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मौनी अमावस्या स्नान संपन्न, अब माघ मेले में अगला पावन स्नान कब? यहां देखें तारीख

प्रयागराज की पावन धरती पर लगने वाला माघ मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, तपस्या, संयम और मोक्ष की कामना का जीवंत प्रतीक है. इसी आस्था के साथ साल 2026 में माघ मेला 3 जनवरी से शुरू होकर 15 फरवरी को महाशिवरात्रि तक चलेगा. इस दौरान कई विशेष तिथियां आती हैं, जिन पर स्नान का पुण्य सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक बताया गया है. 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के अवसर पर लाखों श्रद्धालुओं ने मौन रहकर पुण्य की डुबकी लगाई. इस मुख्य स्नान के बाद अब माघ मेले के चौथा प्रमुख स्नान की बारी है. बसंत पंचमी पर होगा अगला प्रमुख स्नान प्रशासनिक और धार्मिक कैलेंडर के अनुसार, माघ मेला का चौथा मुख्य स्नान बसंत पंचमी के पावन अवसर पर होगा. बसंत पंचमी (चौथा स्नान): 23 जनवरी 2026, शुक्रवार माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाने वाली बसंत पंचमी ज्ञान, विद्या और नवचेतना का पर्व मानी जाती है. इस दिन देवी सरस्वती की पूजा होती है और प्रकृति में भी वसंत का उल्लास दिखाई देने लगता है. मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन संगम में स्नान करने से विद्या, बुद्धि और वाणी की शुद्धि होती है. पीले वस्त्र धारण कर स्नान करना विशेष फलदायी माना गया है.साधु-संतों के अनुसार, यह तिथि आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा के संचार के लिए बहुत ही शुभ होती है. मौनी अमावस्या की तपस्या के बाद बसंत पंचमी का स्नान मन और आत्मा में नई चेतना भर देता है. माघ मेला 2026 की आगामी प्रमुख स्नान तिथियां बसंत पंचमी के बाद भी माघ मेले में श्रद्धालुओं के लिए दो महत्वपूर्ण स्नान पर्व बाकी हैं. माघी पूर्णिमा (पांचवां स्नान): 1 फरवरी 2026, रविवार महाशिवरात्रि (अंतिम स्नान): 15 फरवरी 2026, रविवार महाशिवरात्रि के दिन अंतिम स्नान के साथ ही माघ मेले का विधिवत समापन होगा. इस दिन भगवान शिव की आराधना और संगम स्नान का विशेष महत्व बताया गया है.

माघ मेला 2026: दूसरे स्नान की तिथि क्या है? यहां देखें शुभ समय

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में त्रिवेणी संगम के तट पर माघ मेला लगा हुआ है, जहां बड़ी संख्या में कल्पवासी और देश के कोने-कोने से श्रद्धालु पहुंचे हुए हैं और आस्था की डुबकी लगा रहे हैं. माघ मेले का पहला स्नान पौष पूर्णिमा पर किया गया था. अब दूसरा स्नान मकर संक्रांति के पावन पर्व पर किया जाएगा. साल की सभी संक्रांति में मकर संक्रांति बड़ी विशेष मानी जाती है. मकर संक्रांति पर सूर्य देव अपने पुत्र शनि देव की राशि मकर में प्रवेश करते हैं. साथ ही उत्तरायण होते हैं. यह देवताओं का समय, शुभ काल माना जाता है. माघ मेले में हर साल मकर संक्रांति का पावन स्नान किया जाता है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार, प्रयागराज के माघ मेले में मकर संक्रांति पर गंगा और त्रिवेणी संगम में स्नान करने से हजारों यज्ञ करने के समान पुण्य मिलता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस साल मकर संक्रांति का स्नान कब किया जाएगा? साथ ही जानते हैं कि स्नान का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा? मकर संक्रांति पर होगा दूसरा स्नान मकर संक्रांति इस बार 14 जनवरी को है. इसी दिन माघ मेले में दूसरा पावन स्नान किया जाएगा. इस दिन षटतिला एकादशी का व्रत भी पड़ रहा है. बताया जा रहा है कि मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी का संयोग 23 सालों बाद हो रहा है. ऐसे में मकर संक्रांति पर माघ मेले में स्नान का महत्व दोगुना माना जा रहा है. मकर संक्रांति पर माघ मेले में 1 करोड़ लोगों के स्नान का अनुमान लगाया जा रहा है. मकर संक्रांति स्नान का मुहूर्त मकर संक्रांति के दिन पुण्य काल दोपहर 3 बजकर 13 मिनट से शुरू होगा. ये 5 बजकर 45 मिनट तक यानी कुल 2 घंटे 32 मिनट रहेगा. वहीं इस दिन महा पुण्य काल दोपहर 3 बजकर 13 मिनट से शुरू होगा. ये 4 बजकर 58 मिनट तक यानी कुल 1 घंटे 45 मिनट रहेगा. इस समय माघ मेले में मकर संक्रांति का स्नान किया जा सकता है. मकर संक्रांति ब्रह्म मुहूर्त स्नान शास्त्रों के अनुसार, माघ मेले के दौरान ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने से बहुत पुण्य फल प्राप्त होते हैं. वहीं इस बार मकर संक्रांति के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 51 मिनट पर शुरू होगा. ये शुभ मुहूर्त सुबह 05 बजकर 44 मिनट तक रहेगा.

माघ मेला-2026 को लेकर रेलवे का बड़ा इंतजाम, प्रयाग स्टेशन पर कई ट्रेनों को अस्थायी ठहराव

इंदौर माघ मेला-2026 के अवसर पर यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उत्तर रेलवे द्वारा प्रयाग स्टेशन पर कुछ ट्रेनों को अस्थायी ठहराव प्रदान किया है। इस ठहराव में पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल से होकर गुजरने वाली कुछ ट्रेनें भी शामिल है। पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार के अनुसार इस अवधि के दौरान चार ट्रेनों को प्रयाग स्टेशन पर दो मिनट का अस्थायी ठहराव प्रदान किया है, जो कि तत्काल प्रभाव से 20 फरवरी 2026 तक प्रभावी रहेगा।   प्रयाग स्टेशन पर अस्थायी ठहराव वाली प्रमुख ट्रेनें : इंदौर-वाराणसी सुपरफास्ट एक्सप्रेस आगमन 01:24 बजे/प्रस्थान 01:26 बजे, बांद्रा टर्मिनस-गाजीपुर सिटी एक्सप्रेस आगमन 01:58 बजे/प्रस्थान 02:00 बजे, गांधीनगर कैपिटल-वाराणसी सुपरफास्ट एक्सप्रेस आगमन 20:48 बजे/ प्रस्थान 20:50 बजे और ओखा-वाराणसी एक्सप्रेस आगमन 23:23 बजे/प्रस्थान 23:25 बजे रहेगा। इसके अतरिक्त अन्य कोई बदलाव नहीं किया गया हैं।  

माघ मेला शुरू, जानिए इस साल के पवित्र स्नान की तारीखें और उनके पुण्य लाभ

प्रयागराज  नए साल के आगमन के साथ ही साल 2026 को लेकर धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से खास उत्साह देखने को मिल रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह वर्ष सूर्य ग्रह के प्रभाव वाला माना जा रहा है, ऐसे में लोगों के जीवन, स्वास्थ्य और कर्मों पर सूर्य की ऊर्जा का विशेष असर पड़ने की मान्यता है। इसी शुभ संयोग के साथ वर्ष की शुरुआत में लगने वाला माघ मेला भी आरंभ होने जा रहा है। यह मेला हर साल माघ मास में आयोजित किया जाता है और इसकी शुरुआत पौष पूर्णिमा से मानी जाती है। माघ मेले के दौरान देश-विदेश से श्रद्धालु प्रयागराज संगम पहुंचकर कल्पवास करते हैं। मान्यता है कि इस अवधि में किया गया स्नान, दान और तपस्या अक्षय पुण्य प्रदान करती है। प्रशासन और मेला समिति द्वारा इसकी तैयारियां बीते कई महीनों से की जा रही थीं। करीब 40 से 45 दिनों तक चलने वाला यह भव्य धार्मिक आयोजन आस्था और परंपरा का अनूठा संगम माना जाता है। आइए जानते हैं माघ मेले के दौरान कौन-कौन सी तिथियां सबसे अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती हैं, जिन पर स्नान और दान का विशेष फल प्राप्त होता है। माघ मेला 2026 कब से कब तक रहेगा? वर्ष 2026 में माघ मेले की शुरुआत आज यानी 3 जनवरी 2025 से हो रही है। इस दिन पौष पूर्णिमा का पहला पवित्र स्नान किया जाएगा। यह मेला करीब 40 से अधिक दिनों तक चलेगा और इसका समापन 15 फरवरी 2026, महाशिवरात्रि के दिन होगा। इस पूरे कालखंड में कई प्रमुख स्नान पर्व, धार्मिक अनुष्ठान और त्योहार मनाए जाएंगे, जिनमें मकर संक्रांति और माघ पूर्णिमा विशेष महत्व रखते हैं। संगम स्नान का धार्मिक महत्व धार्मिक मान्यता है कि माघ मेले के दौरान संगम में स्नान करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। शास्त्रों के अनुसार माघ माह में किया गया स्नान, दान और जप कई गुना फल देता है। इसी कारण इस दौरान साधु-संत, कल्पवासी और श्रद्धालु संगम तट पर निवास कर साधना, ध्यान और पूजा-पाठ करते हैं। कल्पवास और साधना का विशेष महत्व माघ मेले में कल्पवास का विशेष महत्व होता है। कल्पवासी इस पूरे माह संगम तट पर रहकर सात्विक जीवन अपनाते हैं। वे ब्रह्म मुहूर्त में स्नान, सूर्य उपासना, हवन, जप और ध्यान करते हैं। माना जाता है कि इस दौरान की गई साधना से जन्म-जन्मांतर के बंधन समाप्त हो जाते हैं और आत्मा शुद्ध होती है। संगम स्नान का धार्मिक महत्व माघ मास में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर स्नान का विशेष महत्व बताया गया है. पुराणों के अनुसार माघ महीने में संगम में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है.यह समय दान, जप, तप और ध्यान के लिए सर्वोत्तम माना गया है. कल्पवास का महत्व कल्पवास माघ मेले की सबसे विशेष और पवित्र परंपरा है.कल्पवासी पूरे माघ मास संगम तट पर रहकर  सादा और संयमित जीवन व्यतीत करते हैं.इस दौरान वे ब्रह्ममुहूर्त में स्नान करते हैं, एक समय सात्विक भोजन , भूमि पर शयन, जप, तप, ध्यान और दान, क्रोध, अहंकार और भोग से दूरी  बनाए रखते हैं शास्त्रों में कहा गया है कि एक माघ मास का कल्पवास हजारों वर्षों की तपस्या के समान फल देता है.विशेष रूप से उम्रदराज और गृहस्थ इस परंपरा का पालन करते हैं. माघ मेले की प्रमुख स्नान तिथियां माघ मेले के दौरान कई महत्वपूर्ण स्नान पर्व आते हैं— 3 जनवरी – पौष पूर्णिमा (कल्पवास आरंभ) 14 जनवरी – मकर संक्रांति  21 जनवरी – मौनी अमावस्या (राजयोग स्नान) 30 जनवरी – बसंत पंचमी 5 फरवरी – माघी पूर्णिमा 15 फरवरी – महाशिवरात्रि (कल्पवास समापन) आस्था और संस्कृति का महापर्व माघ मेला भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत स्वरूप है.यहां संतों के प्रवचन, यज्ञ, भजन-कीर्तन और धार्मिक चर्चाओं से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है. माघ मेले में इन बातों का रखें विशेष ध्यान माघ मेले के दौरान श्रद्धालुओं को कुछ नियमों का पालन करना चाहिए। इस समय मांस-मदिरा, प्याज और लहसुन जैसे तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए। छल-कपट, क्रोध और गलत शब्दों के प्रयोग से बचें। स्नान करते समय मन को शांत रखें और हंसी-मजाक न करें। पूरे समय अच्छे विचार रखें और सात्विक जीवनशैली अपनाएं।

Magh Mela 2026: कब से शुरू होगा माघ मेला, मौनी अमावस्या और पहले स्नान की पूरी डिटेल

प्रयागराज संगम नगरी प्रयागराज में आस्था का सबसे बड़ा संगम माघ मेला अपनी भव्यता के लिए जाना जाता है. साल 2026 में भी लाखों श्रद्धालु त्रिवेणी संगम के पवित्र जल में डुबकी लगाने के लिए एकत्रित होंगे. माघ मेले का पहला पवित्र स्नान पौष पूर्णिमा के दिन होता है. यदि आप भी इस पावन अवसर पर पुण्य की डुबकी लगाना चाहते हैं, तो यह खबर आपके लिए है. इस लेख में जानें कि साल 2026 में माघ मेले का पहला स्नान कब है, मौनी अमावस्या की सही तिथि क्या है और इन स्नान पर्वों का धार्मिक महत्व क्या है. कब शुरू हो रहा है माघ मेला 2026? साल 2026 में माघ मेले की शुरुआत 3 जनवरी को पौष पूर्णिमा के पहले स्नान के साथ होगी. इसी दिन से श्रद्धालु और कल्पवासी संगम तट पर अपने एक महीने के कठिन व्रत और साधना (कल्पवास) का आरंभ करते हैं. माघ मेला 2026: प्रमुख स्नान तिथियां     3 जनवरी 2026 पौष पूर्णिमा     15 जनवरी 2026 मकर संक्रांति     18 जनवरी 2026 मौनी अमावस्या     23 जनवरी 2026 बसंत पंचमी     1 फरवरी 2026 माघी पूर्णिमा     15 फरवरी 2026 महाशिवरात्रि मौनी अमावस्या 2026: क्यों है यह सबसे खास? माघ मेले में मौनी अमावस्या का विशेष महत्व है. इसे अमावस्याओं की अमावस्या कहा जाता है. मान्यताओं के अनुसार, इस दिन संगम का जल अमृत के समान हो जाता है. श्रद्धालु इस दिन मौन व्रत रखकर स्नान करते हैं, जिससे आत्मिक शांति और पापों से मुक्ति मिलती है. माना जाता है मौनी अमावस्या के दिन दान-पुण्य करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है. माघ स्नान का धार्मिक महत्व हिंदू धर्म में माघ के महीने को बेहद पवित्र माना गया है. शास्त्रों के अनुसार, माघ मेले के दौरान प्रयागराज के संगम तट पर सभी देवी-देवताओं का वास होता है. संगम में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश होता है. माघ मेले में एक महीने तक संयमित जीवन जीना (कल्पवास) मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग खुलता है. मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या पर स्नान करने से कुंडली के कई दोष समाप्त हो जाते हैं.

ऐतिहासिक संयोग: 75 वर्षों बाद बन रहा महाशुभ योग, इन तिथियों पर स्नान का विशेष महत्व

प्रयागराज माघ मेला हिंदू धर्म का एक अत्यंत पावन पर्व है, जिसका आयोजन हर वर्ष धर्म नगरी प्रयागराज में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम तट पर होता है। हिंदू शास्त्रों और पंचांग के अनुसार, पौष पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक चलने वाला यह मेला स्नान, दान, तप और साधना के लिए विशेष फलदायी माना गया है। मान्यता है कि माघ मास में संगम में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। वर्ष 2026 में माघ मेले की शुरुआत 3 जनवरी को पौष पूर्णिमा से होगी। इसके अगले दिन यानी 4 जनवरी 2026 (रविवार) से माघ मास का आरंभ होगा। इस दिन पुनर्वसु नक्षत्र का योग बन रहा है, जो वैदिक ज्योतिष में अत्यंत शुभ माना जाता है। पुनर्वसु नक्षत्र के साथ माघ मास का आरंभ होना सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का संकेत देता है। 75 वर्षों बाद बन रहा विशेष शुभ संयोग माघ मेला 2026 को खास बनाने वाला सबसे बड़ा कारण है मकर संक्रांति का दुर्लभ संयोग। वर्षों बाद ऐसा संयोग बन रहा है जब मकर संक्रांति के दिन शनि देव का अनुराधा नक्षत्र रहेगा। शास्त्रों के अनुसार, सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के समय यदि शनि का शुभ नक्षत्र हो, तो उस दिन किया गया स्नान, दान और जप कई गुना फल देता है। इस दिन संगम स्नान करने से सूर्य का तेज, शनि की कृपा और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है। माघ मेला 2026 की प्रमुख स्नान तिथियां पौष पूर्णिमा: 3 जनवरी 2026 मकर संक्रांति: 14 जनवरी 2026 (प्रातः स्नान 15 जनवरी को भी मान्य) मौनी अमावस्या: 18 जनवरी 2026 बसंत पंचमी: 23 जनवरी 2026 माघ पूर्णिमा: 1 फरवरी 2026 महाशिवरात्रि: 15 फरवरी 2026 संक्रांति स्नान दो दिन क्यों? हिंदू पंचांग के अनुसार, 14 जनवरी 2026 को सूर्य दोपहर बाद मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसलिए शास्त्रों में 14 जनवरी का सायंकालीन स्नान और 15 जनवरी का प्रातःकालीन स्नान दोनों को संक्रांति स्नान का पुण्य प्राप्त होगा। इसी कारण अलग-अलग स्थानों पर अलग तिथियां मान्य दिखाई देती हैं। माघ मेला 2026 केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक साधना, पुण्य अर्जन और जीवन शुद्धि का दुर्लभ अवसर है। विशेष रूप से मकर संक्रांति का स्नान इस वर्ष अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में एक बार फिर भव्य, सुरक्षित और सुव्यवस्थित माघ मेला संपन्न कराने की तैयारी

महाकुंभ के भव्य आयोजन के बाद माघ मेला-2026 की तैयारियां अंतिम चरण में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में एक बार फिर भव्य, सुरक्षित और सुव्यवस्थित माघ मेला संपन्न कराने की तैयारी मुख्य सचिव ने प्रतीक चिन्ह के अनावरण, सेक्टरवार रंग योजना और अवसंरचनात्मक सुधारों पर बैठक में की चर्चा 7 सेक्टर्स और 7 पॉन्टून पुलों को 7 ऊर्जा चक्रों के रंगों से सजाया जाएगा हर क्षेत्र में माघ मेला का प्रतीक चिन्ह किया जाएगा अंकित लखनऊ  महाकुंभ-2025 के सफल आयोजन के बाद अब राज्य सरकार माघ मेला-2026 को भी अभूतपूर्व, व्यवस्थित और सौंदर्यपूर्ण स्वरूप देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में माघ मेले की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। अभी हाल ही में मुख्य सचिव के समक्ष प्रतीक चिन्ह का अनावरण, सेक्टरवार रंग योजना और अवसंरचनात्मक सुधारों पर विशेष चर्चा हुई थी। इस बार अनुमानित है कि प्रयागराज में 12 से 15 करोड़ श्रद्धालु संगम पर पवित्र स्नान करेंगे, जिनमें प्रतिदिन आने वाले लाखों कल्पवासी भी शामिल होंगे। 7 सेक्टर्स – 7 ऊर्जा चक्रों के रंग पूरा मेला क्षेत्र रंग-समन्वित थीम पर आधारित होगा। हर सेक्टर एकरूपता का अनुभव कराएगा। मेले को सुसंगत और आकर्षक रूप देने के लिए सातों सेक्टर्स और सात पॉन्टून पुलों को "सात ऊर्जा चक्रों" के अनुरूप रंगों से सजाया जाएगा। हर सेक्टर की चहारदीवारी पर 3 फुट चौड़ी सीमांकन पट्टी बनाई जाएगी, जिससे मेले का आकार दृष्टिगत रूप से स्पष्ट, व्यवस्थित और सुंदर दिखाई देगा। सभी सेक्टर्स में उत्तर प्रदेश सरकार और माघ मेला-2026 का प्रतीक चिन्ह अंकित होगा। चेंजिंग रूम होंगे अधिक सुविधाजनक विभिन्न घाटों पर उपलब्ध चेंजिंग रूम भी सेक्टरवार रंग योजना के अनुरूप तैयार किए जाएंगे। पहले की तुलना में दोगुनी क्षमता, रंग योजनाओं से मेल खाते हुए होंगे। अब 2 यूनिट में 2 के स्थान पर 4 लोग एक साथ सुविधा का उपयोग कर सकेंगे। इससे भीड़ प्रबंधन अधिक सुचारू और सुविधाजनक होगा तथा मेले की एकरूपता कायम रहेगी। पॉन्टून पुलों पर बढ़ेगी सौंदर्य और सुरक्षा दोनों सातों पॉन्टून पुलों को इंद्रधनुषी सात रंगों से सजाया जाएगा। पुलों पर लगे लाइट, पोलों पर एलईडी लाइटें धार्मिक चिन्हों के साथ प्रदर्शित होंगी, जो दिन और रात दोनों समय आकर्षण का केंद्र रहेंगी। हर पुल पर रंग अनुरूप झंडे लगाए जाएंगे।यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलों पर कैनोपी का निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विश्वस्तरीय अनुभव देने पर फोकस मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए हैं कि माघ मेला-2026 न केवल धार्मिक भावना का प्रतीक हो, बल्कि साफ-सफाई, सुरक्षा, यातायात, चिकित्सा सुविधाओं और आधुनिक अवसंरचना के मामले में भी देशभर के मेले आयोजनों के लिए एक आदर्श बने। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में मेला प्रशासन श्रद्धालुओं को एक सुरक्षित, व्यवस्थित, आध्यात्मिक और विश्वस्तरीय अनुभव प्रदान करने में जुट गया है।

माघ मेला 2026 की तैयारियों में तेजी, विशाल सुरक्षा प्लान हुआ लागू

प्रयागराज  उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में लगने वाले माघ मेला 2026 की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सभी विभागों ने अभी से तैयारियां तेज़ कर दी हैं। मेला क्षेत्र में प्रतिदिन डॉग स्क्वॉड और बम डिस्पोज़ल दस्ते संयुक्त रूप से चेकिंग अभियान चला रहे हैं, ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके। सुरक्षा एजेंसियां लगातार पीपा पुल, महत्वपूर्ण मार्गों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में गहन तलाशी अभियान चला रही हैं। जैसे-जैसे माघ मेले की तिथि नज़दीक आ रही है, प्रशासन सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर रही हैं।  सीएम योगी ने दिए निर्देश    तीन जनवरी 2026 से शुरू होने वाले माघ मेले को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही अधिकारियों को सख्त निर्देश दे चुके हैं। सीएम ने स्पष्ट किया है कि संतों, कल्पवासियों और करोड़ों श्रद्धालुओं को सुरक्षित, व्यवस्थित और सुगम वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा तैयारियों को चरणबद्ध रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है।सुरक्षा को अभेद बनाने के लिए इस बार हाई-टेक तकनीक का बड़ा इस्तेमाल किया जा रहा है। पूरे मेला क्षेत्र में 400 एआई-आधारित सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, जो भीड़ की गतिविधियों, घनत्व और किसी भी संदिग्ध हरकत पर तुरंत अलटर् प्रदान करेंगे। साथ ही ड्रोन कैमरे भी ऊपर से लगातार निगरानी रखेंगे, जिससे सुरक्षा एजेंसियों को वास्तविक समय में पूरी स्थिति की जानकारी मिलती रहे।  5 हजार पुलिसकर्मियों की होगी तैनाती  इस बार मेला क्षेत्र में लगभग 5 हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी। सिविल पुलिस के साथ-साथ एटीएस, एसटीएफ, पीएसी, आरएफ और बाढ़ राहत कंपनियों की टीमें भी सुरक्षा में सक्रिय रहेंगी। महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में महिला पुलिसकर्मियों की भी तैनाती की जा रही है। इसके अलावा 17 अस्थायी थाने और 42 पुलिस चौकियां स्थापित की जा रही हैं, ताकि हर सेक्टर में सुरक्षा व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो सके। लगातार निगरानी, आधुनिक तकनीक और मजबूत पुलिस बल के साथ प्रशासन माघ मेला 2026 को पूरी तरह सुरक्षित और शांतिपूर्ण बनाने के लिए हर स्तर पर सक्रिय है।   

माघ मेला शुरू, संगम तट पर आस्था का महापर्व; पवित्र स्नान तिथियों की जानकारी

 प्रयागराज संगम तट पर हर वर्ष लगने वाला माघ मेला बेहद खास है. आध्यात्मिक मेलों में से एक माना जाने वाला माघ मेला पूरे एक माह तक चलता है. यह मेला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है. इसे तप, साधना, संयम और जागरण का महापर्व कहा जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में स्नान करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है. यही कारण है कि हर वर्ष मकर संक्रांति से लेकर पूरा माघ महीना लाखों श्रद्धालु संगम तट पर आकर स्नान, पूजा और साधना में लीन रहते हैं.  पुराणों में संगम को देवभूमि और पुण्यस्थल बताया गया है, जबकि अक्षयवट, सरस्वती कूप और त्रिवेणी क्षेत्र को प्राचीन काल से तपस्थली माना गया है. इतिहासकारों के अनुसार यह मेला कई हजार वर्षों से निरंतर आयोजित होता आ रहा है. समय के साथ इसकी भव्यता में लगातार बढ़ोतरी हुई है. आइए जानते हैं 2026 में माघ मेला की शुरुआत कब होगी, यह कितने दिनों तक चलेगा और इस दौरान पवित्र स्नान की तिथियां क्या रहेंगी. माघ मेला 2026 कब से कब तक  पंचांग के मुताबिक, माघ मेला की शुरुआत पौष पूर्णिमा के दिन से शुरू होकर महाशिवरात्रि तक चलेगी. यानी माघ मेला 3 जनवरी 2026 से शुरू होकर 15 फरवरी 2026 तक चलेगा. इस दौरान 6 प्रमुख माघ स्नान किए जाएंगे, जिसमें मौनी अमावस्या के स्नान को सबसे प्रमुख स्नान माना जाता है.  पौष पूर्णिमा – 3 जनवरी 2026 मेला का शुभारंभ पौष पूर्णिमा के पवित्र स्नान से होता है. इसी दिन कल्पवास भी प्रारंभ होता है. श्रद्धालु संगम में डुबकी लगाकर अपने आध्यात्मिक तप की शुरुआत करते हैं.  मकर संक्रांति – 14 जनवरी 2026 मकर संक्रांति को सूर्य धनु से मकर राशि में प्रवेश करता है. इसे अत्यंत पुण्यदायी स्नान तिथि माना गया है. इसी दिन दूसरा शाही माघ स्नान होता है.  लाखों श्रद्धालु पवित्र डुबकी लगाते हैं.  मौनी अमावस्या – 18 जनवरी 2026 मौनी अमावस्या माघ मेला का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण स्नान पर्व माना जाता है.  मौन साधना, दान और संगम स्नान इस दिन विशेष फलदायी होते हैं.  यह दिन तीसरे प्रमुख स्नान के रूप में मनाया जाएगा.  वसंत पंचमी – 23 जनवरी 2026 बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक वसंत पंचमी को चौथा प्रमुख स्नान आयोजित होगा.  यह दिन सरस्वती पूजा और नए उत्साह का प्रतीक माना जाता है.  माघी पूर्णिमा – 1 फरवरी 2026 यह तारीख कल्पवासियों के लिए विशेष महत्व रखती है. माघी पूर्णिमा पर संगम स्नान और दान को अत्यंत शुभ माना जाता है। यह मेला का पांचवां बड़ा स्नान है.  महाशिवरात्रि – 15 फ़रवरी 2026 माघ मेला का समापन महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर अंतिम स्नान के साथ होगा. भगवान शिव के ध्यान, उपवास और पूजा के साथ संगम स्नान करने का विशेष महत्व है.