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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन में जिले में 96 हजार से अधिक परिवारों को मिला पक्का मकान

रायपुर कभी बारिश में टपकती छत और कमजोर दीवारों के बीच रात गुजारने को मजबूर परिवार आज अपने पक्के घर में सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना जशपुर जिले के ऐसे हजारों परिवारों के लिए केवल एक आवास योजना नहीं, बल्कि वर्षों पुराने सपने को साकार करने और जीवन में स्थायित्व लाने का माध्यम बनी है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से जिले में अब तक 1 लाख 12 हजार 948 आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें 96 हजार 801 आवास पूर्ण हो चुके हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के साथ प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों तक भी पक्के आवास और बुनियादी सुविधाएं पहुंच रही हैं। वहीं मुख्यमंत्री  साय की मंशा के अनुरूप आवास प्लस 2.0 के तहत पूर्व में छूटे परिवारों का सर्वेक्षण कर पात्रतानुसार उन्हें भी योजना से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। कच्चे मकान की चिंता खत्म, पक्की छत ने दिया सुरक्षा और सम्मान का भरोसा जशपुर जिले के अनेक परिवारों का जीवन वर्षों तक कच्चे मकानों में अभाव और कठिनाइयों के बीच बीता। कमजोर दीवारें, टूटी-फूटी छत और बरसात के दिनों में घर के भीतर टपकता पानी उनकी रोजमर्रा की परेशानी का हिस्सा था। बारिश के दौरान सामान को भीगने से बचाना और परिवार के लिए सुरक्षित जगह तलाशना बड़ी चुनौती होती थी। सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण अपना पक्का घर बनाना ऐसे परिवारों के लिए आसान नहीं था। प्रधानमंत्री आवास योजना ने इस स्थिति को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पक्की छत मिलने से परिवारों को मौसम की मार से सुरक्षा के साथ अपने घर में सम्मानपूर्वक जीवन जीने का भरोसा मिला है। आज ये आवास केवल ईंट और सीमेंट से बने मकान नहीं, बल्कि परिवारों के बेहतर भविष्य, सुरक्षा और आत्मसम्मान की मजबूत नींव बन रहे हैं। जशपुर में 1.12 लाख से अधिक आवास स्वीकृत, 96,801 आवास पूर्ण प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत जशपुर जिले में अब तक कुल 1 लाख 12 हजार 948 आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं। इनमें 96 हजार 801 आवासों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। इन पक्के घरों में हजारों परिवार अब अपने बच्चों और परिजनों के साथ सुरक्षित जीवन व्यतीत कर रहे हैं। योजना के माध्यम से पात्र परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने के साथ उनके जीवन स्तर में व्यापक सुधार का प्रयास किया जा रहा है। आवास के साथ स्वच्छ पेयजल, बिजली, शौचालय और एलपीजी जैसी बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच परिवारों के जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाने में सहायक हो रही है। इस तरह पक्का मकान परिवार की सुरक्षा के साथ स्वास्थ्य, स्वच्छता और बेहतर जीवन स्तर का भी आधार बन रहा है। पीएम जनमन से पहाड़ी कोरवा परिवारों के जीवन में आया बदलाव जशपुर जिले के विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों तक विकास की बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने में प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वर्ष 2023 से 2025 तक जिले में पीएम जनमन के अंतर्गत 2,100 आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें 1,614 से अधिक आवास पूर्ण हो चुके हैं। इससे विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवारों को सुरक्षित पक्के आवास का लाभ मिला है। पीएम जनमन के तहत आवास के साथ स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, सड़क एवं दूरसंचार कनेक्टिविटी और स्थायी आजीविका जैसी बुनियादी आवश्यकताओं तक पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की यह पहल उनके जीवन में स्थायी बदलाव का आधार बन रही है। आवास प्लस 2.0 : छूटे 1.02 लाख से अधिक परिवारों का हुआ सर्वेक्षण पक्के आवास की सुविधा से कोई पात्र परिवार वंचित न रहे, इसके लिए आवास प्लस 2.0 के तहत जिले में पूर्व में छूटे परिवारों का पुनः सर्वेक्षण किया गया है। इसके अंतर्गत 1 लाख 2 हजार 371 परिवारों का सर्वे किया गया है। सर्वेक्षण के बाद निर्धारित पात्रता के आधार पर परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना सहित संबंधित योजनाओं से लाभान्वित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इस पहल से उन जरूरतमंद परिवारों के लिए भी पक्के आवास की उम्मीद मजबूत हुई है, जो किसी कारणवश पूर्व में योजना में शामिल नहीं हो पाए थे। इससे जिले में पक्के आवास का दायरा और व्यापक होगा तथा अधिक से अधिक पात्र परिवारों तक योजना का लाभ पहुंच सकेगा। एक पक्का घर, परिवार के बेहतर भविष्य की मजबूत नींव प्रधानमंत्री आवास योजना से जशपुर में दिखाई दे रहा बदलाव केवल मकानों की बढ़ती संख्या तक सीमित नहीं है। पक्के घर ने हजारों परिवारों को मौसम की चिंता से राहत, बच्चों को बेहतर वातावरण और पूरे परिवार को सुरक्षा तथा सम्मान का अहसास दिया है। पीएम जनमन और आवास प्लस 2.0 जैसी पहलों के माध्यम से इस बदलाव का दायरा दूरस्थ और वंचित परिवारों तक भी लगातार बढ़ रहा है। सेवा संकल्प अभियान 2026 के अंतर्गत ‘सेवा मेरा योगदान’ की भावना के साथ जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के बीच जशपुर के हजारों पक्के आवास बदलाव की एक सशक्त तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। कभी जो पक्का घर परिवारों के लिए दूर का सपना था, वही आज उनके सुरक्षित वर्तमान और बेहतर भविष्य का आधार बन चुका है।

पक्के आशियानों से संवर रही जिंदगी, खुशहाल जीवन का मिला नया आधार

रायपुर हर परिवार का सपना होता है कि उसका अपना ऐसा घर हो, जहां परिवार सुरक्षित वातावरण में रह सके और मौसम की चुनौतियों की चिंता न हो। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए इस सपने को पूरा करने में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। योजना के माध्यम से पात्र परिवारों को आवास निर्माण के लिए सहायता मिल रही है, जिससे कच्चे और असुरक्षित मकानों से निकलकर अनेक परिवार अपने पक्के आशियाने में पहुंच रहे हैं। शहरों में योजना से लाभान्वित परिवारों के अनुभव बताते हैं कि पक्का मकान मिलने से उनके रहन-सहन में सकारात्मक बदलाव आया है। कोरबा के पोड़ीबहार निवासी  आनंद राम लंबे समय से कच्चे मकान में रह रहे थे। बारिश के दिनों में टपकती छत, सीलन और जहरीले जीव-जंतुओं का डर परिवार की परेशानी बढ़ाता था। आवास स्वीकृत होने और किश्तों में सहायता प्राप्त होने के बाद उन्होंने निर्माण शुरू किया। आज उनका पक्का घर परिवार को सुरक्षा और सुकून दे रहा है। वे इसे अपने परिवार के बेहतर भविष्य की नींव बताते हैं। कोसाबाड़ी की मती ललिता रजक ने भी बरसों से पक्के घर का सपना संजोया था। खराब आर्थिक परिस्थितियों के कारण मकान निर्माण कठिन था। योजना के सहयोग से उनका यह सपना पूरा हुआ और परिवार को स्थायी आवास के साथ सुरक्षा, सुविधा एवं आत्मविश्वास का अनुभव मिला। वे अपने पक्के घर को परिवार की खुशियों और सुरक्षित भविष्य का आधार मानती हैं। काशीनगर निवासी मती गुंजा साहू का परिवार भी लंबे समय तक कच्चे मकान में रहा। बारिश के दौरान पानी टपकने और सीलन की समस्या के साथ सांप-बिच्छुओं का डर बना रहता था। पीएम आवास (शहरी) 2.0 के तहत उन्हें तीन किश्तों में लगभग 2.50 लाख रुपये की सहायता मिली। अपनी बचत राशि के साथ उन्होंने पक्के मकान का निर्माण पूरा किया। आज उनका परिवार सुरक्षित वातावरण में सुकून से रह रहा है। छुरीकला नगर पंचायत के  सुनील कुमार तिवारी के परिवार की कहानी भी आवास योजना से आए बदलाव को सामने रखती है। वे मिट्टी से बने दो कमरों के मकान में पत्नी और बेटी के साथ रहते थे। सीमित आय के बीच पक्का मकान बनाना कठिन था। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 2.26 लाख रुपये की स्वीकृत लागत में केंद्रांश और राज्यांश की सहायता प्राप्त हुई, जिसके बाद उनका पक्का घर तैयार हुआ। वे कहते हैं कि योजना ने उनके परिवार को सुरक्षित आवास के साथ बेहतर भविष्य की उम्मीद दी है। पथर्रीपारा निवासी  सनातन प्रसाद पाठक भी पहले कच्चे मकान में रहते थे। ठेका मजदूरी से परिवार का भरण-पोषण करने वाले  पाठक के लिए हर बारिश चिंता लेकर आती थी। योजना का लाभ मिलने के बाद उनका पक्का मकान तैयार हुआ और परिवार को मौसम की परेशानियों से राहत मिली। इसी क्षेत्र के  धरम लाल ध्रुव के परिवार ने भी योजना के सहयोग से अपना पक्का घर बनाया। उनका कहना है कि मजबूत छत और दीवारों वाले घर में अब परिवार सुरक्षित और सुकून से रह रहा है। लाभार्थी परिवारों ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति योजना के संचालन तथा जरूरतमंद परिवारों तक इसका लाभ पहुंचाने के लिए आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि आवास निर्माण के लिए मिली सहायता ने उनके वर्षों पुराने सपने को पूरा करने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) से नगरीय निकायों के आर्थिक रूप से कमजोर अनेक परिवारों को आवास निर्माण का सहारा मिल रहा है। किसी के लिए यह वर्षों पुराने सपने का पूरा होना है, तो किसी के लिए परिवार की सुरक्षा और स्थायित्व की नई शुरुआत। पक्के आशियाने के साथ इन परिवारों के जीवन में सुविधा, आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य की नई उम्मीद जुड़ रही है।

तेन्दूपत्ता से बदली जिंदगी, बढ़ी आय और सम्मान बढ़ी आय और सम्मान

रायपुर तेन्दूपत्ता से बदली जिंदगी, बढ़ी आय और सम्मान तेन्दूपत्ता संग्रहण आदिवासी और वनवासी परिवारों के लिए आजीविका का एक अत्यंत सशक्त और महत्वपूर्ण आधार है। इसे जंगलों का हरा सोना भी कहा जाता है। यह कार्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करता है और विशेष रूप से भीषण गर्मी के महीनों में जब अन्य रोजगार के साधन कम होते हैं, तब यह आय का एक बड़ा जरिया बनता है। छत्तीसगढ़ में तेन्दूपत्ता संग्रहण आदिवासी और वनवासी परिवारों के लिए आजीविका का एक मजबूत आधार है। यहां उत्पादित तेन्दूपत्ता अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता के लिए देशभर में प्रसिद्ध है।  कटघोरा वनमण्डल में यह कार्य संगठित रूप से संचालित हो रहा है, जहां 7 परिक्षेत्रों में 44 प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समितियां सक्रिय हैं। हर वर्ष मई के पहले सप्ताह से तेन्दूपत्ता संग्रहण शुरू होता है। इससे पहले फड़ों (संग्रहण केंद्रों) का चयन और शाखा कर्तन का कार्य किया जाता है, जिससे अच्छी गुणवत्ता के पत्ते प्राप्त हों। वर्ष 2026 में केवल शाखा कर्तन कार्य के लिए ही 47 लाख 54 हजार रूपए से अधिक का भुगतान किया गया, जिससे स्थानीय लोगों को अतिरिक्त रोजगार मिला।     वर्ष 2025 में कटघोरा वनमण्डल के 486 फड़ों में 78, हजार 300 मानक बोरा संग्रहण का लक्ष्य रखा गया था। इसमें से 71,737 मानक बोरा (94.02 प्रतिशत) तेन्दूपत्ता संग्रहण किया गया। इस कार्य में 66 हजार 331 संग्राहकों ने भाग लिया, जिन्हें 5 हजार 500 रूपए प्रति मानक बोरा की दर से कुल 39 करोड़ 45 लाख रूपए से अधिक पारिश्रमिक सीधे उनके बैंक खातों में ऑनलाइन (डीबीटी) के माध्यम से भुगतान किया गया। इससे भुगतान में पारदर्शिता और भरोसा दोनों बढ़े हैं। सरकार की पहल से तेन्दूपत्ता का संग्रहण दर भी बढ़ा है। वर्ष 2023 में 4 हजार  रूपए प्रति मानक बोरा मिलने वाली दर को वर्ष 2024 से बढ़ाकर 5 हजार 500 रूपए कर दिया गया, जो वर्ष 2026 में भी लागू है। इसके साथ ही तेन्दूपत्ता व्यापार से होने वाली आय का 80 प्रतिशत हिस्सा संग्राहकों को बोनस के रूप में दिया जाता है। वर्ष 2019 से 2022 के बीच करोड़ों रूपए का बोनस सीधे हजारों संग्राहकों के खातों में पहुंचाया गया, जिससे उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया। तेन्दूपत्ता संग्राहकों के कल्याण के लिए कई जनहितकारी योजनाएं  चरणपादुका योजना के तहत वर्ष 2025 में 63 हजार 636 महिला संग्राहकों को निःशुल्क जूते प्रदान किए गए। राजमोहिनी देवी सामाजिक सुरक्षा योजना में 84 संग्राहकों को 1.07 करोड़ रूपए से अधिक की सहायता दी गई। समूह बीमा योजना के तहत 90 हितग्राहियों को आर्थिक सहायता प्रदान की गई और शिक्षा प्रोत्साहन योजनाओं के माध्यम से सैकड़ों बच्चों को लाखों रूपए की छात्रवृत्ति दी गई, जिससे उनके भविष्य को नई दिशा मिली।  इन योजनाओं का प्रभाव यह है कि अब तेन्दूपत्ता संग्रहण केवल एक मौसमी काम नहीं रहा, बल्कि यह स्थायी आय और सामाजिक सुरक्षा का माध्यम बन गया है। संग्राहकों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, उनके बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल रही है और जीवन स्तर में स्पष्ट सुधार दिखाई दे रहा है। यह सफलता दिखाती है कि जब शासकीय योजनाएं सही तरीके से लागू होती हैं, तो जंगल से जुड़ी आजीविका भी सम्मान, सुरक्षा और समृद्धि का मार्ग बन सकती है।