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सीएम योगी के निर्देश पर तत्काल लागू की गई नई व्यवस्था, लखनऊ और प्रयागराज में गठित हुई विशेष बेंच

लखनऊ योगी सरकार प्रदेश में राजस्व प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण सुधार कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राजस्व परिषद ने सार्वजनिक महत्व की भूमि से जुड़े मामलों के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिए बड़ा निर्णय लिया है। अब आरक्षित श्रेणी की भूमि, शासकीय भूमि, ग्राम सभा, नजूल, निष्क्रांत संपत्ति तथा शत्रु संपत्ति (यदि कोई हो) से संबंधित सभी वादों की सुनवाई तीन सदस्यीय विशेष पीठ (थ्री मेंबर बेंच) द्वारा की जाएगी। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। धारा-9 के तहत लागू की गई नई व्यवस्था राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार सरकारी एवं सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने, भूमि विवादों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने तथा राजस्व न्याय प्रणाली को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने पर विशेष बल देते रहे हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा-9 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए नई व्यवस्था लागू की गयी है। इसका उद्देश्य इन संवेदनशील मामलों के निस्तारण में पारदर्शिता, न्यायिक गुणवत्ता और एकरूपता सुनिश्चित करना है। यह व्यवस्था तत्काल लागू कर दी गई है, जिसके तहत लखनऊ एवं प्रयागराज स्थित राजस्व परिषद न्यायालयों में इन श्रेणी के सभी लंबित और नए वाद अब विशेष रूप से गठित तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे। नई व्यवस्था के अनुसार आरक्षित श्रेणी की भूमि, शासकीय भूमि, ग्राम सभा, नजूल, निष्क्रांत संपत्ति तथा शत्रु संपत्ति से जुड़े मामलों की सुनवाई अब परिषद की एकल पीठ अथवा सर्किट कोर्ट द्वारा नहीं की जाएगी। इन मामलों पर विशेष रूप से गठित तीन सदस्यीय पीठ सामूहिक रूप से विचार करेगी। इससे महत्वपूर्ण मामलों में विभिन्न न्यायिक दृष्टिकोणों का समावेश होगा और निर्णय प्रक्रिया अधिक मजबूत, निष्पक्ष तथा न्यायसंगत बन सकेगी। विशेष पीठ हर बुधवार को करेगी मामलों की सुनवाई परिषद की अध्यक्ष ने बताया कि राजस्व परिषद ने लखनऊ और प्रयागराज दोनों न्यायालयों के लिए अलग-अलग तीन सदस्यीय विशेष पीठों का गठन किया है। इन विशेष पीठों द्वारा प्रत्येक बुधवार को नियमित रूप से इन मामलों की सुनवाई की जाएगी। इससे सरकारी और सार्वजनिक भूमि से जुड़े संवेदनशील प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण संभव होगा, साथ ही पूरे प्रदेश में निर्णय प्रक्रिया में एकरूपता भी स्थापित होगी। वहीं संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि इस श्रेणी के सभी लंबित एवं नए वादों की पहचान कर उन्हें निर्धारित विशेष पीठ के समक्ष सूचीबद्ध कराया जाए। इससे नई व्यवस्था का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा और मामलों के अनावश्यक लंबित रहने की संभावना भी कम होगी। व्यवस्थित सूचीकरण और नियमित सुनवाई से न्यायिक प्रक्रिया अधिक सुचारु एवं परिणामकारी बनेगी। सामूहिक निर्णय प्रणाली अपनाए जाने से न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता और पारदर्शिता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही विभिन्न प्रकार के समान मामलों में एकरूप निर्णय आने से भविष्य में अनावश्यक विवादों और कानूनी असमंजस की स्थिति भी कम होगी। राजस्व व्यवस्था को बनाया अधिक उत्तरदायी योगी सरकार पहले ही राजस्व प्रशासन में व्यापक सुधारों की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहल कर चुकी है। डिजिटल भू-अभिलेख, ऑनलाइन नामांतरण एवं अन्य राजस्व सेवाएं, आधुनिक तकनीकों के माध्यम से भूमि पैमाइश, पारदर्शी न्यायिक प्रक्रिया तथा सरकारी भूमि की सुरक्षा जैसे कदमों ने राजस्व व्यवस्था को अधिक उत्तरदायी बनाया है। अब तीन सदस्यीय विशेष पीठ का गठन इसी सुधार श्रृंखला की महत्वपूर्ण कड़ी है। विशेषज्ञतापूर्ण सामूहिक निर्णय व्यवस्था से न केवल न्याय वितरण प्रणाली अधिक प्रभावी और विश्वसनीय बनेगी, बल्कि प्रदेश में राजस्व न्याय व्यवस्था के आधुनिकीकरण को भी नई गति मिलेगी।

नीतीश सरकार का बड़ा फैसला: पानी की फिजूलखर्ची रोकने को नया नियम लागू

पटना बिहार सरकार ने ‘हर घर नल का जल’ योजना को और प्रभावी बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद अब पानी की बर्बादी करना सीधे जेब पर भारी पड़ेगा। सरकार का साफ कहना है—अब नल खुला छोड़ना या बेवजह पानी बहाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। क्या लागू हुआ नया नियम? राज्य में लगातार गिरते भू-गर्भीय जलस्तर को देखते हुए सरकार ने पानी की बर्बादी रोकने के लिए सख्त पेनल्टी सिस्टम लागू किया है। जो लोग नल बहता छोड़ देते हैं या घरेलू पेयजल का गलत उपयोग करते हैं, उनके खिलाफ अब पंचायत स्तर पर तुरंत कार्रवाई होगी। अब ये गलती की… तो जुर्माना तय सरकार ने तीन-स्तरीय पेनल्टी का प्रावधान बनाया है:     पहली बार गलती: ₹150 जुर्माना     दूसरी बार: ₹400 जुर्माना     तीसरी बार: ₹5,000 जुर्माना + पानी का कनेक्शन तत्काल काट दिया जाएगा अगर कोई उपभोक्ता जुर्माना नहीं भरता है, तो उसके खिलाफ सर्टिफिकेट वाद दर्ज कर वसूली की प्रक्रिया शुरू होगी। कनेक्शन कट गया तो दोबारा कैसे मिलेगा? दुबारा पानी का कनेक्शन चाहिये तो उपभोक्ता को सभी बकाया राशि और लगाया गया जुर्माना पूरी तरह जमा करना होगा। इसके बाद WIMC यानी वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति की अनुमति पर ही कनेक्शन बहाल होगा। पेयजल का गलत उपयोग करने पर सख्त प्रतिबंध सरकार ने साफ निर्देश जारी किए हैं कि पेयजल का उपयोग सिर्फ घरेलू और पीने से जुड़ी जरूरतों के लिए किया जाए। इन कामों पर पूरी तरह पाबंदी होगी:     नल खुला छोड़कर पानी बहाना     गाड़ी, आंगन या घर धोने में पेयजल का उपयोग     जानवरों को नहलाने के लिए नल का पानी     खराब या लीक टोंटी को नजरअंदाज करना     कहीं भी लीकेज देखने पर सूचना न देना मोटर पंप लगाया तो मुश्किल में पड़ जाएंगे सरकारी नल पर मोटर पंप चलाना अब अपराध माना जाएगा।     तुरंत ₹5,000 का जुर्माना     मोटर पंप जब्त     बार-बार गलती पर FIR दर्ज सरकार का कहना है कि यह कदम उन लोगों पर लगाम लगाने के लिए उठाया गया है जो सरकारी सुविधा का दुरुपयोग कर रहे थे। सरकार ने क्यों अपनाई कड़ी नीति? जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है, और कई जगहों पर पेयजल की कमी देखी जा रही है। सरकार के अनुसार “योजना का उद्देश्य हर घर को स्वच्छ पानी देना है, लेकिन कुछ लोग गैर-जरूरी उपयोग कर पानी की बर्बादी बढ़ा रहे हैं। नए नियम जल संरक्षण और सामुदायिक जिम्मेदारी दोनों को मजबूत करेंगे।” अगर आप भी ‘हर घर नल का जल’ योजना के लाभार्थी हैं, तो इन नए नियमों का पालन करना अब जरूरी है, नहीं तो भारी जुर्माना झेलना पड़ेगा।