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सीएम विष्णु देव साय ने जगन्नाथ मंदिर में टेका माथा, प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय  आज राजधानी रायपुर स्थित जगन्नाथ मंदिर पहुँचकर भगवान जगन्नाथ महाप्रभु की भव्य महाआरती में शामिल हुए और विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के जीवन में सुख, समृद्धि, शांति और निरंतर प्रगति की मंगलकामना की। इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि और श्रद्धालुजन उपस्थित थे।

जमशेदपुर में 100 करोड़ से बनने वाले श्री जगन्नाथ मंदिर का राष्ट्रपति 26 को करेंगी शिलान्यास

जमशेदपुर. श्री जगन्नाथ स्पिरिचुअल एंड कल्चर चैरिटेबल सेंटर की ओर से मरीन ड्राइव क्षेत्र में करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से भव्य श्री जगन्नाथ मंदिर का निर्माण किया जाएगा। इस मंदिर का शिलान्यास 26 फरवरी को देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा किया जाएगा। उक्त जानकारी ट्रस्ट के चेयरमैन सह आरसीबी ग्रुप इंटरनेशनल के प्रबंध निदेशक एसके बेहरा ने आयोजन स्थल पर मंगलवार दोपहर प्रेस वार्ता में दी। उन्होंने बताया कि यह भव्य मंदिर लगभग ढाई एकड़ भूमि पर बनेगा। इसमें डेढ़ एकड़ क्षेत्र में मुख्य मंदिर परिसर विकसित किया जाएगा, जबकि एक एकड़ भूमि पर आध्यात्मिक केंद्र का निर्माण होगा। मंदिर की संरचना उड़ीसा के श्री जगन्नाथ मंदिर, पुरी की तर्ज पर की जाएगी, जिसमें भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा सहित सभी देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित होंगी। उन्होंने बताया कि मंदिर निर्माण कार्य लगभग चार वर्षों में पूर्ण होगा, जबकि आध्यात्मिक केंद्र दो वर्षों में तैयार हो जाएगा। आध्यात्मिक केंद्र का मुख्य उद्देश्य युवाओं का सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास करना है। इसके तहत गीता और भागवत जैसे धार्मिक ग्रंथों के माध्यम से बच्चों और युवाओं को जीवन मूल्यों की शिक्षा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस मंदिर से 200 से 250 किलोमीटर के दायरे में स्थित विभिन्न शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को यहां 25-15 दिनों मर आमंत्रित किया जाएगा, ताकि उनके भीतर नैतिकता, अनुशासन और आत्मबल का विकास हो सके। उद्देश्य यह है कि युवा जीवन में आने वाली कठिनाइयों का साहसपूर्वक सामना कर सकें और समाज के लिए जिम्मेदार नागरिक बनें। शिलान्यास समारोह में राष्ट्रपति के अलावा झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तथा झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की उपस्थिति भी रहेगी। कार्यक्रम की रूपरेखा की जानकारी देते हुए बताया गया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू दोपहर 12:20 बजे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचेंगी और 1:20 बजे अपने संबोधन के पश्चात रवाना होंगी। इस अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए भोग-प्रसाद की भी विशेष व्यवस्था की गई है। ट्रस्ट पदाधिकारियों ने कहा कि यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि जमशेदपुर को एक नई आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान भी देगा। आने वाले समय में यह स्थल देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा।

मंदिर का अनोखा झंडा: हवा के विपरीत दिशा में लहराने का रहस्य

जगन्नाथ मंदिर की महिमा कौन नहीं जानता. पुरी का जगन्नाथ मंदिर अपनी भव्यता और आस्था के लिए विश्व प्रसिद्ध है, लेकिन इससे जुड़े कई रहस्य और परंपराएं भी हैं, जो आपको हैरान कर देंगी. इन्हीं में से एक है इस मंदिर का झंडा जो हवा की दिशा के विपरीत लहराता है. आम तौर पर झंडा हवा के साथ उड़ता है, लेकिन यहां ऐसा नहीं होता. यही बात इस मंदिर को रहस्यमयी और अद्भुत बनाती है. आज तक कोई पता नहीं लगा पाया है कि मंदिर का झंडा हवा के विपरीत दिशा में क्यों लहराता है. स्थानीय लोग इसे भगवान जगन्नाथ की दैवीय शक्ति का संकेत मानते हैं. कहा जाता है कि मंदिर के ऊपर लहराता झंडा नकारात्मक ऊर्जाओं को खत्म करता है और पूरे वातावरण में सकारात्मकता फैलाता है. इस झंडे को हर दिन बदला जाता है, लेकिन यह काम कोई साधारण नहीं है, बल्कि भगवान के प्रति भक्ति और विश्वास का प्रतीक माना जाता है. हर शाम लगभग सूर्यास्त के समय पुराना झंडा उतारकर नया त्रिकोणीय झंडा लगाया जाता है. सर्दियों में यह काम करीब 5 बजे और गर्मियों में 6 बजे के आसपास किया जाता है. ऐसा भी है कि अगर किसी दिन झंडा नहीं बदला गया, तो मंदिर 18 सालों तक बंद हो सकता है. इसलिए चाहे बारिश हो या तूफान, यह परंपरा एक दिन के लिए भी नहीं रुकती. झंडा बदलने का यह कार्य एक विशेष परिवार, जिसे चुनरा सेवक या चोला परिवार कहा जाता है, के हाथों से ही होता है. इस परिवार के लोग लगभग पिछले 800 सालों से यह पवित्र जिम्मेदारी निभा रहे हैं. सबसे हैरानी की बात यह है कि वे बिना किसी सुरक्षा उपकरण के 214 फुट ऊंचे मंदिर के शिखर पर चढ़ते हैं और वहां झंडा बदलते हैं. कहा जाता है कि आज तक इस परिवार के किसी भी सदस्य को इस काम के दौरान कोई चोट नहीं लगी. पुराने झंडे को नकारात्मक ऊर्जा को सोखने वाला माना जाता है, इसलिए हर दिन नया झंडा लगाकर भगवान जगन्नाथ के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है. यह झंडा केवल एक कपड़ा नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और सुरक्षा का प्रतीक है. जगन्नाथ मंदिर का यह रहस्य भले ही विज्ञान से परे हो, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए यह भगवान की शक्ति और कृपा का जीवंत प्रमाण है.