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प्रदूषण पर बड़ा बयान: किरण बेदी ने मांगा श्वेत पत्र, कहा— अब समय है जवाबदेही तय करने का

नई दिल्ली  सामाजिक कार्यकर्ता और रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने दिल्ली के वायु प्रदूषण संकट पर स्पष्ट जवाबदेही की अपनी अपील दोहराई है। बेदी ने इस संकट पर सरकार से श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। उन्होंने यह अपील एक्स पर इस मुद्दे को उठाने के कुछ दिनों बाद की है। किरण बेदी ने एक्स पर एक लंबे पोस्ट में दो-भागों वाला एक दस्तावेज पेश किया है। इसमें राजधानी की दीर्घकालिक वायु गुणवत्ता समस्याओं की जांच, संस्थागत विफलताओं की पहचान तथा विभागों और नागरिकों के बीच तत्काल, अल्पकालिक और दीर्घकालिक कार्रवाई के लिए एक रोडमैप तैयार किया गया है। शनिवार को बेदी ने दिल्ली की बिगड़ती वायु गुणवत्ता पर अपनी पीड़ा जाहिर की थी। कहा था कि वह शहर को पीड़ित होते नहीं देख सकतीं। उन्होंने याद दिलाया कि उन्होंने अपना पूरा जीवन राजधानी को दे दिया है, जिसे वह अब वर्षों की तीव्र गिरावट के बाद 'घुटते और हांफते' हुए देख रही हैं। किरण बेदी की दो पार्ट की योजना अपनी लेटेस्ट पोस्ट में किरण बेदी ने दो पार्ट में एक विस्तृत प्रस्ताव शेयर किया है। पार्ट-1 में उन्होंने श्वेत पत्र लाने की मांग की है पहले पार्ट में किरण बेदी ने लिखा है कि क्या वायु प्रदूषण की वर्तमान चुनौती पर एक श्वेत पत्र तैयार किया जा सकता है? पिछली जवाबदेही तय करें। वर्तमान संकट किस कारण से है? किसने और किस चीज ने हमें विफल किया? पार्ट-2 में कुछ सवाल पूछे हैं पार्ट-2 में बेदी ने पूछा है कि अब हम इस गिरावट को रोकने के लिए कहां जाएंगे? तात्कालिक, अल्पकालिक और दीर्घकालिक उपाय क्या हैं? किसके द्वारा और कैसे किए जाएंगे? क्या प्रस्तावित समय-सीमा के साथ होंगे? उन्होंने संबंधित विभागों और आम जनता के सहयोग की भी बात कही है। क्योंकि हर कोई योगदानकर्ता है और समाधान भी। इससे पहले किरण बेदी ने पोस्ट किया कि वह दिल्ली को 'घुटते और हांफते' हुए देख रही हैं। कहा कि हाल के वर्षों में शहर का पतन हुआ है। अपनी अपील के साथ बेदी ने संकट को कम करने के उपायों की रूपरेखा पेश की और अधिकारियों से कागजी कार्रवाई के बजाय जमीनी निरीक्षण को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। तमाम उपायों के बावजूद, दिल्ली में AQI पिछले दो हफ्तों 'बेहद खराब' और 'गंभीर' श्रेणियों के बीच बना हुआ है। दिल्ली के लिए वायु गुणवत्ता प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले हफ्ते में वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब' रहने की संभावना है।  

किरण बेदी बोलीं—दिल्ली की हवा खतरनाक! PM मोदी को भेजी चिट्ठी में उठाए बड़े मुद्दे

नई दिल्ली  दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर हर ओर चिंता जताई जा रही है. विपक्षी दल भी प्रदूषण को लेकर सरकार पर हमला कर रहे हैं. अब राजधानी की दूषित हवा को लेकर पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर और आईपीएस अधिकारी डॉक्टर किरण बेदी ने चिंता जताई है. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर कहा है कि देश की हवा लगातार जहरीली होती जा रही है, लेकिन प्रशासनिक समन्वय और दीर्घकालिक योजना की कमी इस संकट को हर साल और भयावह बना रही है. किरण बेदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे एक विस्तृत पत्र में कहा है कि दिल्लीएनसीआर की हवा अब एक सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिहाज से आपातकाल बन चुकी है और इसे केवल अस्थायी उपायों से नहीं रोका जा सकता. उन्होंने अपने X पोस्ट में कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई राष्ट्रीय चुनौतियों में समयबद्ध कार्यवाही सुनिश्चित की थी, और उसी तरह की उच्च-स्तरीय, नियमित मॉनिटरिंग आज दिल्ली के प्रदूषण संकट को रोकने के लिए जरूरी है. पीएम मोदी को दिए 4 सुझाव पीएम मोदी को लिखे पत्र में किरण बेदी ने अपने 4 सुझाव भी दिए हैं. उनका कहना है कि 3 पड़ोसी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मुख्य सचिवों के साथ प्रधानमंत्री की हर महीने ऑनलाइन बैठकें होनी चाहिए, साथ ही शीर्ष स्तर पर नियमित समीक्षा किए जाने से राज्यों में जवाबदेही बढ़ेगी और स्थिति बिगड़ने से रोकी जा सकेगी. इसके अलावा उन्होंने पीएम मोदी से मन की बात कार्यक्रम के जरिए जन-भागीदारी का संदेश देने का सुझाव दिया है. विभागीय समन्वय की कमी को दूर करने के सुझाव के साथ ही प्रशासन के सक्रिय किए जाने की बात भी कही है. उन्होंने कहा कि शासन केवल बैठकों से नहीं चलता, अधिकारियों को मैदान में उतरकर स्थिति का वास्तविक आकलन करना चाहिए. स्थायी समाधान के विकल्प पूर्व पुलिस अफसर ने कहा कि हर साल का प्रदूषण संकट इसलिए होता क्योंकि सरकारें तात्कालिक उपायों पर निर्भर रहती हैं, जैसे स्मॉग टॉवर और ऑडईवन. इसी तरह कई एजेंसियों के बीच जिम्मेदारी बंटी हुई होती है. इसके अलावा वाहन, उद्योग, निर्माण धूल और पराली जैसे बड़े स्रोतों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित नहीं किया जाता. साथ ही लंबे समय वाली नीतियों की तुलना में अल्पकालिक राजनीतिक फायदे प्राथमिकता बन जाते हैं. जबकि वास्तविक सुधार के लिए मजबूत प्रवर्तन, स्वच्छ ऊर्जा और ट्रांसपोर्ट में लंबे निवेश की जरूरत है. राजधानी में वायु प्रदूषण को लेकर किरण बेदी ने कहा कि दिल्ली को भी इस संकट से निपटने में केंद्र और राज्य सरकार के साथ समन्वय की उतनी ही जरुरत थी जितनी अन्य विकास कार्यों में डबल इंजन की बात कही जाती है. हवा की गुणवत्ता में सुधार तभी होगा जब शीर्ष नेतृत्व, सभी राज्य, और हर विभाग मिलकर ईमानदार और सतत स्तर प्रयास करेंगे.