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होलिका दहन की पूजा विधि: कौन-कौन सी वस्तुएँ चढ़ती हैं और प्रसाद घर लाना शुभ है या नहीं?

हर साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा के दिन होली का त्योहार मनाया जाता है. इस दिन पूरे देश रंग और गुलाल बिखरे नजर आते हैं. होली के दिन आपसी मतभेद भूलकर लोग एक दूसरे को रंग और गुलाल लगाते हैं. साथ ही एक दूसरे को लगे लगाते हैं. पूरा देश होली के पर्व का इंजार बेसब्र होकर करता है. वहीं हर साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा की रात को होलिका दहन का भी पर्व मनाया जाता है. रात को हालिका दहन के बाद ही सुबह रंगों की होली खेली जाती है. बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में होलिका दहन का पर्व मनाया जाता है. मान्यता है कि होलिका दहन की अग्नि में जीवन के सभी दुख और नकारात्मकता जलकर भस्म हो जाती है. फाल्गुन मास की पूर्णिमा की रात शुभ मुहूर्त में होलिका दहन किया जाता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि होलका दहन में क्या-क्या चीजें अर्पित की जाती हैं? साथ ही जानते हैं कि होलिका दहन का प्रसाद घर ला सकते हैं या नहीं होलिका दहन 2026 कब है? द्रिक पंचांग के अनुसार, इस बार फाल्गुन पूर्णिमा की तिथि की शुरुआत 02 मार्च 2026 की शाम को 05 बजकर 55 मिनट पर होगी. इस तिथि का समापन 03 मार्च की शाम 5 बजकर 07 मिनट तक रहेगी. ऐसे में होलिका दहन का पर्व 3 मार्च 2026 को मनाया जाएगा. 04 मार्च को रंगों की होली खेली जाएगी. होलिका दहन में क्या चीजें की जाती हैं अर्पित? पूजा के दौरान जलती हुई अग्नि यानी होलिका में नारियल, उपले, नई फसल, गेंहू, गुलाल, चावल, जौ, रोली, अक्षत, बताशे, फूल, हल्दी की गांठ और कपूर आदि पूजा सामग्री अर्पित की जाती है. साथ ही बुराई पर अच्छाई की जीत का आशीर्वाद मांगा जाता है. होलिका दहन का प्रसाद क्या है? जो चीजें होलिका में अर्पित की जाती हैं, वही होलिका दहन का प्रसाद होता है. इसके अलावा अंत में बची हुई होलिका की राख भी बेहद शुभ मानी जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, होलिका की राख को घर के मंदिर या तिजोरी में रखना चाहिए. साथ ही माथे पर लगाना चाहिए. इससे सेहत अच्छी रहती है. क्या होलिका दहन का प्रसाद घर ला सकते हैं? धार्मिक मान्यता के अनुसार, होलिका दहन का प्रसाद घर लाया जा सकता है. गेहूं, चने, नारियल, बताशे, नई फसल, चावल और जौ आदि प्रसाद को दोस्तों और परिवार वालों के बीच वितरित करना चाहिए. इससे नकारात्मकता दूर रहती है.

Holi 2026: कब है होलिका दहन और धुलेंडी? शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व की पूरी जानकारी

हिंदू धर्म में होली का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत, प्रेम और आपसी भाईचारे का प्रतीक माना जाता है. यह त्योहार दो दिन मनाया जाता है. पहले दिन होलिका दहन किया जाता है और दूसरे दिन धुलेंडी, जिसे रंगों वाली होली भी कहा जाता है. हर साल की तरह इस साल भी होली की तारीख को लेकर लोगों के मन में कंफ्यूजन रहता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि 2026 में होलिका दहन और रंगों वाली होली कब मनाई जाएगी, साथ ही जानेंगे इसका शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व. होलिका दहन और धुलेंडी की तारीख साल 2026 में पूर्णिमा तिथि और प्रदोष काल के संयोग के कारण होली की तिथियां इस प्रकार होंगी.     होलिका दहन: 3 मार्च 2026 (मंगलवार)     धुलेंडी (रंगों वाली होली): 4 मार्च 2026 (बुधवार) शुभ मुहूर्त और समय ज्योतिषीय गणना के अनुसार,     पूर्णिमा तिथि शुरू: 2 मार्च 2026, शाम 05:55 बजे से.     पूर्णिमा तिथि का समापन 3 मार्च 2026, शाम 05:07 बजे तक. शास्त्र सम्मत नियम है कि होलिका दहन हमेशा प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) में किया जाता है. चूंकि 3 मार्च को पूर्णिमा तिथि का प्रभाव रहेगा, इसलिए होलिका दहन 3 मार्च को ही मनाया जाएगा. इसके अगले सूर्योदय पर यानी 4 मार्च को रंगों वाली होली खेली जाएगी. होलिका दहन की पूजा विधि     तैयारी: दहन वाली जगह पर सूखी लकड़ी, घास और गोबर के उपले इकट्ठा करें.     पूजा सामग्री: रोली, अक्षत, फूल, कच्चा सूत, साबुत हल्दी, मूंग, बताशे और एक कलश जल साथ रखें.     विधि: होलिका के चारों ओर सात बार कच्चा सूत लपेटें और जल अर्पित करें. भगवान नरसिंह और भक्त प्रहलाद का ध्यान करते हुए फल, फूल और मिठाइयां चढ़ाएं.     अग्नि प्रज्वलन: शुभ मुहूर्त में होलिका में अग्नि लगाएं और नई फसल (जैसे गेहूं की बालियां) को उसकी लौ में सेकें. होली का महत्व होली केवल रंगों का खेल नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे धार्मिक और सामाजिक कारण छिपे हैं. यह पर्व भगवान विष्णु के अनन्य भक्त प्रहलाद की रक्षा और अहंकारी हिरण्यकश्यप की बहन होलिका के अंत की याद दिलाता है. यह दिन ऊंच-नीच और पुराने गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाने का है. होली का त्योहार वसंत ऋतु के आगमन और सर्दियों की विदाई का भी संदेश देता है.