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ना फूल–ना बेलपत्र, यहां बैगन से होती है पूजा—बिहार के अनूठे शिवधाम की खास परंपरा

वैशाली वैशाली जिले के जंदाहा प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत वसंतपुर धधुआ स्थित बाबा बटेश्वरनाथ धाम देश का एकमात्र ऐसा मंदिर माना जाता है, जहां वटवृक्ष के कंदरा से प्रकट काले रंग का शिवलिंग विराजमान है। यह प्राचीन और आस्था का केंद्र मंदिर दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के लिए जाना जाता है, जहां बड़ी संख्या में भक्त पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। बैगन चढ़ाने की अनोखी परंपरा बाबा बटेश्वरनाथ धाम के गर्भगृह में स्थापित भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग पर श्रद्धालु प्रसाद के रूप में बैगन (सब्जी) अर्पित करते हैं। क्षेत्र के किसान अपने खेतों में सब्जी की खेती करने के बाद पहली उपज के रूप में बैगन भगवान भोलेनाथ को चढ़ाते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मन्नतें यहां अवश्य पूरी होती हैं और मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु बैगन चढ़ाने जरूर आते हैं। मंदिर के उपाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह ने बताया कि यह एक अत्यंत प्राचीन मंदिर है, जिसकी स्थापना का कोई लिखित इतिहास उपलब्ध नहीं है। मान्यता है कि शिवलिंग स्वयं वटवृक्ष के कंदरा से प्रकट हुआ है। मंदिर परिसर में भगवान नंदी महाराज की प्रतिमा भी स्थापित है और यहां शिवलिंग के साथ-साथ नंदी महाराज की भी विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। राजा जनक से जुड़ी ऐतिहासिक मान्यता अनिल कुमार सिंह ने बताया कि एक मान्यता के अनुसार, राजा जनक जब जनकपुर से चंपा घाट स्नान के लिए आते थे, तो उनका हाथी, जिस पर पुष्पक विमान सजा होता था, बाबा बटेश्वरनाथ धाम में रुकता था। राजा जनक यहां भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करने के बाद ही जनकपुर की ओर प्रस्थान करते थे। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र कृषि प्रधान है। जब किसानों की सब्जी की फसल तैयार होती है, तो वे सब्जियों में से बैगन को प्रसाद और चढ़ावे के रूप में बाबा बटेश्वरनाथ को अर्पित करते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए बिहार के वैशाली, छपरा, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, पटना समेत कई जिलों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसके अलावा असम के सिलचर, साथ ही नेपाल और रूस जैसे देशों से भी भक्त यहां आकर आशीर्वाद प्राप्त कर चुके हैं। अनिल कुमार सिंह ने बताया कि रूस से आए एक शिवभक्त ने रूस की मुद्रा चढ़ावे के रूप में अर्पित की थी, जिसे मंदिर संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया है। मंदिर प्रशासन का दावा है कि पूरे विश्व में इस आकार और स्वरूप का काले रंग का शिवलिंग कहीं और नहीं है, जो वटवृक्ष के कंदरा से प्राकृतिक रूप से प्रकट हुआ हो। यही कारण है कि बाबा बटेश्वरनाथ धाम की पहचान देश-विदेश तक फैली हुई है। महाशिवरात्रि और बसंत पंचमी पर भव्य मेला उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि और बसंत पंचमी के अवसर पर मंदिर परिसर में भव्य मेला लगता है। महाशिवरात्रि पर एक माह तक मेला आयोजित होता है, जिसमें सैकड़ों क्विंटल बैगन भगवान को चढ़ाया जाता है। वहीं, बसंत पंचमी पर एक दिन का मेला लगता है, जिसमें भी बैगन चढ़ाया जाता है, हालांकि मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है। मेले में तेजपत्ता और लकड़ी से बने सामानों की खूब बिक्री होती है। इसके अलावा सावन माह में भी पूजा-अर्चना और जलाभिषेक को लेकर शिवभक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। पूरा मंदिर परिसर और आसपास का वातावरण भक्ति और श्रद्धा से सराबोर नजर आता है।

मौत को मात देकर शिवभक्त बना एकमात्र अंग्रेज, पत्नी के तप और बैजनाथ महादेव से जुड़ी चमत्कारी कथा

मध्य प्रदेश के आगर-मालवा जिले में स्थित बैजनाथ महादेव मंदिर का एक अनूठा इतिहास रहा है. ये मंदिर आगर-मालवा के सुसनेर रोड पर स्थित है, जोकि जिले के प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों में से एक है. मंदिर के शिखर की ऊंचाई लगभग 50 फीट है. यह भारत का एकमात्र मंदिर है जिसका अंग्रेजों ने जीर्णोद्धार करवाया. मंदिर बाणगंगा नदी के किनारे बना हुआ है. दरअसल, 16वीं शताब्दी में निर्मित इस प्राचीन मंदिर का 1883 में एक ब्रिटिश सेना अधिकारी ने जीर्णोद्धार कराया गया था. वह अधिकारी एक चमत्कारिक घटना के कारण शिव का भक्त बन गया था. ब्रिटिश सेना का नाम लेफ्टिनेंट कर्नल मार्टिन था, जोकि अफगानिस्तान युद्ध में भाग लेने गए. उनकी पत्नी आगर मालवा छावनी में रहती थीं. उन्हें कुछ दिनों तक अपने पति की कोई खबर नहीं मिली. एक दिन वह चिंतित होकर घोड़े पर सवार होकर जीर्ण-शीर्ण बैजनाथ मंदिर पहुंचीं. वहां की आरती और मंत्रोच्चार ने उसे आकर्षित किया. उनकी व्याकुलता देखकर पुजारियों ने उन्हें 11 दिनों तक ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करने की सलाह दी. उन्होंने प्रतिज्ञा की कि यदि उनका पति सुरक्षित लौट आता है, तो वह मंदिर का जीर्णोद्धार करवाएंगी. मार्टिन की पत्नी के मंत्र जपने का फल जब उन्होंने मंत्र का जाप करना शुरू किया उसके ठीक दसवें दिन मार्टिन का एक पत्र आया. उसमें उसने एक चौंकाने वाली बात लिखी. उसने बताया कि जब युद्ध में शत्रुओं ने उसे घेर लिया, तो बाघ की खाल पहने और हाथ में त्रिशूल लिए एक योगी प्रकट हुए और उन्होंने शत्रुओं को भगा दिया. मार्टिन ने बताया कि योगी ने उससे कहा कि वह उनकी पत्नी की प्रार्थनाओं के कारण उसे बचाने आए हैं. सौभाग्य से, पति की सुरक्षित वापसी के बाद मार्टिन दंपति ने 15,000 रुपए के भारी दान से मंदिर का जीर्णोद्धार कराया. इसका प्रमाण आज भी मंदिर के शिलालेखों में देखा जा सकता है. इसके बाद वे इंग्लैंड चले गए, लेकिन कहा जाता है कि उन्होंने अपने घर में एक शिवलिंग स्थापित किया और अपनी अंतिम सांस तक शिव की पूजा की. बैजनाथ महादेव मंदिर तक कैसे पहुंचे? हवाई मार्ग: सबसे निकट इंदौर का देवी अहिल्या बाई होलकर हवाई अड्डा है, जोकि 126 किमी दूर है. यह मध्य प्रदेश का सबसे व्यस्त हवाई अड्डा माना जाता है. दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, चेन्नई, अहमदाबाद, कोलकाता, बेंगलुरु, रायपुर और जबलपुर जैसे शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है. रेल मार्गः इस मंदिर के सबसे पास उज्जैन का रेलवे स्टेशन है, जोकि 68 किमी दूर है. उज्जैन रेलवे स्टेशन मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है. सड़क मार्गः आगर-मालवा सड़क से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है. आप यहां एक कैब किराए पर ले सकते हैं या उज्जैन, इंदौर (126 किमी), भोपाल (184 किमी) और कोटा राजस्थान (195 किमी) से बस पकड़कर यहां पहुंच सकते हैं.

JP नड्डा ने बैद्यनाथ मंदिर में की शिव पूजा, BJP नेताओं की रही मौजूदगी

देवघर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा झारखंड के दो दिवसीय दौरे पर हैं। वह बीते शुक्रवार को देवघर आए। आज यानी शनिवार को जेपी नड्डा देवघर के बाबा धाम मंदिर में पूजा -अर्चना के लिए पहुंचे। जेपी नड्डा ने श्रद्धा के साथ बाबाधाम मंदिर में पूजा -अर्चना की। इस दौरान उनके साथ झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे और बाबूलाल मरांडी मौजूद रहे। पूजा स्थल पर पंडा धर्मरक्षिणी सभा ने जेपी नड्डा का स्वागत किया। नड्डा ने मंदिर के गर्भगृह में भगवान शिव की पूजा-अर्चना की। सूत्रों के मुताबिक जेपी नड्डा आज पूजा -अर्चना के बाद देवघर में पार्टी के नवनिर्मित जिला भाजपा कार्यालय का औपचारिक उद्घाटन करने वाले हैं। नड्डा इस दौरान वर्चुअल रूप से गुमला जिला भाजपा कार्यालय का भी उद्घाटन करेंगे। बता दें कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष जेपी नड्डा शुक्रवार रात झारखंड पहुंचे और उन्होंने राज्य में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बंद कमरे में बैठक की। नड्डा देवघर में विमान से उतरे और हवाई अड्डे पर भाजपा की राज्य इकाई के अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी, पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा और पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन और मधु कोड़ा ने उनका स्वागत किया।  

सोम प्रदोष व्रत पर भूलकर भी न करें ये गलती, करें ये पाठ और पाएं सुख-समृद्धि!

आज प्रदोष व्रत है. प्रदोष व्रत हर माह में दो बार शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है. आज सोमवार है. ऐसे में ये सोम प्रदोष व्रत है. ये कार्तिक माह का अंतिम प्रदोष व्रत है. ये दिन भगवान शिव को समर्पित है. आज शुभ अवसर पर देवों के देव महादेव और मां पार्वती का प्रदोष काल में पूजन किया जाएगा. प्रदोष व्रत और पूजन से सारे मनोरथ पूर्ण होते हैं. सनातन शास्त्रों में बताया गया है कि अगर शिव जी का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक किया जाए तो वो जल्द प्रसन्न होते हैं. भगवान शिव की पूजा के समय जलाभिषेक के लिए पंडितों और विद्वानों की ओर से कहा जाता है. महादेव की पूजा के समय जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने से शारीरिक और मानसिक समस्याएं दूर होती हैं. जीवन के कष्टों और आर्थिक तंगी या कर्ज मुक्ति के लिए सोम प्रदोष व्रत के दिन पूजा के समय भगवान शिव का अभिषेक करते समय दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र और श्री लिङ्गाष्टकम् का पाठ जरूर करना चाहिए. श्री लिङ्गाष्टकम् ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गंनिर्मलभासितशोभितलिङ्गम्। जन्मजदुःखविनाशकलिङ्गंतत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥ देवमुनिप्रवरार्चितलिङ्गं कामदहम्करुणाकर लिङ्गम्। रावणदर्पविनाशनलिङ्गंतत् प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम्॥ सर्वसुगन्धिसुलेपितलिङ्गंबुद्धिविवर्धनकारणलिङ्गम्। सिद्धसुरासुरवन्दितलिङ्गंतत् प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम्॥ कनकमहामणिभूषितलिङ्गंफणिपतिवेष्टित शोभित लिङ्गम्। दक्षसुयज्ञविनाशन लिङ्गंतत् प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम्॥ कुङ्कुमचन्दनलेपितलिङ्गंपङ्कजहारसुशोभितलिङ्गम्। सञ्चितपापविनाशनलिङ्गंतत् प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम्॥ देवगणार्चित सेवितलिङ्गंभावैर्भक्तिभिरेव च लिङ्गम्। दिनकरकोटिप्रभाकरलिङ्गंतत् प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम्॥ अष्टदलोपरिवेष्टितलिङ्गंसर्वसमुद्भवकारणलिङ्गम्। अष्टदरिद्रविनाशनलिङ्गंतत् प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम्॥ सुरगुरुसुरवरपूजित लिङ्गंसुरवनपुष्प सदार्चित लिङ्गम्। परात्परं परमात्मक लिङ्गंतत् प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम्॥ लिङ्गाष्टकमिदं पुण्यं यःपठेत् शिवसन्निधौ। शिवलोकमवाप्नोतिशिवेन सह मोदते॥ दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र विश्वेश्वराय नरकार्णवतारणाय कर्णामृताय शशिशेखरधारणाय । कर्पूरकान्तिधवलाय जटाधराय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥ गौरीप्रियाय रजनीशकलाधराय कालान्तकाय भुजगाधिपकङ्कणाय । गङ्गाधराय गजराजविमर्दनाय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥ भक्तप्रियाय भवरोगभयापहाय उग्राय दुर्गभवसागरतारणाय । ज्योतिर्मयाय गुणनामसुकृत्यकाय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥ चर्मांबराय शवभस्मविलेपनाय भालेक्षणाय मणिकुण्डलमण्डिताय । मंजीरपादयुगलाय जटाधराय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥ पञ्चाननाय फणिराजविभूषणाय हेमांशुकाय भुवनत्रय मण्डिताय । आनन्दभूमिवरदाय तमोमयाय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥ गौरीविलासभवनाय महेश्वराय पञ्चाननाय शरणागतकल्पकाय । शर्वाय सर्वजगतामधिपाय तस्मै दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥ भानुप्रियाय भवसागरतारणाय कालान्तकाय कमलासनपूजिताय । नेत्रत्रयाय शुभलक्षणलक्षिताय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥ रामप्रियाय राघुनाथवरप्रदाय नागप्रियाय नरकार्णवतारणाय । पुण्येषु पुण्यभरिताय सुरार्चिताय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥ मुक्तेश्वराय फलदाय गणेश्वराय गीतप्रियाय वृषभेश्वरवाहनाय । मातङ्गचर्मवसनाय महेश्वराय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥ वसिष्ठेनकृतं स्तोत्रं सर्व दारिद्र्यनाशनम् । सर्वसंपत्करं शीघ्रं पुत्रपौत्रादिवर्धनम् ॥ सोम प्रदोष की पूजा का शुभ मुहूर्त पंचांग के अनुसार त्रयोदशी तिथि पर शिव जी की पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है. आज सोम प्रदोष व्रत पर प्रदोष काल में पूजा का शुभ मुहूर्त शाम को 05 बजकर 34 मिनट पर शुरू होगा. ये शुभ मुहूर्त 08 बजकर 11 मिनट रहेगा. इस समय में पूजा करने से उसका पूरा फल प्राप्त होगा.

देवउठनी एकादशी पर करें ये खास उपाय, भगवान शिव देंगे हर संकट से मुक्ति

  देवउठनी एकादशी बहुत ही विशेष मानी जाती है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है. देवउठनी एकादशी के दिन ही भगवान विष्णु चार माह की योगनिद्रा से उठते हैं और फिर से सृष्टि का कार्यभार संभाल लेते हैं. भगवान विष्णु के उठने के साथ ही चातुर्मास समाप्त हो जाता है. इसके बाद विवाह समेत तमाम मांगलिक काम फिर से शुरू कर दिए जाते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन सच्चे मन से व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी पापों से छुटकारा मिल जाता है. प्रभु की कृपा से जीवन में सुख-शांति रहती है. देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की अराधना के साथ-साथ शिवलिंग का अभिषेक करना शुभ होता है. ऐसा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं.देवउठनी एकादशी के दिन शिवलिंग पर कुछ विशेष चीजें अर्पित करने से कष्टों से छुटकारा मिलता है. जीवन में खुशहाली आती है. देवउठनी एकादशी कब है? हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की तिथि 01 नवंबर को सुबह 09 बजकर 11 मिनट पर शुरू हो रही है. वहीं, इस तिथि का समापन 02 नवंबर को सुबह 07 बजकर 31 मिनट पर हो जाएगा. ऐसे में देवउठनी एकादशी का व्रत 01 नवंबर को रखा जाएगा. देवउठनी एकादशी के दिन शिवलिंग पर चढ़ाएं ये चीजें     देवउठनी के दिन शिवलिंग पर गंगाजल और दूध चढ़ाना चाहिए. ऐसा करने से मानसिक तनाव की समस्या से मुक्ति मिलती है. जीवन में खुख-शांति रहती है.     इस दिन शिवलिंग पर दही और शहद चढ़ाना चाहिए. ऐसा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और सभी मनोरथ पूर्ण करते हैं.     इस दिन शिवलिंग पर शमी के फूल चढ़ाने चाहिए. ऐसा करने से शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं.     इस दिन शिवलिंग पर चावल चढ़ाने चाहिए. साथ ही शिव मंत्रों का जप करना चाहिए. ऐसा करने से महादेव प्रसन्न होते हैं और आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है.