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चलती ट्रेन में अनोखा प्रसव: साउथ बिहार एक्सप्रेस की बर्थ पर महिला ने दिया बच्ची को जन्म

झाझा झाझा रेलवे स्टेशन पर बुधवार सुबह साउथ बिहार एक्सप्रेस की एक सामान्य बोगी में उस समय भावुक दृश्य देखने को मिला, जब एक गर्भवती महिला ने चलती ट्रेन में बच्ची को जन्म दिया। रायपुर से पटना जा रही इस ट्रेन में सफर कर रहीं पटना निवासी खुशबू कुमारी को जसीडीह स्टेशन पार करते ही अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। दो बच्चों के साथ सफर कर रही थी महिला महिला अपने दो छोटे बच्चों के साथ यात्रा कर रही थीं। दर्द बढ़ने के साथ बोगी में मौजूद यात्रियों की चिंता भी बढ़ने लगी। सुबह करीब छह बजे ट्रेन के झाझा स्टेशन पहुंचने तक स्थिति गंभीर हो चुकी थी। बोगी में मौजूद महिलाओं ने की मदद ऐसे में बोगी में मौजूद महिला यात्रियों ने तत्परता और संवेदनशीलता का परिचय दिया। कुछ महिलाओं ने चादरों से घेरा बनाकर अस्थायी व्यवस्था की, तो अन्य यात्रियों ने पानी और आवश्यक सामान उपलब्ध कराया। रेलकर्मियों ने भी तत्काल सूचना प्रसारित कर चिकित्सकीय सहायता की व्यवस्था कराई। देखते ही देखते सामान्य बोगी अस्थायी प्रसूति कक्ष में बदल गई। महिला ने बच्ची को दिया जन्म दर्द और दुआओं के बीच महिला ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। नवजात के रोने की आवाज गूंजते ही पूरी बोगी तालियों और राहत की सांस से भर उठी। उस पल तक अनजान यात्री एक परिवार की तरह साथ खड़े नजर आए। मौके पर पहुंची चिकित्सा टीम घटना की सूचना मिलते ही रेल पुलिस और चिकित्सा टीम मौके पर पहुंची। जच्चा-बच्चा को तत्काल रेफरल अस्पताल, झाझा ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने दोनों को स्वस्थ बताया। सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के लिए ट्रेन को लगभग 45 मिनट तक स्टेशन पर रोका गया। अस्पताल प्रशासन ने रायपुर में रह रहे खुशबू के पति को घटना की सूचना दे दी है।

त्योहार के दिन दर्दनाक घटना: लूनकरणसर में झाड़ियों में मिली परित्यक्त नवजात

बीकानेर एक ओर जहां नवरात्र के दिनों में जब घर-घर में कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनके चरण पखारने की परंपरा निभाई जा रही है, वहीं दूसरी ओर जिले लूनकरणसर के कालाबास गांव से एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने समाज की संवेदनाओं को झकझोर दिया। झाड़ियों में लावारिस हालत में एक नवजात बालिका पाई गई। सूचना मिलते ही टाइगर फोर्स के महिपाल सिंह मौके पर पहुंचे और मासूम को बाहर निकालकर तुरंत अस्पताल पहुंचाया। लूनकरणसर अस्पताल प्रभारी डॉ. वीरेंद्र मांझु ने बताया कि बच्ची झाड़ियों में फेंके जाने से चोटिल हो गई थी और मिट्टी से सनी हुई थी। डॉक्टरों ने मासूम का उपचार कर ऑक्सीजन पर रखा। पास में भर्ती एक महिला ने बच्ची को दूध पिलाने की कोशिश भी की, लेकिन बच्ची ने दूध नहीं लिया। स्थिति को देखते हुए बच्ची को बीकानेर रेफर किया गया है। सामाजिक कार्यकर्ता महिपाल सिंह मासूम को लेकर बीकानेर रवाना हो गए हैं। नवरात्र में जहां कन्याओं को देवी मानकर उनकी आरती उतारी जाती है, वहीं उसी कन्या को झाड़ियों में मरने के लिए छोड़ देना हमारे समाज के दोहरे चेहरे को उजागर करता है। यह सवाल हर उस इंसान से है जो कन्या के चरण पखारता है,क्या सच में हम कन्या को देवी मानते हैं, या सिर्फ रस्म निभाते हैं?