samacharsecretary.com

नीतीश से बेटे को लेकर ललन सिंह बोले- ‘अब इन्हें भी आने दीजिए’

पटना. बिहार की राजनीति अक्सर इशारों, मुस्कानों और खामोशी के बीच फैसले करती है. ऐसा ही एक पल शुक्रवार को पटना स्थित जेडीयू आईटी सेल कार्यालय में देखने को मिला, जब सरस्वती पूजा कार्यक्रम में नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी. केंद्रीय मंत्री ललन सिंह की एक हल्की-सी टिप्पणी और मुख्यमंत्री की मुस्कान ने इस चर्चा को और तेज कर दिया कि क्या निशांत कुमार की ‘राजनीतिक पारी’ अब बस शुरू होने वाली है. “तुम कब आ गए?” और उसके पीछे छिपा संकेत जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे और उन्होंने निशांत को पहले से मौजूद देखा, तो सहज भाव में पूछा, “तुम कब आ गए?” निशांत का जवाब था, “आधा घंटा हो गया है.” यह संवाद भले ही सामान्य लगे, लेकिन राजनीति में हर शब्द और हर भाव का अपना अर्थ होता है. यह पहली बार नहीं है जब निशांत किसी सार्वजनिक राजनीतिक कार्यक्रम में दिखे हों, लेकिन इस बार माहौल कुछ अलग था. उनके साथ केंद्रीय मंत्री ललन सिंह की मौजूदगी और पूरे कार्यक्रम में राजनीतिक गर्माहट साफ महसूस की जा सकती थी. ललन सिंह की लाइन और नीतीश की मुस्कान कार्यक्रम के दौरान ललन सिंह ने मजाकिया लहजे में नीतीश कुमार से कहा, “बोल दीजिए कि मानेंगे.” मतलब साफ था कि निशांत कुमार के राजनीति में आने पर अपनी सहमति दे दीजिए. इस पर मुख्यमंत्री और निशांत दोनों ही कुछ बोले नहीं, बस मुस्कुराते रहे. बिहार की राजनीति में यह मुस्कान किसी बयान से कम नहीं मानी जा रही है. यह न तो सीधा इनकार था और न ही खुला समर्थन, बल्कि संभावनाओं का एक दरवाजा खोलने वाला संकेत था. निशांत कुमार की मौजूदगी क्यों बन रही है बड़ी खबर निशांत कुमार अब तक सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखते आए हैं. वे चुनावी मंचों, रैलियों और पार्टी की रणनीतिक बैठकों से दूर ही दिखे हैं. ऐसे में जेडीयू आईटी सेल जैसे राजनीतिक रूप से अहम मंच पर उनकी मौजूदगी अपने आप में खास है. वहां उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से घुल-मिलकर बातचीत की, सरस्वती पूजा में हिस्सा लिया और पूरे कार्यक्रम में सहज दिखाई दिए. यह सब उस छवि से अलग था, जिसमें निशांत को हमेशा राजनीतिक हलकों से दूर रहने वाला माना जाता रहा है. बिहार की राजनीति और ‘राजनीतिक उत्तराधिकार’ की बहस बिहार में परिवारवाद हमेशा एक संवेदनशील मुद्दा रहा है. लालू प्रसाद यादव से लेकर रामविलास पासवान तक, हर बड़े नेता के परिवार ने राजनीति में अपनी जगह बनाई है. नीतीश कुमार को अब तक इस मामले में अलग माना जाता रहा है, क्योंकि उन्होंने कभी अपने बेटे को राजनीति में आगे नहीं बढ़ाया. यही वजह है कि निशांत कुमार की मौजूदगी और उस पर नीतीश की चुप्पी ज्यादा मायने रखती है. यह चुप्पी कहीं न कहीं इस संभावना को मजबूत करती है कि भविष्य में तस्वीर बदल सकती है. फिलहाल न तो नीतीश कुमार ने कोई औपचारिक ऐलान किया है और न ही निशांत कुमार ने अपनी मंशा जाहिर की है. लेकिन बिहार की राजनीति में इतना भर काफी है कि एक मुस्कान और एक चुप्पी से नई चर्चाओं का दौर शुरू हो जाए. अब सबकी नजर इस पर टिकी है कि यह मुस्कान आगे चलकर राजनीतिक हरी झंडी में बदलती है या फिर सिर्फ एक संयोग बनकर रह जाती है.

आरसीपी सिंह पर ललन सिंह की दो-टूक: बोले– जेडीयू अपने दम पर मजबूत, प्रशांत किशोर पर भी खुलकर हमला

पटना बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) में पार्टी के पूर्व अध्यक्ष आरसीपी सिंह की वापसी की अटकलें जोरों पर हैं। हालांकि, जदयू के वरीय नेता एवं केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने इन अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने दो-टूक जवाब देते हुए कहा कि जेडीयू को अब आरसीपी सिंह की जरूरत नहीं है। उन्होंने जन सुराज पार्टी के चीफ प्रशांत किशोर की जेडीयू में वापसी की संभावनाओं पर भी प्रतिक्रिया दी।   केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने रविवार को कहा कि प्रशांत किशोर और आरसीपी सिंह की जदयू में वापसी की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने कहा, “इन दोनों नेताओं को जनता ने खारिज कर दिया है और अब बिहार की राजनीति में उनका कोई स्थान नहीं है। पिछले बिहार विधानसभा चुनाव से पहले पीके ने भविष्यवाणी की थी कि जदयू केवल 25 सीटों पर सिमट जाएगी। उन्होंने यह भी दावा किया था कि नीतीश कुमार की मुख्यमंत्री के रूप में यह आखिरी राजनीतिक पारी होगी।” जदयू नेता ने सवाल किया कि प्रशांत किशोर के उन दावों और भविष्यवाणियों का क्या हुआ? ललन सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में बीते बिहार चुनाव में जदयू की सीटें 42 से बढ़कर 85 हो गईं। वह फिर से मुख्यमंत्री भी बन गए हैं। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद किशोर की राजनीतिक हैसियत अब कुछ भी नहीं है। बता दें कि हालिया चुनाव में जन सुराज पार्टी की करारी हार मिलने के बाद पीके के जेडीयू में लौटने की अटकलें राजनीतिक गलियारों में लगाई जा रही थीं। इसी सवाल का जवाब देते हुए ललन सिंह ने ये बातें कहीं। उन्होंने पीके की पार्टी के नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह की पार्टी में वापसी की संभावनाओं को भी खारिज किया। ललन सिंह ने कहा कि आरसीपी के जेडीयू का अध्यक्ष रहते 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी की सीटें 71 से घटकर 42 रह गई थीं। ऐसे लोगों की अब पार्टी में कोई जरूरत नहीं है। दरअसल, आरसीपी सिंह ने हाल ही में मीडिया से बातचीत में कहा था कि वह और नीतीश कुमार कभी अलग नहीं हुए। उन्होंने कहा था कि नौकरशाही के अपने करियर और बाद में राजनीति में भी वे और नीतीश हमेशा एक ही पन्ने पर रहे हैं और दोनों एक-दूसरे को बहुत अच्छे से जानते और समझते हैं। आरसीपी 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जन सुराज पार्टी में शामिल हो गए थे। उन्होंने जन सुराज के नेता प्रशांत किशोर की सराहना की थी और कहा था कि व्यवस्था और राजनीतिक परिदृश्य को बदलने का उनका प्रयास बिहार की राजनीति में बड़े अच्छे परिणाम देगा। मगर अब उनके जन सुराज छोड़ने की चर्चा चल रही है।