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झारखंड की हेमंत सरकार 20 हजार करोड़ का निवेश लाकर बढ़ाएगी रोजगार

रांची. झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में मंगलवार को द्वितीय पाली में श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग व उद्योग विभाग के कटौती प्रस्ताव पर चर्चा हुई। डुमरी विधानसभा से झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के विधायक जयराम कुमार महतो ने सदन में उपरोक्त विभाग के बजट में कटौती का प्रस्ताव लाया था। सदन में चर्चा के बाद श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग के 1168.73 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हो गया। सरकार के उत्तर में विभागीय मंत्री संजय प्रसाद यादव ने कहा कि रोजगार, नौकरी व श्रमिकों के हित में हेमंत सोरेन की सरकार बेहतर कार्य कर रही है। हर हाथ को काम, हर चेहरे पर मुस्कान, हेमंत सोरेन की सरकार का संकल्प है। उसे पूरा करने के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं। उनकी सरकार राज्य में 20 हजार करोड़ का निवेश ला रही है, ताकि रोजगार को बढ़ावा मिल सके। राज्य में औद्योगिक विकास पर भी काम हो रहा है, ताकि यहां के लोगों को रोजगार मिल सके। सरकार ने गिनाए काम मंत्री संजय प्रसाद यादव ने कहा कि चालू वित्तीय वर्ष में जनवरी तक तीन लाख 89 हजार 568 निर्माण श्रमिकों का निबंधन किया गया है। झारखंड भवन व अन्य बोर्ड के माध्यम से 277582 निबंधित लाभुकों को विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित करने के लिए कुल 167.93 करोड़ रुपये का लाभ वितरित किया गया है। श्रमाधान पोर्टल पर अब तक निबंधित कुल असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की संख्या 15 लाख 57 हजार 373 है, जिन्हें विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित करने के लिए 31 जनवरी 2026 तक कुल 83919 श्रमिकों को कुल 58 .19 करोड़ रुपये के समतुल्य योजनाओं का लाभ दिया गया है। बाल श्रमिकों की विमुक्ति के लिए अभियान चलाया जा रहा है और अब तक 80 बाल श्रमिकों को विमुक्त कराया गया है। इनमें से 22 बाल श्रमिकों का नामांकन विभिन्न विद्यालयों में कराया गया है, शेष के नामांकन की कार्रवाई चल रही है। उनके माता-पिता को विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में 273 प्रवासी मजदूरों के आश्रितों को उनकी मृत्यु के बाद 225.50 लाख रुपये की सहायता राशि दी गई है। सामान्य मृत्यु की स्थिति में 219 श्रमिकों के पार्थिव शरीर को पैतृक आवास तक लाने के लिए 106.55 लाख रुपये आश्रितों को सहायता दी गई है। चालू वित्तीय वर्ष में विदेश में दुर्घटना में छह मजदूर की मृत्यु होने पर उनके आश्रित को विभाग ने 30 लाख रुपये का अनुदान दिया। बेरोजगार युवकों को निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठानों में रोजगार का अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 302 भर्ती कैंपों एवं 95 रोजगार मेलों का आयोजन कर 14748 युवाओं को रोजगार के लिए चयन किया गया। सीएम पर टिप्पणी को संसदीय कार्य मंत्री ने बताया गलत कटौती प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विधायक जयराम महतो ने कहा कि धनबाद की एक सभा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा था कि अगर निजी संस्थान नौकरी नहीं देते हैं, तो लोग उसपर कब्जा कर लें। जयराम महतो ने कहा कि एक विधायक कहें तो शोभा देता है, लेकिन मुख्यमंत्री का पद एक शक्तिशाली पद है। उन्हें तमाम अधिकार प्राप्त है। उनका यह संबोधन उनके पद की गरिमा के विपरीत है। इसपर संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि मुख्यमंत्री से संबंधित इस तरह का कोई सबूत जयराम महतो के पास नहीं है, इसलिए इसे सदन की कार्यवाही से हटाया जाए। बाद में जयराम महतो ने इंटरनेट मीडिया से संबंधित फुटेज व छपी खबरों से संबंधित कतरन उन्हें मोबाइल पर भेजने का दावा किया। इन विधायकों ने भी रखी अपनी बातें कटौती प्रस्ताव के पक्ष में विधायक आलोक कुमार चौरसिया, जनार्दन पासवान, रागिनी सिंह व सरयू राय ने अपनी बात रखी। वहीं, कटौती प्रस्ताव के विपक्ष में व सरकार के पक्ष में विधायक दशरथ गगराई, प्रदीप यादव, सुरेश पासवान, अरुप चटर्जी, सुदीप गुड़िया व जगत मांझी ने अपनी बात रखी। विधायक सुदीप गुड़िया ने खूंटी, रनिया कोरिडोर को विकसित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि पर्यटन के साथ-साथ रोजगार भी बढ़ेगा। सरयू राय ने कहा कि यहां उद्योगों के विकास के लिए पर्याप्त संसाधन है। यहां के खनिज से दूसरे राज्यों में उद्योग-धंधे चल रहे हैं। सरकार को इसपर ध्यान देना चाहिए। उद्योग लगने से यहां के श्रमिकों को यहीं पर रोजगार मिलेगा। विधायक प्रदीप यादव ने भी कहा कि नए उद्योगों को लाकर सरकार झारखंड की बेरोजगारी दूर कर सकती है।

उद्योगों की रफ्तार बढ़ी: राजस्थान में 7.05 लाख करोड़ के निवेश पर जमीन पर काम शुरू

जयपुर राजस्थान में निवेश परिदृश्य अब इरादों से हकीकत की ओर बढ़ रहा है। अब तक हुए 3,362 एमओयू पर ज़मीनी स्तर पर काम शुरू हो गया है, जिनमें 7.05 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव शामिल हैं। ये निवेश राज्य के 20 प्रमुख सेक्टरों में किए जा रहे हैं। ऊर्जा क्षेत्र निवेश में सबसे आगे है, जिसमें 432 एमओयू के माध्यम से 5.60 लाख करोड़ रुपये से अधिक के प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इनमें अक्षय ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़े बड़े उपक्रम शामिल हैं, जो राजस्थान को देश का अग्रणी क्लीन एनर्जी हब बनाने की दिशा में हैं। सेक्टर वाइज निवेश का ब्योरा: उद्योग विभाग ने 1,182 एमओयू के तहत 57,319 करोड़ रुपये के निवेश आकर्षित किए हैं, जो विनिर्माण और एमएसएमई सेक्टर में निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाते हैं। शहरी विकास एवं आवासन क्षेत्र में भी 306 एमओयू के तहत 26,826 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट क्रियान्वयन के चरण में हैं, जिनका फोकस शहरी विस्तार, सस्ती आवास योजनाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर है। इसके अलावा, खनन क्षेत्र में 22 एमओयू के माध्यम से 28,092 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं। पर्यटन क्षेत्र में 267 एमओयू के तहत 8,907 करोड़ रुपये के निवेश से हेरिटेज, इको और एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा रहा है। कृषि क्षेत्र में 663 एमओयू से 7,741 करोड़ रुपये के निवेश के जरिए एग्री-वैल्यू चेन और फूड प्रोसेसिंग को मज़बूती दी जा रही है। चिकित्सा और तकनीकी शिक्षा में भी 5,500 करोड़ रुपये से अधिक के प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं, जो स्वास्थ्य और कौशल विकास के बुनियादी ढांचे को सशक्त करेंगे। इसके साथ ही, एविएशन, आयुष, पशुपालन, आईटी और खेल जैसे उभरते क्षेत्रों में भी नई नीतियों के तहत ठोस प्रगति हो रही है। सभी एमओयू की मॉनिटरिंग के लिए एक समर्पित तंत्र बनाया गया है ताकि तय समयसीमा में इन निवेशों को धरातल पर उतारा जा सके। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह राजस्थान की आर्थिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। राज्य ने निवेश घोषणाओं और वास्तविक कार्यान्वयन के बीच की खाई को पाट दिया है। 7.05 लाख करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स पर कार्य प्रगति पर होने के साथ, राजस्थान देश के सबसे तेज़ी से बढ़ते निवेश गंतव्यों में शामिल हो रहा है- अक्षय ऊर्जा, विनिर्माण उत्कृष्टता और प्रगतिशील नीतियों के बल पर। गौरतलब है कि दिसंबर 2024 में आयोजित इन्वेस्ट राजस्थान समिट (9-11 दिसंबर) के दौरान राज्य सरकार ने रिकॉर्ड 35 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर हस्ताक्षर किए थे। 12 नई नीतियां लाने की तैयारी निवेश प्रस्तावों को रफ्तार देने के लिए सरकार इसी साल 12 नई नीतियां भी लाने की तैयारी कर चुकी है। इनमें से कुछ नीतियों के ड्रॉफ्ट कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजे जा चुके हैं। आने वाली नई नीतियां इस प्रकार हैं: 1. एग्रीकल्चर एवं फूड प्रोसेसिंग: किसानों की आय बढ़ाने और एग्रो-बेस्ड इंडस्ट्री को प्रोत्साहन देने पर जोर। 2. नई औद्योगिक नीति: मैन्युफैक्चरिंग को सशक्त बनाकर बड़े निवेश को आकर्षित करने की योजना। 3. एविएशन और लगिंग: राजस्थान को एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस का हब बनाना, ड्रोन्स और स्पेयर पार्ट्स के लिए तैयार करेंगी नीति। 4. ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर: बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए राजस्थान को नया ग्लोबल हब बनाना। मल्टीनैशनल कंपनियों के आने से टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और सपोर्ट सेंटर खुल सकेंगे। 5. नई टूरिज्म नीति: राजस्थान की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विविधता को नए रूप में पेश करने की कोशिश। हेरिटेज, ईको और ग्रामीण टूरिज्म को प्राथमिकता। 6. ग्रीन ग्रोथ क्रेडिट नीति: पर्यावरण अनुकूल प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा, जिसमें सोलर एनर्जी, ग्रीन एनर्जी और हरित उद्योग शामिल होंगे। 7. स्पोर्ट्स नीति: नई प्रतिभाओं के लिए अवसर, विश्वस्तरीय ढांचा का विकास। प्रशिक्षकों और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए बेहतर अवसर पर फोकस। 8. एफएमसीजी नीति: मैन्युफैक्चरिंग और कृषि की बेहतर उपयोगिता सुनिश्चित कर एफएमसीजी क्षेत्र को बढ़ावा। छोटे और मध्यम उद्योगों की भागीदारी की दिशा में कदम। 9. आईटी आउटसोर्सिंग और फॉरेस्ट नीति: ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी और युवाओं को रोजगार बढ़ाने और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को सशक्त बनाने की दिशा। 10. ट्रेड प्रमोशन नीति: व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ाने और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए योजना। 11. सेमीकंडक्टर पॉलिसी: टेक्नोलॉजी हार्डवेयर निवेश के लिए नई सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग नीति तैयार की जाएगी। 12. ड्रोन और एयरो स्पेस पॉलिसी: एयरोस्पेस उद्योगों में निवेश को नई दिशा देने। राज्य में हार्ड-कोर मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस हब स्थापित करने पर फोकस।  

छत्तीसगढ़ टेकस्टार्ट 2025 : नवाचार और निवेश का नया अध्याय

4 नवम्बर को होगा आयोजन – स्टार्टअप्स और निवेशकों के लिए बड़ा अवसर रायपुर, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग, छत्तीसगढ़ द्वारा 4 नवम्बर को छत्तीसगढ़ टेकस्टार्ट 2025 का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन राज्य के स्टार्टअप और टेक्नोलॉजी क्षेत्र को नई दिशा देने के साथ-साथ उसे राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने का प्रयास है। छत्तीसगढ़ टेकस्टार्ट 2025 में निवेशक, उद्योग जगत के विशेषज्ञ और युवा उद्यमी एक ही मंच पर जुटेंगे। आयोजन का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ को आईटी, आईटीईएस और तकनीकी उद्यमिता का अग्रणी केंद्र बनाना है। यह आयोजन नए निवेश को गति देगा, स्टार्टअप्स और उद्योग जगत के बीच साझेदारी के अवसर बढ़ाएगा, तथा डिजिटल प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में राज्य की उभरती क्षमता को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करेगा। आयोजन में सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) और MeitY स्टार्टअप हब जैसे राष्ट्रीय संस्थान भी भाग लेंगे। कार्यक्रम में नई तकनीक, नवाचार नीतियों और वैश्विक सहयोग के अवसरों पर चर्चा की जाएगी। राज्य की औद्योगिक विकास नीति 2024–30 के तहत स्टार्टअप्स और आईटी/आईटीईएस निवेशकों के लिए सीड फंडिंग, संचालन सहायता और इनक्यूबेशन सपोर्ट जैसे अनेक प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। इस अवसर पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ साझेदारी समझौते भी किए जाएंगे ताकि छत्तीसगढ़ के स्टार्टअप्स को मार्गदर्शन, नवाचार और वैश्विक बाजारों तक पहुँच प्राप्त हो सके। छत्तीसगढ़ टेकस्टार्ट 2025 राज्य को मध्य भारत का प्रमुख नवाचार और तकनीकी केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह आयोजन राज्य में एक मजबूत, नवाचार-प्रेरित और वैश्विक स्तर पर जुड़ा हुआ स्टार्टअप वातावरण तैयार करेगा। “4 नवम्बर को आयोजित होने जा रहा ‘छत्तीसगढ़ टेकस्टार्ट 2025’ राज्य में नवाचार, प्रौद्योगिकी और उद्यमिता के नए युग की शुरुआत करेगा। यह आयोजन न केवल छत्तीसगढ़ के युवाओं में स्टार्टअप संस्कृति और तकनीकी उद्यमिता को प्रोत्साहित करेगा, बल्कि राज्य को ‘न्यू इंडिया’ के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन मिशन में एक प्रमुख भागीदार के रूप में स्थापित करेगा। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘स्टार्टअप इंडिया’ अभियानों की भावना के अनुरूप है, जो आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में नवाचार और कौशल को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। छत्तीसगढ़ सरकार का लक्ष्य है कि हर युवा विचार एक अवसर बने, और हर नवाचार राज्य की प्रगति में योगदान दे।”- मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय