध और तनाव की स्थिति बन सकती है। रिश्तों में अहंकार टकराव पैदा कर सकता है। वास्तु सिद्धांत कहते हैं कि घर शांति और सौहार्द का स्थान है, इसलिए यहां उग्र और हिंसक पशुओं की तस्वीरें लगाने से बचना चाहिए। नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा आक्रामक पशुओं की तस्वीरें घर की सकारात्मक ऊर्जा को बाधित कर सकती हैं। वास्तु के अनुसार, दीवारों पर लगे चित्र मानसिक स्थिति को प्रभावित करते हैं। शेर, बाघ या युद्ध दर्शाने वाली तस्वीरें मानसिक अशांति बढ़ा सकती हैं। निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है। बच्चों के स्वभाव पर भी असर पड़ता है। किन तस्वीरों से बचें? वास्तु के अनुसार निम्न पक्षियों/पशुओं की तस्वीरें भी घर में नहीं लगानी चाहिए गिद्ध, उल्लू, कौआ, बाज और बगुला। इनको अशुभ संकेत और एकाकीपन का प्रतीक माना गया है। कौन सी तस्वीरें मानी जाती हैं शुभ? घर में शांत और सकारात्मक प्रतीकों वाली तस्वीरें लगाना श्रेष्ठ माना गया है। जैसे: गाय – समृद्धि और मातृत्व का प्रतीक सात दौड़ते घोड़े – सफलता और प्रगति हाथी – शक्ति और स्थिरता कछुआ – दीर्घायु हंस – ज्ञान और विवेक मोर – सौभाग्य और सुंदरता ये प्रतीक घर में सकारात्मक ऊर्जा और सौहार्द बढ़ाते हैं वास्तु शास्त्र के अनुसार घर केवल ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि ऊर्जा का केंद्र होता है। इसलिए सजावट करते समय केवल सुंदरता ही नहीं, बल्कि उसके प्रभाव को भी ध्यान में रखना चाहिए। अगर आप घर में सुख-शांति और समृद्धि चाहते हैं, तो शेर जैसी आक्रामक तस्वीरों से बचें और शुभ प्रतीकों को अपनाएं।

वास्तु दोष से सुरक्षा चाहिए? होलाष्टक की एंट्री से पहले घर में करें ये खास परिवर्तन

होलाष्टक का समय हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। होली से आठ दिन पहले शुरू होने वाले इस समय को 'होलाष्टक' कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इन आठ दिनों में सभी ग्रह उग्र अवस्था में होते हैं, जिसके कारण वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। यही कारण है कि इस दौरान कोई भी शुभ कार्य वर्जित होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, यदि आप होलाष्टक शुरू होने से पहले अपने घर और जीवन से जुड़ी कुछ खास तैयारियों को पूरा कर लेते हैं तो आप आने वाली परेशानियों और वास्तु दोषों से बच सकते हैं। आइए जानते हैं विस्तार से कि वे कौन से काम हैं जिन्हें समय रहते निपटा लेना चाहिए। घर की गहरी सफाई और कबाड़ का निपटारा वास्तु में स्वच्छता का सीधा संबंध सकारात्मकता से है। होलाष्टक के दौरान नकारात्मक शक्तियां प्रभावी होती हैं, इसलिए घर के कोनों में जमा धूल-मिट्टी और मकड़ी के जाले वास्तु दोष को निमंत्रण देते हैं।  घर में पड़ी टूटी हुई क्रॉकरी, बंद घड़ियां या इलेक्ट्रॉनिक कचरा तुरंत बाहर करें। ये चीजें राहु और शनि के नकारात्मक प्रभाव को बढ़ाती हैं। मुख्य द्वार के पास पुराने फटे जूते न रखें। होलाष्टक से पहले इन्हें हटा दें ताकि घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश सुगम हो सके। ईशान कोण को दोषमुक्त करना घर का उत्तर-पूर्वी कोना यानी ईशान कोण देवताओं का स्थान माना जाता है। होलाष्टक शुरू होने से पहले यह सुनिश्चित करें कि इस दिशा में कोई भारी सामान या गंदगी न हो। यदि यहां कोई भारी अलमारी रखी है, तो उसे दक्षिण या पश्चिम दिशा में खिसका दें। इस कोने में गंगाजल का छिड़काव करें ताकि ग्रहों की उग्रता का असर आपके घर की शांति पर न पड़े।  रसोई और नमक का उपाय वास्तु शास्त्र में रसोई को घर की समृद्धि का केंद्र माना गया है। होलाष्टक से पहले रसोई की सफाई अनिवार्य है। होलाष्टक शुरू होने से एक दिन पहले पूरे घर में सेंधा नमक मिले हुए पानी से पोंछा लगाएं। नमक नकारात्मक ऊर्जा को सोखने का काम करता है। यह नियम बना लें कि होलाष्टक के दौरान रात को रसोई में जूठे बर्तन न रहें। इससे अन्नपूर्णा दोष लगता है। मुख्य द्वार का सौंदर्यीकरण वास्तु के अनुसार घर का मुख्य द्वार ही भाग्य का द्वार होता है। होलाष्टक में ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव को रोकने के लिए मुख्य द्वार पर आम या अशोक के पत्तों का तोरण लगाएं। द्वार के दोनों ओर सिंदूर से स्वास्तिक बनाएं। यह चिन्ह सुरक्षा कवच की तरह काम करता है और बुरी शक्तियों को घर के अंदर प्रवेश करने से रोकता है। धन स्थान और तिजोरी की व्यवस्था होलाष्टक के दौरान आर्थिक तंगी से बचने के लिए अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान को व्यवस्थित करें। तिजोरी में लाल कपड़ा बिछाएं और उसमें कुछ गोमती चक्र या कौड़ियां रखें। ध्यान रहे कि होलाष्टक शुरू होने के बाद निवेश या बड़े आर्थिक लेनदेन से बचना चाहिए, इसलिए जो भी निवेश संबंधी कागजी कार्यवाही है, उसे पहले ही पूरा कर लें। पूजा घर की शुद्धि होलाष्टक में भक्ति का विशेष महत्व है क्योंकि भक्त प्रहलाद को इसी दौरान प्रताड़ित किया गया था। अपने मंदिर की सफाई करें और भगवान की मूर्तियों को गंगाजल से स्नान कराएं। खंडित मूर्तियों या तस्वीरों को विसर्जित कर दें। होलाष्टक शुरू होने से पहले शुद्ध घी का दीपक जलाने का संकल्प लें, ताकि घर का आभामंडल शुद्ध रहे।

सोने से पहले किचन से इन चीजों को हटाना क्यों है जरूरी

वास्तु शास्त्र के अनुसार, रसोई घर केवल खाना बनाने की जगह नहीं है, बल्कि यह घर की सुख-समृद्धि का मुख्य केंद्र भी है। अक्सर हम दिनभर की थकान के बाद रात को रसोई को वैसे ही छोड़ देते हैं, लेकिन आपकी यह एक छोटी सी लापरवाही घर की बरकत को रोक सकती है। जूठे बर्तन: दरिद्रता का मुख्य कारण रात के समय सिंक में जूठे बर्तन छोड़ना वास्तु में सबसे बड़ा दोष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जूठे बर्तन घर में नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) को आकर्षित करते हैं। यह माना जाता है कि रसोई को गंदा छोड़ने से मां लक्ष्मी (Laxmi Ji) रुष्ट हो जाती हैं और घर में आर्थिक तंगी आने लगती है। वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो जूठे बर्तनों में बैक्टीरिया पनपते हैं, जो घर के सदस्यों की सेहत बिगाड़ सकते हैं। खाली पानी के बर्तन अक्सर लोग रात को रसोई में रखे बाल्टी या मटके को खाली छोड़ देते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, रसोई में पानी के बर्तन खाली रखना शुभ नहीं होता। खाली बर्तन जीवन में रिक्तता और तनाव का प्रतीक माने जाते हैं। सोने से पहले कम से कम एक बाल्टी या जग भरकर जरूर रखना चाहिए, ताकि घर में खुशहाली और संपन्नता बनी रहे। बिखरा हुआ सामान और कूड़ा रसोई के स्लैब पर फैला हुआ आटा, मसाले या सब्जियों के छिलके राहु और केतु के दोष को बढ़ाते हैं। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, रात को रसोई की सफाई न करने से व्यक्ति की कुंडली में ग्रह नक्षत्रों की स्थिति कमजोर होने लगती है, जिसका सीधा असर मानसिक शांति और करियर पर पड़ता है। गूंथा हुआ आटा कई घरों में महिलाएं सुबह की जल्दी के चक्कर में रात को ही आटा गूंथकर रख देती हैं। लेकिन, पुराणों और शास्त्रों के अनुसार, गूंथा हुआ आटा एक 'पिंड' के समान माना जाता है। इसे रात भर रखने से घर में नकारात्मक शक्तियां आने लगती हैं और यह स्वास्थ्य के लिहाज से भी हानिकारक है क्योंकि खमीर उठने से इसमें विषैले तत्व पैदा हो सकते हैं।  

घर के आंगन में तुलसी कब लगाएं? खाली तिजोरी भरने का अचूक उपाय

सनातन धर्म में तुलसी का पौधा पूजनीय है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, तुलसी की पूजा-अर्चना करने से घर में मां लक्ष्मी का आगमन होता है। साथ ही सुख-शांति की प्राप्ति होती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, गलत दिन या गलत दिशा में तुलसी को लगाने से जीवन में वास्तु दोष का सामना करना पड़ सकता है और मां लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं। आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि तुलसी लगाने के लिए कौन-सा दिन है शुभ? किस दिन लगाएं तुलसी?     अगर आप घर में तुलसी लगाना चाहते हैं, तो इसके लिए गुरुवार का दिन शुभ माना जाता है, क्योंकि यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गुरुवार के दिन तुलसी लगाने से परिवार के सदस्यों को जगत के पालनहार भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही घर में सुख-शांति बनी रहती है।     इसके अलावा तुलसी लगाने के लिए शुक्रवार का दिन शुभ माना जाता है। इस दिनमां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन घर में तुलसी लगाने से आर्थिक तंगी की समस्या से मुक्ति मिलती है और घर में मां लक्ष्मी का आगमन होता है।     तुलसी लगाने के लिए कार्तिक माह को बेहद शुभ माना जाता है। इस माह में तुलसी पूजा करने का विशेष महत्व है। इसलिए इस माह में तुलसी लगाने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। साथ ही घर में खुशियों का आगमन होता है। किस दिशा में लगाएं तुलसी?     घर में तुलसी का पौधा उत्तर या उत्तर-पूर्व में लगाना चाहिए। वास्तु के अनुसार, इस दिशा को देवताओं का स्थान माना जाता है। इसलिए इस दिशा में तुलसी लगाने से शुभ परिणाम मिलते हैं।     इसके अलावा पूर्व दिशा में भी तुलसी का पौधा लगा सकते हैं।     एक बात का विशेष ध्यान रखें कि तुलसी को भूलकर भी दक्षिण दिशा में न लगाएं। इस दिशा को यम की दिशा मानी जाती है। इससे घर में वास्तु दोष की समस्या बन सकती है। तुलसी के नियम     तुलसी के पास भूलकर भी जूते-चप्पल या झाड़ू नहीं रखनी चाहिए।     इसके अलावा पौधे के पास साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।     रोजाना सुबह और शाम पौधे के देसी घी का दीपक जलाएं।     गंदे हाथों से तुसली को स्पर्श न करें।  

नेम प्लेट में छिपी है सफलता—घर से समाज तक चमकेगा नाम

घर की सबसे पहली खूबसूरती मुख्य प्रवेश द्वार पर लगी नेम प्लेट होती है, जो आगंतुक को आपके व आपके परिवार के बारे में जानकारी देती है। वर्तमान में कमोबेश हर घर के मुख्य प्रवेश द्वार पर एक नेम प्लेट दिखाई दे ही जाती है। भिन्न-भिन्न आकार व डिजाइन में लगी ये नेमप्लेटें घर की खूबसूरती में चार चांद लगाने का काम करती हैं। वास्तु में घर के हर एक कोने और घर में रखी हर एक चीज का खास महत्व होता है। वास्तु शास्त्र में कई ऐसे उपाय बताए गए हैं, जिन्हें अपनाकर जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली लाई जा सकती है। घर के बाहर लगी नेम प्लेट को लेकर भी कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है, ताकि घर में यश, र्कीत और सुख-समृद्धि का आगमन हो। नेम प्लेट हमेशा घर के मुख्य प्रवेश द्वार के दाईं ओर लगाई जानी चाहिए। इसे हमेशा साफ-सुथरा रखना चाहिए। अधिकांश घरों के बाहर लगी नेम प्लेट पर धूल के परतें देखी जाती हैं। कोशिश करके नेमप्लेट को रोज प्रात: उठते ही साफ करना चाहिए। नेम प्लेट का आकार सही होना चाहिए। इस पर कम से कम दो लाइन लिखी हुई होनी चाहिएं। कई घरों के बाहर केवल घर का पता लिखी नेम प्लेट लगी होती है, यह वास्तु शास्त्र के अनुसार सही नहीं है। पते से पहले घर के मालिक का नाम लिखा होना चाहिए। नेम प्लेट पर लिखे जाने वाले अक्षरों की बनावट ऐसी हो जो पढ़ने में साफ हो। नेम प्लेट पर फॉन्ट न तो बड़े और न ही बहुत छोटे आकार में होना चाहिए। नेम प्लेट की लिखावट ऐसी हो जिसे हर उम्र का व्यक्ति आसानी से पढ़ सके। नेम प्लेट पर नाम इस तरीके से लिखा हो कि वह ज्यादा भरी हुई न लगे। नेम प्लेट हमेशा दीवार या दरवाजे की बीच में लगानी चाहिए। वास्तु के अनुसार वृत्ताकार, त्रिकोण और विषम आकृति की नेम प्लेट घर के लिए सबसे अच्छी होती है। वास्तु के अनुसार लगी नेम प्लेट घर के भीतर वास्तु दोष को आने से रोकती है। इससे घर पर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और गृह क्लेश तथा बीमारियां दूर होती हैं। नेम प्लेट कहीं से टूटी-फूटी नहीं होनी चाहिए और न ही इसमें छेद होना चाहिए। इससे घर में नकारात्मकता आती है। नेम प्लेट का रंग घर के मुखिया की राशि के आधार पर ही चुना जाना चाहिए। नेम प्लेट पर सफेद, हल्का पीला, केसरिया आदि जैसे मिलते-जुलते रंगों का इस्तेमाल करें। भूलकर भी इस पर नीले, काले, ग्रे या फिर इसी तरह से मिलते-जुलते गहरे रंगों का इस्तेमाल न करें। प्रयास करके तांबा, स्टील या पीतल की धातु से बनी नेम प्लेट लगानी चाहिए। यदि इन धातुओं की प्लेट नहीं मिले तो फिर लकड़ी और पत्थर की बनी नेम प्लेट भी लगाई जा सकती है। नेम प्लेट के एक ओर गणपति या फिर स्वास्तिक का चिन्ह बनवाना भी शुभ माना जाता है। रात में नेम प्लेट पर रोशनी के लिए आप एक छोटा-सा बल्ब भी लगवा सकते हैं।

Relationship Tips: वैलेंटाइन डे पर आज़माएं वास्तु के 3 आसान उपाय, दूरियां होंगी खत्म

वैलेंटाइन डे सिर्फ तोहफों और कैंडल लाइट डिनर का दिन नहीं है, बल्कि यह अपने रिश्तों की गहराई को समझने और उनमें आई दूरियों को मिटाने का भी एक सुनहरा मौका है। कई बार हम अपने पार्टनर को खुश करने की लाख कोशिशें करते हैं, लेकिन घर का वास्तु हमारे रिश्तों में अनजाने में तनाव पैदा कर देता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की दिशाएं और वहां रखी चीजें हमारे मन और भावनाओं पर गहरा असर डालती हैं। साल 2026 के वैलेंटाइन डे पर अगर आप भी अपने रिश्ते में वही पुरानी वाली मिठास वापस चाहते हैं, तो घर के एक खास कोने में बदलाव करना आपके लिए जादू की तरह काम कर सकता है। दक्षिण-पश्चिम दिशा वास्तु विज्ञान में दक्षिण-पश्चिम दिशा को 'पितृ' और 'रिश्तों' का कोना माना जाता है। अगर आपके और आपके पार्टनर के बीच छोटी-छोटी बातों पर झगड़े होते हैं, तो सबसे पहले इसी कोने की जांच करें। क्या करें बदलाव? साफ-सफाई: इस वैलेंटाइन, घर के इस कोने से कबाड़, टूटी हुई चीजें या नीले रंग की वस्तुओं को तुरंत हटा दें। नीला रंग पानी का प्रतीक है, जो इस दिशा की स्थिरता को डगमगा देता है। लव बर्ड्स या जोड़े की तस्वीर: इस दिशा में हंसों के जोड़े की मूर्ति या अपनी और अपने पार्टनर की एक मुस्कुराती हुई फोटो लगाएं। ध्यान रहे कि फोटो लाल या सुनहरे फ्रेम में हो। गुलाबी रोशनी: वैलेंटाइन डे की शाम इस कोने में एक छोटा गुलाबी या लाल रंग का लैंप जलाएं। गुलाबी रंग प्यार और करुणा का प्रतीक है। बेडरूम का वास्तु भी जरूरी अक्सर बेडरूम में रखी कुछ चीजें नकारात्मकता फैलाती हैं। वास्तु के अनुसार, सोते समय कभी भी आपके पैर मुख्य दरवाजे की ओर नहीं होने चाहिए। साथ ही, बेडरूम में शीशा ऐसी जगह न लगाएं जहां सोते समय आपकी परछाई दिखे, यह वैवाहिक जीवन में तनाव का कारण बनता है। रिश्ते में प्यार बढ़ाने के लिए इस वैलेंटाइन डे पर अपने बेडरूम में ताजे गुलाब के फूल रखें और थोड़े से 'रॉक साल्ट' (सेंधा नमक) से घर में पोंछा लगाएं। यह नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेता है और वातावरण में सकारात्मकता भर देता है।  

देवी-देवताओं की तस्वीरें भी ला सकती हैं नकारात्मक ऊर्जा! क्या कहती हैं धार्मिक मान्यताएं

घर में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए लोग देवी-देवताओं की तस्वीरें और मूर्तियां स्थापित करते हैं। मान्यता है कि सही विधि और सही स्वरूप में की गई पूजा से घर का वातावरण सकारात्मक बना रहता है। हालांकि, वास्तु शास्त्र और ज्योतिष के अनुसार हर देवी-देवता की हर तस्वीर या मूर्ति घर में रखना शुभ नहीं माना जाता। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुछ विशेष देवी-देवताओं के उग्र स्वरूप, खंडित प्रतिमाएं या युद्ध दर्शाती तस्वीरें घर में रखने से मानसिक तनाव, आपसी कलह और आर्थिक तंगी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। आइए जानते हैं किन देवी-देवताओं की तस्वीरें घर में रखने से बचना चाहिए और इसके पीछे क्या कारण बताए गए हैं। भगवान भैरव और नटराज की मूर्ति भगवान शिव के उग्र रूप भैरव महाराज की तस्वीर या मूर्ति घर के भीतर रखना शुभ नहीं माना जाता। शास्त्रों के अनुसार, भैरव तंत्र साधना के देवता हैं और उनकी पूजा मुख्य रूप से घर के बाहर या मंदिर में की जानी चाहिए। इसी तरह, नटराज स्वरूप में भगवान शिव तांडव मुद्रा में होते हैं, जो विनाश और प्रलय का प्रतीक मानी जाती है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, इस स्वरूप की मूर्ति घर में रखने से अशांति और मानसिक तनाव बढ़ सकता है। शनि देव की प्रतिमा शनि देव को न्याय और कर्मफल का देवता माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनकी दृष्टि अत्यंत प्रभावशाली और उग्र मानी जाती है। यही कारण है कि शनि देव की मूर्ति या तस्वीर घर में लगाना उचित नहीं माना गया है। शनि देव की पूजा के लिए मंदिर या शनि पीठ में जाना शुभ माना जाता है। घर में उनकी प्रतिमा रखने से परिवार के सदस्यों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका बताई जाती है। देवी काली का उग्र स्वरूप मां काली शक्ति और संहार की देवी हैं, लेकिन घर में उनका अत्यंत उग्र या विकराल स्वरूप रखना शुभ नहीं माना जाता। ऐसी तस्वीरें जिनमें मां काली राक्षसों का संहार करती दिखाई दें या अत्यधिक उग्र रूप में हों, घर में नकारात्मक ऊर्जा और क्रोध को बढ़ा सकती हैं। वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घर में मां लक्ष्मी, मां सरस्वती या मां दुर्गा के सौम्य और आशीर्वाद देते हुए स्वरूप की पूजा करना अधिक शुभ माना गया है। खंडित मूर्तियां या टूटी हुई तस्वीरें वास्तु शास्त्र में खंडित मूर्तियों को सबसे बड़ा दोष माना गया है। टूटी हुई मूर्ति, तस्वीर का टूटा या चटका हुआ कांच इन सभी को घर में रखना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि खंडित प्रतिमाएं दुर्भाग्य को आकर्षित करती हैं और घर की बरकत को रोक देती हैं। ऐसी मूर्तियों या तस्वीरों को तुरंत सम्मानपूर्वक हटा देना चाहिए। युद्ध या क्रोध मुद्रा वाली तस्वीरें किसी भी देवी-देवता की ऐसी तस्वीर जिसमें वे युद्ध करते हुए या अत्यधिक क्रोध में दिखाई दें, घर के वातावरण को तनावपूर्ण बना सकती है। उदाहरण के लिए, महाभारत युद्ध या अन्य संघर्ष दर्शाती धार्मिक तस्वीरें घर में शांति भंग कर सकती हैं। ऐसे दृश्य पूजा स्थान के लिए उपयुक्त नहीं माने जाते। इन वास्तु नियमों का भी रखें ध्यान पीठ दिखाई न दे: भगवान की मूर्ति या तस्वीर इस तरह न रखें कि उनकी पीठ दिखाई दे। आमने-सामने न हों: एक ही देवी-देवता की दो मूर्तियां या तस्वीरें आमने-सामने न रखें। मंदिर की सही दिशा: घर का मंदिर हमेशा उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में होना चाहिए। साफ-सफाई: पूजा स्थल को हमेशा स्वच्छ और व्यवस्थित रखें। वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घर में देवी-देवताओं की सही तस्वीरें और मूर्तियां रखने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। वहीं, गलत स्वरूप या खंडित प्रतिमाएं घर की शांति और समृद्धि में बाधा बन सकती हैं। इसलिए पूजा स्थल की व्यवस्था करते समय इन नियमों का पालन करना बेहद जरूरी माना गया है।

घर का मुख्य द्वार किस दिशा में हो तो मिले अपार धन और खुशहाली?

वास्तु शास्त्र में सभी दिशाओं का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि वास्तु के नियम का पालन करने से जातक का जीवन खुशियों से भरा रहता है। वास्तु की दृष्टि से घर के मुख्य द्वार एक अहम हिस्सा होता है, इसलिए मुख्य द्वार सही दिशा में होना चाहिए, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होगा। शुभ दिशा में घर का मुख्य द्वार होने से सकारात्मकता और मानसिक शांति बनी रहती है। साथ ही तनाव की समस्या दूर होती है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि किस दिशा में होना चाहिए घर का मुख्य द्वार। कौन-सी दिशा मुख्य द्वार के लिए है शुभ?     वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के मुख्य द्वार लिए उत्तर दिशा शुभ माना जाता है। इस दिशा को धन के देवता कुबेर का स्थान माना जाता है। इससे घर में धन का प्रभाव बना रहता है।     इसके अलावा पूर्व दिशा को भी घर के मुख्य द्वार के लिए उत्तम माना जाता है। यह दिशा सूर्य देव की है। इस दिशा में मुख्य द्वार होने से जातक को मान-सम्मान मिलता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है।     अगर आप घर में शांति का माहौल चाहते हैं, तो घर का मुख्य द्वार ईशान कोण में होना चाहिए। इससे जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। इन बातों का रखें ध्यान     मुख्य द्वार घर के अंदर की तरफ खुलना चाहिए। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है।     इसके अलावा मुख्य द्वार घर के सभी दरवाजों से बड़ा चाहिए।     मुख्य पर साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। ऐसा माना जाता है कि मुख्य द्वार पर गंदगी होने से घर में मां लक्ष्मी का आगमन नहीं होता है।     मुख्य द्वार पर स्वास्तिक का चिन्ह लगाना शुभ माना जाता है। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा नहीं आती है     मुख्य द्वार पर पेड़-पौधें लगाएं। इससे गेटिविटी दूर रहती है।     द्वारा पर हमेशा पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए।     अगर आप वास्तु के इन नियम का पालन करते हैं, तो आपक घर में हमेशा खुशहाली और सकारात्मकता का वास होगा।  

क्या आप भी सुबह सबसे पहले ये 5 चीजें देखते हैं? हो सकता है इसी वजह से बिगड़ता हो आपका दिन

हम अक्सर कहते हैं कि "आज का दिन ही खराब है", लेकिन कभी इसके पीछे की वजह पर गौर नहीं करते। वास्तु शास्त्र के अनुसार, जब हम सोकर उठते हैं, तो हमारा शरीर और मन अत्यधिक संवेदनशील होता है। उस वक्त हम जो देखते हैं, उसका सीधा असर हमारी मानसिक ऊर्जा और भाग्य पर पड़ता है। प्राचीन वास्तु शास्त्र और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, कुछ चीजें नकारात्मकता का प्रतीक मानी जाती हैं। अगर दिन की शुरुआत ही इन चीजों को देखकर हो, तो न केवल मानसिक तनाव बढ़ता है, बल्कि आर्थिक हानि के योग भी बनने लगते हैं। भूलकर भी न देखें ये 5 चीजें बंद घड़ी (रुका हुआ समय): वास्तु विशेषज्ञों के मुताबिक, सुबह उठते ही बंद घड़ी देखना बहुत अशुभ है। यह आपके जीवन में ठहराव और कार्यों में बाधा आने का संकेत है। यह दर्शाता है कि आपका अच्छा समय रुक गया है। शीशे में चेहरा देखना: बहुत से लोगों की आदत होती है जागते ही शीशा देखने की। वास्तु के अनुसार, रात भर की नकारात्मक ऊर्जा सुबह चेहरे पर होती है। शीशा देखने से वह ऊर्जा वापस आप में समा जाती है, जिससे दिनभर चिड़चिड़ापन रह सकता है। जूठे बर्तन: अगर आप सुबह उठकर किचन में सबसे पहले रात के जूठे बर्तन देखते हैं, तो यह सीधे तौर पर आर्थिक तंगी को न्योता देना है। इससे घर में दरिद्रता का वास होता है। अपनी या दूसरों की परछाई: सुबह-सुबह परछाई देखना (चाहे वह अपनी हो या किसी और की) राहु का प्रभाव बढ़ाता है। इससे मन में डर, भ्रम और कार्यों में उलझन पैदा होती है। जंगली जानवरों की तस्वीर: बेडरूम में कभी भी हिंसक जानवरों की फोटो न लगाएं। सुबह इन्हें देखने से स्वभाव में क्रोध बढ़ता है और परिवार में क्लेश होने की संभावना रहती है। धार्मिक ग्रंथों और वास्तु के जानकारों के अनुसार, इन नकारात्मक चीजों से बचने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि सुबह उठते ही अपनी हथेलियों के दर्शन करें या किसी देवी-देवता की शांत तस्वीर देखें। इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।  

वास्तु के अनुसार घर की घंटियां और विंड चाइम: जानें किस दिशा में लटकाना है सबसे शुभ

हवा के झोंकों के साथ जब घर में विंड चाइम या छोटी घंटियों की सुरीली आवाज गूंजती है, तो मन को एक अजीब सा सुकून मिलता है। लेकिन, क्या आपको पता है कि यह प्यारी सी आवाज सिर्फ सुनने में अच्छी नहीं लगती, बल्कि आपके जीवन से नकारात्मकता को दूर कर सुख-समृद्धि के द्वार भी खोल सकती है? वास्तु शास्त्र में ध्वनि तरंगों का बहुत महत्व है। सही दिशा में लगी विंड चाइम सोई हुई किस्मत को जगाने का काम करती है। वहीं, गलत दिशा में लगी घंटी मानसिक तनाव का कारण बन सकती है। दिशाओं का रखें खास ख्याल विंड चाइम खरीदते समय सबसे पहले उसकी दिशा और धातु पर ध्यान देना चाहिए। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, अगर आप पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा में विंड चाइम लगाना चाहते हैं, तो धातु से बनी विंड चाइम का चुनाव करें। यह दिशा बच्चों के करियर और सौभाग्य के लिए उत्तम मानी जाती है। वहीं, अगर आप घर की पूर्व या दक्षिण-पूर्व दिशा को सजाना चाहते हैं, तो लकड़ी या बांस से बनी विंड चाइम सबसे शुभ फल देती है। ऐसा माना जाता है कि लकड़ी का तत्व विकास और उन्नति का प्रतीक है। छड़ों की संख्या का जादुई अंक विंड चाइम में छड़ों  की संख्या का भी अपना महत्व है। घर में शांति और क्लेश दूर करने के लिए 7 या 8 छड़ों वाली विंड चाइम लगानी चाहिए। वहीं, अगर आप अपनी लोकप्रियता या सामाजिक दायरे को बढ़ाना चाहते हैं, तो 6 छड़ों वाली विंड चाइम को उत्तर-पश्चिम दिशा में लटकाना लाभकारी होता है। प्रवेश द्वार पर घंटी का महत्व सिर्फ विंड चाइम ही नहीं, घर के मुख्य द्वार पर छोटी पीतल की घंटी लटकाना भी सकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करता है। जब भी कोई दरवाजा खोलता है, तो घंटी की आवाज से घर की 'डेड एनर्जी' (रुकी हुई ऊर्जा) एक्टिव हो जाती है। यह आवाज घर में प्रवेश करने वाली नकारात्मक शक्तियों को बाहर ही रोक देती है। कहां न लगाएं विंड चाइम? वास्तु के अनुसार, कभी भी ऐसी जगह विंड चाइम न लगाएं, जहां उसके नीचे कोई बैठता हो या सोता हो। इसके अलावा, किचन या स्टोर रूम के अंधेरे कोनों में भी इसे लगाने से बचना चाहिए, क्योंकि वहां इसकी ऊर्जा का सही प्रवाह नहीं हो पाता।