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नवरात्रि में कन्या पूजन का खास महत्व: इन चीजों का दान दिलाएगा माता रानी का आशीर्वाद

हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व है, और इसमें भी महाष्टमी यानी आठवें दिन का अपना एक अलग आध्यात्मिक वजन होता है. यह दिन शक्ति स्वरूपा मां महागौरी को समर्पित है. मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से कन्या पूजन करने पर मां दुर्गा का साक्षात आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन से दरिद्रता का नाश होता है. साल 2026 में दुर्गा अष्टमी 26 मार्च, गुरुवार के दिन मनाई जाएगी. अगर आप भी मां महागौरी को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो कन्या पूजन के दौरान कुछ विशेष चीजों का दान करना आपके भाग्य के द्वार खोल सकता है क्यों किया जाता है कन्या पूजन? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छोटी कन्याओं में देवी शक्ति का वास माना जाता है. कन्या पूजन के दौरान 2 से 10 वर्ष तक की बच्चियों को नवदुर्गा का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है. उन्हें सम्मानपूर्वक भोजन कराना और दान देना बहुत ही शुभ फलदायी माना जाता है. कन्या पूजन में क्या खिलाना चाहिए? कन्या पूजन में पारंपरिक रूप से ये चीजें परोसी जाती हैं जैसे, पूड़ी, काले चने और सूजी का हलवा. इसे भोग प्रसाद माना जाता है. कन्या पूजन में किन चीजों का दान करना शुभ होता है? लाल वस्त्र या चुनरी लाल रंग मां दुर्गा का प्रिय माना जाता है. कन्याओं को लाल चुनरी या कपड़े दान करने से विशेष पुण्य मिलता है. फल और मिठाई फल और मिठाइयों का दान करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है. कंघी, रिबन और चूड़ियां कन्याओं को श्रृंगार की चीजें देना बहुत शुभ माना जाता है. इससे मां महागौरी की कृपा प्राप्त होती है. पैसे (दक्षिणा) कन्या पूजन के बाद श्रद्धानुसार दक्षिणा देना आवश्यक माना गया है. यह पूजा को पूरा करता है. खिलौने और स्टेशनरी छोटी बच्चियों को खिलौने, कॉपी, पेंसिल आदि देना भी पुण्यदायी माना जाता है. नारियल नारियल को शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. कन्याओं को नारियल देने से घर में खुशहाली आती है. कन्या पूजन का महत्व कन्या पूजन को नवरात्रि का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना गया है. यह न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि समाज में बेटियों के सम्मान और महत्व को भी दर्शाता है. मान्यता है कि सच्चे मन से किया गया कन्या पूजन जीवन की सभी बाधाओं को दूर करता है और घर में सुख-शांति बनाए रखता है.

त्योहार के दिन दर्दनाक घटना: लूनकरणसर में झाड़ियों में मिली परित्यक्त नवजात

बीकानेर एक ओर जहां नवरात्र के दिनों में जब घर-घर में कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनके चरण पखारने की परंपरा निभाई जा रही है, वहीं दूसरी ओर जिले लूनकरणसर के कालाबास गांव से एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने समाज की संवेदनाओं को झकझोर दिया। झाड़ियों में लावारिस हालत में एक नवजात बालिका पाई गई। सूचना मिलते ही टाइगर फोर्स के महिपाल सिंह मौके पर पहुंचे और मासूम को बाहर निकालकर तुरंत अस्पताल पहुंचाया। लूनकरणसर अस्पताल प्रभारी डॉ. वीरेंद्र मांझु ने बताया कि बच्ची झाड़ियों में फेंके जाने से चोटिल हो गई थी और मिट्टी से सनी हुई थी। डॉक्टरों ने मासूम का उपचार कर ऑक्सीजन पर रखा। पास में भर्ती एक महिला ने बच्ची को दूध पिलाने की कोशिश भी की, लेकिन बच्ची ने दूध नहीं लिया। स्थिति को देखते हुए बच्ची को बीकानेर रेफर किया गया है। सामाजिक कार्यकर्ता महिपाल सिंह मासूम को लेकर बीकानेर रवाना हो गए हैं। नवरात्र में जहां कन्याओं को देवी मानकर उनकी आरती उतारी जाती है, वहीं उसी कन्या को झाड़ियों में मरने के लिए छोड़ देना हमारे समाज के दोहरे चेहरे को उजागर करता है। यह सवाल हर उस इंसान से है जो कन्या के चरण पखारता है,क्या सच में हम कन्या को देवी मानते हैं, या सिर्फ रस्म निभाते हैं?

कन्या पूजन 2025: अष्टमी और नवमी का सही समय और पूजा विधि

शारदीय नवरात्रि 2025 का पर्व 22 सितंबर से 2 अक्टूबर तक मनाया जाएगा. इस साल अष्टमी और नवमी तिथियों का विशेष संयोग बन रहा है, जो कन्या पूजन के लिए बेहद शुभ माना जाता है. इस पवित्र दिन का महत्व सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लाने के लिए भी है. जानिए इस साल कब और किस समय करें कन्याओं का पूजन, साथ ही पूजा की पूरी विधि और जरूरी टिप्स. अष्टमी और नवमी का शुभ मुहूर्त अष्टमी तिथि: 29 सितंबर शाम 4:31 बजे से 30 सितंबर शाम 6:06 बजे तक. नवमी तिथि: 30 सितंबर शाम 6:06 बजे से 1 अक्टूबर रात 7:01 बजे तक. कन्या पूजन का ब्रह्म मुहूर्त अष्टमी: सुबह 4:37 बजे से 5:25 बजे तक नवमी: सुबह 4:37 बजे से 5:26 बजे तक विशेषज्ञों के अनुसार, अष्टमी और नवमी के शुभ मुहूर्त में कन्या पूजन करने से माता दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है. अष्टमी के दिन शक्ति का विशेष संचार होता है और नवमी के दिन विजयदशमी के साथ इसका फल और भी अधिक प्रभावशाली माना जाता है. कन्या पूजन की विधि और महत्व कन्या पूजन देवी दुर्गा के नौ रूपों का प्रतीक है. घर में इस दिन कन्याओं का सम्मान करना केवल परंपरा नहीं बल्कि माता के प्रति श्रद्धा और भक्ति का वास्तविक रूप है. कन्याओं का स्वागत: घर में 9 कन्याओं को आमंत्रित करें और उनका हृदय से स्वागत करें. पैर धोकर सम्मान: कन्याओं के पैरों को धोकर साफ करें और चरणामृत ग्रहण करें. इसे करने से घर में पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा आती है. भोजन और प्रसाद: हलवा, चना, पूरी, मिठाइयां आदि परोसें. भोजन भले ही साधारण हो, लेकिन सच्चे मनोभाव से किया गया पूजन अत्यंत फलदायी होता है. दान करते समय शुभ मुहूर्त का ध्यान रखें. आरती और प्रार्थना: कन्याओं की आरती करें और माता दुर्गा से आशीर्वाद प्राप्त करें. यह घर में सुख, शांति और समृद्धि लाने का सबसे सरल उपाय है. क्यों है यह खास कन्या पूजन में नौ कन्याओं का पूजन, देवी के नौ रूपों की पूजा के समान माना जाता है. अष्टमीनवमी का पूजन न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि घर और परिवार के लिए सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य का स्रोत भी है. विशेषज्ञों का कहना है कि अष्टमीनवमी के शुभ समय में किया गया पूजन बच्चों और कन्याओं के लिए भी आशीर्वाद लेकर आता है. पूजन का आध्यात्मिक महत्व अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन करने से माता दुर्गा के शक्ति-संपन्न रूप का आशीर्वाद मिलता है. यह विशेष दिन देवी की कृपा से घर में समृद्धि, शांति और खुशहाली लाता है. साथ ही यह परिवार में सद्भाव और आपसी प्रेम को भी बढ़ाता है. इस वर्ष 2930 सितंबर और 1 अक्टूबर को अष्टमीनवमी के शुभ मुहूर्त में कन्या पूजन करना अत्यंत फलदायी माना गया है, इस दिन कन्याओं का सम्मान, दान और आरती करने से माता दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुखशांति और समृद्धि आती है. इस अवसर को अवश्य अपनाएं और माता की असीम कृपा का अनुभव करें.