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CBI का शिकंजा कसा! IDFC बैंक फ्रॉड केस में वरिष्ठ IAS अधिकारी के आवास पर रेड

 पंचकूला IDFC बैंक के FD घोटाले मामले में वरिष्ठ IAS अधिकारी के आवास पर रेड जारी है। सीबीआई कि तरफ से मामले में चार्जशीट पेश की जा चुकी है। CBI अग्रिम कार्रवाई को अंजाम दे रही है। मामले में मनी ट्रेल व IAS अधिकारीयों कि भूमिका की जांच हो रही है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में हुए 657 करोड़ रुपये के फंड गबन मामले में शुक्रवार को दो अलग-अलग चार्जशीट दाखिल की थी। यह मामले हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) से जुड़े हैं। सीबीआई ने हरियाणा सरकार के फंड के दुरुपयोग से संबंधित चार्जशीट पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत में दाखिल की। इस मामले में चंडीगढ़ के रियल एस्टेट इन्वेस्टर विक्रम वधवा और सावन ज्वेलर्स के मालिक राजन सिंह कदोदिया आरोपित बनाया गया, जिन्हें अपराध से अर्जित धन का लाभार्थी बताया गया। पहले सीबीआई 15 आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है इससे पहले सीबीआई 15 आरोपितों और कंपनियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिनमें तीन सरकारी कर्मचारी, छह बैंक अधिकारी, दो कंपनियां और चार निजी व्यक्ति शामिल हैं। वहीं, चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड से जुड़े मामले में सीबीआई ने चंडीगढ़ की विशेष अदालत में पहली चार्जशीट दाखिल की है। इसमें सात आरोपियों को नामजद किया गया है, जिनमें पांच बैंक अधिकारी, सीएससीएल का एक अधिकारी और एक निजी व्यक्ति शामिल है। जांच के दौरान पाया गया कि 250 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सावन ज्वेलर्स के द्वारा रिभव ऋषि, अभय कुमार, अभिषेक सिंगला, स्वाति सिंगला व अन्य आरोपितों की विभिन्न कंपनियों से प्राप्त की है। इन कंपनियों/फर्मों में पैसा सरकारी खातों से गैर कानूनी तरीके से ट्रांसफर किए गए थे। प्रारंभिक जांच में क्या सामने आया? प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि सावन ज्वेलर्स के मालिक राजन के द्वारा मुख्य आरोपितों के लिए कैश कन्वर्जन का काम किया गया व इसके लिए भारी कमीशन प्राप्त किया। आरोपित द्वारा इन फर्मों/कंपनियों के नाम सोने के आइटम्स बेचे हुए दिखाए गए। आरोपित राजन ने इस मामले में धोखाधड़ी की शुरुआत से ही षड्यंत्र रचने में अहम भूमिका निभाई तथा पूर्व योजना के तहत अपराध को अंजाम देने में सक्रिय योगदान दिया। जांच में यह भी सामने आया था कि सावन ज्वेलर्स को अनधिकृत तरीके से पैसा तीन फर्मों से मिला है। वहीं विक्रम वधवा ने हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ निगम के साथ साथ चंडीगढ़-पंचकूला के दो निजी स्कूलों के बैंक खातों से भी करोड़ों का गबन किया। ईडी के अनुसार सरकारी फंड की हेराफेरी से जुड़े इस मामले में विक्रम वाधवा के निजी खाते में 70 करोड़ रुपये से अधिक की रकम पहुंची थी, जिसे बाद में अलग-अलग कंपनियों और संपत्तियों में लगाया गया। उस पर रिभव ऋषि, अभय कुमार, बैंक अधिकारियों व कुछ सरकारी कर्मचारियों के साथ मिलकर सरकारी धन की हेराफेरी का आरोप है। वाधवा ने अवैध रकम को छिपाने, अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने और उसे वैध दिखाने में अहम भूमिका निभाई। गबन की रकम को कई शेल कंपनियों के जरिए घुमाया। कौनसी कंपनियों के नाम? इनमें कैपको फिनटेक सर्विसेज, स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स, आरएस ट्रेडर्स और एसआरआर प्लानिंग गुरुस प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों के नाम हैं। एजेंसी के अनुसार इनके खातों में सरकारी विभागों से पैसे ट्रांसफर किए गए। गौरतलब है कि सीबीआई ने हरियाणा सरकार के आठ विभागों से जुड़े मामले को राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से अपने हाथ में लिया था। वहीं चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड और क्रेस्ट चंडीगढ़ से जुड़े दो मामलों की जांच आर्थिक अपराध थाना, चंडीगढ़ से सीबीआई को सौंपी गई थी। जांच एजेंसी के मुताबिक हरियाणा सरकार से जुड़े मामले में करीब 504 करोड़ रुपये तथा चंडीगढ़ प्रशासन से जुड़े मामले में 153 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। सीबीआई ने कहा कि मामलों की जांच जारी है और आने वाले समय में और भी चार्जशीट दाखिल की जा सकती हैं।  

CBI ने कसी शिकंजा: IDFC बैंक घोटाले में 9 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल, हरियाणा-चंडीगढ़ कनेक्शन

चंडीगढ़  केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) के फंड के दुरुपयोग से जुड़े मामलों में बड़ी कार्रवाई की। सीबीआई ने सरकारी अधिकारियों और आईडीएफसी बैंक के कर्मचारियों सहित कुल 9 आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालतों में दो अलग-अलग चार्जशीट दाखिल की हैं। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। सीबीआई अधिकारी ने बताया कि हरियाणा सरकार से जुड़े मामले में अवैध बैंक लेन-देन के कारण लगभग 504 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ, जबकि चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश से जुड़े मामले में करीब 153 करोड़ रुपए की हानि हुई। सीबीआई ने यह भी कहा कि इन मामलों में आगे और भी चार्जशीट दाखिल की जा सकती हैं। चार्जशीट में क्या? सीबीआई के बयान में कहा गया है कि चार्जशीट में आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी और धोखाधड़ी के आरोप शामिल हैं। इसके अलावा, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी आरोप लगाए गए हैं। सीबीआई ने बताया कि हरियाणा सरकार से जुड़े मामले की चार्जशीट पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में दाखिल की गई है। इस मामले में दो निजी व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है, जिन्हें कथित अपराध से प्राप्त धन का लाभार्थी बताया गया है। सीबीआई की यह दूसरी चार्जशीट यह हरियाणा सरकार से जुड़े मामले में दूसरी चार्जशीट है। इससे पहले सीबीआई 15 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिनमें तीन सरकारी कर्मचारी, छह बैंक अधिकारी, दो कंपनियां और चार निजी व्यक्ति शामिल हैं। सीबीआई ने बताया कि चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) से जुड़े मामले की चार्जशीट चंडीगढ़ स्थित सीबीआई विशेष अदालत में दाखिल की गई है। इस मामले में कुल सात आरोपियों को नामजद किया गया है, जिनमें पांच बैंक अधिकारी, सीएससीएल का एक अधिकारी और एक निजी व्यक्ति शामिल है। यह इस मामले में पहली चार्जशीट है। सीबीआई ने की थी छह स्थानों पर छापेमारी सीबीआई ने हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से आठ विभागों से जुड़े एक मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। इसके अलावा, चंडीगढ़ के आर्थिक अपराध पुलिस स्टेशन से चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड और क्रेस्ट चंडीगढ़ से जुड़े दो मामलों की जांच भी सीबीआई को सौंपी गई थी। पिछले सप्ताह सीबीआई ने इन दोनों मामलों के सिलसिले में चंडीगढ़, पंचकूला और दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में छह स्थानों पर छापेमारी की थी। किनके ठिकानों पर तलाशी? जिन परिसरों की तलाशी ली गई, उनमें हरियाणा कैडर के कुछ सरकारी अधिकारियों के आवास और विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक के ठिकाने शामिल थे। सीबीआई के अनुसार, यह कार्रवाई कथित वित्तीय अनियमितताओं और अपराध से अर्जित धन की प्राप्ति से जुड़े तथ्यों की जांच के लिए की गई थी। जांच में क्या आया सामने? सीबीआई ने बताया कि जांच के दौरान यह सामने आया कि कुछ सरकारी अधिकारियों ने बैंक कर्मचारियों के साथ मिलकर खातों को खुलवाने, धनराशि ट्रांसफर करने और बाद में उसे दूसरी जगह भेजने में मदद की थी। एजेंसी के अनुसार, सरकारी अधिकारियों और बैंक कर्मचारियों की कथित मिलीभगत के जरिए धन का दुरुपयोग किया गया, जिसकी जांच अभी भी जारी है।