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ईरानी गैंग के 14 आरोपियों को फर्जी जमानत पर रिहा किया गया, मृतकों के नाम पर जमानतदार बने लोग

भोपाल  भोपाल में पुलिस ने कड़ी मशक्कत और लंबी प्लानिंग के बाद 27 और 28 दिसंबर की दरमियानी रात भोपाल के अमन कॉलोनी में बने ईरानी डेरे पर दबिश दी थी. यहां से पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया था, क्योंकि जैसे ही पुलिस की टीम ईरानी डेरे में पहुंची थी तो यहां पुलिस के साथ पथराव और मारपीट की घटना सामने आई थी. पुलिस को इस बात की जानकारी मिली थी कि इस ईरानी डेरे में देश के अलग-अलग हिस्सों के बदमाश छिपे थे. जिसके बाद पुलिस ने यहां कार्रवाई थी. यहां से 22 पुरुषों और 10 महिलाओं को गिरफ्तार किया गया था. लेकिन हैरानी वाली बात यह है कि यह 14 सदस्य जमानत पर रिहा हो चुके हैं.  जमानत लेने में दिखा फर्जीवाड़ा  बताया जा रहा है कि 5 जनवरी को आरोपियों की तरफ से कोर्ट में जमानत की याचिका लगाई गई थी. लेकिन जमानत लेने में कोर्ट में ईरानियों का फर्जीवाड़ा दिखा है, क्योंकि फर्जी जमानतदारों को कोर्ट में खड़ा किया गया था, इनमें से 2 जमानतदार तो ऐसे थे, जिनकी मौत हो चुकी है. जमानत के लिए जमील रहमान नाम के व्यक्ति को कोर्ट में खड़ा किया गया था, उसकी संपत्ति रखवाई थी, लेकिन जमील रहमान की दो साल पहले ही हो मौत हो चुकी है, इसी तरह से दूसरे फर्जी जमानतदार को भी खड़ा किया गया था. जहां 5 जनवरी को 10 और 6 जनवरी को 4 आरोपियों को जमानत मिली थी, इस तरह से कुल 14 आरोपियों को पूरे मामले में जमानत मिल चुकी है.  ऐसे में इस मामले ने अब पुलिस और अभियोजन की कार्यप्रणाली को भी कटखरे में खड़ा कर दिया है कि आखिर फर्जी जमानतदारों के आधार पर जमानत कैसे ली गई. इस मामले में सख्ती क्यों नहीं बरती गई. पुलिस फिलहाल जमानत निरस्त करवाने के लिए तैयारी करने की बात कह रही है.  महीनों की प्लानिंग के बाद रात 4 बजे दी थी दबिश 27 और 28 दिसंबर की दरमियानी रात करीब चार बजे पुलिस ने अमन कॉलोनी स्थित ईरानी डेरे पर दबिश दी थी। पुलिस को सूचना मिली थी कि यहां देश के विभिन्न हिस्सों में वांछित बदमाश छिपे हुए हैं। महीनों की निगरानी और रणनीति के बाद की गई इस कार्रवाई के दौरान पुलिस पर पथराव और मारपीट की गई। हालात बेकाबू होने के बावजूद पुलिस ने मौके से 22 पुरुषों और 10 महिलाओं को हिरासत में लिया। कई शहरों और राज्यों में चोरी, लूट और ठगी में शामिल पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ बलवा, शासकीय कार्य में बाधा, मारपीट, तोड़फोड़ और संगठित अपराध जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, कई आरोपी पहले भी दूसरे शहरों और राज्यों में चोरी, लूट और ठगी की वारदातों में संलिप्त रह चुके हैं। लगातार दो दिन फर्जी जमानतदार पेश 5 जनवरी को 10 आरोपियों की ओर से कोर्ट में जमानत याचिका दायर की गई। जमानत के लिए जमील रहमान खान नामक व्यक्ति को जमानतदार बताया गया और उसके नाम के भूमि संबंधी दस्तावेज कोर्ट में पेश किए गए। बाद में जांच में सामने आया कि जमील रहमान खान की दो साल पहले ही मौत हो चुकी है। इसके बावजूद किसी अन्य व्यक्ति को उसी नाम से कोर्ट में पेश कर जमानत हासिल कर ली गई। इसके अगले दिन 6 जनवरी को चार और आरोपियों को भी दूसरे फर्जी जमानतदार के जरिए राहत मिल गई। इस तरह कुल 14 आरोपी जेल से बाहर आ गए। इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस और अभियोजन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना अहम होगा कि फर्जी जमानतदारों के इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है और जिम्मेदारों पर कब शिकंजा कसा जाता है। भोपाल में सक्रिए ईरानी गैंग  भोपाल के अमन कॉलोनी के ईरानी डेरे के सदस्य कई राज्यों में सक्रिए माने जाते हैं, जो मारपीट, तोड़फोड़, संगठित अपराध, लूट, ठगी, चोरी समेत कई घटनाओं में संलिप्त पाए जा चुके हैं. वहीं यहां के कई सदस्यों पर कुख्यात अपराधों के मामले दर्ज हैं. इसमें राजू ईरानी का नाम सबसे ऊपर है, जो ईरानी गैंग का भोपाल में मुखिया माना जाता है. ऐसे में आरोपियों को मिली जमानत के बाद इस मामले में कई सवाल खड़े हो रहे हैं.   जमानत के साथ कोर्ट ने लगाईं सख्त शर्तें कोर्ट ने जमानत देते समय कड़ी शर्तें लगाई हैं। आदेश के अनुसार, सभी आरोपियों को हर पेशी पर अनिवार्य रूप से न्यायालय में उपस्थित रहना होगा। इसके साथ ही उन्हें साक्ष्यों से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न करने और गवाहों को प्रभावित न करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि आरोपियों द्वारा जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया गया, तो उनकी जमानत निरस्त की जा सकती है। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, अमन कॉलोनी क्षेत्र के ईरानी डेरे से कई अपराधों में शामिल बदमाशों के खिलाफ छापामार कारर्वाई करते हुए गिरफ्तारी की गई थी। सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया था। फिलहाल, पुलिस और अभियोजन पक्ष की आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। ईरानी डेरा बना कुख्यात अंतर्राज्यीय गिरोहों का अड्डा भोपाल पुलिस की जांच में बड़ी खुलासा हुआ है कि ईरानी डेरे में एक नहीं बल्कि 6 से अधिक ईरानी गैंग सक्रिय पाई गई हैं। इन गैंग चोरी, ठगी, नकली सोना खपाना, लूट और प्रॉपर्टी कब्जाने जैसे अपराधों में शामिल हैं। हर गैंग का अलग लीडर है। सभी गैंग का मुख्य सरगना राजू ईरानी बताया जा रहा है, जो फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। जांच में काला ईरानी का नाम प्रॉपर्टी कारोबार में सामने आया है। निशातपुरा के जनता नगर कॉलोनी में प्लॉट हेरफेर कर बेचने के आरोप लगे हैं। करोड़ों की संपत्ति और काला ईरानी के करीबी रहीम की भी पुलिस जांच कर रही है। पुलिस दबिश में बड़ी संख्या में मोबाइल, लैपटॉप, सीपीयू और पैनड्राइव जब्त किए गए है। आशंका है कि इन डिवाइस से चोरी के मोबाइल का सिक्योरिटी लॉक तोड़ा जाता था।  घरों से महीनों गायब रहते हैं गिरोह के सदस्य ईरानी डेरे में रहने वाले अपराधी चोरी, लूट, ठगी जैसी वारदातों के लिए महीनों कबीले से दूर दूसरे शहर और राज्यों में रहते … Read more

ईरानी गैंग का आतंक: भोपाल में चोरी, लूट और प्रॉपर्टी कब्जाने के मामलों में सरगना राजू का नाम सामने

भोपाल राजधानी भोपाल में पुलिस की एक सटीक कार्रवाई ने ऐसा भूचाल ला दिया है कि असर सिर्फ शहर तक सीमित नहीं रहा. ईरानी डेरे पर हुई कार्रवाई के बाद अब देश के कम से कम 6 राज्यों की पुलिस अलर्ट मोड पर है. वजह साफ है जांच में सामने आया है कि ईरानी गैंग से जुड़े कई लोग अलग-अलग राज्यों में चेन स्नेचिंग, ठगी और अन्य आपराधिक वारदातों में शामिल रहे हैं. भोपाल के ईरानी डेरे में एक नहीं 6 से अधिक गैंग सक्रिय हैं। इस बात का खुलासा पुलिस की अब तक की जांच में हुआ है। इन सभी गैंग में कई दर्जन गुर्गे शामिल हैं। सभी गैंग अपने-अपने तरीकों में माहिर हैं। इन सभी गैंग के लीडर्स अलग-अलग हैं। ईरानी डेरा में छुपा है डर, दहशत और रहस्य भोपाल के अमन कॉलोनी इलाके में स्थित ईरानी डेरा लंबे समय से चर्चा में रहा है. कहा जाता है कि एक समय ऐसा था जब इस डेरे में जाने से पुलिस भी कतराती थी. 12 राज्यों में खौफ का ठिकाना बताए जाने वाले इस डेरे को अपराधियों की सुरक्षित पनाहगाह तक कहा गया. लेकिन हालिया कार्रवाई के बाद पहली बार इस डेरे के भीतर की तस्वीरें और आवाजें सामने आई हैं. पुलिस की कार्रवाई और संपत्तियों की जांच पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस गैंग के खिलाफ कार्रवाई के बाद भोपाल में चेन स्नेचिंग और छोटी आपराधिक घटनाओं में साफ गिरावट आई है. अब पुलिस का फोकस सिर्फ गिरफ्तारी पर नहीं, बल्कि ईरानी गैंग से जुड़े लोगों की संपत्तियों की जांच पर भी है. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन संपत्तियों का स्रोत क्या है और कहीं ये अवैध कमाई से तो नहीं बनाई गईं. अधिकारियों का कहना है कि अगर संपत्तियों में गड़बड़ी पाई गई, तो उन पर भी कानूनी शिकंजा कसा जाएगा. पुलिस को ईरानी डेरे से दबिश में बड़ी संख्या में मोबाइल, लैपटॉप, सीपीयू, पैनड्राइव आदि मिले हैं। इन सभी का परीक्षण कराया जा रहा है। माना जा रहा है कि इन डिवाइस का इस्तेमाल कर ईरानी चोरी के मोबाइल का सिक्योरिटी लॉक तोड़ने का काम करते थे। काला ईरानी के काले कारोबार पर नजरें पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि काला ईरानी निशातपुरा इलाके में लंबे समय से प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़ा है। जनता नगर कॉलोनी में उसने कई प्लॉटों को हेरफेर कर बेचा है। काला के करीबी रहीम पर भी पुलिस की नजरें हैं। करोड़ों की संपत्ति के असामी बन चुके काले ईरानी पुलिस बारीकी से तस्दीक करा रही है। फरार आरोपियों की तलाश में स्पेशल टीमें पुलिस ने इस मामले में कई विशेष टीमें बनाई हैं, जो तकनीकी और जमीनी स्तर पर लगातार काम कर रही हैं. अलग-अलग राज्यों में इस गैंग के सदस्यों के खिलाफ वारंट जारी हो चुके हैं. पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चाही मिश्र का साफ कहना है कि संगठित अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी और किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा. वारदातों के लिए महीनों का सफर ईरानी डेरे में रहने वाले अपराधी चोरी, लूट, ठगी जैसी वारदातों के लिए महीनों कबीले से दूर दूसरे शहर और राज्यों में रहते हैं। इसे सफर में होना कहा जाता है। इस दौरान कबीले के युवक आपराधिक वारदातों को अंजाम देते हैं। पकड़े जाने पर भी माल को सुरक्षित कबीले तक पहुंचाने के लिए दो युवक होते हैं। सफर में जाने वाले युवकों के गिरोह के साथ हर समय दो युवक ऐसे होते हैं जो वारदात में सीधे तौर पर शामिल नहीं होते, लेकिन घटना के बाद मिले माल को लेकर सुरक्षित कबीले तक लाने की जिम्मेदारी इनकी होती है। इसके लिए कई बार आरोपी बाय रोड लग्जरी कार और बाइक से सैकड़ों किलोमीटर तक का सफर तय करते हैं। रिश्तेदारी का भी मिलता है फायदा जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि गैंग के कई सदस्य आपस में रिश्तेदार हैं। इनके रिश्ते महाराष्ट्र और राजस्थान में बसे परिवारों से जुड़े हुए हैं, जिसकी वजह से वहां इनका नेटवर्क मजबूत बना रहा। यही कारण है कि यह गैंग दिल्ली, मुंबई, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश जैसे कई राज्यों में बेखौफ होकर वारदात करता रहा।